दिल की धड़कन तेज, धीमी या अनियमित क्यों होती है? जानिए एरिथमिया के संकेत और इलाज
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दिल की धड़कन तेज, धीमी या अनियमित क्यों होती है? जानिए एरिथमिया के संकेत और इलाज

Summary

  • एरिथमिया, जिसे हिंदी में अतालता कहा जाता है, दिल की धड़कन के सामान्य लय में गड़बड़ी की स्थिति है, चाहे धड़कन तेज हो, धीमी हो या अनियमित।
  • सामान्य दिल की धड़कन आराम की अवस्था में 60 से 100 प्रति मिनट के बीच होती है, इससे ऊपर या नीचे जाना कई बार सामान्य और कई बार चिंता का विषय हो सकता है।
  • तनाव, कैफीन, थायरॉइड की समस्या या दिल की बीमारी, ये सब अतालता के आम कारण हो सकते हैं।
  • छाती में दर्द, बेहोशी, सांस फूलना या लगातार चक्कर आने के साथ अनियमित धड़कन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
  • ECG और होल्टर मॉनिटर जैसी जांचें अतालता का सटीक कारण पता लगाने में मदद करती हैं।
  • इलाज लाइफस्टाइल बदलाव से लेकर दवाओं, कार्डियक एब्लेशन और पेसमेकर तक, अतालता के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है।

रात को सोते समय अचानक महसूस होना कि दिल जोर-जोर से धड़क रहा है, या दिन में अचानक ऐसा लगना कि दिल एक धड़कन छोड़ गया, यह अनुभव किसी को भी चिंता में डाल सकता है। कई लोग इसे सिर्फ तनाव या ज्यादा चाय-कॉफी का असर मानकर टाल देते हैं, तो कुछ लोग हर धड़कन पर ध्यान देकर बेवजह चिंता में डूब जाते हैं। सच यह है कि दिल की धड़कन में होने वाला यह बदलाव, जिसे मेडिकल भाषा में एरिथमिया या अतालता कहा जाता है, कई बार बिल्कुल सामान्य होता है, तो कई बार यह शरीर का एक जरूरी संकेत भी हो सकता है जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।

सीके बिरला हॉस्पिटल्स में हमारी कार्डियोलॉजी टीम हर रोज ऐसे मरीजों से मिलते हैं, जो सीने में धड़कन की असहजता लेकर आते हैं, और ज्यादातर मामलों में सही समय पर जांच और सही जानकारी से यह समस्या पूरी तरह मैनेज हो जाती है। चलिए इस ब्लॉग की मदद से समझते हैं कि दिल की धड़कन तेज, धीमी या अनियमित क्यों होती है, कब यह सामान्य है और कब डॉक्टर से मिलना जरूरी हो जाता है। अगर आपको भी दिल की धड़कन को लेकर कोई असहजता महसूस हो रही है, तो जयपुर में हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और समय पर सही जांच करवाएं।

एरिथमिया (अतालता) क्या है? दिल की धड़कन का सिस्टम कैसे काम करता है?

दिल के अंदर एक प्राकृतिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम होता है, जो हर धड़कन को सही समय और सही लय में बनाए रखता है। दिल के ऊपरी और निचले भाग (एट्रिया और वेंट्रिकल) इसी इलेक्ट्रिकल सिग्नल के जरिए तालमेल के साथ सिकुड़ते और फैलते हैं, जिससे खून पूरे शरीर में पहुंचता है। जब यह इलेक्ट्रिकल सिस्टम सही तरीके से काम नहीं करता, तो धड़कन बहुत तेज, बहुत धीमी या पूरी तरह अनियमित हो सकती है, इसी स्थिति को अतालता या एरिथमिया कहा जाता है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर अनियमित धड़कन खतरनाक नहीं होती, कई बार यह व्यायाम, तनाव या नींद की कमी की वजह से अस्थायी रूप से होती है। लेकिन जब यह बार-बार हो या साथ में अन्य लक्षण भी दिखें, तो इसकी जांच जरूरी हो जाती है।

दिल की धड़कन तेज होने के कारण

दिल की धड़कन तेज होने की स्थिति को टैकीकार्डिया कहा जाता है, जिसमें दिल एक मिनट में 100 से ज्यादा बार धड़कने लगता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं - 

  • तनाव, चिंता या घबराहट: भावनात्मक उतार-चढ़ाव सीधे दिल की धड़कन को प्रभावित करता है।
  • कैफीन, निकोटीन या शराब का अधिक सेवन: ये उत्तेजक पदार्थ दिल की धड़कन को अस्थायी रूप से तेज कर सकते हैं।
  • थायरॉइड का अधिक सक्रिय होना (हाइपरथायरॉइडिज्म): यह मेटाबॉलिज्म के साथ-साथ दिल की गति को भी बढ़ा देता है।
  • बुखार या इंफेक्शन: शरीर का तापमान बढ़ने पर दिल भी तेज धड़कता है।
  • एट्रियल फिब्रिलेशन (AFib): यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें दिल का ऊपरी हिस्सा बिना रिदम के धड़कता है, जिसके कारण स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • कुछ दवाओं का असर: कुछ दवाएं साइड इफेक्ट के तौर पर धड़कन बढ़ा सकती हैं।

दिल की धड़कन धीमी होने का कारण

धीमी धड़कन, जिसे ब्रैडीकार्डिया कहा जाता है, की स्थिति तब मानी जाती है जब आराम की अवस्था में दिल की धड़कन 60 प्रति मिनट से कम हो। यह हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं है, कई एथलीट और नियमित व्यायाम करने वाले लोगों में यह उनके फिट दिल का संकेत होती है। लेकिन बाकी लोगों में इसके पीछे ये कारण हो सकते हैं - 

  • साइनस नोड की खराबी: दिल के प्राकृतिक पेसमेकर का सही तरीके से काम न करना।
  • हार्ट ब्लॉक: दिल के ऊपरी हिस्से से निचले हिस्से तक इलेक्ट्रिकल सिग्नल का सही तरीके से न पहुंच पाना।
  • थायरॉइड का कम सक्रिय होना (हाइपोथायरॉइडिज्म): थायरॉइड की समस्या दिल पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे दिल की धड़कन धीमी हो जाती है।
  • उम्र बढ़ने के साथ दिल की इलेक्ट्रिकल प्रणाली में स्वाभाविक बदलाव: जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है दिल की इलेक्ट्रिकल प्रणाली धीमी होने लगती है।
  • कुछ दवाओं का असर: खासकर बीटा-ब्लॉकर जैसी दवाएं इस स्थिति के मुख्य कारण हो सकती हैं।

जब धड़कन बहुत धीमी हो जाती है, तो दिमाग और शरीर तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता, जिससे थकान, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षण हो सकते हैं।

अनियमित दिल की धड़कन के लक्षण 

symptoms of irregular heart beat , arrhythmia

अनियमित धड़कन के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, और कई बार तो कोई लक्षण महसूस ही नहीं होते, ऐसे मामलों का पता किसी सामान्य जांच के दौरान ही चलता है। हालांकि कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं जैसे कि - 

  • सीने में धड़कन का जोर से या तेजी से महसूस होना (palpitations)
  • चक्कर आना या हल्कापन महसूस होना
  • सांस फूलना, खासकर हल्की मेहनत के दौरान भी
  • सीने में असहजता या दबाव
  • अचानक कमजोरी या थकान
  • बेहोशी या बेहोशी जैसा महसूस होना

कब यह खतरनाक हो सकता है? चेतावनी भरे संकेत

ज्यादातर हल्की-फुल्की अनियमित धड़कन चिंता की बात नहीं होती, लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं, जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए - 

  • सीने में तेज दर्द या दबाव
  • अचानक बेहोश हो जाना
  • सांस लेने में गंभीर तकलीफ होना
  • धड़कन का अचानक बहुत तेज या बहुत धीमी होकर लंबे समय तक बने रहना
  • पहले से दिल की बीमारी, हार्ट अटैक या स्ट्रोक का इतिहास होने पर नए लक्षण दिखना

डॉक्टर कौन से टेस्ट करते हैं?

अतालता का सटीक कारण जानने के लिए डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित जांच का सुझाव देते हैं - 

  • ECG (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम): दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि की तुरंत जांच के लिए यह सबसे पहला टेस्ट है।
  • होल्टर मॉनिटर: 24 से 48 घंटे तक दिल की धड़कन पर लगातार नजर रखने के लिए एक पोर्टेबल डिवाइस पहनाई जाती है।
  • इकोकार्डियोग्राम: दिल की संरचना और पंपिंग क्षमता की जांच करता है।
  • इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी (EPS): जटिल मामलों में दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की विस्तृत जांच के लिए इस्तेमाल की जाती है।

एरिथमिया का इलाज: कौन सा विकल्प कब चुना जाता है?

इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि अतालता किस प्रकार की है और कितनी गंभीर है - 

  • जीवनशैली में बदलाव: हल्के मामलों में कैफीन, शराब कम करना, तनाव प्रबंधन और वजन नियंत्रण से काफी फर्क पड़ता है।
  • दवाएं: एंटी-एरिथमिक दवाएं दिल की धड़कन को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
  • कार्डियोवर्जन: दिल को सामान्य लय में वापस लाने के लिए एक नियंत्रित हल्का इलेक्ट्रिक शॉक दिया जाता है।
  • कैथेटर एब्लेशन: एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया, जिसमें दिल के उस छोटे हिस्से को निष्क्रिय किया जाता है जो असामान्य सिग्नल पैदा कर रहा होता है।
  • पेसमेकर: धीमी धड़कन को नियंत्रित करने के लिए छाती में त्वचा के नीचे एक छोटा उपकरण लगाया जाता है।
  • ICD (इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर): जानलेवा तेज अतालता से बचाव के लिए यह उपकरण जरूरत पड़ने पर दिल को सामान्य लय में वापस लाता है।

दिल की धड़कन तेज होने पर घरेलू उपाय और क्या करें?

अगर धड़कन अचानक तेज़ महसूस हो और सांस फूलने या सीने में दर्द जैसे गंभीर लक्षण न हों, तो कुछ आसान कदम राहत दे सकते हैं, जैसे कि गहरी और धीमी सांस लेना, थोड़ी देर शांति से बैठकर आराम करना और ठंडे पानी से चेहरा धोना। ये तरीके शरीर के पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को शांत करने में मदद करते हैं।

हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये उपाय सिर्फ अस्थायी राहत के लिए हैं, असली कारण की पहचान और इलाज के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है। यदि यह समस्या बार-बार हो रही है, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय विशेषज्ञ से मिलना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

बचाव: दिल की लय को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी आदतें

इन आदतों को अपनाएं और दिल की तेज धड़कन, या अनियमितता से बचाव पाएं - 

  • नियमित हल्की एक्सरसाइज और सक्रिय जीवनशैली अपनाएं।
  • कैफीन और शराब का सेवन सीमित रखें।
  • पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लें, नींद की कमी दिल की लय को सीधे प्रभावित करती है।
  • तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान, योग या हल्के व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।
  • ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और थायरॉइड की नियमित जांच करवाते रहें।
  • अगर परिवार में दिल की बीमारी या अचानक कार्डियक अरेस्ट का इतिहास रहा हो, तो नियमित कार्डियक चेकअप को नजरअंदाज न करें।

निष्कर्ष

दिल की धड़कन में हल्का-फुल्का बदलाव जिंदगी का सामान्य हिस्सा है, लेकिन जब यह बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या साथ में सीने में दर्द, बेहोशी या सांस फूलने जैसे लक्षण हों, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। सही समय पर जांच और सही इलाज से एरिथमिया को बेहद असरदार तरीके से मैनेज किया जा सकता है, और मरीज पूरी तरह सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। सीके बिरला हॉस्पिटल्स की कार्डियोलॉजी टीम इस दिशा में हर कदम पर आपके साथ है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को दिल की धड़कन को लेकर कोई असहजता महसूस हो रही है, तो देर न करें, जयपुर में आज ही हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने दिल की सेहत को प्राथमिकता दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

शांत बैठें, गहरी सांस लें और घबराहट कम करने की कोशिश करें। अगर सीने में दर्द, बेहोशी या सांस फूलने जैसा कोई लक्षण हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Written and Verified by:

Dr. Shubham Sharma

Dr. Shubham Sharma

Consultant Exp: 2 Yr

Cardiology- Electrophysiology

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Dr. Shubham Sharma is a Gold Medalist DM Cardiology-trained Cardiac Electrophysiologist with specialized expertise in the diagnosis and treatment of heart rhythm disorders (arrhythmias). He has extensive experience in performing electrophysiology studies, catheter ablation procedures, and implantation of advanced cardiac rhythm devices.

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