क्या फैटी लिवर दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाता है? जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं।
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क्या फैटी लिवर दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाता है? जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं।

Cardiology | by Dr. Dhiman Kahali on 18/08/2026 | Last Updated : 20/08/2026

Summary

  • फैटी लिवर अब सिर्फ लिवर की बीमारी नहीं, बल्कि दिल की बीमारी का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
  • हाल की रिपोर्ट के अनुसार फैटी लिवर वाले लोगों में हार्ट अटैक जैसी गंभीर घटना का खतरा करीब 69% तक ज्यादा पाया गया।
  • भारत में करीब 38 से 40% वयस्क आबादी फैटी लिवर यानी MASLD से प्रभावित है, और इनमें से बड़ा हिस्सा हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है।
  • फैटी लिवर के मरीजों को लिवर के साथ-साथ हार्ट की जांच भी करानी चाहिए, खासकर अगर मोटापा, डायबिटीज या फैमिली हिस्ट्री मौजूद हो।
  • समय पर पहचान और सही डाइट-लाइफस्टाइल से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सीने में हल्का दर्द, थोड़ी घबराहट, और सांस फूलने जैसा एहसास, ये शायद आपको गैस जैसा लग सकता है, लेकिन जांच में अक्सर ये सारे लक्षण ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल या फिर दोनों की तरफ संकेत कर सकते हैं। यदि आपको किसी भी रूटीन जांच में फैटी लिवर की समस्या का निदान हुआ है और ये लक्षण भी आपको परेशान कर रहे हैं, तो आपको सबसे पहला काम हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए। 

हम में से बहुत से लोग फैटी लिवर को मामूली सी बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, ये सोचकर कि यह सिर्फ खान-पान से जुड़ी एक आम समस्या है। लेकिन हकीकत यह है कि फैटी लिवर अकेले नहीं आता, यह अक्सर अपने साथ दिल की बीमारी का खतरा भी लेकर आता है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को फैटी लिवर बताया गया है, तो यह लेख आपके लिए है। और अगर आपको सीने में भारीपन, थकान या सांस फूलने जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो देर न करें, हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें और समय रहते सही जांच कराएं।

क्या फैटी लिवर सिर्फ लिवर की बीमारी है या दिल के लिए भी खतरा है?

लंबे समय तक फैटी लिवर को केवल लिवर से जुड़ी समस्या या फिर अधिक शराब पीने वाले लोगों की बीमारी माना जाता रहा है। लेकिन अब मेडिकल साइंस इसे बिल्कुल अलग नजरिए से देख रही है। आजकल इसे मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टिएटोटिक लिवर डिजीज यानी MASLD कहा जाता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर शरीर के मेटाबॉलिज्म से जुड़ी गड़बड़ियों का नतीजा है। यही वजह है कि यह लिवर तक सीमित नहीं रहती। 

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के हेपेटोलॉजी विभाग के एक विशेषज्ञ के अनुसार, MASLD से पीड़ित मरीजों में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण अक्सर लिवर की बीमारी नहीं, बल्कि हृदय रोग बनता है। दुनियाभर में करीब 30% लोग इस स्थिति से प्रभावित बताए जाते हैं, और भारत की तस्वीर तो और भी चिंताजनक है। हाल में हुई एक बड़ी स्टडी के अनुसार भारत के करीब 38% से 40% वयस्क MASLD से जूझ रहे हैं, यानी हर दस में से चार भारतीय इससे प्रभावित होते हैं।

फैटी लिवर और दिल की बीमारी के बीच क्या संबंध है?

सवाल यह उठता है कि आखिर लिवर में जमा चर्बी (फैट) का दिल से क्या लेना-देना? इसका जवाब शरीर के भीतर चल रही एक जटिल प्रक्रिया में छिपा है। जब लिवर में चर्बी जमा होने लगती है, तो यह शरीर में सूजन बढ़ाने वाले तत्व और हानिकारक रसायन छोड़ना शुरू कर देता है। ये तत्व धमनियों की भीतरी दीवार को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे वहां प्लाक जमा होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। 

इसी साल प्रकाशित हुई एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्टडी, जिसमें करीब 3,637 मरीजों का विश्लेषण किया गया, में यह बात सामने आई कि फैटी लिवर वाले मरीजों की धमनियों में ऐसा प्लाक करीब 24% ज्यादा पाया गया है, जो नरम और आसानी से टूटने वाला होता है, यही प्लाक हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण बनता है। इसी स्टडी में यह भी पाया गया कि मोटापा और दूसरे जोखिम कारकों को अलग रखने के बाद भी, फैटी लिवर वाले मरीजों में गंभीर हृदय संबंधी घटना का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में करीब 69% ज्यादा था। सरल भाषा में समझें तो फैटी लिवर सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि दिल की सेहत का एक अलार्म भी है।

किन लोगों में फैटी लिवर के साथ हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है?

फैटी लिवर के सभी मामलों में एक जैसा खतरा नहीं होता है, लेकिन कुछ स्थितियां इसे कई गुना बढ़ा देती हैं। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज है, उनमें फैटी लिवर होने की दर 52% से भी ज्यादा देखी गई है, और ऐसे मरीजों में हृदय रोग का जोखिम भी सबसे ज्यादा रहता है। इसके अतिरिक्त पेट के आसपास जमा चर्बी यानी विसरल फैट, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ट्राइग्लिसराइड्स, कम गुड कोलेस्ट्रॉल यानी HDL, और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे लोग भी इस दायरे में आते हैं। 

दिलचस्प बात यह है कि अब यह सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही। हमारे यहां कोलकाता के बीएम बिड़ला हॉस्पिटल में हाल के वर्षों में तीस से चालीस साल की उम्र के युवा मरीज भी फैटी लिवर के साथ हाई कोलेस्ट्रॉल और शुरुआती दिल की बीमारी की शिकायत लेकर आ रहे हैं, जिनकी वजह अक्सर लंबे समय तक बैठे रहने वाली जीवनशैली, जंक फूड और नींद की कमी होती है। 

फैटी लिवर के मरीजों को कौन-कौन से हार्ट और लिवर टेस्ट कराने चाहिए?

अगर आपको फैटी लिवर होने की पुष्टि हो चुकी है, तो सिर्फ लिवर तक सीमित सोच रखना सही नहीं है। 

लिवर की जांच के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जाते हैं - 

  • FIB-4 स्कोर (फाइब्रोसिस-4 इंडेक्स): लिवर की स्थिति का अंदाजा लगाने के लिए ये टेस्ट कराया जाता है।
  • लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT): लिवर की कार्यक्षमता जांचने के लिए ये ब्लड टेस्ट होता है।
  • फाइब्रोस्कैन: यह एक नॉन-इनवेसिव जांच है, जो लिवर में सख्ती (Stiffness) का पता लगाती है।

हार्ट और मेटाबॉलिज्म की जांच के लिए निम्न जांच कराई जाती है - 

  • लिपिड प्रोफाइल: कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच के लिए ब्लड टेस्ट कराया जाता है।
  • ब्लड शुगर टेस्ट: फास्टिंग ब्लड शुगर या HbA1c की जांच होती है।
  • ब्लड प्रेशर (BP): इसकी नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है।
  • एडवांस हार्ट टेस्ट: डॉक्टर की सलाह पर ECG या कोरोनरी कैल्शियम स्कोरिंग की जांच होती है।

इस स्थिति में खास बातये है कि दिल की रूटीन सीटी (CT) स्कैन जांच के दौरान भी फैटी लिवर पकड़ा जा सकता है। इसलिए बीमारी के हर पहलू को कवर करने के लिए मरीजों को गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और कार्डियोलॉजी, दोनों विभागों की संयुक्त सलाह लेनी चाहिए।

फैटी लिवर और दिल की बीमारी का जोखिम कैसे कम करें? 

फैटी लिवर और दिल की बीमारी का जोखिम कैसे कम करें 

फैटी लिवर और दिल की बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए आप निम्नलिखित प्रमाणित एवं प्रभावी उपायों को अपना सकते हैं - 

  • वजन कम करें: शरीर के कुल वजन का सिर्फ 7-10% कम करने से लिवर की चर्बी घटती है और कोलेस्ट्रॉल व BP भी कंट्रोल में आता है।
  • नियमित व्यायाम: रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज चहलकदमी (Brisk Walk) या हल्की एक्सरसाइज करें।
  • खानपान में सुधार: डाइट में हरी सब्जियां और साबुत अनाज बढ़ाएं। तला-भुना और मीठा खाना बिल्कुल सीमित कर दें।
  • शराब और सिगरेट से दूरी: शराब से पूरी तरह परहेज करें। धूम्रपान (Smoking) तुरंत छोड़ें क्योंकि यह धमनियों (Arteries) को बहुत तेजी से नुकसान पहुंचाता है।
  • पर्याप्त नींद और धैर्य: अच्छी नींद लें। याद रखें कि यह एक दिन का बदलाव नहीं बल्कि लंबे समय की लाइफस्टाइल है, जिसे परिवार के साथ और सहयोग से आसानी से अपनाया जा सकता है।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट से कब मिलें?

यदि आपको निम्नलिखित लक्षण देखने को मिले तो सीधे गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट से मिलने की सलाह दी जाती है - 

  • गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की सलाह: रूटीन जांच में फैटी लिवर की पुष्टि होते ही डॉक्टर से मिलें, भले ही आपको कोई लक्षण महसूस न हो रहे हों।
  • कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह: अगर फैटी लिवर के साथ आपको मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या हाई BP की समस्या है, तो हार्ट स्पेशलिस्ट को जरूर दिखाएं।
  • इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें: सीने में भारीपन, चलने-फिरने पर सीने में हल्का दर्द बढ़ना, सांस फूलना, अत्यधिक थकान या पैरों में सूजन होने पर तुरंत जांच कराएं।
  • पारिवारिक हिस्ट्री (Family History): यदि आपके परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा है, तो 40 साल की उम्र के बाद हर साल लिवर और हार्ट की जांच कराएं। यह बीमारी बिना किसी चेतावनी के चुपचाप बढ़ती है, इसलिए सतर्कता ही बचाव है।

निष्कर्ष

फैटी लिवर को हल्के में लेना अब कोई विकल्प नहीं रह गया। यह सिर्फ एक अंग की बीमारी नहीं, बल्कि पूरे शरीर, खासकर दिल की सेहत से जुड़ा एक गंभीर संकेत है। सही समय पर पहचान, नियमित जांच, और थोड़ी सी जीवनशैली में समझदारी भरा बदलाव इस खतरे को काफी हद तक टाल सकता है। अगर आपको या आपके किसी अपने को फैटी लिवर की समस्या है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय आज ही एक कदम उठाएं। पहले आप एक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से मिलें और यदि आपके ब्लड टेस्ट में दिल के पैरामीटर में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो बना देर किए हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से मिलें और एक स्वस्थ दिल की तरफ अपना पहला कदम बढ़ाएं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

फैटी लिवर से शरीर में लिपिड मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है, जिससे खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ जाते हैं जबकि गुड कोलेस्ट्रॉल यानी HDL घट जाता है। यह असंतुलन धमनियों में प्लाक जमने का खतरा बढ़ाता है।

Written and Verified by:

Dr. Dhiman Kahali

Dr. Dhiman Kahali

Director Exp: 47 Yr

Interventional Cardiology

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Dr. Dhiman Kahali is the Director of Interventional Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 37 years of experience. He specializes in angioplasty, mitral balloon dilation, and peripheral vascular interventions, and has been honored with the Gandhi Centenary and Mother Teresa International Awards.

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