
सीने में हल्का दर्द, थोड़ी घबराहट, और सांस फूलने जैसा एहसास, ये शायद आपको गैस जैसा लग सकता है, लेकिन जांच में अक्सर ये सारे लक्षण ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल या फिर दोनों की तरफ संकेत कर सकते हैं। यदि आपको किसी भी रूटीन जांच में फैटी लिवर की समस्या का निदान हुआ है और ये लक्षण भी आपको परेशान कर रहे हैं, तो आपको सबसे पहला काम हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए।
हम में से बहुत से लोग फैटी लिवर को मामूली सी बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, ये सोचकर कि यह सिर्फ खान-पान से जुड़ी एक आम समस्या है। लेकिन हकीकत यह है कि फैटी लिवर अकेले नहीं आता, यह अक्सर अपने साथ दिल की बीमारी का खतरा भी लेकर आता है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को फैटी लिवर बताया गया है, तो यह लेख आपके लिए है। और अगर आपको सीने में भारीपन, थकान या सांस फूलने जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो देर न करें, हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें और समय रहते सही जांच कराएं।
लंबे समय तक फैटी लिवर को केवल लिवर से जुड़ी समस्या या फिर अधिक शराब पीने वाले लोगों की बीमारी माना जाता रहा है। लेकिन अब मेडिकल साइंस इसे बिल्कुल अलग नजरिए से देख रही है। आजकल इसे मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टिएटोटिक लिवर डिजीज यानी MASLD कहा जाता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर शरीर के मेटाबॉलिज्म से जुड़ी गड़बड़ियों का नतीजा है। यही वजह है कि यह लिवर तक सीमित नहीं रहती।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के हेपेटोलॉजी विभाग के एक विशेषज्ञ के अनुसार, MASLD से पीड़ित मरीजों में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण अक्सर लिवर की बीमारी नहीं, बल्कि हृदय रोग बनता है। दुनियाभर में करीब 30% लोग इस स्थिति से प्रभावित बताए जाते हैं, और भारत की तस्वीर तो और भी चिंताजनक है। हाल में हुई एक बड़ी स्टडी के अनुसार भारत के करीब 38% से 40% वयस्क MASLD से जूझ रहे हैं, यानी हर दस में से चार भारतीय इससे प्रभावित होते हैं।
सवाल यह उठता है कि आखिर लिवर में जमा चर्बी (फैट) का दिल से क्या लेना-देना? इसका जवाब शरीर के भीतर चल रही एक जटिल प्रक्रिया में छिपा है। जब लिवर में चर्बी जमा होने लगती है, तो यह शरीर में सूजन बढ़ाने वाले तत्व और हानिकारक रसायन छोड़ना शुरू कर देता है। ये तत्व धमनियों की भीतरी दीवार को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे वहां प्लाक जमा होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
इसी साल प्रकाशित हुई एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्टडी, जिसमें करीब 3,637 मरीजों का विश्लेषण किया गया, में यह बात सामने आई कि फैटी लिवर वाले मरीजों की धमनियों में ऐसा प्लाक करीब 24% ज्यादा पाया गया है, जो नरम और आसानी से टूटने वाला होता है, यही प्लाक हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण बनता है। इसी स्टडी में यह भी पाया गया कि मोटापा और दूसरे जोखिम कारकों को अलग रखने के बाद भी, फैटी लिवर वाले मरीजों में गंभीर हृदय संबंधी घटना का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में करीब 69% ज्यादा था। सरल भाषा में समझें तो फैटी लिवर सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि दिल की सेहत का एक अलार्म भी है।
फैटी लिवर के सभी मामलों में एक जैसा खतरा नहीं होता है, लेकिन कुछ स्थितियां इसे कई गुना बढ़ा देती हैं। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज है, उनमें फैटी लिवर होने की दर 52% से भी ज्यादा देखी गई है, और ऐसे मरीजों में हृदय रोग का जोखिम भी सबसे ज्यादा रहता है। इसके अतिरिक्त पेट के आसपास जमा चर्बी यानी विसरल फैट, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ट्राइग्लिसराइड्स, कम गुड कोलेस्ट्रॉल यानी HDL, और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे लोग भी इस दायरे में आते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि अब यह सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही। हमारे यहां कोलकाता के बीएम बिड़ला हॉस्पिटल में हाल के वर्षों में तीस से चालीस साल की उम्र के युवा मरीज भी फैटी लिवर के साथ हाई कोलेस्ट्रॉल और शुरुआती दिल की बीमारी की शिकायत लेकर आ रहे हैं, जिनकी वजह अक्सर लंबे समय तक बैठे रहने वाली जीवनशैली, जंक फूड और नींद की कमी होती है।
अगर आपको फैटी लिवर होने की पुष्टि हो चुकी है, तो सिर्फ लिवर तक सीमित सोच रखना सही नहीं है।
इस स्थिति में खास बातये है कि दिल की रूटीन सीटी (CT) स्कैन जांच के दौरान भी फैटी लिवर पकड़ा जा सकता है। इसलिए बीमारी के हर पहलू को कवर करने के लिए मरीजों को गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और कार्डियोलॉजी, दोनों विभागों की संयुक्त सलाह लेनी चाहिए।

फैटी लिवर और दिल की बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए आप निम्नलिखित प्रमाणित एवं प्रभावी उपायों को अपना सकते हैं -
यदि आपको निम्नलिखित लक्षण देखने को मिले तो सीधे गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट से मिलने की सलाह दी जाती है -
फैटी लिवर को हल्के में लेना अब कोई विकल्प नहीं रह गया। यह सिर्फ एक अंग की बीमारी नहीं, बल्कि पूरे शरीर, खासकर दिल की सेहत से जुड़ा एक गंभीर संकेत है। सही समय पर पहचान, नियमित जांच, और थोड़ी सी जीवनशैली में समझदारी भरा बदलाव इस खतरे को काफी हद तक टाल सकता है। अगर आपको या आपके किसी अपने को फैटी लिवर की समस्या है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय आज ही एक कदम उठाएं। पहले आप एक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से मिलें और यदि आपके ब्लड टेस्ट में दिल के पैरामीटर में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो बना देर किए हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से मिलें और एक स्वस्थ दिल की तरफ अपना पहला कदम बढ़ाएं।
फैटी लिवर से शरीर में लिपिड मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है, जिससे खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ जाते हैं जबकि गुड कोलेस्ट्रॉल यानी HDL घट जाता है। यह असंतुलन धमनियों में प्लाक जमने का खतरा बढ़ाता है।
हां, फैटी लिवर से जुड़ी इंसुलिन रेजिस्टेंस और सूजन की प्रक्रिया रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ा सकती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होना आम पाया गया है।
बिल्कुल, खासकर अगर साथ में मोटापा, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल हो। नियमित लिपिड प्रोफाइल, ब्लड प्रेशर और जरूरत पड़ने पर ECG जैसी जांच कराना दिल की सेहत के लिए जरूरी है।
जी हां, कुल वजन का सात से दस प्रतिशत कम करने से लिवर में जमा चर्बी घटती है और साथ ही कोलेस्ट्रॉल व ब्लड प्रेशर भी बेहतर होता है, जिससे हृदय रोग का खतरा भी काफी कम हो जाता है।
फैटी लिवर अक्सर मेटाबॉलिक सिंड्रोम का हिस्सा होता है, जिसमें मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हाई शुगर और असामान्य कोलेस्ट्रॉल स्तर एक साथ मौजूद रहते हैं, और यह मिलकर दिल की बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।
हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और हेल्दी फैट युक्त भोजन को प्राथमिकता दें। तला-भुना, अत्यधिक मीठा और प्रोसेस्ड फूड कम करें, और शराब से पूरी तरह परहेज करें।
शुरुआती स्टेज में सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज और वजन नियंत्रण से फैटी लिवर काफी हद तक ठीक हो सकता है। हालांकि अगर स्थिति बढ़ जाए, तो डॉक्टर की निगरानी में लंबे समय तक इलाज जरूरी हो सकता है।
हां, यह एक गलतफहमी है कि फैटी लिवर सिर्फ मोटे लोगों को होता है। पेट के आसपास जमा चर्बी, खराब खान-पान और अनुवांशिक कारणों से सामान्य वजन वाले लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
Written and Verified by:

Dr. Anil Mishra is the Director of Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 33 years of experience. He specializes in complex angioplasties, pacemaker & AICD implantation, CRT-D, TAVI, and was the first in Eastern India to perform rotablation and implant leadless pacemakers.
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