पोटैशियम की कमी के लक्षण: शरीर में संतुलन बिगड़ने के संकेत और इलाज
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पोटैशियम की कमी के लक्षण: शरीर में संतुलन बिगड़ने के संकेत और इलाज

Internal Medicine | by Dr. Rajarshi Sengupta on 18/12/2025 | Last Updated : 17/12/2025

Summary

पोटेशियम की कमी (Hypokalemia) एक ख़तरनाक इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन है, जिसके लक्षण थकान, ऐंठन और अनियमित दिल की धड़कन है। सही निदान, उच्च पोटेशियम खाद्य पदार्थ और विशेषज्ञ उपचार से इसे संतुलित करना संभव है।

जब आप लगातार बिना कारण थकान, कमजोरी या रात में मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन (Muscle Cramps) का सामना कर रहे हैं और इसके साथ-साथ उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) की समस्या आपको परेशान कर रही है, तो हो सकता है कि यह किसी गंभीर समस्या की तरफ इशारा कर रही हो। पोटेशियम की कमी, जिसे चिकित्सा भाषा में हाइपोकैलीमिया (Hypokalemia) कहा जाता है।

शरीर में पोटेशियम की कमी शुरू में हल्के लक्षण दिखाते हैं, जिन्हें हम अक्सर थकान समझ कर टाल देते हैं। लेकिन यह इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन आपके दिल की धड़कन को नियंत्रित करते हैं, जिससे अचानक कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आंकड़े बताते हैं कि अस्पताल में भर्ती लगभग 20% मरीज इस कमी से प्रभावित होते हैं, और हृदय रोगी (Cardiac Patients) यदि इससे जूझ रहे हैं, तो उनमें मृत्यु दर 10 गुना तक बढ़ सकती है।

वहीं डब्ल्यूएचओ (WHO) और आईसीएमआर (ICMR) प्रतिदिन कम से कम 3.5 ग्राम पोटेशियम के सेवन की सलाह देते हैं, लेकिन भारत में औसत आहार में यह मात्रा अक्सर अपर्याप्त पाई जाती है। यदि आप भी लो पोटेशियम का सामना कर रहे हैं, तो सीएमआरआई (CMRI) और सीके बिरला हॉस्पिटल्स (CK Birla Hospitals) में हम इस स्थिति का इलाज सटीकता और सुदृढ़ता से करते हैं, इसलिए अभी अपना परामर्श बुक करें।

पोटैशियम क्या है और इसकी कमी क्यों खतरनाक है?

पोटैशियम एक अत्यंत महत्वपूर्ण मिनरल और इलेक्ट्रोलाइट है, जो हमारे शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को करने के लिए जाना जाता है। चलिए सबसे पहले पोटेशियम के मुख्य कार्यों को समझते हैं - 

  • कोशिका संतुलन: यह कोशिकाओं के अंदर पानी और पोषक तत्वों को नियंत्रित करता है, जबकि सोडियम बाहर रहता है।
  • मांसपेशी और तंत्रिका कार्य: यह विद्युत संकेतों को उत्पन्न करता है, जो नर्वस सिस्टम को संदेश भेजने और मांसपेशियों (विशेष रूप से हृदय की मांसपेशियों के लिए) के कार्य करने के लिए आवश्यक होते हैं।
  • रक्तचाप नियंत्रण: यह रक्त वाहिकाओं को आराम देता है और शरीर से अतिरिक्त सोडियम को बाहर निकालने में मदद करता है।

यदि पोटेशियम का स्तर कम होता है, तो ऊपर बताए गए कार्य प्रभावित होते हैं, जिससे शरीर को गंभीर खतरा हो सकता है। चलिए पोटेशियम के सामान्य और गंभीर स्तर के बारे में जानते हैं। रक्त में सामान्य पोटेशियम स्तर 3.5 से 5.0 mEq/L के बीच होता है। जब यह स्तर 3.5 mEq/L से नीचे चला जाता है, तो इसे पोटेशियम की कमी कहा जाता है। 2.5 mEq/L से नीचे का स्तर अत्यंत गंभीर और जीवन-घातक माना जाता है।

शरीर में संतुलन बिगड़ने के संकेत: पोटेशियम की कमी के लक्षण

पोटैशियम की कमी के लक्षण शरीर के कई प्रणालियों को प्रभावित करते हैं। इन लक्षण को पहचानना शीघ्र उपचार के लिए महत्वपूर्ण है।

  • अत्यधिक थकान और कमजोरी: यह सबसे आम लक्षण है। कमी के कारण कोशिकाएं ऊर्जा का उत्पादन ठीक से नहीं कर पाती, जिससे लगातार थकान और शारीरिक कमजोरी महसूस होती है, भले ही आप पर्याप्त आराम कर चुके हों।
  • मांसपेशियों में ऐंठन और अकड़न: मांसपेशी संकुचन को नियंत्रित करने वाला विद्युत संतुलन बिगड़ने के कारण, हाथ-पैरों में बार-बार, दर्दनाक ऐंठन (खासकर रात में) होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
  • अनियमित और तेज दिल की धड़कन: यह पोटेशियम की कमी के लक्षण में सबसे गंभीर है। दिल की धड़कन की लय को नियंत्रित करने वाले विद्युत संकेतों में बाधा आती है, जिससे दिल की धड़कन अनियमित (अतालता) हो जाती है। यह सीधे कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है।
  • सुन्नता और झुनझुनी (Paresthesia): नर्वस सिस्टम के बाधित होने के कारण उंगलियों, पैरों या अन्य अंगों में सुन्नता या 'पिन और सुई' चुभने जैसा अजीब एहसास हो सकता है।
  • पाचन संबंधी समस्याएं: पाचन तंत्र की चिकनी मांसपेशियों के कार्य धीमे हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर कब्ज, पेट फूलना और ऐंठन की समस्या हो सकती है।
  • उच्च रक्तचाप: पोटेशियम की कमी रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकती है और सोडियम के प्रभाव को बढ़ा सकती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है।
  • मानसिक भ्रम और मूड स्विंग्स: पोटेशियम मस्तिष्क के कार्य के लिए महत्वपूर्ण है। गंभीर कमी होने पर भ्रम, डिप्रेशन या मतिभ्रम जैसी मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

शरीर में पोटेशियम की कमी क्यों होती है: मुख्य कारण

शरीर में पोटेशियम की कमी केवल आहार में कमी के कारण नहीं होती; यह अक्सर शरीर से इसके अत्यधिक नुकसान का परिणाम होती है। चलिए सभी कारणों को एक-एक करके समझते हैं - 

  • अत्यधिक द्रव हानि: यदि लंबे समय तक दस्त या उल्टी होना, अत्यधिक पसीना आनाऔर रेचक (Laxative) का अत्यधिक उपयोग होता है, तो शरीर से अधिक तरल पदार्थ शरीर से बाहर जाने लगता है, जिससे पोटेशियम की कमी की समस्या उत्पन्न हो सकती है। 
  • दवाइयों का उपयोग: उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के इलाज में इस्तेमाल होने वाले कुछ मूत्रवर्धक या डाइयुरेटिक्स से किडनी शरीर में मौजूद पोटेशियम को शरीर से बाहर निकालने का कार्य करता है। डॉक्टर अक्सर इन दवाओं का उपयोग करने वाले मरीजों को सप्लीमेंट्स देते हैं।
  • अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियां: हार्मोनल रोग (कुशिंग सिंड्रोम), गुर्दे की समस्याएं और लो मैग्नीशियम के कारण भी शरीर में पोटेशियम की समस्या कम हो सकती है। 
  • अपर्याप्त सेवन: हालांकि यह अकेला मुख्य कारण कम ही होता है, लेकिन कम फलों, सब्जियों और होल ग्रेन्स वाले आहार पोटेशियम की कमी में एक योगदान कारक बन सकते हैं।

पोटेशियम की कमी से होने वाले गंभीर रोग और नुकसान

पोटेशियम की कमी से होने वाला रोग या नुकसान अक्सर जीवन-घातक हो सकता है, इसलिए विशेषज्ञ की निगरानी आवश्यक है। पोटेशियम की कमी के कारण निम्न रोग और नुकसान हो सकते हैं - 

  • घातक अतालता और कार्डियक अरेस्ट: पोटेशियम की कमी से नुकसान सीधे दिल को होता है। यह वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन जैसी घातक हृदय ताल समस्याओं को ट्रिगर कर सकती है।
  • हाइपोकॅलेमिक पैरालिसिस: पोटेशियम का स्तर बहुत कम होने पर अचानक और गंभीर मांसपेशियों की कमजोरी या अस्थायी लकवा (Paralysis) हो सकता है, जिसे हाइपोकॅलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस कहते हैं।
  • रबडोमायोलिसिस (मांसपेशी का टूटना): अत्यधिक मांसपेशी क्षति (रबडोमायोलिसिस) की स्थिति में टूटी हुई मांसपेशियों से हानिकारक पदार्थ (मायोग्लोबिन) रक्त प्रवाह में लीक होकर किडनी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं और किडनी फेलियर का कारण बन सकते हैं।
  • किडनी की समस्या होना: लंबे समय तक पोटेशियम की कमी से होने वाला रोग किडनी के पानी को केंद्रित करने की क्षमता को खराब करता है, जिससे पेशाब की आवृत्ति बढ़ जाती है और किडनी में सिस्ट बन सकते हैं।

पोटैशियम की कमी को दूर करने के उपाय और इलाज

पोटैशियम की कमी को दूर करने के उपाय उसकी गंभीरता और कारण पर निर्भर करते हैं। चलिए सभी उपायों और इलाज के विकल्पों को समझते हैं। 

  • आहार और जीवनशैली प्रबंधन: हल्की कमी के लिए, उच्च पोटेशियम खाद्य पदार्थ का सेवन बढ़ाना और द्रव हानि के कारणों (जैसे उल्टी या दस्त) का मैनेजमेंट करना ही पर्याप्त होता है।
  • ओरल पोटेशियम सप्लीमेंट्स: मध्यम कमी वाले मरीजों को डॉक्टर की सलाह पर पोटेशियम क्लोराइड सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं। ध्यान दें कि डॉक्टर की सलाह के बिना सप्लीमेंट्स लेना ख़तरनाक हो सकता है, खासकर किडनी की समस्या वाले मरीजों में यह स्थिति अधिक गंभीर मानी जाती है।
  • अंतःशिरा (IV) पोटेशियम: गंभीर कमी (2.5 mEq/L से नीचे) एक मेडिकल इमरजेंसी है। ऐसे मामलों में, हृदय की निगरानी करते हुए पोटेशियम को धीरे-धीरे IV ड्रिप के माध्यम से दिया जाता है।
  • अंतर्निहित कारण का उपचार: यदि कमी किसी दवा या हार्मोनल समस्या के कारण है, तो डॉक्टर उस दवा की खुराक को समायोजित करेंगे या विशिष्ट अंतर्निहित विकार का इलाज करेंगे। मैग्नीशियम के स्तर को सही करना भी अक्सर महत्वपूर्ण होता है।

आहार ही सबसे बड़ा उपचार है

उच्च पोटेशियम खाद्य पदार्थ को अपने दैनिक भोजन में शामिल करना पोटेशियम की कमी को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है। प्रतिदिन 3.5 ग्राम पोटेशियम लेने का लक्ष्य रखें। आप इसे इस टेबल की मदद से समझ सकते हैं - 

खाद्य पदार्थ (उच्च पोटेशियम)

पोटैशियम सामग्री (प्रति सेवारत लगभग)

सफ़ेद बीन्स

1000 mg (प्रति पका हुआ कप)

सूखे मेवे (जर्दाालु)

1500 mg (प्रति 100g)

शकरकंद

540 mg (प्रति मध्यम आलू)

पालक

560 mg (प्रति पका हुआ कप)

एवोकाडो

975 mg (प्रति कप)

टमाटर प्यूरी/पेस्ट

660 mg (प्रति ¼ कप)

केला

420 mg (प्रति मध्यम केला)

मसूर दाल

730 mg (प्रति पका हुआ कप)

दही

380 mg (प्रति कप)

फैटी मछली

मध्यम से उच्च

निष्कर्ष

पोटेशियम की कमी (पोटेशियम की कमी) एक गंभीर लेकिन इसका प्रबंधन स्वास्थ्य चुनौती है। पोटेशियम की कमी के लक्षण को पहचानना और समय पर हस्तक्षेप करना हृदय स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है। सीएमआरआई, सीके बिरला हॉस्पिटल्स में, हमारी विशेषज्ञ टीम इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के सटीक और व्यापक उपचार के लिए प्रतिबद्ध है। अभी अपना परामर्श सत्र बुक करें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न - (FAQ)

शरीर में पोटेशियम की मात्रा कितनी होनी चाहिए?

रक्त में सामान्य पोटैशियम की मात्रा 3.5 से 5.0 mEq/L के बीच होनी चाहिए। 3.5 mEq/L से कम होने पर मेडिकल सहायता आवश्यक है।

पोटेशियम की कमी से कौन सा रोग होता है?

पोटेशियम की कमी से हाइपोकैलीमिया होता है। गंभीर मामलों में, यह घातक हृदय अतालता और अस्थायी हाइपोकॅलेमिक पैरालिसिस को जन्म दे सकता है।

शरीर में पोटेशियम की कमी कैसे दूर करें?

कमी को कारण का इलाज करके दूर किया जाता है। हल्की कमी को उच्च पोटेशियम खाद्य पदार्थ से और गंभीर कमी को डॉक्टर की सलाह पर ओरल/IV सप्लीमेंट्स से दूर किया जाता है।

शरीर में पोटेशियम की कमी क्यों होती है?

यह मुख्य रूप से शरीर से अत्यधिक नुकसान के कारण होती है, जैसे कि लंबे दस्त/उल्टी, मूत्रवर्धक दवाओं का उपयोग, क्रोनिक किडनी रोग, या हार्मोनल समस्याएं।

पोटेशियम की कमी से क्या दिक्कत होती है?

इससे मांसपेशियों में कमजोरी, ऐंठन, कब्ज, उच्च रक्तचाप, और सबसे खतरनाक, अनियमित दिल की धड़कन (Arrhythmia) की दिक्कत होती है।

पोटेशियम की कमी होने पर/के लिए/में क्या खाना चाहिए?

आपको उच्च पोटेशियम खाद्य पदार्थ खाने चाहिए, जिसमें केला, शकरकंद, पालक, एवोकाडो, बीन्स, और सूखे मेवे शामिल हैं।

Written and Verified by:

Dr. Rajarshi Sengupta

Dr. Rajarshi Sengupta

Consultant Exp: 35 Yr

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Dr. Rajarshi Sengupta is a Consultant in Internal Medicine Dept. at CMRI, Kolkata, with over 23 years of experience. He specializes in the management of infectious diseases such as dengue, malaria, typhoid, and diphtheria, with a strong focus on patient care and immunizations.

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