
ट्रैफिक में फंसे हो, कोई बात पर बात काट दे, या घर में किसी से छोटी सी तकरार हो जाए, ये सारी ऐसी परिस्थितियाँ हैं, जिनकी वजह से गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। हम में से ज्यादातर लोग यह सोचकर चलते हैं कि 'थोड़ा गुस्सा तो होता ही है, इसमें क्या बड़ी बात है।' लेकिन अगर यह गुस्सा बार-बार आता हो, तेज हो और लंबे समय तक बना रहे, तो यह सिर्फ मिजाज का मसला नहीं रहता। यह आपके दिल का दुश्मन बन सकता है।
2024 में 'जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन' में प्रकाशित और एनआईएच-फंडेड एक शोध ने पहली बार सीधे तौर पर यह साबित किया कि गुस्सा रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को नुकसान पहुंचाता है और हार्ट अटैक व स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा देता है। अगर आप या आपके घर में कोई बार-बार गुस्से की समस्या से जूझ रहा है, तो सीके बिरला अस्पताल, BMB के अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से अभी अपॉइंटमेंट लें, क्योंकि आपका दिल इंतजार नहीं कर सकता।
गुस्सा एक स्वाभाविक भावना है। इंसान इसके बिना न तो खुद की रक्षा कर सकता है, न अन्याय का विरोध। लेकिन जब यह भावना बार-बार, बेवजह, या बहुत तीव्रता से आने लगे, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं -
ज्यादा गुस्सा आने के कारण कई हो सकते हैं, लेकिन जो बात सबको एक करती है, वह है इसका शरीर पर एक जैसा असर, खासकर दिल पर।
जब आप गुस्से में होते हैं, तो शरीर उसे 'खतरे का संकेत' मानता है और 'fight-or-flight' प्रतिक्रिया शुरू कर देता है। इस दौरान -
ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के अनुसार, गुस्से की यह अवस्था रक्त वाहिकाओं की लाइनिंग (endothelium) को नुकसान पहुंचाती है, जो धमनियों में प्लाक जमने की शुरुआत करती है। यही प्लाक आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बनता है।
हाई ब्लड प्रेशर और गुस्सा एक दूसरे को बढ़ावा देते हैं, गुस्से से बीपी बढ़ता है, और हाई बीपी की वजह से व्यक्ति और ज्यादा तनावग्रस्त और चिड़चिड़ा हो जाता है। यह एक खतरनाक चक्र है।
यह सवाल शायद आपके मन में भी आया होगा, और इसका जवाब है: हां, बिल्कुल। 2024 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के रिसर्चर द्वारा किए गए रिसर्च में (जो Journal of the American Heart Association में प्रकाशित हुआ) 280 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। उन्हें 8 मिनट के लिए उन बातों के बारे में सोचने को कहा जो उन्हें सबसे ज्यादा गुस्सा दिलाती हैं। नतीजे चौंकाने वाले थे -
गुस्सा आने पर शरीर में एक पूरी 'आंधी' आ जाती है और यह समझना जरूरी है कि इस आंधी में दिल सबसे पहले हिलता है -
ये सब बदलाव अगर हफ्ते में एक-दो बार हों, तो शरीर संभाल लेता है। लेकिन जब यही स्थिति रोज होती है, तो धमनियों की दीवारें धीरे-धीरे टूटने लगती हैं।
अच्छी खबर यह है — गुस्से को कंट्रोल किया जा सकता है। और जब गुस्सा काबू में आता है, तो दिल की सेहत खुद-ब-खुद बेहतर होने लगती है:
हर गुस्सा बीमारी नहीं होता। लेकिन नीचे दिए संकेत दिखें तो तुरंत किसी विशेषज्ञ से मिलें -
इनमें से कोई भी लक्षण हो, तो यह गुस्सा अब सिर्फ स्वभाव नहीं, एक स्वास्थ्य समस्या है। स्ट्रेस और हार्ट डिजीज का सीधा संबंध है, और इसे नजरअंदाज करना दिल के लिए घातक हो सकता है। ऐसे में मनोचिकित्सक (Psychologist), कार्डियोलॉजिस्ट, या जनरल फिजिशियन, तीनों की सलाह जरूरी हो सकती है।
गुस्सा जीवन का हिस्सा है, लेकिन अत्यधिक गुस्सा दिल को भारी नुकसान पहुँचा सकता है। विज्ञान के अनुसार, गुस्से का दिल पर उतना ही बुरा असर पड़ता है, जितना धूम्रपान या खराब खानपान का, बस यह दिखाई नहीं देता। अपने गुस्से को समझें, उसकी जड़ पहचानें और जरूरत पड़ने पर मदद लें। आपका दिल आपकी सबसे कीमती संपत्ति है, इसे गुस्से की आग से बचाएं। सीके बिरला अस्पताल,BMB के हृदय रोग विशेषज्ञों से आज ही मिलें, क्योंकि दिल की देखभाल में देरी ठीक नहीं।
हाँ, गुस्से के दौरान एड्रेनालिन और कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज होने से ब्लड प्रेशर अचानक 20-30 mmHg तक बढ़ सकता है। बार-बार ऐसा होना हाई बीपी और हृदय रोग का कारण बनता है।
नहीं, स्ट्रेस लंबे समय का मानसिक दबाव है, जबकि गुस्सा एक तीव्र और तात्कालिक प्रतिक्रिया है। दोनों ही दिल के लिए हानिकारक हैं।
बिल्कुल, मानसिक रूप से चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन बढ़ता है, जबकि शारीरिक रूप से हाई बीपी, सिरदर्द और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचता है।
हाँ, नियमित मेडिटेशन से मस्तिष्क की हाइपर-एक्टिविटी कम होती है और कोर्टिसोल का स्तर घटता है। योग और प्राणायाम गुस्से को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
हां, लगातार गुस्सा करने से धमनियों में प्लाक जमता है और ब्लड प्रेशर स्थायी रूप से बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा रहता है।
गुस्से में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने से दिल को ऑक्सीजन कम मिलती है और उस पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इससे सीने में दर्द या जकड़न हो सकती है। ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।
बचपन का लगातार गुस्सा और तनाव बड़े होने पर हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है। बच्चों में भावनात्मक बुद्धिमत्ता (EQ) विकसित करना उनके दिल की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
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Dr. Dhiman Kahali is the Director of Interventional Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 37 years of experience. He specializes in angioplasty, mitral balloon dilation, and peripheral vascular interventions, and has been honored with the Gandhi Centenary and Mother Teresa International Awards.
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