
1. रिपोर्ट के प्रमुख पैरामीटर
HDL (Good): नसों का 'सफाई कर्मचारी', जितना ज्यादा, उतना बेहतर।
LDL (Bad): नसों में जमने वाला 'फैट’, जितना कम, उतना सुरक्षित।
Triglycerides: खून में जमा 'एक्स्ट्रा फैट' और इसका बढ़ना हृदय रोग का संकेत है।
VLDL: सबसे जिद्दी बैड कोलेस्ट्रॉल, जो धमनियों में ब्लॉकेज पैदा करता है।
2. मुख्य नॉर्मल रेंज (Target Levels)
टोटल कोलेस्ट्रॉल: 200 mg/dL से कम।
LDL (Bad): 100 mg/dL से कम रखें।
HDL (Good): 60 mg/dL से ऊपर आदर्श है।
Triglycerides: 150 mg/dL के नीचे होना चाहिए।
3. टेस्ट के लिए जरूरी सावधानी
फास्टिंग: कम से कम 10-12 घंटे का उपवास (Fasting) अनिवार्य है।
परहेज: टेस्ट से 24 घंटे पहले शराब और भारी भोजन से बचें।
निष्कर्ष: यदि आपका Cholesterol/HDL Ratio 5 से ऊपर है, तो यह दिल की सेहत के लिए चेतावनी है। सही डाइट और व्यायाम से इसे बदला जा सकता है।
जीवन में कभी न कभी आपका लिपिड प्रोफाइल टेस्ट हुआ ही होगा, और यदि आपका नहीं हुआ होगा तो परिवार में किसी का हुआ होगा। आपने अपने रिपोर्ट में लिखे भारी-भरकम शब्दों और बढ़े हुए नंबर्स को देखकर चिंता भी महसूस की होगी। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि इन शब्दों और आंकड़ों का आपके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
सरल शब्दों में समझा जाए तो लिपिड प्रोफाइल टेस्ट आपके शरीर की नसों में ब्लॉकेज का संकेत देता है। यही कारण है कि लिपिड प्रोफाइल टेस्ट एक बहुत ही महत्वपूर्ण परीक्षण है, जो आपके शरीर में फैट्स (कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, इत्यादि) के स्तर को मापता है और यह बताता है कि आपका दिल कितना स्वस्थ है। हमारे विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी ही हृदय रोग के खिलाफ आपका सबसे बड़ा हथियार है। आइए, आपकी इस रिपोर्ट के पीछे की कहानी को आसान भाषा में समझते हैं। इस ब्लॉग में हम लिपिड प्रोफाइल टेस्ट, इसके महत्व, और कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के बारे में सब कुछ जानेंगे, जो आपको जानना चाहिए। कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए आपको एक सही योजना की आवश्यकता होगी, जिसके लिए आप कोलकाता में हमारे हृदय रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श ले सकते हैं।
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट एक ब्लड टेस्ट है, जो आपके शरीर में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के लिपिड (फैट्स) के स्तर को मापता है। इसमें मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच की जाती है। यह टेस्ट आपके दिल और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को मापने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अक्सर इस टेस्ट का सुझाव हाई कोलेस्ट्रोल के लक्षण दिखने पर दिया जाता है। अक्सर इस टेस्ट को हेल्थ पैकेज में भी इस टेस्ट को शामिल किया जाता है।
जब डॉक्टर इस टेस्ट का सुझाव देते हैं, तो वह लिपिड प्रोफाइल लिखते हैं, जिसमें 'Lipid' शब्द का मतलब है वसा या फैट। अक्सर लोग रिपोर्ट में इतने सारे नाम देखकर उलझ जाते हैं। आइए, एक-एक करके उन सभी शब्दों को समझते हैं, जिन्होंने आपकी रातों की नींद को उड़ा रखा है -
इस सेक्शन में हम केवल यह नहीं जानेंगे कि यह क्या है, बल्कि यह समझेंगे कि इसका सही स्तर क्या होना चाहिए और इन्हें कंट्रोल कैसे करना है।
जैसा कि हमने ऊपर समझा, यह 'अच्छा' कोलेस्ट्रॉल है। लेकिन इसे केवल जानना काफी नहीं है, इसका स्तर 60 mg/dL से ऊपर रखना आपके दिल को स्वस्थ रखने की गारंटी देता है।
यह 'खराब' कोलेस्ट्रॉल है जिसे 100 mg/dL से कम रखना अनिवार्य है। जब यह बढ़ता है, तो नसों के अंदर 'प्लास्टर' की तरह जमने लगता है, जिससे नसों में लचीलापन खत्म हो जाता है और दिल को रक्त पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
VLDL का मुख्य काम खून में ट्राइग्लिसराइड्स को पहुंचाना है। इसका सामान्य स्तर 2-30 mg/dL के बीच होना चाहिए। VLDL को नियंत्रित रखने के लिए आहार में बदलाव और शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण होती है। इसका स्तर उच्च होने पर, दिल और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
Note:
क्या आप जानते हैं? जिसे हम आम भाषा में 'कोलेस्ट्रॉल के प्रकार' कहते हैं, वे असल में लिपोप्रोटीन (Lipoproteins) होते हैं। कोलेस्ट्रॉल खुद एक वसा (Fat) है, जो खून में अकेले नहीं तैर सकता, इसलिए ये प्रोटीन उसे 'वाहकों' (Carriers) की तरह शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाते हैं। यही कारण है कि रिपोर्ट में इन्हें HDL, LDL और VLDL जैसे नामों से दिखाया जाता है।
ट्राइग्लिसराइड्स शरीर में कैलोरी का रूप होता है, जो अतिरिक्त कैलोरी को वसा के रूप में स्टोर करते हैं। यह ऊर्जा का मुख्य स्रोत होते हैं, लेकिन यदि इसका स्तर अत्यधिक बढ़ जाए, तो यह दिल की बीमारी, स्ट्रोक और पैंक्रियाटाइटिस जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
नीचे एक टेबल दी गई है, जिससे आप अपनी लिपिड प्रोफाइल रिपोर्ट को आसानी से समझ सकते हैं, और सही समय पर सही कदम उठा सकते हैं।

रिपोर्ट में यह पैरामीटर आपको यह बताते हैं कि आपके कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर हृदय स्वास्थ्य पर कैसा असर पड़ रहा है।
यदि आपका कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ा हुआ है, तो कुछ बदलाव करके आप इनका स्तर नियंत्रित कर सकते हैं। उनमें से कुछ आसान उपाय इस प्रकार हैं -
अक्सर गलत तैयारी की वजह से रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के आंकड़े गलत आ सकते हैं। सटीक परिणामों के लिए इन बातों का खास ख्याल रखें -
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि आपके शरीर में हृदय स्वास्थ्य से संबंधित फैट्स का स्तर कितना है। यह टेस्ट आपके लिपिड्स (कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स) के स्तर की जांच करता है, जो हृदय रोग, स्ट्रोक, और अन्य कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं के जोखिम के संकेत हो सकते हैं। यह रक्त वाहिकाओं में प्लाक (चर्बी) के जमा होने का आकलन भी करता है, जो समय के साथ रक्त प्रवाह को बाधित कर सकता है।
हाल ही में, कई शोधों में यह पाया गया है कि हृदय रोगों से जुड़ी स्थितियां मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती हैं। उच्च कोलेस्ट्रॉल, LDL और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर का मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है। तनाव, चिंता और डिप्रेशन के लक्षण हृदय रोगों की संभावना को बढ़ा सकते हैं। इसलिए, केवल शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना बहुत जरूरी है।
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट आपके दिल के स्वास्थ्य को समझने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह टेस्ट आपके कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को जानने में मदद करता है और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अवसर प्रदान करता है। नियमित रूप से अपने लिपिड प्रोफाइल की जांच करवाएं और अपने दिल की सुरक्षा करें।
हां, इस टेस्ट के लिए 8-12 घंटे का उपवास आवश्यक है। आप पानी पी सकते हैं, लेकिन अन्य किसी भी खाद्य पदार्थ या पेय का सेवन नहीं करना चाहिए।
यह टेस्ट हर 5 साल में एक बार कराना चाहिए, लेकिन यदि आपको हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह या अन्य संबंधित समस्याएं हैं, तो इसे साल में एक बार करवाना बेहतर होता है। सामान्य रूप से आप हर वर्ष भी इस टेस्ट को करा सकते हैं।
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में टोटल कोलेस्ट्रॉल, एचडीएल, एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर मापा जाता है।
बच्चों में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट आमतौर पर तब हो जाता है, जब उन्हें हृदय रोग का खतरा हो, जैसे कि परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो।
उच्च कोलेस्ट्रॉल के अधिकांश मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं, लेकिन यदि आप शरीर में थकान, दर्द या असामान्य संकेत महसूस करते हैं, तो यह आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर का संकेत हो सकता है।
Written and Verified by:

Dr. Rakesh Sarkar is a Senior Consultant in Cardiology & Electrophysiology at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 11 years of experience. He specializes in complex arrhythmia management, including atrial fibrillation, ventricular tachycardia, CRT-D, and conduction system pacing.
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