किडनी खराब होने के लक्षण
Home >Blogs >किडनी खराब होने के लक्षण

किडनी खराब होने के लक्षण

Renal Sciences | by Dr. Pankaj Kumar Gupta on 12/03/2025 | Last Updated : 18/08/2026

Summary

किडनी फेलियर धीरे-धीरे या अचानक विकसित हो सकता है और शुरुआती चरणों में इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते। इसके प्रमुख संकेतों में पेशाब में बदलाव, झाग या खून आना, पैरों व चेहरे पर सूजन, थकान, मतली और हाई ब्लड प्रेशर शामिल हैं। डायबिटीज और अनियंत्रित हाई BP किडनी खराब होने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली और ब्लड शुगर व BP को नियंत्रित रखना किडनी की बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है। लगातार लक्षण या जोखिम होने पर नेफ्रोलॉजिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है।

किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभाता है। किडनी का मुख्य कार्य रक्त को फिल्टर करना है और अपशिष्ट उत्पादों को रक्त से हटाकर इलेक्ट्रोलाइट्स और ब्लड प्रेशर जैसे आवश्यक कारकों को नियंत्रित करना है। किडनी खराब होने की समस्या समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होती है। यही कारण है कि अक्सर शुरुआती चरणों में किडनी खराब होने के लक्षण उत्पन्न ही नहीं होते हैं। 

जैसे-जैसे किडनी के कार्य करने की क्षमता कम होती है, लक्षण अधिक स्पष्ट होने लगते हैं। जब तक लक्षण दिखने शुरू होते हैं, तब तक किडनी को अपरिवर्तनीय नुकसान हो जाता है। इसलिए समय पर निदान और प्रभावी उपचार के लिए किडनी की विफलता के शुरुआती लक्षणों को पहचानना आवश्यक हो जाता है और सही समय पर एक श्रेष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट (Nephrologists) से भी मिलने का सुझाव दिया जाता है।

किडनी फेलियर के लक्षण -

किडनी दो तरीकों से खराब होती है - धीरे-धीरे और अचानक से। धीरे-धीरे किडनी की खराब होने की स्थिति को क्रोनिक किडनी फेलियर कहा जाता है और अचानक होने वाले किडनी फेल्योर को एक्यूट किडनी फेलियर कहा जाता है। किडनी खराब होने के सबसे आम लक्षण इस प्रकार हैं - 

  • बार-बार पेशाब आना (खासकर रात में)
  • मूत्र उत्पादन में कमी
  • मूत्र में खून (मेडिकल नेम - हेमाट्यूरिया)
  • मूत्र में झाग (मेडिकल नेम - प्रोटीनुरिया(Proteinuria))
  • पैरों, टखनों और चेहरे पर सूजन
  • थकान और कमजोरी
  • उच्च रक्तचाप
  • पीठ दर्द या साइड दर्द
  • भूख न लगना और मुंह में धातु जैसा स्वाद
  • मतली और उल्टी
  • सूखी, खुजली वाली त्वचा
  • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और याददाश्त संबंधी समस्याएं

यह कुछ आम लक्षण है, जो मुख्य रूप से किडनी के खराब होने की स्थिति में उत्पन्न हो सकते हैं। हालांकि किडनी फेल्योर या किडनी रोग के शुरुआती लक्षण को समझ कर आप तुरंत डॉक्टर से परामर्श और इलाज ले सकते हैं।

किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण

किडनी रोग एक व्यक्ति को कई चरणों में प्रभावित करता है, इसलिए समय रहते इलाज इस स्थिति की जटिलताओं को काफी हद तक रोक सकता है। किडनी फेलियर के शुरुआती लक्षण इस प्रकार हैं - 

  • पेशाब में बदलाव: पेशाब में कई बदलाव आते हैं जैसे कि - पेशाब में वृद्धि या कमी, पेशाब में झाग, पेशाब के रंग में बदलाव या पेशाब में खून आना।
  • सूजन: किडनी जब सही से कार्य नहीं कर पाता है, तो शरीर में हानिकारक पदार्थों का जमाव बढ़ जाता है, जिसके कारण पैरों, और चेहरे पर सूजन हो जाता है।
  • थकान और कमजोरी: जब शरीर में हानिकारक पदार्थ जमा होने लगते हैं, तो इसके कारण थकान और कमजोरी आ जाती है। 
  • भूख न लगना और वजन कम होना: शरीर में हानिकारक पदार्थों के जमा होने से पाचन क्रिया को अच्छा खासा नुकसान हो सकता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर: किडनी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब किडनी की कार्यक्षमता को नुकसान होता है, तो ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है और किडनी डैमेज होने की शुरुआत हो जाती है। 

यह लक्षण किडनी फेल्योर के अलग-अलग चरणों में अलग-अलग हो सकते हैं। चलिए उन लक्षणों को जानते हैं जो एक किडनी के खराब होने पर उत्पन्न हो सकते हैं।

एक किडनी फेलियर के लक्षण

यदि केवल एक किडनी प्रभावित है, तो लक्षण हल्के हो सकते हैं, क्योंकि दूसरी किडनी बाकी का कार्य कर रही होगी। हालांकि, इस स्थिति में कुछ लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं जैसे कि - 

  • पीठ के निचले भाग या बगल में हल्का दर्द होना।
  • पेशाब के रंग में हल्का बदलाव होना।
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • थकान या चक्कर आना।

हालांकि किडनी अपना कार्य करती है, लेकिन फिर भी शरीर में कुछ हानिकारक पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिसके कारण ऊपर बताए गए लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं।

दोनों किडनी खराब होने के लक्षण

जब दोनों ही किडनी काम करना बंद कर देती है, तो यह एक जानलेवा स्थिति में परिवर्तित हो जाती है। इस स्थिति में निम्न लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं - 

  • शरीर में अधिक सूजन का होना
  • अत्यधिक थकान और भ्रम की स्थिति उत्पन्न होना।
  • लगातार मतली या उल्टी आना।
  • फेफड़ों में तरल पदार्थ का जमा हो जाना, जिसके कारण सांस फूल जाए।
  • पीठ के निचले भाग में तेज दर्द होना।
  • उच्च रक्तचाप जिसे मैनेज करना मुश्किल हो जाए।
  • बिना कारण वजन कम होना।

किडनी खराब होने के कारण

किडनी खराब होने के पीछे आमतौर पर एक नहीं, बल्कि कई कारण मिलकर काम करते हैं:

  • डायबिटीज: अनियंत्रित ब्लड शुगर किडनी की रक्त वाहिकाओं को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है - यह किडनी खराब होने का सबसे आम कारण है।
  • अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर: किडनी की फिल्टरिंग यूनिट्स (नेफ्रॉन) पर लगातार दबाव डालता है।
  • इन्फेक्शन: बार-बार होने वाला किडनी या यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन।
  • डिहाइड्रेशन: शरीर में पानी की लगातार कमी।
  • दर्द निवारक दवाओं (पेनकिलर) का अत्यधिक उपयोग: NSAID श्रेणी की दवाएं लंबे समय तक बिना डॉक्टरी सलाह के लेने पर किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
  • जेनेटिक स्थितियां: पारिवारिक इतिहास में किडनी रोग होना।
  • किडनी स्टोन या रुकावट: मूत्र मार्ग में लंबे समय तक रुकावट रहना।

इनमें से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर - दोनों मिलकर किडनी फेलियर के अधिकतर मामलों के लिए जिम्मेदार होते हैं, इसलिए इन दोनों स्थितियों को नियंत्रण में रखना किडनी बचाव की पहली सीढ़ी है।

किडनी खराब होने के स्टेज

क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) को eGFR के आधार पर 5 चरणों में बांटा जाता है - Stage 1 और 2 में लक्षण लगभग न के बराबर होते हैं, जबकि Stage 4 और 5 में डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट जैसी सहायता की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि सिर्फ लक्षणों का इंतजार करने के बजाय, हाई-रिस्क लोगों (डायबिटीज, हाई बीपी, पारिवारिक इतिहास वाले) को नियमित जांच करवानी चाहिए ताकि समस्या शुरुआती स्टेज में ही पकड़ी जा सके।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

किडनी खराब होने का संकेत इसके लक्षणों से ही मिलता है और जब तक लक्षण दिखते हैं, तब तक किडनी की कार्यक्षमता को काफी हद तक नुकसान भी हो जाता है। निम्न स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से मिलने की सलाह दी जाती है - 

  • लगातार लक्षणों का बने रहना: यदि लक्षण लगातार बने रहते हैं और स्थिति धीरे-धीरे खराब होती जा रही है, तो तुरंत एक अनुभवी डॉक्टर से मिलें और इलाज के विकल्पों पर विचार करें। त्वरित उपचार किडनी की कार्यक्षमता में सुधार ला सकता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर: लगातार हाई ब्लड प्रेशर का बने रहना कई समस्याओं का संकेत देता है। यह किडनी की कार्यक्षमता को काफी हद तक नुकसान पहुंचा सकता है। 
  • फैमिली हिस्ट्री: आपके घर परिवार में किसी को भी किडनी की समस्या रही है, तो आपको भी यह समस्या परेशान कर सकती है।
  • मधुमेह या हाई ब्लड शुगर लेवल: डायबिटीज वाले व्यक्तियों को किडनी की बीमारी का खतरा अधिक होता है। यदि आपको भी डायबिटीज है, तो अपने शुगर लेवल का ध्यान रखें और उसका प्रबंधन करें। 

भले ही आपको किसी भी प्रकार के गंभीर लक्षण न दिखे, लेकिन संदेह होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें और स्थिति का इलाज कराएं।

किडनी को स्वस्थ रखने के घरेलू उपाय

किडनी के स्वास्थ्य को बनाए रखने और किडनी फेलियर के जोखिम को कम करने के लिए, निम्न उपायों का पालन करना बहुत ज़रूरी है - 

  • हाइड्रेटेड रहें: किडनी में मौजूद हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने के लिए आपको खूब सारा पानी पीना चाहिए। 
  • संतुलित आहार लें: बेरीज, हरे पत्तेदार साग और होल ग्रेन्स जैसे किडनी के लिए लाभकारी खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करें। 
  • नमक और चीनी का सेवन सीमित करें: अत्यधिक सोडियम और चीनी किडनी के कार्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • शुगर और ब्लड प्रेशर को मैनेज करें: यह दोनों ही हमारे किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए प्रयास करें कि आप इन स्थितियों को अपने आहार और जीवनशैली के माध्यम से मैनेज करने का प्रयास करें।
  • दर्द निवारक दवाओं के अत्यधिक उपयोग से बचें: कुछ प्रकार के दर्द निवारक दवाएं किडनी को अच्छा खासा नुकसान पहुंचा सकते हैं। 
  • नियमित रूप से व्यायाम करें: स्वस्थ वजन बनाए रखें और रक्त संचार को निरंतर रखने के लिए आप व्यायाम को अपना सकते हैं।
  • शराब का सेवन सीमित करें और धूम्रपान छोड़ें: यह आदतें किडनी रोग के जोखिम को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।

निष्कर्ष

किडनी डैमेज होना एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जो धीरे-धीरे विकसित होती है, और अक्सर शुरुआती चरणों में ध्यान देने योग्य लक्षण नहीं होते हैं। समय पर निदान और प्रभावी उपचार के लिए किडनी की विफलता के शुरुआती लक्षणों को पहचानना महत्वपूर्ण है। शुरुआती सामान्य लक्षणों में पेशाब में बदलाव, पेशाब में खून, पेशाब में प्रोटीन, सूजन, थकान, हाई ब्लड प्रेशर, पीठ दर्द, भूख और स्वाद में बदलाव, शुष्क त्वचा और खुजली वाली त्वचा, मतली, उल्टी, अस्पष्टीकृत वजन कम होना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई शामिल है। 

अगर आप इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं या उच्च जोखिम वाली श्रेणियों में आते हैं, तो तुरंत कोलकाता में नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्टर से परामर्श से मिलें या फिर हमसे परामर्श लें। शीघ्र हस्तक्षेप से किडनी की बीमारी का प्रबंधन आसान हो जाता है। इसके अतिरिक्त हाइड्रेटेड रहना, संतुलित आहार खाना और उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी स्थितियों का प्रबंधन करना आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है। याद रखें कि नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली किडनी की समस्याओं को रोकने और आपके किडनी को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

आहार में किसी भी प्रकार के सप्लीमेंट को जोड़ने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। किडनी को स्वस्थ रखने के लिए आप निम्नलिखित खाद्य पदार्थों को अपने आहार में ज़रूर शामिल करें -

  • जामुन
  • प्रोबायोटिक्स में उच्च खाद्य पदार्थ, जैसे अचार, सॉकरौट, सादी दही इत्यादि
  • उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थ जैसे केले, बीन्स, दाल, बादाम, जई और अन्य होल ग्रेन
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड

Written and Verified by:

Dr. Pankaj Kumar Gupta

Dr. Pankaj Kumar Gupta

Consultant - Urologist Exp: 18 Yr

Urology

Book an Appointment

Dr. Pankaj Kumar Gupta is a Consultant in Urology Dept. at CMRI, Kolkata with over 10 years of experience. He specializes in renal stone management, prostate & uro-oncology surgery, reconstructive urology including urethroplasty.

Related Diseases & Treatments

Treatments in Kolkata

Renal Sciences Doctors in Kolkata

NavBook Appt.WhatsappWhatsappCall Now