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हृदय बाईपास सर्जरी: प्रकार, जोखिम कारक, और तैयारी

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हृदय बाईपास सर्जरी: प्रकार, जोखिम कारक, और तैयारी

Cardiac Surgery | by Dr. Manoj Kumar Daga | Published on 26/04/2024


कई बार लोगों को लगता है कि दिल की धड़कन तेज होना, सीने में जकड़न या सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना एक आम समस्या है। हालांकि यह सच है लेकिन इनका संबंध सीधा आपके दिल के स्वास्थ्य से होता है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) जैसी स्थितियों में हृदय तक रक्त ले जाने वाली नसें पतली हो जाती हैं, जिससे सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। हार्ट बाईपास सर्जरी से इन ब्लॉकेज वाली नसों को फिर से स्वस्थ कर रक्त प्रवाह को दुरुस्त किया जा सकता है। इस सर्जरी को कई नामों से जाना जाता है जैसे - 

  • कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG) - Coronary Artery Bypass Grafting
  • कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट सर्जरी - Coronary Artery Bypass Surgery

यह एक गंभीर स्थिति है, जिसके बारे में सभी को अवश्य जानना चाहिए। चलिए हृदय बाईपास सर्जरी के प्रकार, कारण, लक्षण, और उपचार के बारे में जानते हैं।

हृदय बाईपास सर्जरी के विभिन्न प्रकार -

हृदय या हार्ट बाईपास सर्जरी कई तरीकों से की जाती है। किस प्रकार की सर्जरी होगी, इसका निर्णय रोगी के स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। चलिए हृदय बाईपास सर्जरी के प्रकार के बारे में जानते हैं -

  • ट्रेडिशनल बाईपास सर्जरी: यह सबसे आम तरीका है, जिसमें छाती पर चीरा लगाकर ब्लॉक नसों को बाईपास किया जाता है। सर्जरी के दौरान रक्त के बहाव को बनाए रखने के लिए मशीन का प्रयोग होता है। 
  • ऑफ-पंप बाईपास सर्जरी: इस विधि में भी छाती पर चीरा तो लगाया जाता है, लेकिन दिल की धड़कन को रोका नहीं जाता है। 
  • मिनिमल इनवेसिव बाईपास सर्जरी: इसे की होल सर्जरी (keyhole surgery) भी कहा जाता है, जिसमें हृदय शल्य चिकित्सक पसलियों के बीच छोटे चीरे लगाकर हृदय तक पहुंचते हैं। कैमरे और रोबोटिक तकनीक की मदद से ऑपरेशन किया जाता है।

इसके अतिरिक्त ब्लॉक नसों की संख्या के आधार पर भी बाईपास के प्रकार का निर्णय होता है जैसे - 

  • सिंगल बाईपास सर्जरी (Single bypass): एक नस का ब्लॉक होना।
  • डबल बाईपास सर्जरी (Double bypass): जब दो नसें ब्लॉक हों।
  • ट्रिपल बाईपास सर्जरी (Triple bypass): जब तीन नसें ब्लॉक हों।
  • क्वाड्रपल बाईपास सर्जरी (Quadruple bypass): जब चार नसें ब्लॉक हो।
  • क्विंटुपल बाईपास सर्जरी (Quintuple bypass): जब पांच नसें ब्लॉक हो।

कई लोगों को ओपन हार्ट सर्जरी और बाईपास सर्जरी के बीच के अंतर को समझने में समस्या होती है। ओपन हार्ट सर्जरी में हृदय से जुड़े सभी समस्याओं का इलाज होता है। वहीं बाईपास सर्जरी में ब्लॉक नसों को बाईपास किया जाता है, जिससे शरीर में रक्त का बहाव फिर से बहाल हो जाए। आसान भाषा में कहा जाए तो हृदय बाईपास सर्जरी भी ओपन हार्ट सर्जरी का एक प्रकार है।

हृदय बाईपास सर्जरी की आवश्यकता कब होती है? -

इस सर्जरी की आवश्यकता आमतौर पर सबसे अधिक तब होती है जब - 

  • हार्ट अटैक के दौरान अन्य उपचार काम न करें।
  • हृदय की मुख्य नसों में रुकावट हो।
  • सीने में तेज दर्द हो और एंजियोप्लास्टी से कोई मदद न मिले।

कई मामलों में हृदय बाईपास सर्जरी को एक मुख्य सर्जरी के रूप में किया जाता है। 

बाईपास सर्जरी के नुकसान -

हृदय बाईपास सर्जरी एक ओपन-हार्ट सर्जरी है, और हर सर्जरी की तरह इसके भी कुछ संभावित जोखिम होते हैं। नीचे बाईपास सर्जरी के जोखिम को समझाया गया है - 

  • रक्त हानि (Bleeding): सर्जरी के दौरान या बाद में रक्त हानि की संभावना बनी रहती है। 
  • संक्रमण (Infection): सीने के जख्म में संक्रमण का खतरा रहता है।
  • दिल की धड़कन में उतार चढ़ाव होना (Irregular Heartbeat): सर्जरी के बाद दिल की धड़कन में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है। 
  • गुर्दे की समस्याएं (Kidney Problems): कुछ मामलों में इस सर्जरी का असर किडनी पर भी पड़ा है।
  • मेमोरी लॉस: बहुत कुछ मामलों में अस्थायी रूप से याददाश्त कमजोर हो सकती है।
  • स्ट्रोक (Stroke): सर्जरी के बाद स्ट्रोक के मामले आते हैं, लेकिन इसकी संख्या भी काफी कम है। 

इसके अतिरिक्त कुछ अन्य जोखिम भी होते हैं, जिनकी संभावना लगातार बनी रहती है जैसे - 

  • पैरों की नसों में रुकावट। 
  • क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) - Chronic Obstructive Pulmonary Disease
  • डायबिटीज

हालांकि सर्जरी से पहले कुछ जोखिमों से बचने के लिए दवाएं दी जाती हैं। इन दवाओं से रक्त हानि, हाई ब्लड प्रेशर और संक्रमण से बचाव संभव है।

हृदय बाईपास सर्जरी से पहले तैयारी -

बाईपास सर्जरी से पहले, पूरी सेहत की जांच की जाती है। इससे ब्लॉक नसों का पता चल पाता है। इलाज से पहले निम्नलिखित टेस्टों का सुझाव दिया जा सकता है - 

  • छाती का एक्स-रे (Chest X-ray)
  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी - ECG)
  • इकोकार्डियोग्राम (ECO)
  • एक्सरसाइज स्ट्रेस टेस्ट
  • न्यूक्लियर कार्डियक स्ट्रेस टेस्ट
  • कार्डियक कैथीटेराइजेशन
  • सीटी स्कैन (CT scan)
  • कोरोनरी कैल्शियम स्कैन - Coronary Calcium Scan
  • रक्त परीक्षण (Blood tests)
  • मूत्र परीक्षण (Urine test)

सर्जरी से पहले खान-पान, जीवनशैली या दवाओं में कुछ बदलाव आवश्यक होते हैं। साथ ही पेशेंट को उन सभी विटामिन और सप्लीमेंट्स के बारे में सारी जानकारी देनी होगी जिनका वह सेवन करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कुछ सप्लीमेंट के कारण सर्जरी के दौरान ज्यादा खून बह सकता है। 

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न- 

 

क्या बाईपास सर्जरी के बाद शराब पी सकते हैं?

नहीं, बाईपास सर्जरी के बाद कम से कम 6 महीने तक शराब नहीं पीना चाहिए। शराब पीने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जिससे रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है। 

क्या आप बाईपास सर्जरी के बाद सामान्य जीवन जी सकते हैं?

जी हां, ज्यादातर लोग बाईपास सर्जरी के बाद स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। हालांकि, जीवनशैली में बदलाव जैसे स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम, धूम्रपान छोड़ना और तनाव कम करना बहुत ज्यादा जरूरी है।

बाईपास के बाद क्या नहीं खाना चाहिए?

बाईपास सर्जरी के बाद निम्नलिखित खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं - 

  • वसायुक्त भोजन: रेड मीट, तले हुए भोजन, उच्च वसा वाले डेयरी प्रोडक्ट, और पैकेज्ड स्नैक्स।
  • प्रोसेस्ड फूड: वाइट ब्रेड, वाइट चावल, और पास्ता।
  • मीठा भोजन: केक, कुकीज, और कैंडी
  • नमक: नमक का सेवन कम करें। इसके बदले रॉक साल्ट का सेवन कर सकते हैं।

हार्ट सर्जरी के बाद क्या-क्या खाना चाहिए?

हार्ट सर्जरी के बाद निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का सेवन लाभकारी साबित होगा - 

  • फल और सब्जियां: ताजे फल और सब्जियां विटामिन, खनिज और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो आपके हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं।
  • होल ग्रेन्स: ओट्स, ब्राउन राइस, और क्विनोआ जैसे होल ग्रेन्स फाइबर और पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं।
  • लीन प्रोटीन: चिकन, मछली, बीन्स, और टोफू जैसे लीन प्रोटीन हृदय के लिए लाभकारी होते हैं।
  • स्वस्थ वसा: एवोकैडो, नट्स, और जैतून का तेल जैसे स्वस्थ वसा हृदय के लिए अच्छे होते हैं।

दिल की बाईपास सर्जरी के बाद कौन से व्यायाम करें?

धीरे-धीरे अपनी सामान्य गतिविधि को बढ़ाएं। अपने कार्डियोलॉजिस्ट से बात करें। वह डाइट और आवश्यक व्यायाम के बारे में आपको सारी जानकारी दे देंगे।