नींद की कमी दिल के लिए कितनी खतरनाक है?
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नींद की कमी दिल के लिए कितनी खतरनाक है?

Pulmonology | by Dr. Raja Dhar on 15/04/2026

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Summary

नींद को कमज़ोरी समझना आपके दिल के लिए सबसे बड़ी गलती हो सकती है। रिसर्च बताती है कि नींद की कमी से हृदय रोगों का खतरा 200% तक बढ़ जाता है। नींद के दौरान शरीर ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, धमनियों की मरम्मत करता है और स्ट्रेस हार्मोन को कम करता है — यानी नींद दिल की असली "रिकवरी टाइम" है।

6 घंटे से कम सोने वालों में धमनियों में प्लाक जमना, हार्ट अटैक और स्लीप एपनिया का खतरा कई गुना अधिक होता है। बचाव के लिए रोज़ 7-9 घंटे की गहरी नींद, सोने से पहले स्क्रीन से दूरी और शाम 4 बजे के बाद कैफीन बंद करें।

याद रखें — नींद कोई लग्ज़री नहीं, यह आपके दिल की ज़रूरत है।

आजकल इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण चीज को सबसे कम अहमियत दे रहे हैं और वे है आपकी नींद। देर रात तक स्क्रीन देखना, काम का तनाव और कैफीन का अत्यधिक सेवन आपको चैन से रात में सोने नहीं देते हैं, और इसके कारण आपका दिल भी थक जाता है।

नींद की कमी (Sleep Deprivation) केवल अगले दिन की थकान तक सीमित नहीं है; यह आपके दिल के लिए एक 'टाइम बम' की तरह काम करता है। कार्डियोलॉजिस्ट मानते हैं कि जो लोग पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं, उनमें हृदय रोगों का खतरा उन लोगों की तुलना में 200% तक अधिक होता है जो चैन की नींद सोते हैं। यदि आप हृदय संबंधी किसी भी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो बिना देर किए हमारे विशेषज्ञों से परामर्श लें।

नींद की कमी शरीर और दिल को कैसे प्रभावित करती है?

‘इंडियन जर्नल ऑफ स्लीप मेडिसिन' के एक रिसर्च के अनुसार, भारत में नींद की कमी एक गंभीर संकट बन चुकी है। विशेषकर 31-50 वर्ष की आयु के 47.9% लोग इससे जूझ रहे हैं, वहीं युवाओं (16-30 वर्ष) में भी यह आंकड़ा 31.6% है, जो बदलती जीवनशैली के खतरनाक प्रभावों को दर्शाता है। मेडिकल साइंस के अनुसार, नींद की यह कमी शरीर में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) के स्तर को बढ़ा देती है और नर्वस सिस्टम को अत्यधिक सक्रिय कर देती है। इसके परिणामस्वरूप, भारतीयों में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम लगातार बढ़ रहा है।

नींद की कमी के कारण कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं जैसे कि - 

  1. एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis): नींद की कमी से धमनियों में प्लाक (Plaque) जमने लगता है, जिससे रक्त का प्रवाह बाधित होता है।
  2. मोटापा और डायबिटीज: नींद की कमी भूख बढ़ाने वाले हार्मोन 'घ्रेलिन' को बढ़ाती है, जिससे वजन बढ़ता है और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। ये दोनों ही दिल के दुश्मन हैं।
  3. ताज़ा आंकड़े: 'स्लीप फाउंडेशन' के अनुसार, क्रोनिक इंसोमनिया या अनिद्रा से ग्रस्त लोगों में हार्ट अटैक आने की संभावना सामान्य लोगों से 29% ज्यादा होती है।

नींद की कमी के लक्षण जिन्हें आपको कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

अक्सर हम नींद की कमी के लक्षणों को सामान्य थकान मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन शरीर हमें चेतावनी दे रहा होता है - 

  • दिन भर भारीपन और चिड़चिड़ापन महसूस होना।
  • याददाश्त कमजोर होना और एकाग्रता में कमी।
  • बार-बार सिरदर्द होना और आंखों के नीचे काले घेरे।
  • बिना किसी कारण के धड़कन का तेज होना (Palpitations)।
  • रात को बार-बार सांस फूलने के कारण जाग जाना, जो स्लीप डिसऑर्डर और दिल की बीमारी का संकेत हो सकता है।

किस विटामिन की कमी से नींद नहीं आती है?

कई बार हम अपनी जीवनशैली को दोष देते हैं, लेकिन समस्या शरीर के भीतर छिपी होती है। यह जानना आवश्यक है कि शरीर में किन पोषक तत्वों की कमी आपकी नींद में बाधा डाल रही है। नींद न आना निम्न कारणों से परेशान कर सकता है - 

  • विटामिन D: इसकी कमी से स्लीप एपनिया का खतरा बढ़ता है।
  • विटामिन B12: यह मेलाटोनिन (नींद का हार्मोन) के उत्पादन में मदद करता है।
  • मैग्नीशियम: यह मांसपेशियों को आराम देता है और गहरी नींद लाने में सहायक है। अगर आप कम नींद के नुकसान से बचना चाहते हैं, तो अपनी डाइट चार्ट में इन पोषक तत्वों को जरूर शामिल करें और मुख्य रूप से मैग्नीशियम को शामिल करें।

हार्ट हेल्थ टिप्स: एक अच्छी नींद के लिए क्या करें?

अपने दिल को सुरक्षित रखने के लिए अपनी स्लीप हाइजीन में सुधार करें। इसके लिए आप अपनी जीवनशैली में निम्न बदलाव कर सकते हैं - 

  • निश्चित समय: सोने और जागने का एक ही समय तय करें, जैसे कि रात में 9 बजे तक सो जाएं और कम से कम 6 बजे उठ जाएं।
  • डिजिटल डिटॉक्स: सोने से 1 घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बनाएं। रिसर्च से प्रमाणित है कि स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी हार्मोन में बदलाव करती है, जिससे नींद नहीं आती है।
  • कैफीन पर लगाम: शाम 4 बजे के बाद चाय या कॉफी का सेवन न करें।
  • नियमित व्यायाम: दिन में शारीरिक गतिविधि करने से रात में गहरी नींद आती है।
  • चेकअप: यदि आपको नींद न आने की समस्या बनी रहती है, तो नींद की कमी के लक्षणों को पहचानें और विशेषज्ञ की सलाह लें।

नींद की कमी से बढ़ने वाले अन्य स्वास्थ्य जोखिम

दिल के अतिरिक्त, नींद की कमी से होने वाले रोगों की सूची काफी लंबी है। चलिए कुछ मुख्य स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानते हैं - 

जब हम सो रहे होते हैं, तो भी हमारा दिल काम करता है। हमारे दिल को भी आराम की ज़रूरत है और उसके लिए आपको शरीर को आराम देना होगा। याद रखें, एक अच्छी नींद कोई लग्जरी नहीं बल्कि आपके जीवन की जरूरत है। आज ही अपनी आदतों को बदलें, ताकि आपका दिल कल सुरक्षित रहे। अगर आपको लगता है कि आप स्लीप डिसऑर्डर और दिल की किसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो तुरंत प्रोफेशनल मदद लें। दिल की समस्या के इलाज में हमारे अनुभवी डॉक्टरों को विशेषज्ञता हासिल है। यदि आपको भी कोई हृदय संबंधित समस्या परेशान कर रही है, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या नींद की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ता है?

हाँ, नींद के दौरान शरीर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। नींद की कमी से स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं, जो नसों को सिकोड़ देते हैं और लंबे समय तक रहने पर हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनते हैं।

क्या नींद की कमी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाती है?

बिल्कुल, 6 घंटे से कम सोने वालों में धमनियों के सख्त होने और सूजन की संभावना अधिक होती है, जिससे अचानक हार्ट अटैक आने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

क्या स्लीप एपनिया दिल के लिए खतरनाक है?

जी हां, स्लीप एपनिया में ऑक्सीजन का स्तर गिरने से हृदय पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। यह एट्रियल फाइब्रिलेशन (दिल की अनियमित धड़कन) और सडन कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है।

क्या ज्यादा काम और तनाव से नींद कम होने पर दिल प्रभावित होता है?

तनाव और काम का बोझ शरीर में एड्रेनालाईन बढ़ाता है, जिससे दिल को आराम नहीं मिलता। यह 'बर्नआउट' सीधे तौर पर हार्ट फेलियर के जोखिम को बढ़ाता है।

क्या दिन में झपकी लेना नींद की कमी पूरी कर सकता है?

दिन की 20-30 मिनट की झपकी ताजगी दे सकती है, लेकिन यह रात की गहरी नींद का विकल्प नहीं है। हृदय की रिकवरी केवल रात की लंबी और गहरी नींद में ही होती है।

रात में नींद न आने पर कौन सा फल खाना चाहिए?

केला और कीवी जैसे फल नींद लाने में सहायक हो सकते हैं, क्योंकि इनमें मैग्नीशियम और सेरोटोनिन पाया जाता है जो शरीर को रिलैक्स करने में मदद करते हैं।

स्लीप एपनिया डिसऑर्डर क्या है?

स्लीप डिसऑर्डर और दिल के बीच सबसे खतरनाक कड़ी है 'ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया' (OSA)। इसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुकती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता है और अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।

कितनी नींद दिल की सेहत के लिए जरूरी है?

बीएम बिरला अस्पताल, कोलकाता के हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क को प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की बिना किसी बाधा वाली नींद लेनी चाहिए।

कम नींद से हार्ट पर क्या असर पड़ता है?

कम नींद से हार्ट पर असर केवल बुढ़ापे में नहीं, बल्कि अब युवाओं में भी देखा जा रहा है। 30-40 साल की उम्र में आने वाले साइलेंट हार्ट अटैक का एक मुख्य कारण 'स्लीप डेप्रिवेशन' ही है।

Written and Verified by:

Dr. Raja Dhar

Dr. Raja Dhar

Director & HOD Exp: 32 Yr

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Dr. Raja Dhar is the Director & Head of Pulmonology Dept. at BM Birla Heart Hospital and CMRI Hospital, Kolkata, with over 27 years of experience. He specializes in interstitial lung disease, asthma & allergy, COPD, sleep medicine, advanced lung function services, interventional & diagnostic pulmonology, rare stroke & orphan lung diseases, and all disciplines of respiratory medicine.

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