रेटिनोपैथी क्या है? कारण, शुरुआती लक्षण और आंखों को नुकसान से कैसे बचाएं
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रेटिनोपैथी क्या है? कारण, शुरुआती लक्षण और आंखों को नुकसान से कैसे बचाएं

Ophthalmology | by Dr. Barishan Mukherjee on 15/04/2026 | Last Updated : 07/04/2026

Summary

  • लंबे समय से डायबिटीज (मधुमेह) से जूझ रहे लोगों के लिए ये ब्लॉग एक गाइड या वार्निंग साइन के रूप में कार्य करेगा।
  • इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य आपको डायबिटिक रेटिनोपैथी के प्रति सचेत करना है, जो कि आँखों की एक गंभीर बीमारी है। 
  • अक्सर लोग इसे सामान्य कमजोरी या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन धुंधला दिखाई देने का कारण कुछ और भी हो सकता है। 
  • यहां आप जानेंगे कि कैसे बढ़ी हुई शुगर आँखों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाती है।
  • इसके शुरुआती संकेत क्या हैं और समय रहते अपनी दृष्टि को स्थायी रूप से खोने से कैसे बचाया जा सकता है।

क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज के साथ जी रहे लाखों भारतीय कहीं न कहीं डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) नाम की एक खतरनाक बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। डायबिटीज में अक्सर हमारा दिमाग सिर्फ मीठे को कंट्रोल करने और इंसुलिन पर होता है, लेकिन हम भूल जाते हैं कि यह बीमारी हमारे शरीर के सबसे नाजुक हिस्से यानी 'आँखों' पर सीधा वार करती है।

अच्छी खबर यह है कि सही जानकारी और समय पर जांच से इसे न केवल रोका जा सकता है, बल्कि आंखों की रोशनी को सुरक्षित भी रखा जा सकता है। सीके बिरला अस्पताल, कोलकता (CMRI) में हमारा लक्ष्य में न केवल मरीजों को इलाज देना है, बल्कि उन्हें इस बीमारी के प्रति सशक्त बनाना भी है। इसलिए यदि आंख के प्रति कोई भी समस्या का आप सामना कर रहे हैं, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें।

डायबिटिक रेटिनोपैथी क्या होती है? - What is Diabetic Retinopathy?

सरल शब्दों में कहें तो, रेटिनोपैथी आंखों के पिछले हिस्से जिसे 'रेटिना' (दृष्टिपटल) कहते हैं, उसकी बीमारी है। रेटिना हमारे लिए एक कैमरे की रील की तरह काम करता है, जो रोशनी को संकेतों में बदलकर दिमाग तक पहुंचाता है, जिसकी मदद से हम देख पाते हैं।

जब रक्त में शुगर की मात्रा लंबे समय तक अनियंत्रित रहती है, तो यह रेटिना की बारीक रक्त वाहिकाओं को क्षतिग्रस्त करने लगती है। ये नसें या तो फूल जाती हैं और रिसने लगती है, या पूरी तरह बंद हो जाती हैं। जब आंखों की रेटिना खराब होना शुरू होती है, तो नई और कमजोर नसें विकसित होने लगती हैं, जो आसानी से फट सकती हैं और आंखों के अंदर रक्त हानि का कारण बनती हैं। इसी स्थिति को हम डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं।

डायबिटिक रेटिनोपैथी के मुख्य कारण क्या है?

रेटिनोपैथी के कारण सीधे तौर पर आपकी जीवनशैली और बीमारी से जुड़े होते हैं जैसे कि - 

  • लंबे समय तक डायबिटीज की समस्या होना: आप जितने अधिक समय से डायबिटीज के मरीज हैं, रेटिनोपैथी होने का खतरा उतना ही अधिक होता है।
  • हाई ब्लड शुगर: शुगर लेवल का लगातार ऊपर-नीचे होना या हमेशा बढ़े रहना आंखों की नसों को कमजोर कर देता है।
  • उच्च रक्तचाप (Hypertension): यदि आपको डायबिटीज के साथ बीपी की भी समस्या है, तो यह आंखों की नसों पर दोगुना दबाव डालता है।
  • कोलेस्ट्रॉल: बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल रक्त वाहिकाओं में रुकावट पैदा कर सकता है।
  • गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज के कारण कभी-कभी रेटिनोपैथी की समस्या गंभीर हो सकती है।
  • तंबाकू और धूम्रपान: यह शरीर की नसों को सख्त बना देता है, जिससे रेटिना तक ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी के शुरुआती लक्षण

इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं। जब तक मरीज को महसूस होता है कि कुछ गलत है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। रेटिना की बीमारी के लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं - 

  • धुंधला दिखाई देना कारण: बार-बार चश्मे का नंबर बदलना या अचानक धुंधलापन आना।
  • फ्लोटर्स (Floaters): आँखों के सामने काले धब्बे या जाले जैसा आकार का दिखना।
  • रंगों की पहचान में मुश्किल: रंगों का फीका पड़ना या सही से पहचान न पाना।
  • आंखों में खालीपन: दृष्टि के बीच में काला घेरा या खाली जगह महसूस होना।
  • रात में कम दिखना: अंधेरे या कम रोशनी में देखने में कठिनाई होना।

यदि आप इनमें से किसी भी रेटिनोपैथी के लक्षण को महसूस कर रहे हैं, तो इसे सामान्य थकान न समझें। यह आपकी आंखों की एक आपातकालीन पुकार हो सकती है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी के प्रकार

इसे मुख्य रूप से दो चरणों में बांटा जाता है - 

  • नॉन-प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी (NPDR): यह शुरुआती चरण है, जहां नसें कमजोर होकर फूल जाती हैं और उनसे तरल पदार्थ रिसने लगता है।
  • प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी (PDR): यह गंभीर चरण है। यहां पुरानी नसें बंद हो जाती हैं और नई, असामान्य नसें उगने लगती हैं। ये नसें बहुत नाजुक होती हैं और आँखों के 'विट्रियस' (Vitreous) में खून फैला सकती हैं। इसके कारण अचानक आंख की रोशनी जा सकती है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी का निदान कैसे किया जाता है?

रेटिनोपैथी क्या है, यह जानने के बाद इसका सही समय पर डायग्नोसिस बहुत जरूरी है। सीएमआरआई (CMRI) जैसे आधुनिक अस्पतालों में हम निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग करते हैं:

  • डाइलेटेड आई एग्जाम: विशेष आई ड्रॉप के जरिए पुतली को फैलाकर रेटिना की गहराई से जांच की जाती है। इसमें 30 मिनट तक लग सकते हैं और दवा का प्रभाव 3-4 घंटे तक रह सकता है, जिसके कारण आपको धूप में देखने में दिक्कत हो सकती है, इसलिए अपने साथ एक व्यक्ति को ज़रूर लेकर आएं।
  • ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (OCT): यह रेटिना की 3D इमेज लेता है, जिससे सूजन का सटीक पता चलता है।
  • फ्लोरेसिन एंजियोग्राफी: एक डाई इंजेक्ट की जाती है, जो यह दिखाती है कि कौन सी नसें लीक हो रही हैं या बंद हैं।

आंखों को नुकसान से कैसे बचाएं?

आप अपनी आँखों की सुरक्षा के खुद मालिक हैं। आंखों की रेटिना खराब होना एक धीमी प्रक्रिया है, जिसे निम्न तरीकों से रोका जा सकता है - 

  • शुगर पर नियंत्रण: अपने HbA1c लेवल को हमेशा 7% के आसपास रखने का प्रयास करें।
  • नियमित जांच: साल में कम से कम एक बार अपनी आंखों की विस्तृत जांच (Fundus Examination) जरूर कराएं, चाहे आपको कोई समस्या हो या न हो।
  • ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल: इन्हें नियंत्रित रखकर आप आंखों की बारीक नसों पर पड़ने वाले बोझ को कम कर सकते हैं।
  • स्वस्थ आहार: ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ए, सी और ई से भरपूर भोजन (जैसे हरी सब्जियां, नट्स, और गाजर) लें।
  • व्यायाम: शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है और शुगर कंट्रोल में रहती है।
  • धूम्रपान छोड़ें: यह आँखों की नसों को बचाने का सबसे असरदार तरीका है।

निष्कर्ष

हालिया रिसर्च में सामने आया है कि भारत में डायबिटीज के लगभग 10 करोड़ से अधिक मरीज हैं। इनमें से करीब 18% से 20% लोग डायबिटिक रेटिनोपैथी के किसी न किसी स्तर से प्रभावित हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 50% मरीजों को पता ही नहीं होता कि उनकी आँखें खतरे में हैं, जब तक कि उनकी रोशनी कम नहीं होने लगती। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर स्क्रीनिंग से रेटिनोपैथी के कारण होने वाले अंधेपन को 90% तक टाला जा सकता है।

सीके बिरला अस्पताल (CMRI) में हमारी अनुभवी नेत्र रोग विशेषज्ञों की टीम अत्याधुनिक तकनीक से आपकी आँखों की हर प्रकार की समस्या का समाधान कर सकती हैं। आपकी आंखें पूरी दुनिया आपको दिखाती हैं, उसके साथ की स्थिति को नज़रअंदाज न करें। आज की एक छोटी सी जांच कल की बड़ी मुसीबत को टाल सकती है।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या धुंधला दिखाई देना रेटिनोपैथी का संकेत हो सकता है?

हां, धुंधला दिखाई देना डायबिटिक रेटिनोपैथी के सबसे आम शुरुआती संकेतों में से एक है। यह रेटिना में सूजन या रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ के रिसाव के कारण हो सकता है। इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

रेटिना की जांच कब करानी चाहिए?

यदि आपको टाइप 2 डायबिटीज है, तो निदान के तुरंत बाद पहली जांच करानी चाहिए। इसके बाद हर साल एक बार आंखों की विस्तृत जांच जरूरी है। टाइप 1 के मरीजों को डायबिटीज होने के 5 साल बाद से नियमित जांच शुरू कर देनी चाहिए।

क्या रेटिनोपैथी का इलाज संभव है?

जी हाँ, यदि सही समय पर पता चल जाए, तो लेज़र उपचार (Photocoagulation), आँखों में इंजेक्शन (Anti-VEGF) या सर्जरी के जरिए दृष्टि हानि को रोका जा सकता है। इलाज का मुख्य उद्देश्य बीमारी को बढ़ने से रोकना होता है।

क्या रेटिनोपैथी से स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है?

दुर्भाग्य से, यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर आंतरिक रक्तस्राव या रेटिनल डिटैचमेंट का कारण बन सकता है, जिससे स्थायी रूप से अंधापन हो सकता है।

आँखों को स्वस्थ रखने के लिए कौन-सी सावधानियां जरूरी है?

शुगर, बीपी और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखें। संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें, धूम्रपान से बचें और सबसे महत्वपूर्ण है कि बिना किसी लक्षण के भी साल में एक बार अपनी आँखों की जांच विशेषज्ञ से जरूर करवाएं।

क्या रेटिनोपैथी केवल बुजुर्गों को होती है?

नहीं, यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है जिसे लंबे समय से डायबिटीज है। हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन युवा मरीजों को भी समान रूप से सतर्क रहना चाहिए।

Written and Verified by:

Dr. Barishan Mukherjee

Dr. Barishan Mukherjee

Consultant - Ophthalmology Exp: 31 Yr

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Dr. Barishan Mukherjee is a Consultant in Ophthalmology Dept. at CMRI Hospital, Kolkata, with over 20 years of experience. He specializes in cataract surgery, corneal grafting, dry eye management, and corneal infections.

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