फिट और हेल्दी हैं, तब भी रेगुलर बीपी चेक कराना क्यों जरूरी है? बता रहे हैं डॉक्टर
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फिट और हेल्दी हैं, तब भी रेगुलर बीपी चेक कराना क्यों जरूरी है? बता रहे हैं डॉक्टर

Table of Contents

Summary

  • हाई BP को "साइलेंट किलर" कहा जाता है, क्योंकि यह अक्सर बिना किसी लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
  • भारत में करीब 20 करोड़ वयस्क हाई BP से पीड़ित हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 2 करोड़ का BP नियंत्रण में है।
  • 20 से 40 साल के हर 8 में से 1 युवा को हाई BP है और उन्हें पता भी नहीं।
  • बिना लक्षण के हाई BP दिल, दिमाग, किडनी और आंखों को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाता है।

हम आमतौर पर सोचते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर होने पर सिरदर्द, चक्कर आना या धुंधला दिखने जैसे लक्षण सामने आएंगे, लेकिन सच यह है कि ज़्यादातर मामलों में हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण बिल्कुल नहीं होते। और यही इसे इतना खतरनाक बनाता है।

WHO की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में 1.4 अरब लोग हाई BP से पीड़ित हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 32 करोड़ लोगों का BP नियंत्रण में है। भारत में खुद करीब 20 करोड़ वयस्क हाई BP से प्रभावित हैं - और इनमें से अधिकांश को पता ही नहीं है।

इस ब्लॉग में सीके बिरला अस्पताल, BMB के हृदय रोग विशेषज्ञ बता रहे हैं कि फिट और हेल्दी दिखने वाले लोगों को भी रेगुलर ब्लड प्रेशर चेक अप क्यों करवाना चाहिए - और इसे नज़रअंदाज़ करने का अंजाम क्या हो सकता है।

फिट और हेल्दी दिखने के बावजूद हाई BP क्यों हो सकता है?

यह सबसे आम गलतफहमी है - "मैं जिम जाता हूँ, BP कैसे होगा?" हाई ब्लड प्रेशर क्यों होता है, इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण होते हैं और इनमें से कुछ ऐसे हैं जो आपकी फिटनेस से बिल्कुल अलग है। फिट होने के बावजूद भी निम्न कारणों से आपको बीपी हो सकता है - 

  • आनुवंशिकता (Genetics): अगर माता-पिता या दादा-नाना को हाई BP था, तो आपको भी हो सकता है - चाहे आप कितने भी फिट हों। 
  • लंबे समय का तनाव (Chronic Stress): कॉर्पोरेट जॉब, टार्गेट, EMI का बोझ, रिश्तों की उलझनें - यह सब लंबे समय तक BP को बढ़ाए रखते हैं। 
  • नींद की कमी: रात को 5 से 6 घंटे से कम सोना BP बढ़ाता है। स्लीप एपनिया (sleep apnea) - जिसमें सोते वक्त साँस रुकती है - हाई BP का एक अहम लेकिन अनजान कारण है।
  • खाने में नमक की मात्रा: प्रोसेस्ड फूड, पैकेटबंद खाना, रेस्तरां का खाना - इनमें सोडियम की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है। जो लोग "हेल्दी सलाद" खाते हैं, लेकिन दोपहर में दफ्तर का कैंटीन खाना लेते हैं, उनके लिए भी यह खतरा ज्यादा है।
  • उम्र के साथ बदलाव: 35 के बाद धमनियाँ (arteries) थोड़ी कड़ी होने लगती हैं। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जो फिटनेस से पूरी तरह नहीं रुकती।

NFHS-5 (नैश्नल फैमिली हेल्थ सर्वे) के आँकड़े बताते हैं कि भारत में हाइपरटेंशन की दर 22.6% है - यानी हर 5 में से 1 भारतीय को हाई BP है।

हाई ब्लड प्रेशर को "साइलेंट किलर" क्यों कहा जाता है?

हाई BP में अक्सर कोई दर्द नहीं होता। कोई बुखार नहीं। कोई थकान नहीं जो बताए कि "कुछ गड़बड़ है।" व्यक्ति बिल्कुल ठीक महसूस करता रहता है, और इस बीच उसकी धमनियों पर, दिल पर, किडनी पर और दिमाग की नसों पर लगातार दबाव बढ़ता जाता है।

एक रिसर्च में पाया गया कि 15 से 39 साल के भारतीय युवाओं में से 10 में से 1 को हाइपरटेंशन है, लेकिन इनमें से आधों को अपनी स्थिति का पता ही नहीं था। हाई BP बिना किसी लक्षण के सालों तक शरीर को नुकसान पहुँचाता रहता है, और जब आपको लक्षण समझ आने लगते हैं, तब तक बहुत देर हो जाती है।

यही वजह है कि हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण का इंतज़ार करना गलत है। जब तक आपको चक्कर, धुंधला दिखना या सिरदर्द होगा, BP पहले से बहुत high हो चुका होगा।

बिना लक्षण के हाई BP शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

यह हिस्सा शायद सबसे ज़रूरी है। इसे ध्यान से पढ़ें।

  • दिल पर असर: हाई BP लगातार हृदय पर ज़्यादा काम का बोझ डालता है। दिल को हर पल ज़्यादा ज़ोर लगाकर खून पंप करना पड़ता है। धीरे-धीरे हृदय की मांसपेशियाँ मोटी और कमज़ोर हो जाती हैं। इससे हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर (heart failure) का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि BM Birla जैसे हार्ट केयर अस्पतालों में आने वाले हार्ट के मरीज़ों में हाई BP एक बहुत बड़ा कॉमन फैक्टर होता है।
  • दिमाग पर असर: हाई BP से दिमाग की नसें कमज़ोर पड़ सकती हैं। एक छोटी सी नस के फटने या ब्लॉक होने से स्ट्रोक या पैरालिसिस हो सकता है। 
  • किडनी पर असर: किडनी छोटी-छोटी रक्तवाहिकाओं का जाल है। हाई BP इन्हें धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। लंबे समय तक अनियंत्रित BP रहने से क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ हो सकती है। और अगर किडनी काम करना बंद कर दे, तो डायलिसिस की नौबत आ सकती है।
  • आंखें पर असर: हाई BP से आंख की रक्तवाहिकाओं में दबाव बढ़ता है, जिससे रेटिना (retina) को नुकसान पहुंच सकता है। इसे हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी (hypertensive retinopathy) कहते हैं, जो अगर समय पर न पकड़ी जाए तो नज़र भी कमज़ोर कर सकती है।

हाई BP कितना होता है? सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 से कम होना चाहिए। 130-139/80-89 को Stage 1 हाई BP और 140/90 या उससे ऊपर को Stage 2 हाई BP कहते हैं - जिसमें तुरंत इलाज ज़रूरी है।

किन लोगों को नियमित BP चेक कराना चाहिए?

सच कहें तो हर वयस्क को BP चेक कराना चाहिए। लेकिन इन लोगों को विशेष रूप से ध्यान देना ज़रूरी है - 

  • हाई BP की फैमिली मेडिकल हिस्ट्री - यदि ऐसा है तो आपको 20 साल की उम्र से ही जांच शुरू कर देनी चाहिए।
  • 35 साल से ज़्यादा उम्र - उम्र के साथ बीपी का रिस्क लगातार बढ़ता रहता है।
  • मोटापा या पेट पर चर्बी - BMI 25 से ऊपर हो तो बीपी हाई होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • बहुत ज़्यादा तनाव वाला काम - IT प्रोफेशनल, मैनेजर, और बिज़नेसमेन अक्सर तनाव में रहते हैं। ऐसे में उन्हें बीपी की जांच हर कुछ समय पर करानी चाहिए।
  • धूम्रपान या शराब का सेवन - ये दोनों BP बढ़ाते हैं, तो यदि आप इनका सेवन अधिक करते हैं, तो जांच कराएं।
  • डायबिटीज़ या थायरॉइड की बीमारी - इनके साथ हाई BP का खतरा और बढ़ जाता है, इसलिए जांच कराते रहें।
  • नमक ज़्यादा खाना - खासकर प्रोसेस्ड फूड, अचार, पापड़ का सेवन अधिक करने वाले भी खतरे के दायरे में आते हैं।
  • नींद की समस्या - स्लीप एपनिया वाले मरीज़ों में BP अक्सर बढ़ा होता है।
  • गर्भवती महिलाएं - प्रेगनेंसी में BP बढ़ना मां और शिशु दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए प्रेगनेंसी में हर विजिट पर बीपी चेक कराएं।

युवाओं को भी यह लिस्ट नज़रअंदाज़ नहीं करनी चाहिए। 20 से 40 साल के युवाओं में दुनिया भर में हर 8 में से 1 को हाई BP है।

ब्लड प्रेशर कितनी बार चेक कराना जरूरी है?

यह सवाल हर कोई पूछता है और इसका जवाब आपकी मौजूदा स्थिति पर निर्भर करता है:

  • अगर BP बिल्कुल सामान्य है (120/80 से नीचे): साल में एक बार जांच पर्याप्त है।
  • अगर BP थोड़ा बढ़ा हुआ है (120-129/80 से कम): हर 3 से 6 महीने में।
  • अगर Stage 1 हाई BP है (130-139/80-89): हर महीने, और डॉक्टर की सलाह से दवा या lifestyle changes पर काम करें।
  • अगर Stage 2 हाई BP है (140/90 या ऊपर): तुरंत डॉक्टर से मिलें और नियमित निगरानी रखें।

हाई BP से बचाव के लिए डॉक्टर की ज़रूरी सलाह

सीके बिरला अस्पताल (BM Birla Hospital) के हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार हाई BP को कंट्रोल में रखना उतना मुश्किल नहीं जितना लोग सोचते हैं। लेकिन इसके लिए जागरूकता और थोड़ी सी अनुशासन ज़रूरी है - 

डॉक्टर हाई ब्लड प्रेशर से बचाव के लिए नियमित बीपी चेक और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह देते हुए

  • नमक कम करें: रोज़ाना 5 ग्राम से कम नमक लें। खाने में ऊपर से नमक न डालें। प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खाने से दूर रहें।
  • DASH Diet अपनाएं: यानी ज़्यादा फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज और कम वसा वाले डेयरी उत्पाद। यह डाइट BP को 8 से 14 mm Hg तक कम कर सकती है।
  • नियमित व्यायाम: रोज़ 30 मिनट की मध्यम तीव्रता की एक्सरसाइज़ जैसे तेज़ चलना, साइकिल चलाना या तैरना BP को 5 से 8 mm Hg कम करती है।
  • तनाव प्रबंधन: ध्यान (meditation), प्राणायाम, और डिजिटल डिटॉक्स - ये सब तनाव कम करते हैं और BP पर सीधा असर डालते हैं।
  • वज़न नियंत्रित रखें: हर 1 किलोग्राम वज़न कम होने पर BP करीब 1 mm Hg तक कम हो सकता है।
  • धूम्रपान और शराब बंद करें: सिगरेट का हर कश BP को कुछ देर के लिए बढ़ाता है और लंबे समय में धमनियों को नुकसान पहुँचाता है।
  • दवा लें तो नियमित लें: अगर डॉक्टर ने BP की दवा दी है तो इसे खुद बंद न करें। यह दवा रोज़ लेनी है, तब तक जब तक डॉक्टर न कहें।
  • दिल की नियमित जांच: हाई BP और दिल की बीमारी का गहरा रिश्ता है। BP कंट्रोल में रखना सिर्फ BP का नहीं, बल्कि दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी फेलियर को रोकने का सबसे पहला कदम है।

निष्कर्ष

BP check करने में 2 मिनट लगते हैं। लेकिन इस 2 मिनट की जांच से आप अपने दिल, दिमाग, किडनी और आंखों को सालों की तकलीफ से बचा सकते हैं।

सीके बिरला अस्पताल (BM Birla Hospital) में हमारी हृदय रोग विशेषज्ञ टीम आपकी पूरी कार्डियोवैस्कुलर स्क्रीनिंग करती है, जिसमें बीपी मॉनिटरिंग, लिपिड प्रोफाइल और हार्ट हेल्थ मैनेजमेंट शामिल हैं। आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें। अपने परिवार को भी यह ब्लॉग शेयर करें - क्योंकि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या नियमित व्यायाम करने वालों को भी हाई BP हो सकता है?

हाँ, बिल्कुल। व्यायाम BP कम करने में मदद करता है लेकिन genetics, तनाव, नींद की कमी और नमक जैसे कारण व्यायाम के बावजूद BP बढ़ा सकते हैं। इसलिए फिट लोगों को भी नियमित ब्लड प्रेशर चेक-अप ज़रूरी है।

क्या सामान्य वजन होने पर भी हाइपरटेंशन का खतरा रहता है?

हाँ, वजन एक कारक है, लेकिन अकेला नहीं। पतले लोगों को भी आनुवंशिकता, तनाव, धूम्रपान या नमक की अधिकता की वजह से हाई BP हो सकता है।

क्या परिवार में हाई BP का इतिहास होने से जोखिम बढ़ जाता है?

हां, निश्चित रूप से। माता-पिता या भाई-बहन को हाई BP है, तो आपका जोखिम काफी बढ़ जाता है। ऐसे लोगों को 20 साल की उम्र से ही नियमित जांच शुरू कर देनी चाहिए।

क्या ज़्यादा नमक खाने से हमेशा BP बढ़ता है?

नहीं, हर किसी में नहीं। लेकिन "salt-sensitive" लोगों में - जो भारत में बड़ी संख्या में हैं - नमक की अधिकता सीधे BP बढ़ाती है। इसलिए WHO की सलाह है कि हर कोई नमक कम रखे।

कितनी बार BP चेक कराने की सलाह दी जाती है?

स्वस्थ व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार। 35 साल से ऊपर या जोखिम वाले लोगों को हर 3 से 6 महीने में। हाई BP के मरीज़ों को महीने में एक बार या डॉक्टर की सलाह अनुसार।

क्या हाई BP किडनी और आँखों को भी नुकसान पहुँचा सकता है?

हां, और यह बहुत गंभीर बात है। अनियंत्रित हाई BP से क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ और हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी (आँखों की नसों का नुकसान) दोनों हो सकते हैं - बिना किसी पूर्व चेतावनी के।

क्या घर पर BP चेक करना सही है?

घर पर सर्टिफाइड डिजिटल बीपी मॉनिटर से नियमित जांच उपयोगी है। लेकिन स्मार्टफोन ऐप से सटीक रीडिंग नहीं मिलती। डॉक्टर से सही तरीके से (या प्रमाणित तरीके से) ब्लड प्रेशर कैसे चेक किया जाता है, यह ज़रूर सीखें।

Written and Verified by:

Dr. Ashok B Malpani

Dr. Ashok B Malpani

Senior Consultant Exp: 42 Yr

Cardiology

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Dr. Ashok B. Malpani is a Senior Consultant in Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 34 years of experience. He specializes in complex angioplasty, primary angioplasty, and pacemaker implantation.

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