
पिछले कुछ महीनों से आपके पिताजी सीढ़ियां चढ़ते हुए बीच में रुकने लगे हैं। मां कहती है कि बस थकान है, उम्र का असर है। आप भी मान लेते हैं। पर रात को लेटते ही सांस भारी लगती है, और यह बात कोई नहीं कहता कि शायद दिल के भीतर कुछ ठीक नहीं है। हार्ट वाल्व की समस्या अक्सर ऐसे ही चुपचाप शुरू होती है, और परिवार उसे "बढ़ती उम्र" समझकर टालता रहता है।
अच्छी बात यह है कि आज हार्ट वाल्व सर्जरी और आधुनिक तकनीकें काफी सुरक्षित हैं, बशर्ते सही समय पर सही फैसला लिया जाए। अगर आपके या आपके किसी अपने में ऐसे लक्षण दिख रहे हैं, तो अंदाजा लगाने में वक्त न गंवाएं। आज ही सीके बिरला हॉस्पिटल के अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ के साथ अपॉइंटमेंट बुक करें। तब तक यह ब्लॉग आपको हर जरूरी बात सरल भाषा में समझाएगा।
हृदय के वाल्व दरवाजे जैसे छोटे पर्दे होते हैं, जो खून को एक ही दिशा में जाने देते हैं। दिल में चार वाल्व होते हैं -
दिल एक दिन में लगभग एक लाख बार धड़कता है, यानी ये वाल्व उतनी ही बार खुलते और बंद होते हैं। जब इनमें से कोई भी ठीक से काम नहीं करता, तो दिल को ज्यादा जोर लगाना पड़ता है।
हृदय वाल्व रोग मुख्यतः तीन तरह से सामने आता है -
कारण भी अलग-अलग हैं। भारत में आज भी रूमेटिक बुखार का असर, जो बचपन के गले के संक्रमण के बाद वाल्व को नुकसान पहुंचाता है, एक बड़ा कारण माना जाता है। इसके अलावा उम्र के साथ वाल्व पर कैल्शियम जमना, जन्म से दो पत्तियों वाला एओर्टिक वाल्व और हृदय का संक्रमण (एंडोकार्डाइटिस) भी वजह बनते हैं। अंतरराष्ट्रीय रिसर्च के अनुसार करीब 2.5 प्रतिशत आबादी में वाल्व रोग मिलता है, और 75 साल से ऊपर के लोगों में यह आंकड़ा काफी ज्यादा है।

हृदय वाल्व रोग के लक्षण शुरू में हल्के होते हैं, इसलिए लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। इन संकेतों पर ध्यान दें-
सांस फूलने की वजह सीधी है। वाल्व खराब हो तो दिल कम खून आगे भेज पाता है या खून पीछे लौटता है, जिससे फेफड़ों में दबाव और पानी का जमाव बढ़ता है।
हर वाल्व रोग का इलाज ऑपरेशन नहीं होता। हल्की समस्या में दवाएं और नियमित इको जांच काफी रहती हैं। हार्ट वाल्व सर्जरी की जरूरत कब पड़ती है, इसका जवाब आम तौर पर इन स्थितियों में मिलता है -
यहां देरी की कीमत बड़ी हो सकती है। गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस में एक बार लक्षण शुरू होने के बाद, बिना इलाज के जीवन की उम्मीद काफी घट जाती है। इसलिए सही समय पर फैसला बेहद जरूरी है।
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वाल्व मरम्मत |
वाल्व रिप्लेसमेंट |
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क्या होता है? |
वाल्व को रिपेयर किया जाता है। |
खराब वाल्व को हटाकर नया लगाया जाता है। |
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कहां ज्यादा उपयोगी |
खासकर माइट्रल रिसाव में |
जब वाल्व बहुत क्षतिग्रस्त या कैल्शियम से जकड़ा हो |
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ब्लड थिनर |
अक्सर जरूरत कम |
मैकेनिकल वाल्व में जीवनभर जरूरी |
इसके अलावा, कुछ मरीजों के लिए बिना बड़ी सर्जरी के कैथेटर से वाल्व बदलने वाली तकनीक TAVI भी एक विकल्प है। आपके लिए कौन सा वाल्व सबसे बेहतर रहेगा, इसका फैसला आप और आपके डॉक्टर आपस में चर्चा करके ले सकते हैं।
सर्जरी से पहले निम्नलिखित टेस्ट कराए जाते हैं -
इन हालात में इंतजार न करें -
अगर पहले से वाल्व रोग का निदान है, तो हर 6 से 12 महीने में डॉक्टर के बताए अनुसार फॉलो-अप जरूर कराएं।
हार्ट वाल्व सर्जरी डरने की चीज नहीं, समझने की चीज है। लक्षणों को शुरू में पहचान लेने, समय पर इको जांच कराने और सही विशेषज्ञ की सलाह लेने से बहुत से मरीज सर्जरी के बाद सामान्य और सक्रिय जीवन जीते हैं। थकान और सांस की तकलीफ को हमेशा "उम्र" का नाम न दें। अपने दिल को एक जांच का मौका जरूर दें। अधिक जानकारी और सही सलाह के लिए आज ही सीके बिरला हॉस्पिटल में हृदय रोग विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट बुक करें।
देरी से दिल की मांसपेशी कमजोर हो सकती है, हार्ट फेल्योर, अनियमित धड़कन और खून के थक्कों का खतरा बढ़ता है। कई मामलों में क्षति स्थायी हो जाती है, इसलिए गंभीर वाल्व रोग में समय पर फैसला जरूरी है।
अस्पताल में आमतौर पर 5 से 7 दिन रुकना पड़ता है। हल्की दिनचर्या कुछ हफ्तों में शुरू होती है, और पूरी रिकवरी में लगभग 6 से 12 सप्ताह लग सकते हैं। यह हर मरीज में अलग हो सकता है।
हां, लंबे समय तक वाल्व खराब रहे तो दिल पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और वह धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है। इससे हृदय विफलता हो सकती है, जिसमें सांस फूलना और सूजन आम लक्षण हैं।
हल्के मामलों में हल्का व्यायाम, जैसे टहलना, अक्सर सुरक्षित है। पर गंभीर वाल्व रोग में भारी कसरत खतरनाक हो सकती है। कोई भी व्यायाम शुरू करने से पहले हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
यह एक बड़ी ओपन-हार्ट सर्जरी है, लेकिन कुशल डॉक्टरों और अच्छे संसाधनों के साथ यह काफी सुरक्षित है। रिसर्च के अनुसार इस सर्जरी में मृत्यु दर बहुत कम (कुछ ही प्रतिशत) होती है। सर्जरी में जोखिम से कहीं अधिक खतरा इसे टालने में है, क्योंकि देर करने पर दिल स्थायी रूप से डैमेज हो सकता है।
दवाएं लक्षण संभालती हैं, पर खराब वाल्व को ठीक करने का निर्णायक इलाज रिपेयर या रिप्लेसमेंट है। कौन-सा तरीका बेहतर है, यह वाल्व के प्रकार, गंभीरता, उम्र और अन्य बीमारियों पर निर्भर करता है।
कुछ चुने हुए मरीजों में TAVI जैसी कैथेटर तकनीक से वाल्व बदला जाता है, जिसमें बड़ा चीरा नहीं लगता। यह हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होता, इसका फैसला हार्ट टीम करती है।
दवाएं समय पर लें, नियमित फॉलो-अप और जांच कराएं, दांत और मसूड़ों की सफाई रखें, और बुखार या सांस की नई तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। मैकेनिकल वाल्व में INR जांच भी जरूरी है।
कुछ प्रकार के गंभीर वाल्व रोग गर्भावस्था में जोखिम बढ़ा सकते हैं। गर्भधारण से पहले हृदय रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ दोनों से सलाह लेना सुरक्षित रहता है।
Written and Verified by:

Dr. Anjan Siotia is the Director of Cardiology Department at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 24 years of experience. He specializes in complex angioplasty, chronic total occlusion, TAVI, CRT & ICD pacemaker surgery, and radial interventions.
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