
सुबह की धूप में कुछ मिनट बैठना, ये आदत हमारी दादी-नानी के जमाने में आम थी। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, चाहे दफ्तर का AC केबिन हो या घर के अंदर बीतता ज्यादातर समय, हम में से बहुत से लोग धूप से दूर होते जा रहे हैं। और इसी के साथ चुपचाप शरीर में बढ़ रही है एक कमी, जिसका असर सिर्फ हड्डियों पर नहीं, बल्कि सीधे दिल पर भी पड़ सकता है। अक्सर हम विटामिन D को जोड़ों के दर्द या कमजोर हड्डियों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन हाल के मेडिकल रिसर्च बताते हैं कि इसका दिल की सेहत से भी गहरा नाता है।
अगर आपको भी थकान, सुस्ती या बार-बार जोड़ों में दर्द रहता है, तो यह सिर्फ मौसम या उम्र का असर नहीं, बल्कि शरीर का दिया हुआ एक इशारा भी हो सकता है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि विटामिन D की कमी और दिल की सेहत के बीच क्या कनेक्शन है, किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है और कब जांच करानी चाहिए। अगर आपको अपने दिल या विटामिन D लेवल को लेकर कोई भी शंका है, तो देर न करें, हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट बुक करें और समय रहते सही सलाह लें।
विटामिन D को अक्सर "सनशाइन विटामिन" कहा जाता है, और ज्यादातर लोग इसे सिर्फ कैल्शियम अवशोषण और हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखते हैं। लेकिन असल तस्वीर इससे कहीं बड़ी है। हमारे शरीर के लगभग हर टिशू में विटामिन D रिसेप्टर मौजूद होते हैं, और दिल की मांसपेशियां (हार्ट मसल्स), ब्लड वेसल्स की अंदरूनी परत और यहां तक कि किडनी भी इससे प्रभावित होती है। रिसर्च बताते हैं कि विटामिन D ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने वाले रेनिन-एंजियोटेंसिन सिस्टम को संतुलित रखने में मदद करता है, सूजन (इंफ्लेमेशन) को कम करता है और आर्टरीज को सख्त होने से बचाता है। जब शरीर में इसकी लगातार कमी बनी रहती है, तो यह पूरा सिस्टम असंतुलित होने लगता है, जिसका सीधा असर दिल की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है।
विटामिन डी के फायदे और नुकसान दोनों को समझना यहां जरूरी है। सही मात्रा में यह हड्डियों, इम्यून सिस्टम और दिल तीनों के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसकी लंबे समय तक कमी शरीर के कई अंगों पर धीरे-धीरे नकारात्मक असर डाल सकती है। इसी तरह अत्यधिक मात्रा में सप्लीमेंट लेना भी नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना हाई डोज सप्लीमेंट शुरू करना सही तरीका नहीं है।
कई बड़े रिसर्च में ये सामने आया है कि विटामिन D की कमी कई हृदय संबंधित समस्याओं को न्योता देती है -

हर किसी में यह जोखिम एक जैसा नहीं होता। कुछ खास समूहों में यह कमी ज्यादा गंभीर असर दिखा सकती है -
दिलचस्प बात यह है कि भारत जैसे धूप वाले देश में भी यह समस्या बेहद आम है। इसकी बड़ी वजह है इनडोर लाइफस्टाइल, स्किन को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े और सनस्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल।
एक हालिया केस को उदाहरण के तौर पर लें तो, हमारे कोलकाता स्थित हॉस्पिटल में एक 45 वर्षीय मरीज बार-बार सांस फूलने और थकान की शिकायत लेकर आए थे। शुरुआती जांच में हार्ट से जुड़े कई पैरामीटर सामान्य सीमा पर थे, लेकिन विस्तृत ब्लड टेस्ट में उनका विटामिन D स्तर बेहद कम पाया गया, साथ ही हल्का हाई ब्लड प्रेशर भी था। समय पर पहचान और सही ट्रीटमेंट प्लान के जरिए स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सका। ऐसे मामले यह दिखाते हैं कि दिल से जुड़ी शिकायतों के पीछे कई बार छिपा हुआ कारण विटामिन D की कमी भी हो सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
यह सवाल आजकल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है, और इसका जवाब है, हां, कई अध्ययन इस कनेक्शन की पुष्टि करते हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि विटामिन D की कमी अकेले हार्ट डिजीज का कारण नहीं बनती, बल्कि यह मौजूदा जोखिम कारकों (जैसे डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान) के साथ मिलकर स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
अगर आप में या आपके परिवार में नीचे दिए गए कोई भी लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो विटामिन D टेस्ट कराना समझदारी है। विटामिन डी की कमी के लक्षण में शामिल हैं -
जिन मरीजों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज या हार्ट फेलियर की समस्या है, उन्हें साल में कम से कम एक बार विटामिन D लेवल की जांच करानी चाहिए। खुद से सप्लीमेंट शुरू करना या बंद करना, खासकर हार्ट पेशेंट्स के लिए, जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि बहुत अधिक विटामिन D भी शरीर में कैल्शियम का असंतुलन पैदा कर सकता है।
विटामिन D की कमी को हल्के में लेना अब आसान नहीं रहा। यह सिर्फ हड्डियों की समस्या नहीं, बल्कि दिल की सेहत से जुड़ा एक गंभीर और अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला पहलू है। खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री है, यह जानकारी जीवनशैली में समय रहते बदलाव लाने का मौका दे सकती है। रोजाना कुछ मिनट धूप में बिताना, संतुलित आहार लेना और नियमित जांच करवाना, ये छोटी-छोटी आदतें आगे चलकर बड़ा फर्क ला सकती हैं। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को दिल से जुड़ी कोई भी शिकायत है, तो इंतजार न करें। सीके बिरला अस्पताल, बीएमबी (कोलकाता) में हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञों से मिलें और अपने दिल की सेहत को प्राथमिकता दें।
रोजाना 15-20 मिनट सुबह की धूप लें, संतुलित आहार लें, नियमित हल्की एक्सरसाइज करें, धूम्रपान से बचें और साल में एक बार ब्लड प्रेशर व विटामिन D की जांच जरूर करवाएं।
हां, कई अध्ययनों में पाया गया है कि विटामिन D की कमी ब्लड वेसल्स को नियंत्रित करने वाले सिस्टम को असंतुलित कर सकती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है।
जी हां, खासकर जिन्हें पहले से हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज है, उन्हें साल में कम से कम एक बार यह जांच जरूर करानी चाहिए ताकि समय रहते सही कदम उठाया जा सके।
कुछ शोध बताते हैं कि सही डोज में विटामिन D लेने से हार्ट पेशेंट्स में जोखिम कम हो सकता है, लेकिन यह डॉक्टर की सलाह और नियमित मॉनिटरिंग के साथ ही किया जाना चाहिए, खुद से नहीं।
आमतौर पर 20-50 ng/mL को सामान्य माना जाता है, जबकि 20 ng/mL से कम स्तर कमी और 12 ng/mL से कम गंभीर कमी की श्रेणी में आता है। सटीक रेंज के लिए डॉक्टर की रिपोर्ट देखें।
सुबह की धूप में नियमित समय बिताएं, अंडे, मछली, मशरूम और फोर्टिफाइड फूड्स को आहार में शामिल करें, और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें।
हां, बचपन से बनी विटामिन D की कमी आगे चलकर मेटाबॉलिक और हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकती है, इसलिए बच्चों में भी संतुलित आहार और धूप का ध्यान रखना जरूरी है।
हां, कम धूप वाले मौसम में शरीर स्वाभाविक रूप से कम विटामिन D बना पाता है, इसलिए इन महीनों में आहार और सप्लीमेंट पर विशेष ध्यान देना फायदेमंद रहता है।
Written and Verified by:

Dr. Rakesh Sarkar is a Senior Consultant in Cardiology & Electrophysiology at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 11 years of experience. He specializes in complex arrhythmia management, including atrial fibrillation, ventricular tachycardia, CRT-D, and conduction system pacing.
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