
मानसून में नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और कम शारीरिक गतिविधि ब्लड प्रेशर को अस्थिर कर सकती है। जानें बारिश के मौसम में बीपी कंट्रोल करने के 10 असरदार उपाय, जिसमें सही डाइट, नियमित बीपी मॉनिटरिंग, दवाइयों का समय पर सेवन और हल्की एक्सरसाइज शामिल हैं। साथ ही, हाई बीपी के मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां और वे लक्षण जानें जिनमें तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
कई फिल्मों और कविताओं में हमने बारिश की तारीफ सुनी होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं, बारिश अपने साथ सुकून के साथ-साथ कितनी सारी समस्याएं लेकर आती है। खासकर अगर आप या आपके घर में कोई हाई ब्लड प्रेशर के मरीज है, तो यही खूबसूरत मौसम कई बार बड़ी परेशानी की वजह बन जाता है। नमी बढ़ने से लेकर तापमान में अचानक गिरावट तक, मानसून का हर बदलाव शरीर की रक्त वाहिनियों पर सीधा असर डालता है।
हमने अपने क्लीनिकल अनुभव में देखा है कि जून के अंत से सितंबर के अंत या अक्टूबर की शुरुआत तक बीपी से जुड़ी इमरजेंसी में साफ बढ़ोतरी दिखती है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि इस मौसम में अपने ब्लड प्रेशर को कैसे संभाला जाए। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को पहले से हाई बीपी, दिल की बीमारी या बार-बार चक्कर आने की शिकायत है, तो देर न करें, हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें और समय रहते अपने दिल की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
जी हां, और यह कोई मिथक नहीं बल्कि मेडिकल रिसर्च से साबित तथ्य है। मानसून के दौरान वातावरण में नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिससे शरीर को खुद को ठंडा रखने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। साथ ही, तापमान में बार-बार बदलाव यानी कभी उमस भरी गर्मी तो कभी अचानक ठंडक, रक्त वाहिनियों को सिकोड़ने और फैलाने का काम करता रहता है, जिससे ब्लड प्रेशर अस्थिर हो जाता है।
WHO की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 30 से 79 वर्ष की आयु वर्ग के 21 करोड़ से ज्यादा लोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या का सामना कर रहे हैं, और चिंता की बात यह है कि इनमें से मुश्किल से 40 फीसदी लोगों को ही अपनी बीमारी के बारे में पता है। मौसम में बदलाव के साथ यह आंकड़ा और गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए मानसून में सतर्कता बरतना बेहद जरूरी हो जाता है।
बारिश के मौसम में बीपी अस्थिर होने के कई कारण हो सकते हैं -

इन उपायों को अपनाने से आपको बहुत अधिक लाभ मिल सकता है। इन्हें आप अपने रोजाना के जीवन में आसानी से अपना सकते हैं -
हाई बीपी डाइट में इस मौसम में कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। सुबह की शुरुआत हल्के, गर्म और आसानी से पचने वाले भोजन से करें। ओट्स, दलिया और मौसमी सब्जियों का सूप बेहतरीन विकल्प हैं। बाहर के स्ट्रीट फूड और पैकेज्ड स्नैक्स से दूरी बनाएं, क्योंकि इनमें छिपा हुआ सोडियम बीपी को अनियंत्रित कर सकता है। चाय-कॉफी का सेवन सीमित मात्रा में रखें क्योंकि कैफीन अस्थायी रूप से बीपी बढ़ा सकता है। लहसुन, अलसी के बीज और होल ग्रेन्स को डाइट में शामिल करना दिल की सेहत के लिए फायदेमंद माना गया है। साथ ही धूम्रपान और शराब से पूरी तरह परहेज करें, क्योंकि मानसून में इसका असर दिल पर दोगुना पड़ सकता है।
कई बार मरीज शुरुआती लक्षणों को मौसमी थकान या सर्दी-जुकाम समझ कर टाल देते हैं, और यही देरी भारी पड़ जाती है। इन संकेतों पर तुरंत ध्यान दें -
अगर घर पर बीपी लगातार दो या तीन बार 140/90 से ऊपर आ रहा है, या ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी दिखे, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से मिलें। कोलकाता स्थित बीएम बिरला हार्ट रिसर्च सेंटर (BMB) या सीके बिरला अस्पताल में हमने पिछले मानसून सीजन में ऐसे कई मरीज देखे, जो शुरुआत में इसे मौसमी कमजोरी समझकर घर पर ही मैनेज करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन समय पर जांच कराने से उनका बीपी क्राइसिस टलने से पहले ही पकड़ में आ गया। इसलिए संकोच न करें, सही समय पर सही सलाह ही बड़ी घटना को रोक सकती है।
मानसून का मौसम भले ही राहत लेकर आता हो, लेकिन हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह एक चुनौती भी है। थोड़ी सी सजगता, सही खान-पान, नियमित मॉनिटरिंग और समय पर डॉक्टरी सलाह से इस मौसम में भी आप अपने दिल को सुरक्षित रख सकते हैं। अपनी सेहत को हल्के में न लें, अपने और अपने परिवार के दिल की जांच को प्राथमिकता दें।
हां, नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और इन्फेक्शन की वजह से दिल पर दबाव बढ़ता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा सामान्य से अधिक हो सकता है, खासकर पहले से हाई बीपी या हृदय रोग के मरीजों में।
हल्का, कम नमक वाला, ताजा पका भोजन लें। पोटैशियम युक्त फल-सब्जियां, दलिया और सूप शामिल करें। तला-भुना, पैकेज्ड और स्ट्रीट फूड से बचें।
सामान्यतः हफ्ते में दो-तीन बार जांच पर्याप्त है, लेकिन बीपी अस्थिर रहने पर डॉक्टर की सलाह अनुसार रोजाना सुबह-शाम जांच करें।
जी हां, रोजाना 5 ग्राम से कम नमक लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ज्यादा सोडियम शरीर में पानी रोककर बीपी बढ़ाता है।
बाहर गीली सतहों पर एक्सरसाइज से बचें, लेकिन योग, स्ट्रेचिंग जैसी इनडोर हल्की एक्टिविटी सुरक्षित और फायदेमंद है।
अगर चक्कर या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत बैठ या लेट जाएं, पैर ऊपर उठाएं, तरल पदार्थ लें और लक्षण बने रहने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
हां, बुजुर्ग मरीजों में तापमान बदलाव के प्रति संवेदनशीलता ज्यादा होती है, इसलिए उन्हें नियमित मॉनिटरिंग और समय पर दवा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
Written and Verified by:

Dr. Anil Mishra is the Director of Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 33 years of experience. He specializes in complex angioplasties, pacemaker & AICD implantation, CRT-D, TAVI, and was the first in Eastern India to perform rotablation and implant leadless pacemakers.
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