
अक्सर हम सीढ़ियां चढ़ते समय होने वाली सांस की कमी या दिन भर की थकान के बाद पैरों में आने वाली सूजन को 'बढ़ती उम्र' के लक्षण समझ कर टाल देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपका शरीर इन संकेतों के सहारे आपको कुछ समझाना चाहता है? सच कहूँ तो, यह संकेत आपके दिल की सेहत से जुड़ी एक बड़ी चेतावनी हो सकते हैं।
'हार्ट फेलियर' - यह शब्द सुनने में जितना डरावना और गंभीर लगता है, असल में वैसा है नहीं। हार्ट फेलियर मतलब यह कतई नहीं है कि आपके दिल ने काम करना छोड़ दिया है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि आपका दिल अब उतना मजबूत नहीं रहा कि वह शरीर की जरूरतों के मुताबिक खून पंप कर सके। यानी, अब उसे थोड़ी एक्स्ट्रा केयर और सही डॉक्टरी सलाह की ज़रूरत है। चलिए, आज इस विषय को थोड़ी गहराई और आसान भाषा में समझते हैं, लेकिन यदि कोई इमरजेंसी है, तो बिना देर किए अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
अक्सर क्लिनिक में लोग हमसे पूछते हैं कि क्या हार्ट फेलियर और हार्ट अटैक एक ही चीज हैं? इसका जवाब है - नहीं। सरल शब्दों में कहें तो, हार्ट फेलियर एक लंबी चलने वाली या क्रोनिक स्थिति है। इसमें दिल की मांसपेशियां या तो इतनी कमजोर हो जाती हैं या इतनी सख्त हो जाती हैं कि वह शरीर को ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने के लिए पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाती।
जब हमारा दिल शरीर के बाकी हिस्सों (जैसे कि आपकी किडनी या फेफड़ों) को सही मात्रा में खून नहीं भेज पाता, तो शरीर में तरल पदार्थ (Fluid) जमा होने लगता है। इसे ही मेडिकल भाषा में 'कंजेस्टिव हार्ट फेलियर' (CHF) कहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई रातों-रात होने वाली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जो धीरे-धीरे हमारे शरीर में अपनी जगह बनाती है। या हम यूं कह सकते हैं कि यह धीरे-धीरे हमारी खराब जीवनशैली और आदतों से बनती है।
हमारा दिल एक पंप की तरह काम करता है, जिसके चार चैंबर शरीर के हर कोने तक जीवन पहुंचाने का काम करते हैं। हार्ट फेलियर मुख्य रूप से दो तरह से हमारे सिस्टम को प्रभावित करता है:
नतीजा दोनों में एक ही होता है, शरीर को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता और दिल को ज़रूरत से ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां के पेशेंट पश्चिमी देशों के मुकाबले लगभग 10 साल पहले ही इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं, जिसका एक बड़ा कारण हमारी भागदौड़ भरी जीवनशैली और जेनेटिक्स हैं।
हार्ट फेलियर के लक्षण इतने मामूली हो सकते हैं कि कोई भी धोखा खा जाए। लेकिन अगर ऐसा हो कि आपके पुराने जूते अब टखनों के पास से थोड़े टाइट महसूस होने लगे, तो आपको थोड़ा संभल जाना चाहिए। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि यह सिर्फ वजन बढ़ना नहीं है, बल्कि शरीर में पानी जमा होने (Edema) की वजह से आई सूजन हो सकती है।
कुछ और बारीक संकेत जिन्हें आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए -
हार्ट फेलियर के पीछे अक्सर कुछ पुरानी बीमारियां छिपी होती हैं -
डॉक्टर सबसे पहले आपकी शारीरिक जांच करेंगे और आपकी लाइफस्टाइल के बारे में पूछेंगे। इसके बाद कुछ बुनियादी टेस्ट किए जाते हैं जैसे कि -
आजकल मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि सही दवाओं (जैसे बीटा-ब्लॉकर्स या ड्यूरेटिक्स) से इस स्थिति को बेहतरीन तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है। कुछ गंभीर मामलों में पेसमेकर या सर्जरी की मदद ली जाती है, जो दिल की धड़कन की रफ्तार को फिर से दुरुस्त किया जाए।
दवाओं के साथ-साथ आपकी रोजाना की आदतें ही असली बदलाव लाती हैं। निम्न बदलाव को अपनाएं और अपने दिल को मुस्कुराने का एक मौका दें -
अगर अचानक सीने में तेज दर्द हो, होंठ या नाखून नीले पड़ने लगे, या सांस की कमी इतनी बढ़ जाए कि चैन से बैठना भी मुश्किल हो जाए, तो बिना एक पल गंवाए हार्ट स्पेशलिस्ट अस्पताल पहुंचे और इलाज लें।
हार्ट फेलियर ज़िंदगी का अंत नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर की तरफ से एक 'वेक-अप कॉल' है कि अब अपनी सेहत को प्राथमिकता देने का समय आ गया है। सही खान-पान, नियमित जांच और एक अच्छे कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह से आप एक सामान्य जीवन जी सकते हैं। याद रखें, आपका दिल आपकी पूरी दुनिया को चलाता है, इसकी आवाज़ सुनना और उसका ख्याल रखना आपकी पहली जिम्मेदारी है। इसके अतिरिक्त कभी भी आपको दिल की समस्या हो, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें और इलाज लें।
बिल्कुल, हार्ट अटैक एक अचानक होने वाली घटना है, जहां दिल की नस ब्लॉक हो जाती है। जबकि हार्ट फेलियर एक क्रोनिक समस्या है जहाँ दिल धीरे-धीरे कमजोर होता जाता है।
इसे पूरी तरह 'रिवर्स' करना मुश्किल है, लेकिन इसे दवाओं और लाइफस्टाइल से इतनी अच्छी तरह कंट्रोल किया जा सकता है कि आप भूल जाएंगे कि आपको कोई बीमारी भी है।
नहीं, आजकल के तनाव और गलत खानपान की वजह से 30-40 साल के युवाओं में भी यह समस्या तेज़ी से देखी जा रही है।
सबसे ज़रूरी है कि नमक कम करें और ताज़े फल-सब्जियों को डाइट में शामिल करें ताकि मेटाबॉलिज्म सही रहे और दिल को अधिक मेहनत न करनी पड़े।
Written and Verified by:

Dr. Ashok B. Malpani is a Senior Consultant in Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 34 years of experience. He specializes in complex angioplasty, primary angioplasty, and pacemaker implantation.
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