
कुछ सीढ़ियाँ चढ़ते ही अगर सांस फूलने लगे, तो इसे सिर्फ सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें। डॉक्टर इसे ‘डिस्पेनिया’ कहते हैं, लेकिन दिल और फेफड़ों की सेहत के संदर्भ में यह एक गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है। सांस फूलना कई बार हृदय संबंधी समस्याओं का शुरुआती लक्षण होता है। इस ब्लॉग में हम सांस फूलने के संभावित कारणों, इससे जुड़े लक्षणों और उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में विस्तार से जानेंगे, ताकि आप समय रहते सही कदम उठा सकें।
सांस लेने में समस्या होना वैसे तो एक आम स्थिति है, जिसे मेडिकल टर्म में 'डिस्पेनिया' (Dyspnea) के नाम से जाना जाता है। इसमें व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है कि उसके फेफड़ों में पर्याप्त हवा नहीं जा पा रही है। यह एहसास बेहद परेशान करने वाला हो सकता है, जैसे छाती में जकड़न हो या दम घुट रहा हो। भारी व्यायाम करने या ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने पर सांस फूलना एक सामान्य बात है, लेकिन यदि आराम करते समय या बिना किसी शारीरिक मेहनत के आपको सांस लेने में तकलीफ होना शुरू हो जाए, तो यह श्वसन तंत्र या हृदय से जुड़ी किसी अंतर्निहित गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
सांस लेने में तकलीफ कई स्थितियों के कारण उत्पन्न हो सकती है, जिन्हें निम्न वर्णित किया गया है -
सांस फूलना या सांस लेने में समस्या होना सिर्फ फेफड़ों की खराबी नहीं, बल्कि आपके दिल की सेहत से भी गहराई से जुड़ा है। जब दिल शरीर में ठीक से खून पंप नहीं कर पाता, तो फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।
यदि सांस फूलने के साथ नीचे दिए गए लक्षण भी दिखाई दें, तो यह किसी गंभीर हृदय रोग (Cardiac Emergency) का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:
महत्वपूर्ण नोट: अगर आप ऊपर दिए गए लक्षणों को खुद में या अपने किसी करीबी में अनुभव करते हैं, तो इसे सामान्य सांस की बीमारी समझने की भूल न करें। यह दिल से जुड़ी एक इमरजेंसी हो सकती है। ऐसे में बिना समय गंवाए तुरंत एक कार्डियोलॉजिस्ट (Cardiologist / दिल के रोग विशेषज्ञ) से परामर्श करें या नजदीकी कार्डियक केयर सेंटर पहुंचे।
समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपकी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों के बारे में पूछेंगे। सांस की समस्या में आमतौर पर नीचे दिए गए टेस्ट कराए जाते हैं:
इसके अतिरिक्त कुछ और टेस्ट होते हैं जो सांस लेने की समस्या की स्थिति में कराए जाते हैं जैसे कि ट्रॉप टी टेस्ट और ट्रॉप आई टेस्ट।
अचानक सांस लेने में समस्या होना, खासकर जब इसके साथ सीने में तेज दर्द, पसीना आना या बेहोशी महसूस हो, तो इसे एक मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए। ऐसे में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
सांस लेने में समस्या हो तो क्या करें? सांस की तकलीफ का उपचार इसके कारण के आधार पर भिन्न होता है:
सांस लेने में समस्या होना एक ऐसा संकेत है जिसे कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यह सिर्फ थकावट नहीं, बल्कि आपके फेफड़ों या हृदय की किसी छिपी हुई बीमारी का संकेत हो सकता है। सभी मामलों में समस्या का सटीक कारण जानने और एक व्यक्तिगत उपचार योजना विकसित करने के लिए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मिलकर समझें कि स्थिति कितनी गंभीर है और इलाज के विकल्प क्या क्या है।
अगर आपको अचानक सांस लेने में कठिनाई महसूस हो तो सबसे पहले शांत रहने का प्रयास करें। यदि यह समस्या बनी रहती है या बिगड़ जाती है, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें। सीधे बैठें, निर्धारित इनहेलर (यदि कोई हो) का उपयोग करें, और ट्रिगर (जैसे, एलर्जी या धूम्रपान) से बचें।
सांस लेते समय सीने में दर्द प्ल्यूराइटिस (फेफड़ों की परत की सूजन), मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं या यहां तक कि एनजाइना जैसी हृदय संबंधी समस्याओं के कारण भी हो सकता है। कारण निर्धारित करने के लिए किसी विशेषज्ञ द्वारा मूल्यांकन महत्वपूर्ण है।
जी हाँ, अस्थमा में व्यक्ति की श्वास नली (वायुमार्ग) में सूजन और सिकुड़न आ जाती है। इसके कारण फेफड़ों में हवा का प्रवाह बाधित होता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न और घरघराहट की समस्या होती है।
बिल्कुल, हार्ट फेलियर या हार्ट ब्लॉकेज जैसी बीमारियों में हृदय शरीर में ठीक से खून पंप नहीं कर पाता। इसके कारण फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है और सांस फूलने लगती है।
सांस की समस्या के मूल कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर आमतौर पर चेस्ट एक्स-रे, पल्स ऑक्सीमीट्री, ब्लड टेस्ट, ईसीजी (ECG) और लंग फंक्शन टेस्ट (स्पाइरोमेट्री) कराने की सलाह देते हैं।
यदि समस्या हल्की है या डॉक्टर ने आपको अस्थमा/COPD के लिए इनहेलर दिया है, तो आप इसे घर पर मैनेज कर सकते हैं। इसके अलावा रिलैक्स होकर बैठना और गहरी सांसें लेना (Pursed-lip breathing) मदद कर सकता है। लेकिन अगर अचानक सांस फूलने लगे और सीने में दर्द हो, तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
हाँ, जब कोई व्यक्ति अत्यधिक तनाव, चिंता या पैनिक अटैक का अनुभव करता है, तो शरीर में घबराहट पैदा होती है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। इसके कारण शारीरिक बीमारी न होने पर भी ऐसा लगता है कि सांस फूल रही है या हवा कम पड़ रही है। के साथ दर्द होने की स्थिति को एक मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए।
Written and Verified by:

Dr. Raja Dhar is the Director & Head of Pulmonology Dept. at BM Birla Heart Hospital and CMRI Hospital, Kolkata, with over 27 years of experience. He specializes in interstitial lung disease, asthma & allergy, COPD, sleep medicine, advanced lung function services, interventional & diagnostic pulmonology, rare stroke & orphan lung diseases, and all disciplines of respiratory medicine.
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