
सुबह उठते ही लगता है, जैसे रात भर नींद आई ही नहीं। ऑफिस की सीढ़ियां चढ़ते हुए सांस भारी हो जाती है, और शाम होते-होते शरीर जवाब दे देता है। आप खुद को समझा लेते हैं कि काम ज्यादा है, उम्र बढ़ रही है, या नींद कम हुई है। परिवार वाले भी कहते हैं, "आराम कर लो, ठीक हो जाएगा।"
पर कुछ हफ्तों बाद भी आराम काम न करे, तो यह सवाल पूछना जरूरी है: कहीं मेरा दिल तो मदद नहीं मांग रहा है? लगातार थकान अक्सर उन पहले संकेतों में होती है, जिन्हें लोग सबसे देर से गंभीरता से लेते हैं। अगर आप या आपके घर में कोई ऐसा महसूस कर रहा है, तो इंतजार न करें। आज ही हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ के साथ अपॉइंटमेंट बुक करें। समय पर की गई जांच बहुत कुछ बदल सकती है।
हां, हो सकती है, लेकिन हमेशा नहीं। दिल का काम पूरे शरीर में ऑक्सीजन से भरा खून पहुंचाना है। जब दिल की मांसपेशी कमजोर हो जाती है, धमनियां संकरी हो जाती हैं या वाल्व ठीक से काम नहीं करते, तो मांसपेशियों और अंगों तक कम खून पहुंचता है। शरीर इसे "ऊर्जा की कमी" के रूप में महसूस करता है। यही दिल की बीमारी में थकान का बुनियादी कारण है।
आंकड़े भी इस विषय की गंभीरता को बताते हैं। WHO के अनुसार हर साल लगभग 1.79 करोड़ लोगों की मृत्यु हृदय और रक्त वाहिकाओं की बीमारियों से होती है, जो दुनिया भर की कुल मौतों का लगभग एक तिहाई है। यह आंकड़ा हर साल बढ़ ही रहा है। भारत में भी हृदय रोग मौत के सबसे बड़े कारणों में गिना जाता है, और यहां यह बीमारी कई पश्चिमी देशों की तुलना में कम उम्र में दस्तक देती दिखती है। महिलाओं पर हुए एक चर्चित अमेरिकी रिसर्च (Circulation, 2003) में करीब 70 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि हार्ट अटैक से एक महीने पहले उन्हें असामान्य थकान महसूस हुई थी। यानी शरीर अक्सर पहले से इशारा देता है।
दोनों को अलग पहचानना मुश्किल लगता है, पर कुछ बातें मदद कर सकती हैं -
ईमानदारी से कहें तो थकान के कारण बहुत सारे हो सकते हैं, और हर बार सिर्फ दिल को दोष देना सही नहीं है। खून की कमी (एनीमिया),थायरॉइड की गड़बड़ी, डायबिटीज, विटामिन B12 या विटामिन D की कमी, स्लीप एपनिया, डिप्रेशन, लंबे समय का तनाव और कुछ दवाइयां भी थकाती हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए जांच जरूरी है, अंदाजे से इलाज न करें और प्रयास करें कि एक अनुभवी विशेषज्ञ से परामर्श लें।
हृदय से जुड़े कारणों में हार्ट फेल्योर (दिल की विफलता), कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़, वाल्व की बीमारी, कार्डियोमायोपैथी और अनियमित धड़कन (एरिथमिया या अतालता) शामिल हैं, जो जीवन को प्रभावित करने वाले कारकों में गिनी जाती है।

थकान से ज्यादा अहम हैं थकान के साथ आने वाले संकेत, इसलिए उन लक्षणों पर भी जोर दें। इन हृदय रोग के चेतावनी संकेत पर नजर रखें -
ये सभी दिल कमज़ोर होने के लक्षण भी माने जा सकते हैं। हृदय की कमजोरी के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए लोग उन्हें आदत बना लेते हैं और यही सबसे बड़ी चूक होती है।
कुछ लोगों में ऐसे लक्षणों का पता ही नहीं चलता है -
अगर परिवार में हृदय रोग, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान या मोटापे का इतिहास है, तो जोखिम और बढ़ जाता है।
हृदय रोग की पहचान आम तौर पर लक्षणों, फैमिली मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच से शुरू होती है। इसके बाद डॉक्टर ज़रूरत के अनुसार ये जांचें सुझा सकते हैं -
हर मरीज को हम सारे टेस्ट नहीं कराते हैं। हम पहले लक्षण देखते हैं और उन लक्षणों के आधार पर ही जांच का सुझाव देते हैं।
इन स्थितियों में बिल्कुल देर न करें और तुरंत डॉक्टरी सहायता लें -
ऐसे में खुद गाड़ी चलाकर जाने के बजाय एम्बुलेंस बुलाएं और नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग पहुँचें।
थकान रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा लगती है, इसलिए उसे नज़रअंदाज़ करना आसान है। लेकिन जब थकान आराम से न जाए, सांस या धड़कन के बदलाव के साथ आए, तो वह आपके दिल का संदेश हो सकती है। हर थकान बीमारी नहीं होती, पर हर लगातार थकान की जांच करवाना समझदारी है।
अपने शरीर की सुनें, और लक्षण गंभीर होने का इंतज़ार न करें। रोज़ 30 मिनट तेज चलना, नमक और तले भोजन में कटौती, पूरी नींद, धूम्रपान से दूरी, वज़न पर नियंत्रण, और बीपी, शुगर व कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच दिल को मजबूत रखती है। सही समय पर सही डॉक्टर से मिलना अक्सर जीवन बदल देता है। आज ही अपने नजदीकी हृदय रोग विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट बुक करें।
हां, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीज़ों में सीने का दर्द न होकर थकान, सांस फूलना, मतली या पीठ-जबड़े का दर्द ही मुख्य लक्षण हो सकता है। इसलिए इन्हें हल्के में न लें।
हो सकते हैं। जब दिल शरीर की ज़रूरत के मुताबिक खून पंप नहीं कर पाता, तो हल्की मेहनत में भी सांस फूलती और थकान होती है। हालाँकि फेफड़ों की समस्या या एनीमिया में भी ऐसा होता है, इसलिए जांच जरूरी है।
हाँ, अत्यधिक थकान हार्ट फेल्योर का एक आम लक्षण है, खासकर जब साथ में सांस फूलना, पैरों में सूजन और वज़न का अचानक बढ़ना हो। ऐसे में जल्द विशेषज्ञ से मिलें।
हां, तनाव में एड्रेनालिन जैसे हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे धड़कन तेज होती है और शरीर थकता है। पर लगातार या बहुत ज्यादा लक्षण हों तो हृदय की जांच कराकर पुष्टि जरूर करें।
जल्दी थकना, हल्की मेहनत में सांस फूलना, धड़कन तेज लगना, चक्कर, सीने में हल्का दबाव और टखनों में सूजन शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। लक्षण दोहराएं जाएं तो जांच कराएं।
Written and Verified by:

Dr. Anjan Siotia is the Director of Cardiology Department at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 24 years of experience. He specializes in complex angioplasty, chronic total occlusion, TAVI, CRT & ICD pacemaker surgery, and radial interventions.
Similar Cardiology Blogs
Book Your Appointment TODAY
© 2024 BMB Kolkata. All Rights Reserved.