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एथेरोस्क्लेरोसिस: कारण, लक्षण और जोखिम कारक

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एथेरोस्क्लेरोसिस: कारण, लक्षण और जोखिम कारक

Cardiology | by Dr. Anil Mishra | Published on 23/02/2024


एथेरोस्क्लेरोसिस वह स्थिति है, जिसमें शरीर की धमनियां प्लाक के जमने के कारण सख्त हो जाती हैं या सिकुड़ जाती हैं। इसके कारण रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है और हृदय संबंधित बीमारियां जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज उत्पन्न होने लगती है। इससे बचने के लिए एथेरोस्क्लेरोसिस के लक्षणों को पहचान कर तुरंत एक अच्छे डॉक्टर से मिलना चाहिए और इलाज की योजना पर विचार करना चाहिए। 

इस ब्लॉग में आपको एथेरोसिलेरोसिस के कारण, लक्षण और जोखिम कारक के बारे में पता चलेगा। यह एक सामान्य जानकारी है। यदि आप भी इन लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो हमारे विशेषज्ञों से मिलने से आपको लाभ मिलेगा। 

एथेरोस्क्लेरोसिस क्या है?

एथेरोस्क्लेरोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें धमनियों की दीवारों पर वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य रसायन जमा हो जाते हैं। इस रसायनों के संचय को प्लाक कहा जाता है। इस जमे हुए प्लाक के कारण धमनियां संकीर्ण हो जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो जाती हैं। कई बार ऐसा होता है कि यदि प्लाक फट जाए तो रक्त का थक्का जम सकता है, जिससे जीवन खतरे में भी आ सकता है।

एथेरोस्क्लेरोसिस एक ऐसा रोग है, जो हृदय से जुड़ा होता है, लेकिन इस रोग के कारण पूरे शरीर की नसें प्रभावित हो सकती हैं। चलिए इसके इलाज और जोखिम कारक जानने से पहले कारण और लक्षण जानते हैं। 

एथेरोस्क्लेरोसिस के लक्षण

एथेरोस्क्लेरोसिस के प्रारंभिक लक्षण बहुत पहले ही दिख जाते हैं। सामान्यतः इस स्थिति के शुरुआती लक्षण तब उत्पन्न होते हैं, जब व्यक्ति की उम्र 10-19 साल के बीच होते हैं। जब नसों की जांच होती है, तो यह प्लाक सफ़ेद रंग का दिखता है। आमतौर पर नसों में प्लाक के निर्माण धीरे-धीरे होता है, जिसके कारण यह स्थिति कई वर्षों के बाद ही उत्पन्न होती हैं। 

एथेरोस्क्लेरोसिस की स्थिति में कई लक्षण उत्पन्न होते हैं, लेकिन लक्षण प्रभावित हुई धमनियों के आधार पर निर्भर करते हैं जैसे - 

  • कैरोटिड धमनियां: जब कैरोटिड धमनी प्रभावित होती है, तो रोगी को स्ट्रोक का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ-साथ शरीर में कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द, चेहरे का सुन्न होना, लकवा जैसे स्थिति का भी अनुभव होता है। 
  • कोरोनरी धमनियां: इसके कारण व्यक्ति को एनजाइना या सीने में दर्द और दिल के दौरे जैसी स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति के कारण सीने में दर्द, उल्टी, अत्यधिक चिंता, खांसी, बेहोशी जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं। 
  • गुर्दे की धमनी: जब यह धमनी प्रभावित होती है, तो मरीज को भूख की कमी, हाथों और पैरों में सूजन और इसके साथ-साथ एक चीज पर ध्यान केंद्रित करने में समस्या आती है। 
  • परिधीय (पेरीफेरल) धमनी रोग: इस नस के प्रभावित होने पर पैरों की मांसपेशियों में भारीपन के साथ ऐंठन की समस्या उत्पन्न होने लगती है। अधिकतर लोगों में इन लक्षणों के साथ दर्द भी होता है। 

ऐथिरोस्क्लेरोसिस के कारण

एथेरोस्क्लेरोसिस की समस्या निम्न कारणों से उत्पन्न हो सकती हैं - 

  • हाई कोलेस्ट्रॉल
  • हाई ब्लड प्रेशर या उच्च रक्तचाप
  • सूजन (आर्थराइटिस या लुपस)
  • धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन
  • मोटापा या डायबिटीज

एथेरोस्क्लेरोसिस के जोखिम कारक

यदि यह स्थिति किसी भी कारणवश अनुपचारित रह जाती है, तो धमनियां सख्त हो जाती हैं और निम्न जोखिम कारक उत्पन्न हो सकते हैं - 

यदि कोई भी इन स्थितियों से बचना चाहता है, तो हम आपको सलाह देंगे कि आप तुरंत इलाज के बारे में विचार करें।

एथेरोस्क्लेरोसिस से बचाव

यदि आपको शुरुआती चरण में एथेरोस्क्लेरोसिस का पता चल जाए, तो आप निम्न युक्तियों का पालन कर इस स्थिति से बच सकते हैं। डॉक्टर भी शुरुआती चरण में कुछ दवाओं के साथ कुछ उपाय बताते हैं जैसे - 

  • धूम्रपान से दूरी बनाएं। 
  • पौष्टिक आहार के सेवन को बढ़ावा दें
  • नियमित व्यायाम करें
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें
  • समय-समय पर रक्तचाप की जांच कराएं क्योंकि इससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। 
  • कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के स्तर को बनाए रखें।

स्वस्थ जीवनशैली आपको हर रोग से दूर कर सकता है। स्वस्थ जीवन शैली को अपनाएं और प्रयास करें कि इस आदत को लंबे समय तक बनाए रखें। 

ऐथिरोस्क्लेरोसिस के उपचार

जीवनशैली में बदलाव इलाज का पहला कदम है। सबसे पहले आपको आहार में फैट और कोलेस्ट्रॉल के सेवन को कम करना होगा। इससे रक्त वाहिकाओं में रक्त का बहाव अच्छा हो जाता है। इसके अतिरिक्त व्यायाम रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद कर सकता है। 

हालांकि यह सब उपाय तभी कारगर साबित होते हैं जब स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं होती है। गंभीर मामलों में डॉक्टर दवा या सर्जरी का सुझाव देते हैं। डॉक्टर ऐथिरोस्क्लेरोसिस के उपचार के लिए निम्न दवाओं का सुझाव देते हैं - 

  • कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं
  • बीटा ब्लॉकर्स 
  • कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स 
  • बीपी कम करने की दवा
  • खून पतला करने वाली दवाएं जिससे खून के थक्के जमने कम हो जाते हैं। 

यदि स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है या फिर डॉक्टर को लगता है कि इससे आपके जीवन को कोई खतरा होता है, तो वह सर्जरी का सुझाव दे सकते हैं। 

डॉक्टर दिल की बीमारी के गंभीर मामलों में सर्जरी को प्राथमिकता दी जाती है। मुख्य रूप से डॉक्टर एथेरोस्क्लेरोसिस के इलाज के लिए बाईपास सर्जरी का सुझाव देते हैं। इसके अलावा डॉक्टर प्रभावित धमनी में इंजेक्शन से एक दवा को डालते हैं। इस दवा डालने वाली प्रक्रिया को थ्रांबोलिटिक थेरेपी कहा जाता है। इसके साथ-साथ एंजियोप्‍लास्‍टी और एंडारटेरेटोमी भी करनी पड़ सकती है। लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टरों से बात करें और इलाज के विकल्पों पर विचार करें।

एथेरोस्क्लेरोसिस से संबंधित अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

 

एथेरोस्क्लेरोसिस का निदान कैसे होता है?

एथेरोस्क्लेरोसिस का निदान शारीरिक परीक्षण, रक्त परीक्षण और इमेजिंग परीक्षण के माध्यम से संभव है। सबसे पहले आप डॉक्टर के पास जाएं और उनसे परामर्श लें। वह आपकी स्थिति के आधार पर इलाज की योजना बनाते हैं।

एथेरोस्क्लेरोसिस का इलाज कैसे किया जाता है?

एथेरोस्क्लेरोसिस के इलाज के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होगा जैसे - 

  • जीवनशैली में बदलाव: स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान छोड़ना, वजन कम करना, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का प्रबंधन करें।
  • दवाएं: एथेरोस्क्लेरोसिस के इलाज के लिए कई दवाएं उपलब्ध हैं जैसे - कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, इत्यादि।
  • सर्जरी: दवाएं और जीवनशैली जब प्रभावी नहीं होते हैं तो डॉक्टर सर्जरी का विकल्प देते हैं। 

एथेरोस्क्लेरोसिस को कैसे रोका जा सकता है?

एथेरोस्क्लेरोसिस को रोकने के लिए निम्न चीजों का पालन करना चाहिए - 

  • स्वस्थ आहार
  • नियमित व्यायाम
  • धूम्रपान से दूरी बनाएं
  • वजन कम करें
  • मधुमेह और उच्च रक्तचाप का प्रबंधन
  • नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं