
कई बार ऐसा होता है कि फोन की घंटी रात के करीब दो बजे बजती है और दूसरी तरफ से घबराई हुई आवाज आती है कि, "डॉक्टर साहब, पापा अचानक बेहोश हो गए हैं, सांस भी नहीं चल रही, यह हार्ट अटैक है या कुछ और?" यह सवाल हर दूसरे परिवार के मन में कभी न कभी उठता है, क्योंकि हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर, ये तीनों शब्द अक्सर एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल कर लिए जाते हैं, जबकि असल में ये तीन बिल्कुल अलग स्थितियां हैं। और यही उलझन कई बार सही समय पर सही कदम उठाने से रोक देती है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
दिल से जुड़ी बीमारियां आज दुनियाभर में मौत की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल करीब 1.8 करोड़ लोग हृदय रोगों की वजह से अपनी जान गंवाते हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी हो जाता है कि हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर में असल फर्क क्या है, ताकि सही समय पर सही फैसला लिया जा सके। इस ब्लॉग में हम इन तीनों स्थितियों को आसान भाषा में समझेंगे, इनके लक्षण, कारण और इलाज को विस्तार से जानेंगे। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को दिल से जुड़ी कोई भी शिकायत है, तो देर न करें, हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने दिल की सही जांच करवाएं।
तीनों को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि दिल तीन अलग-अलग तरीकों से मुसीबत में पड़ सकता है, खून की सप्लाई में रुकावट, इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी, या पंप करने की क्षमता का कमजोर पड़ना। चलिए तीनों को एक-एक करके समझते हैं -
तीनों को आसानी से समझने के लिए इसे इस तरह देखा जा सकता है:
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विशेषता |
हार्ट अटैक (Heart Attack) |
कार्डियक अरेस्ट |
हार्ट फेलियर (Heart Failure) |
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मूल समस्या |
सर्कुलेशन (Plumbing): खून की सप्लाई में रुकावट। |
इलेक्ट्रिकल (Electrical): दिल की धड़कन का अचानक रुकना। |
पंपिंग (Pumping): दिल का कमजोर होकर कम खून पंप करना। |
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गति (Speed) |
अचानक होता है, लेकिन लक्षण धीरे-धीरे आ सकते हैं। |
पलक झपकते ही (अचानक) होता है। |
धीरे-धीरे (क्रोनिक) बढ़ता है। |
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मुख्य लक्षण |
सीने में तेज दर्द, भारीपन, बांह/जबड़े में दर्द, पसीना। |
अचानक बेहोश होना, सांस और नब्ज का रुक जाना। |
सांस फूलना (विशेषकर लेटने पर), पैरों में सूजन, थकान। |
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स्थिति |
मरीज आमतौर पर होश में रहता है। |
मरीज तुरंत बेहोश हो जाता है। |
मरीज होश में रहता है, लेकिन कमजोर होता है। |
यहां एक जरूरी बात समझनी चाहिए, ये तीनों स्थितियां आपस में जुड़ी भी हो सकती हैं। एक गंभीर हार्ट अटैक दिल की मांसपेशी को इतना नुकसान पहुंचा सकता है कि आगे चलकर हार्ट फेलियर की स्थिति बन जाए। इसी तरह, अगर हार्ट अटैक दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित कर दे, तो वह कार्डियक अरेस्ट को भी ट्रिगर कर सकता है। हालांकि यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर हार्ट अटैक सीधे कार्डियक अरेस्ट में नहीं बदलते, लेकिन जब भी कार्डियक अरेस्ट होता है, हार्ट अटैक इसका एक आम कारण जरूर होता है।

कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए: अगर सीने में दर्द, अचानक बेहोशी, सांस लेने में गंभीर तकलीफ या नब्ज न मिलने जैसे लक्षण दिखें, तो एक मिनट भी बर्बाद किए बिना इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें। कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में हर मिनट की देरी जीवित रहने की संभावना को कम करती है, इसलिए तुरंत CPR शुरू करना और नजदीकी अस्पताल पहुंचना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
तीनों स्थितियों के कुछ कारण एक जैसे हैं, तो कुछ अलग भी हैं जैसे कि -
इन तीनों स्थितियों में हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, धूम्रपान और फैमिली मेडिकल हिस्ट्री कॉमन जोखिम कारकों की तरह काम करते हैं। यही वजह है कि इन जोखिम कारकों को नियंत्रित रखना तीनों स्थितियों से बचाव में मददगार साबित होता है।
इन हृदय संबंधी आपात स्थितियों के इलाज के लिए निम्न तरीकों का उपयोग किया जा सकता है -
सीके बिरला अस्पताल, (BMB) कोलकाता जैसे हमारे अस्पतालों में अत्याधुनिक कार्डियक इमरजेंसी सुविधाओं के साथ अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट की टीम मौजूद है, जो इन तीनों स्थितियों को सटीकता से पहचान कर सही समय पर सही इलाज देने में सक्षम है।
हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर, ये तीनों नाम भले ही एक जैसे सुनाई दें, लेकिन इनके कारण, लक्षण और इलाज का तरीका पूरी तरह अलग है। हार्ट अटैक खून की सप्लाई की रुकावट है, कार्डियक अरेस्ट दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गड़बड़ी है, और हार्ट फेलियर दिल की धीरे-धीरे कमजोर होती पंपिंग क्षमता है। इन फर्कों को समझना न सिर्फ आपकी जिज्ञासा शांत करता है, बल्कि इमरजेंसी की स्थिति में सही और तुरंत फैसला लेने में भी मदद करता है। अगर आपको दिल से जुड़ा कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, या आप अपने दिल की सेहत को लेकर सतर्क रहना चाहते हैं, तो इंतजार न करें। हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञों से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने दिल की पूरी जांच करवाएं।
नहीं, ज्यादातर हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट में नहीं बदलते। लेकिन अगर हार्ट अटैक दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित कर दे, तो यह कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है।
नहीं, हार्ट फेलियर का मतलब है कि दिल पर्याप्त कुशलता से खून पंप नहीं कर पा रहा, यह पूरी तरह बंद होने से अलग है। सही इलाज से इसे प्रबंधित किया जा सकता है।
जितनी जल्दी हो सके, आदर्श रूप से पहले ही मिनट के भीतर। हर मिनट की देरी जीवित रहने की संभावना को काफी कम कर देती है, इसलिए तुरंत CPR शुरू करें और एम्बुलेंस बुलाएं।
हां, हालांकि यह उम्रदराज लोगों में ज्यादा आम है, लेकिन खराब जीवनशैली, धूम्रपान, तनाव और फैमिली मेडिकल हिस्ट्री की वजह से युवाओं में भी यह मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
हार्ट अटैक के बाद दोबारा हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है, खासकर अगर जोखिम कारक जैसे हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल या धूम्रपान नियंत्रित न किए जाएं। नियमित फॉलो-अप और दवाएं इस खतरे को काफी कम करती हैं।
गैस का दर्द आमतौर पर डकार या पोजीशन बदलने से कम हो जाता है, जबकि हार्ट अटैक का दर्द सांस फूलने, पसीना आने और बांह-जबड़े तक फैलने के साथ आता है। शक होने पर तुरंत जांच करवाएं।
ज्यादातर मामलों में हार्ट फेलियर पूरी तरह ठीक नहीं होता, लेकिन सही दवाओं, जीवनशैली में बदलाव और नियमित निगरानी से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।
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Dr. Ratan Kumar Das is the Director of Cardiothoracic & Vascular Surgery Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 20 years of experience. He specializes in off-pump CABG with LIMA-RIMA Y, minimally invasive valve surgery, mitral valve repair, and pediatric cardiac surgery.
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