
क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज के साथ जी रहे लाखों भारतीय कहीं न कहीं डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) नाम की एक खतरनाक बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। डायबिटीज में अक्सर हमारा दिमाग सिर्फ मीठे को कंट्रोल करने और इंसुलिन पर होता है, लेकिन हम भूल जाते हैं कि यह बीमारी हमारे शरीर के सबसे नाजुक हिस्से यानी 'आँखों' पर सीधा वार करती है।
अच्छी खबर यह है कि सही जानकारी और समय पर जांच से इसे न केवल रोका जा सकता है, बल्कि आंखों की रोशनी को सुरक्षित भी रखा जा सकता है। सीके बिरला अस्पताल, कोलकता (CMRI) में हमारा लक्ष्य में न केवल मरीजों को इलाज देना है, बल्कि उन्हें इस बीमारी के प्रति सशक्त बनाना भी है। इसलिए यदि आंख के प्रति कोई भी समस्या का आप सामना कर रहे हैं, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें।
सरल शब्दों में कहें तो, रेटिनोपैथी आंखों के पिछले हिस्से जिसे 'रेटिना' (दृष्टिपटल) कहते हैं, उसकी बीमारी है। रेटिना हमारे लिए एक कैमरे की रील की तरह काम करता है, जो रोशनी को संकेतों में बदलकर दिमाग तक पहुंचाता है, जिसकी मदद से हम देख पाते हैं।
जब रक्त में शुगर की मात्रा लंबे समय तक अनियंत्रित रहती है, तो यह रेटिना की बारीक रक्त वाहिकाओं को क्षतिग्रस्त करने लगती है। ये नसें या तो फूल जाती हैं और रिसने लगती है, या पूरी तरह बंद हो जाती हैं। जब आंखों की रेटिना खराब होना शुरू होती है, तो नई और कमजोर नसें विकसित होने लगती हैं, जो आसानी से फट सकती हैं और आंखों के अंदर रक्त हानि का कारण बनती हैं। इसी स्थिति को हम डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं।
रेटिनोपैथी के कारण सीधे तौर पर आपकी जीवनशैली और बीमारी से जुड़े होते हैं जैसे कि -
इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं। जब तक मरीज को महसूस होता है कि कुछ गलत है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। रेटिना की बीमारी के लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं -
यदि आप इनमें से किसी भी रेटिनोपैथी के लक्षण को महसूस कर रहे हैं, तो इसे सामान्य थकान न समझें। यह आपकी आंखों की एक आपातकालीन पुकार हो सकती है।
इसे मुख्य रूप से दो चरणों में बांटा जाता है -
रेटिनोपैथी क्या है, यह जानने के बाद इसका सही समय पर डायग्नोसिस बहुत जरूरी है। सीएमआरआई (CMRI) जैसे आधुनिक अस्पतालों में हम निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग करते हैं:
आप अपनी आँखों की सुरक्षा के खुद मालिक हैं। आंखों की रेटिना खराब होना एक धीमी प्रक्रिया है, जिसे निम्न तरीकों से रोका जा सकता है -
हालिया रिसर्च में सामने आया है कि भारत में डायबिटीज के लगभग 10 करोड़ से अधिक मरीज हैं। इनमें से करीब 18% से 20% लोग डायबिटिक रेटिनोपैथी के किसी न किसी स्तर से प्रभावित हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 50% मरीजों को पता ही नहीं होता कि उनकी आँखें खतरे में हैं, जब तक कि उनकी रोशनी कम नहीं होने लगती। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर स्क्रीनिंग से रेटिनोपैथी के कारण होने वाले अंधेपन को 90% तक टाला जा सकता है।
सीके बिरला अस्पताल (CMRI) में हमारी अनुभवी नेत्र रोग विशेषज्ञों की टीम अत्याधुनिक तकनीक से आपकी आँखों की हर प्रकार की समस्या का समाधान कर सकती हैं। आपकी आंखें पूरी दुनिया आपको दिखाती हैं, उसके साथ की स्थिति को नज़रअंदाज न करें। आज की एक छोटी सी जांच कल की बड़ी मुसीबत को टाल सकती है।
हां, धुंधला दिखाई देना डायबिटिक रेटिनोपैथी के सबसे आम शुरुआती संकेतों में से एक है। यह रेटिना में सूजन या रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ के रिसाव के कारण हो सकता है। इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
यदि आपको टाइप 2 डायबिटीज है, तो निदान के तुरंत बाद पहली जांच करानी चाहिए। इसके बाद हर साल एक बार आंखों की विस्तृत जांच जरूरी है। टाइप 1 के मरीजों को डायबिटीज होने के 5 साल बाद से नियमित जांच शुरू कर देनी चाहिए।
जी हाँ, यदि सही समय पर पता चल जाए, तो लेज़र उपचार (Photocoagulation), आँखों में इंजेक्शन (Anti-VEGF) या सर्जरी के जरिए दृष्टि हानि को रोका जा सकता है। इलाज का मुख्य उद्देश्य बीमारी को बढ़ने से रोकना होता है।
दुर्भाग्य से, यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर आंतरिक रक्तस्राव या रेटिनल डिटैचमेंट का कारण बन सकता है, जिससे स्थायी रूप से अंधापन हो सकता है।
शुगर, बीपी और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखें। संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें, धूम्रपान से बचें और सबसे महत्वपूर्ण है कि बिना किसी लक्षण के भी साल में एक बार अपनी आँखों की जांच विशेषज्ञ से जरूर करवाएं।
नहीं, यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है जिसे लंबे समय से डायबिटीज है। हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन युवा मरीजों को भी समान रूप से सतर्क रहना चाहिए।
Written and Verified by:
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Dr. Barishan Mukherjee is a Consultant in Ophthalmology Dept. at CMRI Hospital, Kolkata, with over 20 years of experience. He specializes in cataract surgery, corneal grafting, dry eye management, and corneal infections.
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