बाईपास सर्जरी की जरूरत कब पड़ती है? जानें 7 जरूरी संकेत
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बाईपास सर्जरी की जरूरत कब पड़ती है? जानें 7 जरूरी संकेत

Summary

  • जब हृदय की एक से ज्यादा धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज हो और दवाओं या एंजियोप्लास्टी से राहत न मिले, तब बाईपास सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
  • आराम करते समय भी सीने में दर्द, थोड़ा चलने पर सांस फूलना, बार-बार थकान और चक्कर आना प्रमुख चेतावनी संकेत हैं।
  • तीन धमनियों में ब्लॉकेज, लेफ्ट मेन आर्टरी में रुकावट या डायबिटीज के साथ कई धमनियों की बीमारी में बाईपास अक्सर बेहतर विकल्प माना जाता है।
  • एंजियोग्राफी, ईसीजी, इको और स्ट्रेस टेस्ट की रिपोर्ट देखकर हृदय रोग विशेषज्ञ निर्णय करते हैं।
  • इलाज में देरी से हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर और जान का जोखिम बढ़ सकते हैं।

सोचिए, आप सीढ़ियां चढ़ रहे हैं और अचानक सीने पर भारीपन महसूस होता है। आप रुकते हैं, थोड़ी देर बाद सब ठीक लगता है और आप इसे "गैस" या "थकान" कहकर टाल देते हैं। ऐसी छोटी अनदेखी कई परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। 

WHO के अनुसार दुनिया भर में हर साल लगभग 1.79 करोड़ लोगों की मौत हृदय रोगों से होती है, और भारत में यह जोखिम युवा उम्र में भी तेजी से दिख रहा है। अगर आपको या आपके किसी अपने को ऐसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो देर न करें। आज ही हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट बुक करें। सही समय पर लिया गया एक फैसला जिंदगी बदल सकता है।

बाईपास सर्जरी क्या होती है?

हमारे हृदय को खून पहुंचाने वाली नलियों को कोरोनरी धमनियां कहते हैं। जब इनमें कोलेस्ट्रॉल और फैट जमकर रुकावट (ब्लॉकेज) बना देता है, तो हृदय की मांसपेशी को पूरा खून और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता। इसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज कहते हैं।

हार्ट बाईपास सर्जरी (CABG) में डॉक्टर शरीर की दूसरी जगह से, जैसे छाती की अंदरूनी धमनी, हाथ की धमनी या पैर की नस, एक स्वस्थ रक्तवाहिका लेते हैं। इसे ब्लॉक के हिस्से के आगे जोड़ दिया जाता है। इससे खून को रुकावट के आसपास एक नया रास्ता मिल जाता है। यानी ब्लॉकेज हटाया नहीं जाता, उसे बाईपास किया जाता है।

बाईपास सर्जरी की जरूरत कब पड़ती है?

हर ब्लॉकेज का इलाज बाईपास नहीं होता। शुरुआती स्थिति में दवाएं और जीवनशैली में बदलाव काम कर जाते हैं। कुछ मामलों में स्टेंट के साथ एंजियोप्लास्टी की जाती है। बाईपास तब सोचा जाता है, जब ब्लॉकेज गंभीर, कई जगह या जटिल जगह पर हो और अकेले स्टेंट से लंबे समय तक सुरक्षा मुश्किल लगे। अंतिम फैसला आपकी उम्र, हृदय की पंपिंग क्षमता, डायबिटीज और बाकी रिपोर्ट देखकर हार्ट टीम लेती है।

बाईपास सर्जरी के संकेत: 7 जरूरी लक्षण

Signs of Bypass Surgery: 7 Important Symptoms

  1. बार-बार होने वाला सीने का दर्द (एंजाइना): सीने के बीच में दबाव, जकड़न या जलन, जो चलने या मेहनत करने पर बढ़े। दवा लेने के बाद भी अगर दर्द बार-बार लौटे, तो यह गंभीर ब्लॉकेज का संकेत हो सकता है।
  2. आराम करते समय भी दर्द होना: पहले दर्द सिर्फ मेहनत में होता था, अब बैठे या सोते समय भी होने लगा, तो इसे अनस्टेबल एंजाइना कहते हैं। यह हार्ट अटैक की चेतावनी है और तुरंत जांच जरूरी है।
  3. थोड़ा चलने पर सांस फूलना: कमरे में चलने या कुछ सीढ़ियां चढ़ने पर हांफना हृदय के कमजोर पड़ने या खून की कमी का संकेत हो सकता है।
  4. असामान्य थकान और कमजोरी: जो काम पहले आसानी से होते थे, उन्हीं में जल्दी थक जाना। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों में यही मुख्य लक्षण हो सकता है।
  5. चक्कर आना या पसीना आना: बिना गर्मी या मेहनत के ठंडा पसीना, घबराहट और चक्कर आना, खासकर दर्द के साथ, हृदय पर बढ़ते दबाव का इशारा है।
  6. दर्द का बांह, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलना: हृदय का दर्द अक्सर बाईं बांह, कंधे, जबड़े या पीठ तक जाता है। लोग इसे मांसपेशियों का दर्द समझकर छोड़ देते हैं।
  7. दवाओं और स्टेंट के बाद भी लक्षण बने रहना: पूरी दवा लेने या पहले एंजियोप्लास्टी होने के बावजूद तकलीफ लौट आए, तो डॉक्टर बाईपास पर विचार कर सकते हैं।

ध्यान रखें, कई लोगों को, खासकर डायबिटीज के मरीजों को, बहुत हल्के लक्षण होते हैं। इसलिए सिर्फ लक्षणों के भरोसे न रहें, जांच जरूर कराएं।

कितनी धमनियों में ब्लॉकेज होने पर बाईपास की जरूरत पड़ सकती है?

इस प्रश्न को आप इस तरह भी समझ सकते हैं कि किन स्थितियों में या फिर कितने ब्लॉकेज के बाद बाईपास सर्जरी अनिवार्य हो जाती है। चलिए समझते हैं - 

  • तीन प्रमुख धमनियों में ब्लॉकेज (ट्रिपल वेसल डिजीज): इस स्थिति में बाईपास सबसे प्रभावी इलाज है।
  • लेफ्ट मेन आर्टरी में गंभीर रुकावट: यह हृदय के बड़े हिस्से को खून देती है, इसलिए यहां जोखिम ज्यादा है।
  • दो धमनियों में ब्लॉकेज: अगर उनमें से एक लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग (LAD) धमनी हो, तो बाईपास पर विचार होता है।
  • डायबिटीज के साथ कई धमनियां प्रभावित होना: रिसर्च में ऐसे मरीजों को लंबे समय में बाईपास से बेहतर परिणाम मिलते देखे गए हैं।
  • हृदय की पंपिंग क्षमता (EF) कम होना: कमजोर हृदय में बाईपास से राहत मिल सकती है।

आम तौर पर 70 प्रतिशत या उससे ज्यादा संकरापन गंभीर माना जाता है, लेकिन ब्लॉकेज की जगह और मरीज की स्थिति के हिसाब से निर्णय बदल सकता है।

बाईपास सर्जरी का निर्णय लेने के लिए कौन-कौन सी जांचें होती हैं?

बाईपास सर्जरी के निर्णय के लिए निम्न टेस्ट के रिपोर्ट को ध्यान में रखा जाता है - 

  • ईसीजी: हृदय की विद्युत गतिविधि की जांच।
  • इकोकार्डियोग्राफी: हृदय की बनावट और पंपिंग क्षमता की जांच।
  • ट्रेडमिल टेस्ट (TMT): मेहनत के समय हृदय की प्रतिक्रिया जांचने के लिए टीएमटी टेस्ट।
  • कोरोनरी एंजियोग्राफी: ये सबसे निर्णायक जांच है, जिसमें ब्लॉकेज की सही जगह और मात्रा का पता चलता है।
  • सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी और खून की जांचें: कोलेस्ट्रॉल, शुगर,किडनी और अन्य जोखिम कारकों के लिए ये जांचें की जाती हैं।

बाईपास सर्जरी एक बड़ा फैसला है। इसके फायदों और जोखिमों को ध्यान में रखते हुए ही डॉक्टर यह तय करते हैं कि मरीज को इसकी जरूरत है या नहीं। 

बाईपास सर्जरी कैसे होती है?

बाईपास सर्जरी (CABG) की प्रक्रिया को मुख्य रूप से इन चरणों में समझा जा सकता है - 

  1. एनेस्थीसिया (बेहोशी): मरीज को पूरी तरह से बेहोश (General Anesthesia) किया जाता है ताकि सर्जरी के दौरान कोई दर्द न हो।
  2. हृदय तक पहुंचना: सर्जन छाती के बीच की हड्डी (स्टर्नम) को बीच से काटकर छाती खोलते हैं और हृदय तक पहुंचते हैं।
  3. ग्राफ्ट (नस) की तैयारी: मरीज के शरीर के दूसरे हिस्से (जैसे पैर की नस या छाती/हाथ की धमनियां) से स्वस्थ रक्त वाहिका निकाली जाती है, जिसे 'ग्राफ्ट' कहते हैं।
  4. हार्ट-लंग मशीन का उपयोग (स्थिति अनुसार):
    • ऑन-पंप सर्जरी: हृदय को कुछ समय के लिए रोक दिया जाता है और शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए 'हार्ट-लंग मशीन' का सहारा लिया जाता है।
    • ऑफ-पंप सर्जरी: कुछ मामलों में मशीन के बिना, धड़कते हुए हृदय पर ही सर्जरी की जाती है।
  5. बायपास बनाना (ग्राफ्ट जोड़ना): स्वस्थ नस के एक सिरे को महाधमनी (Aorta) से और दूसरे सिरे को ब्लॉक नस के आगे जोड़ा जाता है, जिससे रक्त का नया रास्ता (बाईपास) बन जाता है।
  6. हृदय को पुन: चालू करना और छाती बंद करना: ग्राफ्ट जोड़ने के बाद यदि हृदय रोका गया था, तो उसे दोबारा चालू किया जाता है। इसके बाद छाती की हड्डी को तारों (Wires) से बांधकर त्वचा पर टांके लगा दिए जाते हैं।

निष्कर्ष

बाईपास सर्जरी का मकसद जिंदगी को दोबारा सुरक्षित रास्ते पर लाना है। सीने में दर्द, सांस फूलना और असामान्य थकान जैसे संकेतों को हल्के में न लें। सही जांच, समय पर निर्णय और सर्जरी के बाद स्वस्थ जीवनशैली, यही लंबे और स्वस्थ जीवन की कुंजी है। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो आज ही हमारे विशेषज्ञ से परामर्श बुक करें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

एंजियोप्लास्टी में गुब्बारे और स्टेंट से संकरी धमनी को खोला जाता है, वह भी बिना छाती खोले। बाईपास में ब्लॉकेज के आगे नई रक्तवाहिका जोड़कर खून का नया रास्ता बनाया जाता है।

Written and Verified by:

Dr. Ratan Kumar Das is the Director of Cardiothoracic & Vascular Surgery Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 30 years of experience. He specializes in off-pump CABG with LIMA-RIMA Y, minimally invasive valve surgery, mitral valve repair, and pediatric cardiac surgery.

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