लिपिड प्रोफाइल क्या है? कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को जानें
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लिपिड प्रोफाइल क्या है? कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को जानें

Cardiology | by Dr. Rakesh Sarkar on 18/06/2025 | Last Updated : 06/02/2026

Table of Contents

Summary

1. रिपोर्ट के प्रमुख पैरामीटर

  • HDL (Good): नसों का 'सफाई कर्मचारी', जितना ज्यादा, उतना बेहतर।

  • LDL (Bad): नसों में जमने वाला 'फैट’, जितना कम, उतना सुरक्षित।

  • Triglycerides: खून में जमा 'एक्स्ट्रा फैट' और इसका बढ़ना हृदय रोग का संकेत है।

  • VLDL: सबसे जिद्दी बैड कोलेस्ट्रॉल, जो धमनियों में ब्लॉकेज पैदा करता है।

 

2. मुख्य नॉर्मल रेंज (Target Levels)

  • टोटल कोलेस्ट्रॉल: 200 mg/dL से कम।

  • LDL (Bad): 100 mg/dL से कम रखें।

  • HDL (Good): 60 mg/dL से ऊपर आदर्श है।

  • Triglycerides: 150 mg/dL के नीचे होना चाहिए।

 

3. टेस्ट के लिए जरूरी सावधानी

  • फास्टिंग: कम से कम 10-12 घंटे का उपवास (Fasting) अनिवार्य है।

  • परहेज: टेस्ट से 24 घंटे पहले शराब और भारी भोजन से बचें।

 

निष्कर्ष: यदि आपका Cholesterol/HDL Ratio 5 से ऊपर है, तो यह दिल की सेहत के लिए चेतावनी है। सही डाइट और व्यायाम से इसे बदला जा सकता है।

जीवन में कभी न कभी आपका लिपिड प्रोफाइल टेस्ट हुआ ही होगा, और यदि आपका नहीं हुआ होगा तो परिवार में किसी का हुआ होगा। आपने अपने रिपोर्ट में लिखे भारी-भरकम शब्दों और बढ़े हुए नंबर्स को देखकर चिंता भी महसूस की होगी। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि इन शब्दों और आंकड़ों का आपके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है? 

सरल शब्दों में समझा जाए तो लिपिड प्रोफाइल टेस्ट आपके शरीर की नसों में ब्लॉकेज का संकेत देता है। यही कारण है कि लिपिड प्रोफाइल टेस्ट एक बहुत ही महत्वपूर्ण परीक्षण है, जो आपके शरीर में फैट्स (कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, इत्यादि) के स्तर को मापता है और यह बताता है कि आपका दिल कितना स्वस्थ है। हमारे विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी ही हृदय रोग के खिलाफ आपका सबसे बड़ा हथियार है। आइए, आपकी इस रिपोर्ट के पीछे की कहानी को आसान भाषा में समझते हैं। इस ब्लॉग में हम लिपिड प्रोफाइल टेस्ट, इसके महत्व, और कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के बारे में सब कुछ जानेंगे, जो आपको जानना चाहिए। कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए आपको एक सही योजना की आवश्यकता होगी, जिसके लिए आप कोलकाता में हमारे हृदय रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श ले सकते हैं।

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट क्या है और यह क्यों जरूरी होता है?

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट एक ब्लड टेस्ट है, जो आपके शरीर में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के लिपिड (फैट्स) के स्तर को मापता है। इसमें मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच की जाती है। यह टेस्ट आपके दिल और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को मापने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अक्सर इस टेस्ट का सुझाव हाई कोलेस्ट्रोल के लक्षण दिखने पर दिया जाता है। अक्सर इस टेस्ट को हेल्थ पैकेज में भी इस टेस्ट को शामिल किया जाता है।

आसान भाषा में अपनी रिपोर्ट को डिकोड करें

जब डॉक्टर इस टेस्ट का सुझाव देते हैं, तो वह लिपिड प्रोफाइल लिखते हैं, जिसमें 'Lipid' शब्द का मतलब है वसा या फैट। अक्सर लोग रिपोर्ट में इतने सारे नाम देखकर उलझ जाते हैं। आइए, एक-एक करके उन सभी शब्दों को समझते हैं, जिन्होंने आपकी रातों की नींद को उड़ा रखा है - 

  • Total Cholesterol (कुल कोलेस्ट्रॉल): यह आपके खून में मौजूद सभी प्रकार के कोलेस्ट्रॉल का जोड़ है। आप इसे ऐसा समझ सकते हैं कि आपके शरीर में मौजूद सभी फैट (कोलेस्ट्रॉल) की संख्या इससे पता चलती है। यह संख्या जितनी संतुलित होगी, नसों पर ट्रैफिक या ब्लॉकेज उतना ही कम होगा।
  • HDL (Good Cholesterol): हम इसे नसों का सफाई कर्मचारी कह सकते हैं, जो शरीर में हानिकारक फैट को शरीर से निकालने का कार्य करता है। यह नसों में जमा फालतू चर्बी को उठाता है और उसे वापस लिवर तक ले जाता है ताकि शरीर उसे बाहर निकाल सके। यह कर्मचारी जितने ज्यादा होंगे, नसें उतनी ही साफ रहेंगी। इसलिए इसका लेवल ज्यादा होना अच्छा है।
  • LDL (Bad Cholesterol): इसे आप 'Bad Garbage' समझें। यह वह जिद्दी फैट है, जो नसों की दीवारों पर चिपक जाता है। यदि यह ज्यादा बढ़ जाए, तो यह नसों को पतला कर देगा, जिससे रक्त संचार बंद हो जाएगा और हृदय को रक्त को पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। यह जितना कम होगा, उतना ही दिल के लिए सुरक्षित है।
  • VLDL (Very Low-Density Lipoprotein): VLDL भी LDL की तरह एक प्रकार का बैड कोलेस्ट्रॉल है, लेकिन यह थोड़ा ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यह ट्राइग्लिसराइड्स को ढोता है। यह नसों में प्लाक (चर्बी की परत) बनाने में सबसे ज्यादा 'सक्रिय' भूमिका निभाता है। इसे आप बहुत ज्यादा जिद्दी कोलेस्ट्रॉल मान सकते हैं।
  • Triglycerides (ट्राइग्लिसराइड्स): जब हम जरूरत से ज्यादा कैलोरी खाते हैं (खासकर मीठा या तला हुआ), तो शरीर उस बची हुई ऊर्जा को 'फैट' के रूप में खून में जमा कर देता है। अगर खून में यह 'ऊर्जा' बढ़ जाए, तो खून गाढ़ा होने लगता है और दिल पर दबाव बढ़ता है।
  • कोलेस्ट्रॉल/HDL रेशो: यह आपकी रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बताता है कि 'बैड फैट' यानी कचरा (Total Cholesterol) के मुकाबले उसे साफ करने वाले 'ट्रक' (HDL) कितने हैं। यदि यह रेशो 5 से ऊपर है, तो इसका मतलब है फैट ज्यादा है और सफाई कर्मचारी कम। इसके परिणामस्वरूप दिल की समस्याएं उत्पन्न होने लग जाती हैं। याद रखें कि सिर्फ टोटल कोलेस्ट्रॉल का कम होना काफी नहीं है, आपके HDL (अच्छे) और LDL (बुरे) कोलेस्ट्रॉल का सही अनुपात (Ratio) में होना असली स्वास्थ्य की निशानी है।
  • Non-HDL Cholesterol: इसमें वह सारा कोलेस्ट्रॉल आता है जो 'अच्छा' नहीं है। यानी आपके टोटल कोलेस्ट्रॉल में से अच्छे 'HDL' को हटा देने पर जो बचता है, वह सब खतरनाक है। डॉक्टर आजकल इस नंबर पर बहुत ध्यान देते हैं, क्योंकि यह दिल के दौरे के जोखिम का सबसे सटीक अनुमान देता है।

कोलेस्ट्रॉल कितने प्रकार का होता है?

इस सेक्शन में हम केवल यह नहीं जानेंगे कि यह क्या है, बल्कि यह समझेंगे कि इसका सही स्तर क्या होना चाहिए और इन्हें कंट्रोल कैसे करना है।

HDL (High-Density Lipoprotein) – "अच्छा" कोलेस्ट्रॉल

जैसा कि हमने ऊपर समझा, यह 'अच्छा' कोलेस्ट्रॉल है। लेकिन इसे केवल जानना काफी नहीं है, इसका स्तर 60 mg/dL से ऊपर रखना आपके दिल को स्वस्थ रखने की गारंटी देता है।

  • अब सवाल उठता है कि HDL कैसे बढ़ाएं? रोजाना 30 मिनट की तेज सैर (Brisk Walking), ओमेगा-3 फैटी एसिड (अखरोट, अलसी के बीज) को अपने खाने में शामिल करके और धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाकर आप अपने 'सफाई कर्मचारियों' की संख्या बढ़ा सकते हैं।
  • यह नसों में सूजन को कम करता है और स्ट्रोक के खतरे को टालता है।
  • सामान्य रेंज: 60 mg/dL से अधिक
  • खतरनाक स्तर: 40 mg/dL से कम

LDL (Low-Density Lipoprotein) – "बैड" कोलेस्ट्रॉल

यह 'खराब' कोलेस्ट्रॉल है जिसे 100 mg/dL से कम रखना अनिवार्य है। जब यह बढ़ता है, तो नसों के अंदर 'प्लास्टर' की तरह जमने लगता है, जिससे नसों में लचीलापन खत्म हो जाता है और दिल को रक्त पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

  • खतरे का संकेत: यदि यह 160 mg/dL के पार है, तो यह हार्ट अटैक का सीधा न्योता है।
  • कंट्रोल कैसे करें? बाहर का तला-भुना खाना (Trans fats) बंद करें और फाइबर युक्त भोजन जैसे ओट्स, दलिया और हरी सब्जियों को प्राथमिकता दें।
  • सामान्य रेंज: 100 mg/dL से कम
  • खतरनाक स्तर: 160 mg/dL से अधिक
  • LDL का प्रभाव: उच्च LDL रक्त वाहिकाओं में जमा होकर संकुचन और रुकावट का कारण बन सकता है, जिससे दिल का दौरास्ट्रोक और अन्य कार्डियोवैस्कुलर समस्याएं हो सकती हैं।

VLDL (Very Low-Density Lipoprotein) – अत्यधिक "खराब" कोलेस्ट्रॉल

VLDL का मुख्य काम खून में ट्राइग्लिसराइड्स को पहुंचाना है। इसका सामान्य स्तर 2-30 mg/dL के बीच होना चाहिए। VLDL को नियंत्रित रखने के लिए आहार में बदलाव और शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण होती है। इसका स्तर उच्च होने पर, दिल और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।

  • विशेष बात: यदि आपका VLDL बढ़ा हुआ है, तो इसका मतलब है कि आपका मेटाबॉलिज्म सही नहीं है और आप जरूरत से ज्यादा कैलोरी (खासकर चीनी और कार्बोहाइड्रेट) ले रहे हैं। इसे कम करने के लिए मीठे पेय पदार्थ और रिफाइंड शुगर से दूरी बनाना सबसे पहला कदम है।
  • सामान्य रेंज: 2-30 mg/dL
  • खतरनाक स्तर: 30 mg/dL से अधिक
  • VLDL का प्रभाव: अत्यधिक VLDL के स्तर से रक्त में अधिक ट्राइग्लिसराइड्स होते हैं, जो धमनियों में जमकर उन्हें अवरुद्ध कर सकते हैं। इससे हृदय रोग और अन्य कार्डियक समस्याएं हो सकती हैं।

Note:

क्या आप जानते हैं? जिसे हम आम भाषा में 'कोलेस्ट्रॉल के प्रकार' कहते हैं, वे असल में लिपोप्रोटीन (Lipoproteins) होते हैं। कोलेस्ट्रॉल खुद एक वसा (Fat) है, जो खून में अकेले नहीं तैर सकता, इसलिए ये प्रोटीन उसे 'वाहकों' (Carriers) की तरह शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाते हैं। यही कारण है कि रिपोर्ट में इन्हें HDL, LDL और VLDL जैसे नामों से दिखाया जाता है।

ट्राइग्लिसराइड्स क्या हैं और इनके हाई लेवल के खतरे क्या हैं?

ट्राइग्लिसराइड्स शरीर में कैलोरी का रूप होता है, जो अतिरिक्त कैलोरी को वसा के रूप में स्टोर करते हैं। यह ऊर्जा का मुख्य स्रोत होते हैं, लेकिन यदि इसका स्तर अत्यधिक बढ़ जाए, तो यह दिल की बीमारी, स्ट्रोक और पैंक्रियाटाइटिस जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

ट्राइग्लिसराइड्स की सामान्य रेंज:

  • 150 mg/dL से कम: सामान्य
  • 150-199 mg/dL: सीमित उच्च
  • 200 mg/dL से अधिक: उच्च

लिपिड प्रोफाइल रिपोर्ट कैसे पढ़ें? जानें नॉर्मल रेंज और मतलब

नीचे एक टेबल दी गई है, जिससे आप अपनी लिपिड प्रोफाइल रिपोर्ट को आसानी से समझ सकते हैं, और सही समय पर सही कदम उठा सकते हैं।

Normal range of lipid profile report

रिपोर्ट में यह पैरामीटर आपको यह बताते हैं कि आपके कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर हृदय स्वास्थ्य पर कैसा असर पड़ रहा है।

हाई कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कंट्रोल करने के आसान उपाय

यदि आपका कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ा हुआ है, तो कुछ बदलाव करके आप इनका स्तर नियंत्रित कर सकते हैं। उनमें से कुछ आसान उपाय इस प्रकार हैं - 

  • स्वस्थ आहार: अधिक फल, सब्जियां, साबुत अनाज, और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करें।
  • व्यायाम: हफ्ते में कम से कम 150 मिनट शारीरिक गतिविधि करें, जैसे तेज चलना, तैराकी, या साइकिल चलाना।
  • धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान से कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, और यह दिल के लिए भी नुकसानदायक होता है।
  • वजन घटाएं: यदि आपका वजन अधिक है, तो उसे घटाने से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • शराब का सेवन कम करें: शराब का अधिक सेवन ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को बढ़ा सकता है, इसलिए इसे सीमित करें।

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट से पहले की जरूरी तैयारियां

अक्सर गलत तैयारी की वजह से रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के आंकड़े गलत आ सकते हैं। सटीक परिणामों के लिए इन बातों का खास ख्याल रखें - 

  • 9-12 घंटे की फास्टिंग: टेस्ट से पहले कम से कम 10-12 घंटे तक कुछ न खाएं। आमतौर पर रात के खाने के बाद अगली सुबह खाली पेट टेस्ट देना सबसे सही रहता है।
  • केवल पानी पिएं: फास्टिंग के दौरान आप सादा पानी पी सकते हैं, लेकिन चाय, कॉफी, दूध या जूस का सेवन बिल्कुल न करें।
  • शराब से परहेज: टेस्ट से कम से कम 24 से 48 घंटे पहले शराब का सेवन न करें। शराब का सेवन सीधे तौर पर आपके ट्राइग्लिसराइड के स्तर को बढ़ाकर रिपोर्ट खराब कर सकता है।
  • दवाइयों की जानकारी: यदि आप शुगर, बीपी या कोई अन्य नियमित दवा ले रहे हैं, तो टेस्ट से पहले अपने डॉक्टर को जरूर बताएं।
  • भारी व्यायाम से बचें: टेस्ट से ठीक पहले जिम जाना या भारी शारीरिक मेहनत न करें, क्योंकि इससे मेटाबॉलिज्म में बदलाव आता है, जो रिपोर्ट को प्रभावित कर सकता है।

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट का महत्व: हृदय स्वास्थ्य के जोखिम को कैसे समझे?

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि आपके शरीर में हृदय स्वास्थ्य से संबंधित फैट्स का स्तर कितना है। यह टेस्ट आपके लिपिड्स (कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स) के स्तर की जांच करता है, जो हृदय रोग, स्ट्रोक, और अन्य कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं के जोखिम के संकेत हो सकते हैं। यह रक्त वाहिकाओं में प्लाक (चर्बी) के जमा होने का आकलन भी करता है, जो समय के साथ रक्त प्रवाह को बाधित कर सकता है।

  • दिल की बीमारियां और हृदय रोगों का बढ़ा हुआ खतरा: उच्च LDL और ट्राइग्लिसराइड्स स्तर से रक्त वाहिकाओं में प्लाक जमा होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे रक्त संचार में रुकावट आ सकती है। यह दिल के दौरे, स्ट्रोक, और अन्य गंभीर हृदय समस्याओं का कारण बन सकता है।
  • निवारक उपाय: सही आहार, शारीरिक सक्रियता, और तनाव प्रबंधन के साथ आप इन लिपिड्स के स्तर को नियंत्रित रख सकते हैं। इससे न सिर्फ आपके हृदय स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी कम होगा।

हाल ही में, कई शोधों में यह पाया गया है कि हृदय रोगों से जुड़ी स्थितियां मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती हैं। उच्च कोलेस्ट्रॉल, LDL और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर का मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है। तनाव, चिंता और डिप्रेशन के लक्षण हृदय रोगों की संभावना को बढ़ा सकते हैं। इसलिए, केवल शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना बहुत जरूरी है।

निष्कर्ष

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट आपके दिल के स्वास्थ्य को समझने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह टेस्ट आपके कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को जानने में मदद करता है और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अवसर प्रदान करता है। नियमित रूप से अपने लिपिड प्रोफाइल की जांच करवाएं और अपने दिल की सुरक्षा करें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के लिए फास्टिंग जरूरी है?

हां, इस टेस्ट के लिए 8-12 घंटे का उपवास आवश्यक है। आप पानी पी सकते हैं, लेकिन अन्य किसी भी खाद्य पदार्थ या पेय का सेवन नहीं करना चाहिए।

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कितनी बार कराना चाहिए?

यह टेस्ट हर 5 साल में एक बार कराना चाहिए, लेकिन यदि आपको हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह या अन्य संबंधित समस्याएं हैं, तो इसे साल में एक बार करवाना बेहतर होता है। सामान्य रूप से आप हर वर्ष भी इस टेस्ट को करा सकते हैं। 

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में कौन-कौन से पैरामीटर मापे जाते हैं?

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में टोटल कोलेस्ट्रॉल, एचडीएल, एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर मापा जाता है।

क्या लिपिड प्रोफाइल टेस्ट बच्चों के लिए भी आवश्यक होता है?

बच्चों में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट आमतौर पर तब हो जाता है, जब उन्हें हृदय रोग का खतरा हो, जैसे कि परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो।

उच्च कोलेस्ट्रॉल के लक्षण क्या होते हैं?

उच्च कोलेस्ट्रॉल के अधिकांश मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं, लेकिन यदि आप शरीर में थकान, दर्द या असामान्य संकेत महसूस करते हैं, तो यह आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर का संकेत हो सकता है।

Written and Verified by:

Dr. Rakesh Sarkar

Dr. Rakesh Sarkar

Senior Consultant Exp: 16 Yr

Cardiology & Electrophysiology

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Dr. Rakesh Sarkar is a Senior Consultant in Cardiology & Electrophysiology at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 11 years of experience. He specializes in complex arrhythmia management, including atrial fibrillation, ventricular tachycardia, CRT-D, and conduction system pacing.

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