
हर साल भारत में हृदय रोग लाखों लोगों की जान ले रहा है, और सबसे चिंता की बात यह है कि अब यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि 30-40 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि हार्ट ब्लॉकेज का पता कैसे चलता है और किन परिस्थितियों में CABG यानी बायपास सर्जरी ही एकमात्र सुरक्षित रास्ता बचता है।
अगर आप या आपके परिवार में किसी को सीने में दर्द, सांस फूलना या बार-बार थकान जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। समय पर सही जांच और सही डॉक्टर की सलाह जिंदगी बचा सकती है। हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञों से सीके बिरला अस्पताल (BM Birla Hospital) के ओपीडी में अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने दिल की सेहत को नजरअंदाज करना आज ही बंद करें।
दिल की मांसपेशियों तक खून पहुंचाने का काम कोरोनरी धमनियां करती हैं। जब इन धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर धीरे-धीरे कोलेस्ट्रॉल, चर्बी और कैल्शियम जमा होने लगता है, तो इसे "प्लाक" कहा जाता है। समय के साथ यह प्लाक मोटा होता जाता है और धमनी का रास्ता संकरा कर देता है, जिससे दिल तक खून और ऑक्सीजन कम पहुंचने लगती है। इसी स्थिति को हार्ट ब्लॉकेज या कोरोनरी आर्टरी डिजीज कहा जाता है।
यह समझने के लिए इसके पीछे के मुख्य कारणों को जानना जरूरी है -
भारत में शहरी आबादी में मोटापा और पेट की चर्बी की समस्या तेजी से बढ़ी है, और यह हृदय रोग के बढ़ते मामलों की एक बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर भी कोरोनरी आर्टरी डिजीज के एक बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार पाया गया है। कोलकाता जैसे बड़े शहरों में बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ता तनाव इस जोखिम को और बढ़ा रहे हैं।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती दौर में हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण बेहद हल्के होते हैं या दिखते ही नहीं हैं। यही कारण है कि इसे "साइलेंट किलर" कहा जाता है। फिर भी कुछ संकेत हैं जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जैसे कि -
अगर आप सोच रहे हैं कि हार्ट ब्लॉकेज के शुरुआती लक्षण क्या हैं, तो याद रखें कि यह अक्सर हल्की बेचैनी या थकान के रूप में शुरू होता है, जिसे लोग आमतौर पर उम्र या काम के दबाव से जोड़कर टाल देते हैं। यही टालमटोल कई बार भारी पड़ जाती है। खासकर अगर परिवार में पहले से हृदय रोग रहा हो, डायबिटीज हो या उम्र 40 पार कर चुकी हो, तो साल में एक बार दिल की जांच जरूर करानी चाहिए।
लक्षणों के आधार पर शक होने पर डॉक्टर कुछ खास जांचों की सलाह देते हैं, ताकि ब्लॉकेज की सही स्थिति और गंभीरता का पता चल सके जैसे कि -

इन जांचों के जरिए यह भी पता चलता है कि हार्ट ब्लॉकेज खोलने के तरीके क्या हो सकते हैं, यानी क्या दवाइयों से काम चल जाएगा, एंजियोप्लास्टी की जरूरत होगी या फिर बायपास सर्जरी ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प है।
CABG यानी कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग एक ऐसी सर्जरी है, जिसमें शरीर के किसी दूसरे हिस्से, आमतौर पर पैर, बांह या सीने की धमनी से एक ग्राफ्ट लेकर ब्लॉक हुई धमनी के आसपास एक नया रास्ता बनाया जाता है, ताकि खून का बहाव फिर से सामान्य हो सके। यह सर्जरी खासतौर पर उन मरीजों के लिए सुझाई जाती है जिनमें -
इसके अतिरिक्त आप अपने डॉक्टर से भी परामर्श ले सकते हैं कि आप इस सर्जरी को करा सकते हैं या नहीं।
बायपास सर्जरी के बाद पहले कुछ हफ्ते आराम और सावधानी के होते हैं, लेकिन ज्यादातर मरीज 6 से 8 हफ्तों में सामान्य दिनचर्या में लौट आते हैं। रिकवरी को बेहतर बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है -
सही देखभाल के साथ बायपास सर्जरी करा चुके ज्यादातर मरीज एक सक्रिय और सामान्य जीवन जी पाते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि सर्जरी के बाद भी अगर जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो नई धमनियों में भी समय के साथ रुकावट बनने का खतरा बना रहता है।
हार्ट ब्लॉकेज धीरे-धीरे बढ़ने वाली एक ऐसी समस्या है, जो अक्सर बिना चेतावनी के गंभीर रूप ले लेती है। लेकिन सही जानकारी, समय पर जांच और सही विशेषज्ञ की सलाह से इसे न सिर्फ पहचाना जा सकता है, बल्कि प्रभावी ढंग से नियंत्रित भी किया जा सकता है। चाहे इलाज दवाइयों से हो, एंजियोप्लास्टी से हो या CABG जैसी सर्जरी से, हर मरीज की स्थिति अलग होती है और इसलिए विशेषज्ञ की सलाह के बिना कोई भी फैसला नहीं लेना चाहिए।
अगर आपको या आपके किसी अपने को सीने में दर्द, सांस फूलना या असामान्य थकान जैसी शिकायत है, तो इंतजार न करें। हमारे अनुभवी कार्डियक सर्जन और हृदय रोग विशेषज्ञों की टीम से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने दिल की पूरी जांच कराएं। समय पर लिया गया एक छोटा कदम, आगे चलकर एक बड़ी जिंदगी बचा सकता है।
जी हां, शुरुआती दौर में हार्ट ब्लॉकेज अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ता रहता है। इसलिए 40 की उम्र के बाद और जोखिम वाले लोगों को नियमित हृदय जांच करानी चाहिए, भले ही कोई तकलीफ महसूस न हो।
आमतौर पर जब किसी धमनी में 70% या उससे अधिक ब्लॉकेज हो, खासकर कई धमनियां या मुख्य धमनी प्रभावित हो, तो डॉक्टर पूरी जांच के बाद CABG की सलाह देते हैं।
नहीं, हर मामले में स्टेंट कारगर नहीं होता। जब कई धमनियां गंभीर रूप से प्रभावित हों या दिल की पंपिंग क्षमता कमजोर हो, तो CABG ही बेहतर और टिकाऊ विकल्प माना जाता है।
हां, अगर जीवनशैली में सुधार न किया जाए, कोलेस्ट्रॉल और शुगर नियंत्रित न रखा जाए, तो नई या पुरानी धमनियों में दोबारा रुकावट बनने का खतरा रहता है। नियमित फॉलो-अप जरूरी है।
तला-भुना खाना, ज्यादा नमक-चीनी, रेड मीट, धूम्रपान और शराब से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके साथ ही तनाव और शारीरिक निष्क्रियता को भी नियंत्रित करना जरूरी है।
हल्के ब्लॉकेज को दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि गंभीर ब्लॉकेज में एंजियोप्लास्टी या CABG की जरूरत पड़ती है। सही इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
हार्ट ब्लॉकेज से जुड़े किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और किसी अनुभवी कार्डियोलॉजी सेंटर में जाकर पूरी जांच कराएं, जहां आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उपलब्ध हो।
Written and Verified by:

Dr. Dhiman Kahali is the Director of Interventional Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 37 years of experience. He specializes in angioplasty, mitral balloon dilation, and peripheral vascular interventions, and has been honored with the Gandhi Centenary and Mother Teresa International Awards.
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