थायराइड रोग के लिए गाइड - कारण, लक्षण और उपचार के उपाय
Home >Blogs >थायराइड रोग के लिए गाइड - कारण, लक्षण और उपचार के उपाय

थायराइड रोग के लिए गाइड - कारण, लक्षण और उपचार के उपाय

Table of Contents

Summary

थायराइड रोग एक सामान्य हार्मोनल समस्या है, जो मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है। इसके मुख्य प्रकार हाइपोथायरायडिज्म (वजन बढ़ना) और हाइपरथायरायडिज्म (वजन घटना) हैं। सही समय पर ब्लड टेस्ट, नियमित दवा और संतुलित आहार से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

क्या आप अक्सर बिना किसी वजह के थकान महसूस करते हैं? या फिर आपकी डाइट न बदलने के बावजूद वजन लगातार बढ़ रहा है? यदि हां, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत में लगभग 4.2 करोड़ से अधिक लोग थायराइड की समस्याओं से जूझ रहे हैं, और चिंताजनक बात यह है कि इनमें से कई लोगों को यह पता भी नहीं होता कि वह इस बीमारी का शिकार है। इसे अक्सर 'साइलेंट किलर' या 'खामोश बीमारी' कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इसे तनाव या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सही समय पर पहचान और इलाज से आप न केवल इसे कंट्रोल कर सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन भी जी सकते हैं।

इस ब्लॉग में, हम थायराइड रोग की हर छोटी-बड़ी जानकारी जैसे कि इसके कारणों से लेकर, लक्षणों और आधुनिक उपचार विकल्पों तक पर चर्चा करेंगे। साथ ही, हम जानेंगे कि कैसे हमारे विशेषज्ञ आपकी मदद कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त थायराइड रोग के संबंध में आप हमारे अनुभवी विशेषज्ञों स परामर्श भी ले सकते हैं।

थायराइड क्या है?

थायराइड गर्दन के सामने वाले हिस्से में स्थित एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि या ग्लैंड (Butterfly-shaped gland) होती है। इसका मुख्य काम ऐसे हार्मोन्स का उत्पादन करना है, जो हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी ऊर्जा के उपयोग की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं।

यह ग्लैंड मुख्य रूप से दो हार्मोन का निर्माण करते हैं -

  • T3 (Triiodothyronine)
  • T4 (Thyroxine)

जब इन हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ता है, तो शरीर की पूरी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। यह असंतुलन आपके वजन, ऊर्जा स्तर, और यहां तक कि आपके मूड को भी प्रभावित कर सकता है।

थायराइड रोग के प्रकार -

थायराइड की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। इसे समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि दोनों के इलाज और लक्षण बिल्कुल अलग होते हैं।

  • हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism): जब आपकी थायराइड ग्लैंड पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती, तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं। इसमें शरीर की प्रक्रियाएं धीमी हो जाती हैं। आम भाषा में कहा जाए तो इसे अक्सर "मोटापा बढ़ाने वाला थायराइड" भी कहा जाता है। यह महिलाओं में अधिक सामान्य है, खासकर 60 वर्ष की आयु के बाद, लेकिन अब यह कम उम्र में भी देखा जा रहा है।
  • हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism): जब थायराइड ग्लैंड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तो इसे हाइपरथायरायडिज्म कहते हैं। इसमें शरीर का मेटाबॉलिज्म बहुत तेज हो जाता है। आम भाषा में कहा जाए, तो इसे "सूखाने वाला" या "वजन घटाने वाला" थायराइड कहा जा सकता है।

थायराइड रोग के कारण -

आज के दौर में थायराइड रोग तेजी से क्यों बढ़ रहा है? इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें हमारी जीवनशैली का बड़ा हाथ है -

  • अत्यधिक तनाव: आधुनिक जीवनशैली का तनाव हमारे एंडोक्राइन सिस्टम पर बुरा असर डालता है, जिससे हार्मोनल असंतुलन होता है।
  • आयोडीन की कमी या अधिकता: शरीर में आयोडीन की मात्रा का कम या ज्यादा होना थायराइड फंक्शन को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
  • आनुवंशिकता (Genetics): यदि आपके परिवार में किसी को थायराइड की समस्या रही है, तो आपको भी इसका खतरा हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी (Pregnancy): गर्भावस्था के दौरान या बाद में हार्मोनल बदलावों के कारण भी कई महिलाओं में थायराइड की समस्या विकसित हो जाती है।

इसके अतिरिक्त भी एक और मुख्य कारण है और वह है ऑटोइम्यून बीमारियां। चलिए इसे भी समझते हैं - 

ऑटोइम्यून बीमारियां

  • हाशिमोटो डिजीज (Hashimoto's Disease): यह हाइपोथायरायडिज्म का सबसे आम कारण है, जहां शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायराइड ग्लैंड पर हमला करती है।
  • ग्रेव्स डिजीज (Graves' Disease): यह हाइपरथायरायडिज्म का भी एक और मुख्य कारण है।

थायराइड रोग के लक्षण: जिन्हें नजरअंदाज करने की गलती न करें!

थायराइड रोग के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे विकसित होते हैं। यहां हाइपो और हाइपर दोनों स्थितियों के लक्षणों का विस्तृत विवरण दिया गया है, ताकि आप अपने शरीर के संकेतों को पहचान सकें। चलिए दोनों के लक्षणों को एक-एक करके समझते हैं -

हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) के लक्षण

  • लगातार थकान: पूरी रात सोने के बाद भी थका हुआ महसूस होना।
  • वजन बढ़ना: डाइट कम होने के बावजूद वजन का तेजी से बढ़ना।
  • ठंड लगना: सामान्य मौसम में भी दूसरों के मुकाबले ज्यादा ठंड लगना।
  • बालों का झड़ना: बाल रूखे और बेजान होकर टूटने लगते हैं।
  • रूखी त्वचा: त्वचा का अत्यधिक शुष्क या रूखी होना।
  • कब्ज: पाचन क्रिया का धीमा होना।
  • डिप्रेशन: मूड खराब रहना या अवसाद/डिप्रेशन महसूस होना।
  • मासिक धर्म/पीरियड्स साइकिल में बदलाव: महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित या बहुत ज्यादा होना।

हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) के लक्षण:

  • वजन घटना: अच्छा खाने के बावजूद वजन का तेजी से गिरना।
  • धड़कन तेज होना: दिल की धड़कन का अचानक बढ़ जाना या घबराहट होना।
  • हाथ कांपना: हाथों में हल्का कंपन महसूस होना।
  • गर्मी बर्दाश्त न होना: बहुत ज्यादा पसीना आना और गर्मी लगना।
  • नींद न आना: रात में बेचैनी और अनिद्रा।
  • आंखों में समस्या: कुछ मामलों में आंखें बाहर की ओर उभरी हुई दिख सकती हैं।

यदि आप इनमें से कोई भी लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो इसे सामान्य मानकर न टालें। हमारे एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लें और सही समय पर जांच कराएं।

थायराइड का निदान

थायराइड रोग की पहचान के लिए डॉक्टर आमतौर पर कुछ ब्लड टेस्ट की सलाह दी जाती है। यह प्रक्रिया बेहद सरल है। चलिए थायराइड रोग की जांच में होने वाली सभी टेस्ट को समझते हैं - 

  • TSH (Thyroid Stimulating Hormone) टेस्ट: यह सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट है। TSH का स्तर बताता है कि आपका ग्लैंड सही काम कर रही है या नहीं।
  • High TSH: हाइपोथायरायडिज्म का संकेत इस टेस्ट से मिलता है।
  • Low TSH: हाइपरथायरायडिज्म का संकेत इस टेस्ट से मिलता है।
  • T3 और T4 टेस्ट: यह टेस्ट रक्त में थायराइड हार्मोन की वास्तविक मात्रा को मापते हैं।
  • एंटीबॉडी टेस्ट (Antibody Test): यह पता लगाने के लिए कि क्या समस्या ऑटोइम्यून (जैसे हाशिमोटो) है।
  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): यदि डॉक्टर को गले में कोई गांठ महसूस होती है, तो वह थायराइड का अल्ट्रासाउंड करवा सकते हैं।

थायराइड का उपचार -

अच्छी खबर यह है कि थायराइड रोग ऐसी समस्या है, जिसको आसानी से मैनेज किया जा सकता है। सही इलाज और नियमित निगरानी से आप पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं। चलिए इलाज के सभी विकल्पों को समझते हैं - 

दवाइयां (Medication)

  • हाइपोथायरायडिज्म के लिए: सिंथेटिक थायराइड हार्मोन (जैसे कि Levothyroxine) की गोलियां दी जाती हैं, जो खाली पेट ली जाती हैं। यह शरीर में हार्मोन की कमी को पूरा करती हैं।
  • हाइपरथायरायडिज्म के लिए: एंटी-थायराइड दवाएं (Anti-thyroid drugs) दी जाती हैं, जो ग्लैंड को अतिरिक्त हार्मोन बनाने से रोकती हैं।

रेडियोधर्मी आयोडीन थेरेपी

यह हाइपरथायरायडिज्म का एक प्रभावी इलाज है। इसमें रेडियोधर्मी आयोडीन का उपयोग करके अतिसक्रिय थायराइड कोशिकाओं को सिकोड़ा जाता है।

सर्जरी - Thyroid Surgery

कुछ मामलों में, जैसे कि थायराइड का आकार बहुत बढ़ जाने पर या थायराइड कैंसर का शक होने पर, सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। हमारे पास अनुभवी सर्जन और अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है, जो सुरक्षित और सटीक सर्जरी सुनिश्चित करते हैं। इसके अतिरिक्त हमारे पास एडवांस लैब्स और आधुनिक मशीनें हैं, जिनकी मदद से निदान के साथ-साथ इलाज भी संभव है।

जीवनशैली में बदलाव -

दवाइयों के साथ-साथ आपकी लाइफस्टाइल भी इलाज का अहम हिस्सा है। यह एलोपैथ के साथ-साथ आयुर्वेद का एक अहम भाग है - 

  • नियमित व्यायाम: योग और वॉक मेटाबॉलिज्म को सुधरने में मदद करते हैं। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट का व्यायाम करें।
  • तनाव प्रबंधन: मेडिटेशन और गहरी सांस लेने के व्यायाम कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को कम करते हैं, जिससे थायराइड फंक्शन बेहतर होता है।

थायराइड रोग में क्या खाएं और क्या न खाएं? -

जितनी महत्वपूर्ण थायराइड रोग की दवाएं हैं, उतना ही डाइट है। सही खान-पान दवा के असर को बढ़ा सकता है।

थायराइड रोग में क्या खाना चाहिए

  • आयोडीन युक्त भोजन: आयोडीन नमक और वसा युक्त मछली।
  • सेलेनियम और जिंक: नट्स, कद्दू के बीज, और दालें।
  • ताजे फल और सब्जियां: एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फल शरीर की सूजन (inflammation) को कम करते हैं।
  • विटामिन D: धूप, अंडे और मशरूम।

थायराइड रोग में क्या नहीं खाना चाहिए

  • सोया उत्पाद: सोया दूध, टोफू आदि थायराइड की दवा के अवशोषण में बाधा डाल सकते हैं।
  • कच्ची क्रूसिफेरस सब्जियां: पत्तागोभी, फूलगोभी और ब्रोकली को कच्चा खाने से बचें (इन्हें पकाकर खा सकते हैं)।
  • प्रोसेस्ड फूड: पैकेटबंद खाना और ज्यादा चीनी वाला भोजन मेटाबॉलिज्म को और धीमा कर देता है।

निष्कर्ष

थायराइड की बीमारी को अपने जीवन पर हावी न होने दें। थकान, वजन बढ़ना या बालों का झड़ना सिर्फ़ कॉस्मेटिक समस्याएं नहीं हैं, यह आपके शरीर की पुकार हो सकती हैं। सही जानकारी, समय पर जांच और डॉक्टरी परामर्श आपको फिर से ऊर्जावान बना सकता है।

याद रखें, हर मरीज का शरीर अलग होता है और इलाज भी उसी के आधार पर अलग होता है। खुद से दवा लेने के बजाय, विशेषज्ञ की सलाह लें। क्या आप अपनी सेहत की कमान अपने हाथ में लेने के लिए तैयार हैं? देर न करें। आज ही हमारे विशेषज्ञ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के साथ अपनी अपॉइंटमेंट बुक करें और एक स्वस्थ कल की शुरुआत करें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या थायराइड की बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है?

अधिकांश मामलों में इसे 'कंट्रोल' किया जाता है, 'क्योर' नहीं। नियमित दवा और स्वस्थ जीवनशैली से आप पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं और लक्षण मुक्त रह सकते हैं।

मुझे थायराइड की दवा कब लेनी चाहिए?

थायराइड (हाइपोथायरायडिज्म) की गोली आमतौर पर सुबह खाली पेट, नाश्ते से कम से कम 30-45 मिनट पहले लेनी चाहिए ताकि शरीर इसे सोक सके।

क्या थायराइड होने पर मैं गर्भवती हो सकती हूं?

जी हां, बिल्कुल, लेकिन गर्भावस्था की योजना बनाने से पहले अपने TSH लेवल को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। डॉक्टर की निगरानी में सुरक्षित प्रेग्नेंसी संभव है।

क्या थायराइड के मरीज दूध पी सकते हैं?

हां, दूध और डेयरी उत्पाद पी सकते हैं, लेकिन यदि आप थायराइड की दवा ले रहे हैं, तो दवा और कैल्शियम युक्त भोजन (दूध) के बीच 4 घंटे का अंतर रखें।

क्या तनाव से थायराइड की समस्या बढ़ सकती है?

हां, अत्यधिक तनाव कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाता है, जो थायराइड ग्लैंड के कार्य को बाधित कर सकता है और लक्षणों को और गंभीर बना सकता है।

Written and Verified by:

Dr. N V K Mohan

Dr. N V K Mohan

Consultant - Otologist, ENT and Cochlear Implant Surgeon Exp: 25 Yr

ENT

Book an Appointment

Dr. Mohan has over 25 years of experience in ENT practice. Previously he worked as an assistant professor ENT at Kamineni Institute of Medical Sciences of Narketpally & SVS Medical College, Mahboob Nagar. Dr. Mohan has worked in Tertiary Referral Hospital in UK for 4 years

Related Diseases & Treatments

Treatments in Kolkata

ENT- Otolaryngology Doctors in Kolkata

NavBook Appt.WhatsappWhatsappCall Now