
रात को सोते समय अचानक महसूस होना कि दिल जोर-जोर से धड़क रहा है, या दिन में अचानक ऐसा लगना कि दिल एक धड़कन छोड़ गया, यह अनुभव किसी को भी चिंता में डाल सकता है। कई लोग इसे सिर्फ तनाव या ज्यादा चाय-कॉफी का असर मानकर टाल देते हैं, तो कुछ लोग हर धड़कन पर ध्यान देकर बेवजह चिंता में डूब जाते हैं। सच यह है कि दिल की धड़कन में होने वाला यह बदलाव, जिसे मेडिकल भाषा में एरिथमिया या अतालता कहा जाता है, कई बार बिल्कुल सामान्य होता है, तो कई बार यह शरीर का एक जरूरी संकेत भी हो सकता है जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
सीके बिरला हॉस्पिटल्स में हमारी कार्डियोलॉजी टीम हर रोज ऐसे मरीजों से मिलते हैं, जो सीने में धड़कन की असहजता लेकर आते हैं, और ज्यादातर मामलों में सही समय पर जांच और सही जानकारी से यह समस्या पूरी तरह मैनेज हो जाती है। चलिए इस ब्लॉग की मदद से समझते हैं कि दिल की धड़कन तेज, धीमी या अनियमित क्यों होती है, कब यह सामान्य है और कब डॉक्टर से मिलना जरूरी हो जाता है। अगर आपको भी दिल की धड़कन को लेकर कोई असहजता महसूस हो रही है, तो जयपुर में हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और समय पर सही जांच करवाएं।
दिल के अंदर एक प्राकृतिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम होता है, जो हर धड़कन को सही समय और सही लय में बनाए रखता है। दिल के ऊपरी और निचले भाग (एट्रिया और वेंट्रिकल) इसी इलेक्ट्रिकल सिग्नल के जरिए तालमेल के साथ सिकुड़ते और फैलते हैं, जिससे खून पूरे शरीर में पहुंचता है। जब यह इलेक्ट्रिकल सिस्टम सही तरीके से काम नहीं करता, तो धड़कन बहुत तेज, बहुत धीमी या पूरी तरह अनियमित हो सकती है, इसी स्थिति को अतालता या एरिथमिया कहा जाता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर अनियमित धड़कन खतरनाक नहीं होती, कई बार यह व्यायाम, तनाव या नींद की कमी की वजह से अस्थायी रूप से होती है। लेकिन जब यह बार-बार हो या साथ में अन्य लक्षण भी दिखें, तो इसकी जांच जरूरी हो जाती है।
दिल की धड़कन तेज होने की स्थिति को टैकीकार्डिया कहा जाता है, जिसमें दिल एक मिनट में 100 से ज्यादा बार धड़कने लगता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं -
धीमी धड़कन, जिसे ब्रैडीकार्डिया कहा जाता है, की स्थिति तब मानी जाती है जब आराम की अवस्था में दिल की धड़कन 60 प्रति मिनट से कम हो। यह हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं है, कई एथलीट और नियमित व्यायाम करने वाले लोगों में यह उनके फिट दिल का संकेत होती है। लेकिन बाकी लोगों में इसके पीछे ये कारण हो सकते हैं -
जब धड़कन बहुत धीमी हो जाती है, तो दिमाग और शरीर तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता, जिससे थकान, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षण हो सकते हैं।

अनियमित धड़कन के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, और कई बार तो कोई लक्षण महसूस ही नहीं होते, ऐसे मामलों का पता किसी सामान्य जांच के दौरान ही चलता है। हालांकि कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं जैसे कि -
ज्यादातर हल्की-फुल्की अनियमित धड़कन चिंता की बात नहीं होती, लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं, जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए -
अतालता का सटीक कारण जानने के लिए डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित जांच का सुझाव देते हैं -
इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि अतालता किस प्रकार की है और कितनी गंभीर है -
अगर धड़कन अचानक तेज़ महसूस हो और सांस फूलने या सीने में दर्द जैसे गंभीर लक्षण न हों, तो कुछ आसान कदम राहत दे सकते हैं, जैसे कि गहरी और धीमी सांस लेना, थोड़ी देर शांति से बैठकर आराम करना और ठंडे पानी से चेहरा धोना। ये तरीके शरीर के पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को शांत करने में मदद करते हैं।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये उपाय सिर्फ अस्थायी राहत के लिए हैं, असली कारण की पहचान और इलाज के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है। यदि यह समस्या बार-बार हो रही है, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय विशेषज्ञ से मिलना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
इन आदतों को अपनाएं और दिल की तेज धड़कन, या अनियमितता से बचाव पाएं -
दिल की धड़कन में हल्का-फुल्का बदलाव जिंदगी का सामान्य हिस्सा है, लेकिन जब यह बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या साथ में सीने में दर्द, बेहोशी या सांस फूलने जैसे लक्षण हों, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। सही समय पर जांच और सही इलाज से एरिथमिया को बेहद असरदार तरीके से मैनेज किया जा सकता है, और मरीज पूरी तरह सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। सीके बिरला हॉस्पिटल्स की कार्डियोलॉजी टीम इस दिशा में हर कदम पर आपके साथ है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को दिल की धड़कन को लेकर कोई असहजता महसूस हो रही है, तो देर न करें, जयपुर में आज ही हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने दिल की सेहत को प्राथमिकता दें।
शांत बैठें, गहरी सांस लें और घबराहट कम करने की कोशिश करें। अगर सीने में दर्द, बेहोशी या सांस फूलने जैसा कोई लक्षण हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अगर यह कभी-कभार तनाव या मेहनत के बाद हो, तो अक्सर सामान्य है। लेकिन बार-बार, बिना वजह या अन्य लक्षणों के साथ होने पर यह अतालता जैसी स्थिति का संकेत हो सकता है, जांच जरूरी है।
साइनस नोड की खराबी, थायरॉइड की समस्या, उम्र बढ़ना या कुछ दवाओं का असर, ये सब धीमी धड़कन के सामान्य कारण हैं। एथलीट में यह अक्सर फिटनेस का संकेत होता है।
सीने में धड़कन महसूस होना, चक्कर आना, सांस फूलना, थकान और कभी-कभी बेहोशी जैसा महसूस होना, ये अनियमित धड़कन के सामान्य लक्षण हैं।
हां, खासकर एट्रियल फिब्रिलेशन (AFib) जैसी स्थिति में दिल में खून का थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है, जो स्ट्रोक का कारण बन सकता है, इसलिए समय पर इलाज जरूरी है।
जब धड़कन लगातार बहुत धीमी हो और दवाओं से नियंत्रित न हो पा रही हो, तब दिल की सामान्य लय बनाए रखने के लिए पेसमेकर लगाने की सलाह दी जाती है।
Written and Verified by:

Dr. Shubham Sharma is a Gold Medalist DM Cardiology-trained Cardiac Electrophysiologist with specialized expertise in the diagnosis and treatment of heart rhythm disorders (arrhythmias). He has extensive experience in performing electrophysiology studies, catheter ablation procedures, and implantation of advanced cardiac rhythm devices.
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