एंडोकार्डाइटिस: दिल के वाल्व में इंफेक्शन के लक्षण और खतरे
Home >Blogs >एंडोकार्डाइटिस: दिल के वाल्व में इंफेक्शन के लक्षण और खतरे

एंडोकार्डाइटिस: दिल के वाल्व में इंफेक्शन के लक्षण और खतरे

Cardiology | by Dr. Anjan Siotia on 21/01/2026

Table of Contents

Summary

एंडोकार्डाइटिस दिल के वाल्व का एक गंभीर संक्रमण है। बुखार, थकान और सांस फूलना इसके प्रमुख लक्षण हैं। खराब ओरल हाइजीन इसका बड़ा कारण है। समय पर एंटीबायोटिक और सर्जरी से इसका सफल इलाज संभव है।

हमें यह समझना होगा कि हमारा दिल सिर्फ एक अंग नहीं है, हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो बिना रुके धड़कता रहता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक मामूली सा दिखने वाला बुखार या दांतों का छोटा सा इंफेक्शन आपके दिल के लिए जानलेवा खतरा बन सकता है? हम अक्सर दिल की बीमारियों को हार्ट अटैक या ब्लॉकेज से जोड़कर देखते हैं, लेकिन 'एंडोकार्डाइटिस' (Endocarditis) एक ऐसा गंभीर और जानलेवा संक्रमण है, जो चुपके से आपके दिल के वाल्व को अपना शिकार बनाता है।

बीएम बिरला हॉस्पिटल, कोलकाता में हमने देखा है कि कई मरीज एंडोकार्डाइटिस के लक्षण को सामान्य वायरल फीवर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। यह ब्लॉग आपको डराने के लिए नहीं, बल्कि जागरूक करने के लिए है। यदि आपके परिवार में कोई कृत्रिम वाल्व (Artificial Valve) या लंबे समय से बुखार से जूझ रहा है, तो बिना देर किए आप हमारे डॉक्टरों से मिलें और इलाज के विकल्पों पर विचार करें।

एंडोकार्डाइटिस क्या है और यह दिल के वाल्व को कैसे प्रभावित करता है?

मेडिकल भाषा में समझें तो, हमारे दिल के अंदरूनी स्तर को 'एंडोकार्डियम' कहा जाता है। जब बैक्टीरिया, फंगी या अन्य कीटाणु आपके रक्त प्रवाह में प्रवेश करते हैं और दिल के क्षतिग्रस्त क्षेत्रों या वाल्वों पर चिपक जाते हैं, तो वहां सूजन और संक्रमण पैदा होता है। इसे ही एंडोकार्डाइटिस कहते हैं।

लेकिन चलिए समझते हैं कि यह कैसे होता है? सामान्यतः, हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम (Immune System) रक्त में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म कर देता है। लेकिन, यदि किसी व्यक्ति के दिल के वाल्व पहले से ही क्षतिग्रस्त हैं, या उन्होंने कोई कृत्रिम वाल्व लगवाया है, तो बैक्टीरिया के लिए वहां घर बनाना आसान हो जाता है। यह बैक्टीरिया वहां जमा होकर 'वेजिटेशन' (Vegetation - बैक्टीरिया और कोशिकाओं का गुच्छा) बना लेते हैं।

यह संक्रमण धीरे-धीरे वाल्व को गला सकता है, उसमें छेद कर सकता है या वाल्व के खुलने और बंद होने की प्रक्रिया को बाधित कर सकता है। यदि इसका सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह दिल के वाल्व में इंफेक्शन (Heart Valve Infection) हार्ट फेलियर, स्ट्रोक (Stroke) या अन्य अंगों के खराब होने का कारण बन सकता है।

यह दो प्रकार का होता है -

  • एक्यूट (Acute Infective Endocarditis): यह अचानक होता है और बहुत तेजी से फैलता है। यदि कुछ दिनों में इलाज न मिले, तो यह जानलेवा हो सकता है।
  • सबएक्यूट (Subacute Infective Endocarditis): यह धीरे-धीरे हफ्तों या महीनों में विकसित होता है। इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जिन्हें पकड़ना मुश्किल हो सकता है।

एंडोकार्डाइटिस के शुरुआती लक्षण: जिन्हें कभी नजरअंदाज न करें

एंडोकार्डाइटिस की पहचान करना कई बार डॉक्टरों के लिए भी चुनौती बन जाता है, क्योंकि इसके लक्षण कई अन्य सामान्य बीमारियों जैसे फ्लू या निमोनिया से मिलते-जुलते हैं। हालांकि, मरीज को अपने शरीर में हो रहे बदलावों पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए।

यहां एंडोकार्डाइटिस के शुरुआती लक्षण दिए गए हैं, जो खतरे की घंटी हो सकते हैं -

  • लगातार बुखार और ठंड लगना: यह सबसे आम लक्षण है। बुखार कभी तेज तो कभी हल्का हो सकता है, लेकिन यह लंबे समय तक बना रहता है।
  • हृदय में नई ध्वनि (Heart Murmur): जब डॉक्टर स्टेथोस्कोप से दिल की धड़कन सुनते हैं, तो उन्हें एक असामान्य ध्वनि (Murmur) सुनाई दे सकती है। यह वाल्व में इंफेक्शन के कारण रक्त प्रवाह में गड़बड़ी का संकेत है।
  • अत्यधिक थकान और कमजोरी: थोड़ा सा काम करने पर ही सांस फूलना या शरीर में जान न महसूस होना।
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द: फ्लू जैसा दर्द, जो घुटनों, कंधों या उंगलियों के जोड़ों में महसूस हो सकता है।
  • रात में पसीना आना (Night Sweats): इतना पसीना आना कि आपके कपड़े गीले हो जाएं।
  • सांस लेने में तकलीफ: लेटने पर या चलते समय सांस फूलना, जो हार्ट फेलियर की तरफ इशारा कर सकता है।

कुछ विशिष्ट और गंभीर लक्षण

  • पैरों या पेट में सूजन: यह संकेत देता है कि वाल्व ठीक से काम नहीं कर रहा है।
  • त्वचा में बदलाव:नाखूनों के नीचे लाल लकीरें (Splinter hemorrhage) आना। इसके अतिरिक्त उंगलियों या पैरों के तलवों पर लाल, दर्द रहित धब्बे बनना, और उंगलियों के पोरों पर दर्दनाक लाल गांठ (Osler’s nodes) बनना।
  • पेशाब में खून आना: यह किडनी के प्रभावित होने का संकेत हो सकता है।

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, खासकर यदि आप पहले से दिल के मरीज हैं, तो तुरंत हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मिलें और इलाज लें।

दिल के वाल्व में इंफेक्शन होने के मुख्य कारण

कई लोग सोचते हैं कि दिल का इंफेक्शन सिर्फ दिल की कमजोरी से होता है, लेकिन सच्चाई यह है कि वाल्व इंफेक्शन के कारण अक्सर हमारे शरीर के अन्य हिस्सों से शुरू होते हैं। बैक्टीरिया को रक्त प्रवाह में प्रवेश करने का मौका मिलना ही इस बीमारी की जड़ है।

यहाँ प्रमुख कारण दिए गए हैं -

  • मुंह की खराब स्वच्छता (Poor Oral Hygiene): यह सुनकर आप हैरान हो सकते हैं, लेकिन आपका मुंह (Mouth) आपके दिल के स्वास्थ्य का आईना है। मसूड़ों से खून आना, मसूड़ों की सूजन या दांतों की सड़न से 'स्ट्रेप्टोकोकस' जैसे बैक्टीरिया खून में मिल सकते हैं, जो सीधे दिल तक पहुंच सकते हैं।
  • डेंटल प्रोसीजर (Dental Procedures): कभी-कभी दांत निकलवाने या मसूड़ों की सर्जरी के दौरान मसूड़ों में कट लगने से बैक्टीरिया खून में प्रवेश कर जाते हैं।
  • कैथेटर या सुई का उपयोग: अस्पतालों में लंबे समय तक आईवी (IV) लाइन या यूरिनरी कैथेटर का उपयोग बैक्टीरिया के प्रवेश का द्वार बन सकता है।
  • नशीली दवाओं का इंजेक्शन: जो लोग गैर-कानूनी ड्रग्स के लिए गंदी सुइयों का इस्तेमाल करते हैं, उनमें दिल के वाल्व में इंफेक्शन होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। इस प्रकार की नशीली दवाएं किसी को भी नहीं लेनी चाहिए।
  • त्वचा के संक्रमण: यदि आपकी त्वचा पर कोई घाव, फोड़ा या अल्सर है और उसका इलाज नहीं किया गया है, तो वहां से बैक्टीरिया खून में जा सकते हैं।
  • पिछली हार्ट सर्जरी: वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद शुरुआती दिनों में इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।

एंडोकार्डाइटिस से होने वाले जोखिम - Risk Factors

हर किसी को एंडोकार्डाइटिस नहीं होता है। एक स्वस्थ दिल वाले व्यक्ति का इम्यून सिस्टम बैक्टीरिया को वाल्व पर चिपकने से पहले ही नष्ट कर देता है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में जोखिम बढ़ जाता है। चलिए जिसे समझते हैं -

  • कृत्रिम हृदय वाल्व (Artificial Heart Valves): जिन लोगों का वाल्व बदला गया है, उनमें बैक्टीरिया के चिपकने की संभावना सामान्य वाल्व की तुलना में अधिक होती है।
  • जन्मजात हृदय दोष (Congenital Heart Defects): यदि किसी के दिल की बनावट में जन्म से ही गड़बड़ी है, तो रक्त का प्रवाह अशांत होता है, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।
  • एंडोकार्डाइटिस की मेडिकल हिस्ट्री: जिसे एक बार यह बीमारी हो चुकी है, उसे दोबारा होने की संभावना काफी ज्यादा होती है।
  • उम्र का कारक: 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में वाल्व के सिकुड़ने या खराब होने की संभावना होती है, जिससे संक्रमण आसानी से हो सकता है।
  • इम्यूनिटी की कमी: कैंसर, एचआईवी या स्टेरॉयड लेने वाले मरीजों में शरीर बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम नहीं होता है।

एंडोकार्डाइटिस से जुड़े गंभीर खतरे और जटिलताएं - Complications

यदि एंडोकार्डाइटिस का समय पर इलाज न किया जाए, तो परिणाम भयावह हो सकते हैं। बैक्टीरिया और कोशिकाओं के गुच्छे (Vegetations) टूटकर खून के जरिए शरीर के दूसरे अंगों तक पहुंच सकते हैं।

  • स्ट्रोक: यदि यह गुच्छा टूटकर दिमाग की नस में फंस जाए, तो पैरालिसिस या स्ट्रोक हो सकता है।
  • हार्ट फेलियर: इंफेक्शन वाल्व को इतना खराब कर सकता है कि दिल खून पंप करना बंद कर दे। यह एंडोकार्डाइटिस से होने वाली मौत का सबसे बड़ा कारण है।
  • किडनी डैमेज: बैक्टीरिया किडनी में जाकर 'ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस' पैदा कर सकते हैं, जिससे किडनी फेल हो सकती है।
  • फेफड़ों में एम्बोलिज्म: यदि गुच्छा फेफड़ों की नसों में चला जाए, तो सांस रुक सकती है।
  • मस्तिष्क में फोड़ा: बैक्टीरिया दिमाग में पहुंचकर पस (Pus) की थैली बना सकते हैं।

एंडोकार्डाइटिस की जांच और इलाज क्यों है जरूरी?

इस बीमारी में 'समय' ही सब कुछ है। जितनी जल्दी निदान होगा, वाल्व को बचाने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। डॉक्टर जांच के लिए निम्न जांच का सुझाव देते हैं -

  • ब्लड कल्चर (Blood Culture): यह सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट है। इससे पता चलता है कि खून में कौन सा बैक्टीरिया है, ताकि सही एंटीबायोटिक दी जा सके।
  • इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram): इसमें दो प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं जैसे कि -
    • TTE (Transthoracic): छाती के ऊपर से की जाने वाली सोनोग्राफी।
    • TEE (Transesophageal): इसमें एक पतली ट्यूब गले के जरिए भोजन नली में डाली जाती है ताकि दिल के वाल्व की ज्यादा साफ तस्वीर मिल सके। यह छोटी से छोटी 'वेजीटेशन' को पकड़ने में सक्षम है।
  • ईसीजी (ECG) और चेस्ट एक्स-रे: दिल की धड़कन और फेफड़ों की स्थिति देखने के लिए यह टेस्ट कराया जाता है।

एंडोकार्डाइटिस के लिए इलाज

बीएम बिरला अस्पताल में हम मरीज की स्थिति के अनुसार 'मल्टी-डिसीप्लिनरी अप्रोच' अपनाते हैं। इलाज के लिए निम्न विकल्पों का सुझाव दिया जा सकता है -

  • एंटीबायोटिक दवाएं: चूकीं यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, इसलिए हाई-डोज एंटीबायोटिक्स सीधे नसों (IV) के जरिए दिए जाते हैं। मरीज को आमतौर पर 4 से 6 सप्ताह तक अस्पताल में या डॉक्टर की निगरानी में एंटीबायोटिक लेने पड़ते हैं।
  • सर्जरी: यदि इंफेक्शन से वाल्व बहुत ज्यादा खराब हो गया है, एंटीबायोटिक असर नहीं कर रहे हैं, या फंगल इंफेक्शन है, तो सर्जरी अनिवार्य हो जाती है। सर्जरी में या तो वाल्व को रिपेयर किया जाता है या उसे कृत्रिम वाल्व से बदल दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, सर्जरी के जरिए जमे हुए बैक्टीरिया को साफ किया जाता है।

एंडोकार्डाइटिस से बचाव के उपाय

आप अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करके इस बड़ी बीमारी से बच सकते हैं जैसे कि -

  • मौखिक स्वच्छता: दिन में दो बार ब्रश करें और माउथ वॉश करें। हर 6 महीने में डेंटिस्ट के पास जाकर दांतों की सफाई करवाएं।
  • एंटीबायोटिक प्रोफिलैक्सिस: यदि आपके वाल्व को बदला गया है या जन्मजात हृदय रोग है, तो किसी भी डेंटल प्रोसीजर से पहले अपने डॉक्टर से पूछकर एंटीबायोटिक जरूर लें।
  • त्वचा की देखभाल: किसी भी कट या घाव को खुला न छोड़ें। उसे साफ करें और पट्टी बांधे। यदि घाव ठीक नहीं हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  • लक्षणों को पहचानें: यदि आपको पिछले इतिहास के साथ बिना कारण बुखार आ रहा है, तो खुद से दवा लेने के बजाय कार्डियोलॉजिस्ट से मिलें।
  • टैटू और पियर्सिंग से बचें: शरीर पर टैटू बनवाने या पियर्सिंग से बैक्टीरिया के खून में जाने का खतरा रहता है, इसलिए सावधानी बरतें।

चलिए इसे आसान बनाने के लिए हम आपको एक टेबल की सहायता से समझाने का प्रयास करते हैं -

क्या करें (Do's)

क्या न करें (Don'ts)

मौखिक स्वच्छता: दिन में दो बार ब्रश करें और माउथ वॉश करें।

मसूड़ों को नजरअंदाज करना: मसूड़ों से खून आने या सूजन को सामान्य न समझें, यह इंफेक्शन का कारण बन सकता है।

डेंटिस्ट से मिलें: हर 6 महीने में दांतों की सफाई करवाएं।

खुद डॉक्टर बनना: बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक्स न लें, यह लक्षणों को छिपा सकता है।

घाव की देखभाल: त्वचा पर कटने या छिलने पर उसे तुरंत एंटीसेप्टिक से साफ करें और ढक कर रखें।

घाव खुला छोड़ना: त्वचा के किसी भी फोड़े, फुंसी या कट को खुला न छोड़ें, वहां से बैक्टीरिया खून में जा सकते हैं।

प्रोफिलैक्सिस (Prophylaxis): डेंटल प्रोसीजर से पहले अपने डॉक्टर से पूछकर एहतियाती एंटीबायोटिक लें।

टैटू और पियर्सिंग: यदि आपको दिल की बीमारी है, तो टैटू या बॉडी पियर्सिंग करवाने से बचें, इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।

लक्षणों पर नज़र: यदि 3-4 दिन से ज्यादा बुखार है और थकान महसूस हो रही है, तो तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से मिलें।

लक्षणों की अनदेखी: सिर्फ वायरल सोचकर लगातार बुखार या रात के पसीने को इग्नोर न करें।

निष्कर्ष

एंडोकार्डाइटिस एक गंभीर बीमारी है, लेकिन सही जानकारी और सतर्कता से इसे हराया जा सकता है। एक मरीज के रूप में, आपको अपने शरीर के संकेतों को समझना होगा। बुखार सिर्फ बुखार नहीं हो सकता, और थकान सिर्फ काम का नतीजा नहीं हो सकता, इसलिए इन लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। यदि आप हाई-रिस्क श्रेणी में आते हैं, तो अपने दिल की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और हमारे अनुभवी विशेषज्ञों को से परामर्श लें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या एंडोकार्डाइटिस बिना बुखार के भी हो सकता है?

हां, विशेषकर बुजुर्गों या एंटीबायोटिक ले रहे लोगों में बुखार हल्का या अनुपस्थित हो सकता है। ऐसे मामलों में थकान और कमजोरी मुख्य लक्षण हो सकते हैं।

क्या दिल के वाल्व बदलने के बाद एंडोकार्डाइटिस हो सकता है?

जी हां, जिनकी वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई है, उनमें संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इसलिए उन्हें ओरल हाइजीन और नियमित जांच का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

एंडोकार्डाइटिस कितने समय में ठीक होता है?

इसका इलाज आमतौर पर 4 से 6 सप्ताह तक चलता है। इसमें लंबे समय तक IV एंटीबायोटिक्स की आवश्यकता होती है, और कुछ मामलों में सर्जरी भी करनी पड़ती है।

क्या एंडोकार्डाइटिस के बाद दिल हमेशा के लिए कमजोर हो जाता है?

यदि इलाज में देरी हो तो वाल्व स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, जिससे हार्ट फेलियर हो सकता है। समय पर इलाज से पूर्ण रिकवरी संभव है।

क्या एंडोकार्डाइटिस बार-बार हो सकता है?

हां, जिन लोगों को एक बार यह इंफेक्शन हो चुका है, उन्हें भविष्य में इसके दोबारा होने का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है।

Written and Verified by:

Dr. Anjan Siotia

Dr. Anjan Siotia

Director Exp: 28 Yr

Cardiology

Book an Appointment

Dr. Anjan Siotia is the Director of Cardiology Department at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 12 years of experience. He specializes in complex angioplasty, chronic total occlusion, TAVI, CRT & ICD pacemaker surgery, and radial interventions.

Related Diseases & Treatments

Treatments in Kolkata

Cardiology Doctors in Kolkata

NavBook Appt.WhatsappWhatsappCall Now