हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर में क्या अंतर है?
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हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर में क्या अंतर है?

Summary

  • हार्ट अटैक ब्लड फ्लो की रुकावट की समस्या है, कार्डियक अरेस्ट दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गड़बड़ी है, और हार्ट फेलियर दिल की धीरे-धीरे कमजोर होती पंपिंग क्षमता है।
  • तीनों अलग-अलग स्थितियां हैं, लेकिन एक-दूसरे से जुड़ी भी हो सकती हैं, जैसे हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है।
  • हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट अचानक होने वाली इमरजेंसी हैं, जबकि हार्ट फेलियर एक लंबे समय में विकसित होने वाली स्थिति है।
  • हाई बीपी, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान तीनों स्थितियों के कॉमन जोखिम कारक हैं।
  • लक्षण दिखते ही तुरंत मेडिकल मदद लेना, खासकर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में, जान बचा सकता है।

कई बार ऐसा होता है कि फोन की घंटी रात के करीब दो बजे बजती है और दूसरी तरफ से घबराई हुई आवाज आती है कि, "डॉक्टर साहब, पापा अचानक बेहोश हो गए हैं, सांस भी नहीं चल रही, यह हार्ट अटैक है या कुछ और?" यह सवाल हर दूसरे परिवार के मन में कभी न कभी उठता है, क्योंकि हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर, ये तीनों शब्द अक्सर एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल कर लिए जाते हैं, जबकि असल में ये तीन बिल्कुल अलग स्थितियां हैं। और यही उलझन कई बार सही समय पर सही कदम उठाने से रोक देती है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

दिल से जुड़ी बीमारियां आज दुनियाभर में मौत की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल करीब 1.8 करोड़ लोग हृदय रोगों की वजह से अपनी जान गंवाते हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी हो जाता है कि हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर में असल फर्क क्या है, ताकि सही समय पर सही फैसला लिया जा सके। इस ब्लॉग में हम इन तीनों स्थितियों को आसान भाषा में समझेंगे, इनके लक्षण, कारण और इलाज को विस्तार से जानेंगे। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को दिल से जुड़ी कोई भी शिकायत है, तो देर न करें, हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने दिल की सही जांच करवाएं।

हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर क्या है?

तीनों को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि दिल तीन अलग-अलग तरीकों से मुसीबत में पड़ सकता है, खून की सप्लाई में रुकावट, इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी, या पंप करने की क्षमता का कमजोर पड़ना। चलिए तीनों को एक-एक करके समझते हैं - 

  • हार्ट अटैक (Myocardial Infarction): यह तब होता है जब दिल की किसी धमनी में ब्लॉकेज या थक्का जमने की वजह से खून का बहाव रुक जाता है। जितनी देर तक यह रुकावट बनी रहती है, दिल की मांसपेशी को उतना ही ज्यादा नुकसान पहुंचता है। इसे एक तरह का सर्कुलेशन प्रॉब्लम कहा जा सकता है।
  • कार्डियक अरेस्ट (Sudden Cardiac Arrest): यह दिल की इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी की वजह से होता है, जिसमें दिल की धड़कन अचानक बहुत तेज हो जाती है और दिल खून पंप करना बंद कर देता है। व्यक्ति सेकंडों में बेहोश हो जाता है और सांस भी रुक सकती है। यह गंभीर इमरजेंसी में से एक है, क्योंकि बिना इलाज के कुछ ही मिनटों में जान जा सकती है।
  • हार्ट फेलियर (Heart Failure): इसका मतलब यह नहीं कि दिल ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया है, बल्कि इसका मतलब है कि दिल शरीर की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त खून पंप नहीं कर पा रहा। यह आमतौर पर एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली, क्रोनिक स्थिति है, हालांकि कुछ मामलों में यह अचानक भी सामने आ सकती है।

हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर में क्या अंतर है?

तीनों को आसानी से समझने के लिए इसे इस तरह देखा जा सकता है:

  • हार्ट अटैक एक सर्कुलेशन प्रॉब्लम है, यानी धमनी में ब्लॉकेज की वजह से खून का बहाव रुक जाता है। इसका मुख्य लक्षण है सीने में दर्द या दबाव।
  • कार्डियक अरेस्ट एक इलेक्ट्रिकल प्रॉब्लम है, यानी दिल की लय बिगड़ने से दिल धड़कना बंद कर देता है। इसका मुख्य लक्षण है अचानक बेहोश हो जाना और नब्ज का न मिलना।
  • हार्ट फेलियर एक पंपिंग एफिशिएंसी की समस्या है, यानी दिल कमजोर होने की वजह से पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता। इसका मुख्य लक्षण है सांस फूलना और शरीर में सूजन।

विशेषता

हार्ट अटैक (Heart Attack)

कार्डियक अरेस्ट

हार्ट फेलियर (Heart Failure)

मूल समस्या

सर्कुलेशन (Plumbing): खून की सप्लाई में रुकावट।

इलेक्ट्रिकल (Electrical): दिल की धड़कन का अचानक रुकना।

पंपिंग (Pumping): दिल का कमजोर होकर कम खून पंप करना।

गति (Speed)

अचानक होता है, लेकिन लक्षण धीरे-धीरे आ सकते हैं।

पलक झपकते ही (अचानक) होता है।

धीरे-धीरे (क्रोनिक) बढ़ता है।

मुख्य लक्षण

सीने में तेज दर्द, भारीपन, बांह/जबड़े में दर्द, पसीना।

अचानक बेहोश होना, सांस और नब्ज का रुक जाना।

सांस फूलना (विशेषकर लेटने पर), पैरों में सूजन, थकान।

स्थिति

मरीज आमतौर पर होश में रहता है।

मरीज तुरंत बेहोश हो जाता है।

मरीज होश में रहता है, लेकिन कमजोर होता है।

यहां एक जरूरी बात समझनी चाहिए, ये तीनों स्थितियां आपस में जुड़ी भी हो सकती हैं। एक गंभीर हार्ट अटैक दिल की मांसपेशी को इतना नुकसान पहुंचा सकता है कि आगे चलकर हार्ट फेलियर की स्थिति बन जाए। इसी तरह, अगर हार्ट अटैक दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित कर दे, तो वह कार्डियक अरेस्ट को भी ट्रिगर कर सकता है। हालांकि यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर हार्ट अटैक सीधे कार्डियक अरेस्ट में नहीं बदलते, लेकिन जब भी कार्डियक अरेस्ट होता है, हार्ट अटैक इसका एक आम कारण जरूर होता है।

तीनों स्थितियों के लक्षण कैसे अलग होते हैं और कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?

Difference between the symptoms of Heart attack, heart failure and cardiac arrest

  • हार्ट अटैक के लक्षण: सीने में दर्द, दबाव या भारीपन जो अक्सर बांह, जबड़े या पीठ तक फैल सकता है, सांस फूलना, ठंडा पसीना आना, जी मिचलाना और बेचैनी। यह लक्षण अचानक तेज हो सकते हैं या धीरे-धीरे घंटों-दिनों में बढ़ सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि महिलाओं में अक्सर सीने के दर्द की बजाय थकान, सांस फूलना या पीठ दर्द जैसे कम आम लक्षण दिखते हैं, जिससे पहचान में देरी हो सकती है।
  • कार्डियक अरेस्ट के लक्षण: अचानक बेहोश हो जाना, सांस का रुकना या असामान्य हो जाना, नब्ज का न मिलना और कोई प्रतिक्रिया न देना। कई बार कार्डियक अरेस्ट से कुछ हफ्ते पहले चक्कर, सांस फूलना या सीने में बेचैनी जैसे चेतावनी संकेत भी मिल सकते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
  • हार्ट फेल होने के लक्षण: सांस फूलना खासकर लेटने पर, पैरों और टखनों में सूजन, लगातार थकान, तेज या अनियमित धड़कन और अचानक वजन बढ़ना। ये लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं, इसलिए शुरुआत में इन्हें अक्सर सामान्य कमजोरी समझ कर टाल दिया जाता है।

कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए: अगर सीने में दर्द, अचानक बेहोशी, सांस लेने में गंभीर तकलीफ या नब्ज न मिलने जैसे लक्षण दिखें, तो एक मिनट भी बर्बाद किए बिना इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें। कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में हर मिनट की देरी जीवित रहने की संभावना को कम करती है, इसलिए तुरंत CPR शुरू करना और नजदीकी अस्पताल पहुंचना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।

हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर के प्रमुख कारण

तीनों स्थितियों के कुछ कारण एक जैसे हैं, तो कुछ अलग भी हैं जैसे कि - 

  • हार्ट अटैक के कारण: धमनियों में प्लाक जमना (कोरोनरी आर्टरी डिजीज), खून का थक्का बनना, हाई कोलेस्ट्रॉल और धमनियों में अचानक ऐंठन की समस्या होना।
  • कार्डियक अरेस्ट के कारण: ज्यादातर मामलों में दिल की अनियमित लय (एरिथमिया), हार्ट अटैक, दिल की मांसपेशियों की बीमारी, और कभी-कभी बिना किसी पूर्व हृदय रोग के भी यह हो सकता है।
  • हार्ट फेलियर के कारण: कोरोनरी आर्टरी डिजीज, लंबे समय तक अनियंत्रित हाई बीपी, डायबिटीज, पिछला हार्ट अटैक, वाल्व की खराबी और मोटापा।

इन तीनों स्थितियों में हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, धूम्रपान और फैमिली मेडिकल हिस्ट्री कॉमन जोखिम कारकों की तरह काम करते हैं। यही वजह है कि इन जोखिम कारकों को नियंत्रित रखना तीनों स्थितियों से बचाव में मददगार साबित होता है।

इन हृदय संबंधी आपात स्थितियों का इलाज कैसे किया जाता है?

इन हृदय संबंधी आपात स्थितियों के इलाज के लिए निम्न तरीकों का उपयोग किया जा सकता है - 

  • हार्ट अटैक का इलाज: तुरंत ब्लॉक हुई धमनी को खोलना प्राथमिकता होती है, जिसके लिए एंजियोप्लास्टी, स्टेंटिंग या दवाओं जैसे एस्पिरिन और क्लॉट-बस्टर दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ गंभीर मामलों में बाईपास सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।
  • कार्डियक अरेस्ट का इलाज: इसमें हर सेकंड कीमती होता है। तुरंत CPR शुरू करना और डिफिब्रिलेटर (AED) से इलेक्ट्रिक शॉक देना दिल की सामान्य लय को वापस लाने में मदद करता है। अस्पताल में इसके बाद अंतर्निहित कारण का इलाज किया जाता है, जिसमें कुछ मरीजों को इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर (ICD) लगाने की भी सलाह दी जा सकती है।
  • हार्ट फेलियर का इलाज: यह लंबे समय तक चलने वाला प्रबंधन है, जिसमें दवाओं से दिल पर दबाव कम किया जाता है, तरल पदार्थ का जमाव नियंत्रित किया जाता है और जीवनशैली में बदलाव सुझाए जाते हैं, जैसे कम नमक वाला आहार, नियमित हल्की एक्सरसाइज और वजन पर नजर रखना। कुछ मामलों में पेसमेकर या अन्य डिवाइस भी लगाए जाते हैं।

सीके बिरला अस्पताल, (BMB) कोलकाता जैसे हमारे अस्पतालों में अत्याधुनिक कार्डियक इमरजेंसी सुविधाओं के साथ अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट की टीम मौजूद है, जो इन तीनों स्थितियों को सटीकता से पहचान कर सही समय पर सही इलाज देने में सक्षम है।

निष्कर्ष

हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर, ये तीनों नाम भले ही एक जैसे सुनाई दें, लेकिन इनके कारण, लक्षण और इलाज का तरीका पूरी तरह अलग है। हार्ट अटैक खून की सप्लाई की रुकावट है, कार्डियक अरेस्ट दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गड़बड़ी है, और हार्ट फेलियर दिल की धीरे-धीरे कमजोर होती पंपिंग क्षमता है। इन फर्कों को समझना न सिर्फ आपकी जिज्ञासा शांत करता है, बल्कि इमरजेंसी की स्थिति में सही और तुरंत फैसला लेने में भी मदद करता है। अगर आपको दिल से जुड़ा कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, या आप अपने दिल की सेहत को लेकर सतर्क रहना चाहते हैं, तो इंतजार न करें। हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञों से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने दिल की पूरी जांच करवाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

नहीं, ज्यादातर हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट में नहीं बदलते। लेकिन अगर हार्ट अटैक दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित कर दे, तो यह कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है।

Written and Verified by:

Dr. Ratan Kumar Das is the Director of Cardiothoracic & Vascular Surgery Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 20 years of experience. He specializes in off-pump CABG with LIMA-RIMA Y, minimally invasive valve surgery, mitral valve repair, and pediatric cardiac surgery.

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