
थायराइड रोग एक सामान्य हार्मोनल समस्या है, जो मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है। इसके मुख्य प्रकार हाइपोथायरायडिज्म (वजन बढ़ना) और हाइपरथायरायडिज्म (वजन घटना) हैं। सही समय पर ब्लड टेस्ट, नियमित दवा और संतुलित आहार से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
क्या आप अक्सर बिना किसी वजह के थकान महसूस करते हैं? या फिर आपकी डाइट न बदलने के बावजूद वजन लगातार बढ़ रहा है? यदि हां, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत में लगभग 4.2 करोड़ से अधिक लोग थायराइड की समस्याओं से जूझ रहे हैं, और चिंताजनक बात यह है कि इनमें से कई लोगों को यह पता भी नहीं होता कि वह इस बीमारी का शिकार है। इसे अक्सर 'साइलेंट किलर' या 'खामोश बीमारी' कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इसे तनाव या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सही समय पर पहचान और इलाज से आप न केवल इसे कंट्रोल कर सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन भी जी सकते हैं।
इस ब्लॉग में, हम थायराइड रोग की हर छोटी-बड़ी जानकारी जैसे कि इसके कारणों से लेकर, लक्षणों और आधुनिक उपचार विकल्पों तक पर चर्चा करेंगे। साथ ही, हम जानेंगे कि कैसे हमारे विशेषज्ञ आपकी मदद कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त थायराइड रोग के संबंध में आप हमारे अनुभवी विशेषज्ञों स परामर्श भी ले सकते हैं।
थायराइड गर्दन के सामने वाले हिस्से में स्थित एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि या ग्लैंड (Butterfly-shaped gland) होती है। इसका मुख्य काम ऐसे हार्मोन्स का उत्पादन करना है, जो हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी ऊर्जा के उपयोग की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं।
यह ग्लैंड मुख्य रूप से दो हार्मोन का निर्माण करते हैं -
जब इन हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ता है, तो शरीर की पूरी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। यह असंतुलन आपके वजन, ऊर्जा स्तर, और यहां तक कि आपके मूड को भी प्रभावित कर सकता है।
थायराइड की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। इसे समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि दोनों के इलाज और लक्षण बिल्कुल अलग होते हैं।
आज के दौर में थायराइड रोग तेजी से क्यों बढ़ रहा है? इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें हमारी जीवनशैली का बड़ा हाथ है -
इसके अतिरिक्त भी एक और मुख्य कारण है और वह है ऑटोइम्यून बीमारियां। चलिए इसे भी समझते हैं -
थायराइड रोग के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे विकसित होते हैं। यहां हाइपो और हाइपर दोनों स्थितियों के लक्षणों का विस्तृत विवरण दिया गया है, ताकि आप अपने शरीर के संकेतों को पहचान सकें। चलिए दोनों के लक्षणों को एक-एक करके समझते हैं -
यदि आप इनमें से कोई भी लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो इसे सामान्य मानकर न टालें। हमारे एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लें और सही समय पर जांच कराएं।
थायराइड रोग की पहचान के लिए डॉक्टर आमतौर पर कुछ ब्लड टेस्ट की सलाह दी जाती है। यह प्रक्रिया बेहद सरल है। चलिए थायराइड रोग की जांच में होने वाली सभी टेस्ट को समझते हैं -
अच्छी खबर यह है कि थायराइड रोग ऐसी समस्या है, जिसको आसानी से मैनेज किया जा सकता है। सही इलाज और नियमित निगरानी से आप पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं। चलिए इलाज के सभी विकल्पों को समझते हैं -
यह हाइपरथायरायडिज्म का एक प्रभावी इलाज है। इसमें रेडियोधर्मी आयोडीन का उपयोग करके अतिसक्रिय थायराइड कोशिकाओं को सिकोड़ा जाता है।
कुछ मामलों में, जैसे कि थायराइड का आकार बहुत बढ़ जाने पर या थायराइड कैंसर का शक होने पर, सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। हमारे पास अनुभवी सर्जन और अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है, जो सुरक्षित और सटीक सर्जरी सुनिश्चित करते हैं। इसके अतिरिक्त हमारे पास एडवांस लैब्स और आधुनिक मशीनें हैं, जिनकी मदद से निदान के साथ-साथ इलाज भी संभव है।
दवाइयों के साथ-साथ आपकी लाइफस्टाइल भी इलाज का अहम हिस्सा है। यह एलोपैथ के साथ-साथ आयुर्वेद का एक अहम भाग है -
जितनी महत्वपूर्ण थायराइड रोग की दवाएं हैं, उतना ही डाइट है। सही खान-पान दवा के असर को बढ़ा सकता है।
थायराइड की बीमारी को अपने जीवन पर हावी न होने दें। थकान, वजन बढ़ना या बालों का झड़ना सिर्फ़ कॉस्मेटिक समस्याएं नहीं हैं, यह आपके शरीर की पुकार हो सकती हैं। सही जानकारी, समय पर जांच और डॉक्टरी परामर्श आपको फिर से ऊर्जावान बना सकता है।
याद रखें, हर मरीज का शरीर अलग होता है और इलाज भी उसी के आधार पर अलग होता है। खुद से दवा लेने के बजाय, विशेषज्ञ की सलाह लें। क्या आप अपनी सेहत की कमान अपने हाथ में लेने के लिए तैयार हैं? देर न करें। आज ही हमारे विशेषज्ञ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के साथ अपनी अपॉइंटमेंट बुक करें और एक स्वस्थ कल की शुरुआत करें।
अधिकांश मामलों में इसे 'कंट्रोल' किया जाता है, 'क्योर' नहीं। नियमित दवा और स्वस्थ जीवनशैली से आप पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं और लक्षण मुक्त रह सकते हैं।
थायराइड (हाइपोथायरायडिज्म) की गोली आमतौर पर सुबह खाली पेट, नाश्ते से कम से कम 30-45 मिनट पहले लेनी चाहिए ताकि शरीर इसे सोक सके।
जी हां, बिल्कुल, लेकिन गर्भावस्था की योजना बनाने से पहले अपने TSH लेवल को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। डॉक्टर की निगरानी में सुरक्षित प्रेग्नेंसी संभव है।
हां, दूध और डेयरी उत्पाद पी सकते हैं, लेकिन यदि आप थायराइड की दवा ले रहे हैं, तो दवा और कैल्शियम युक्त भोजन (दूध) के बीच 4 घंटे का अंतर रखें।
हां, अत्यधिक तनाव कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाता है, जो थायराइड ग्लैंड के कार्य को बाधित कर सकता है और लक्षणों को और गंभीर बना सकता है।
Written and Verified by:
-Dr.-N.-V.K-Mohan-(-E.N.-T-).webp&w=256&q=75)
Consultant - Otologist, ENT and Cochlear Implant Surgeon Exp: 25 Yr
ENT
Dr. Mohan has over 25 years of experience in ENT practice. Previously he worked as an assistant professor ENT at Kamineni Institute of Medical Sciences of Narketpally & SVS Medical College, Mahboob Nagar. Dr. Mohan has worked in Tertiary Referral Hospital in UK for 4 years
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