क्या प्रोबायोटिक्स सच में दिल को स्वस्थ रखते हैं? जानिए क्या कहती है रिसर्च
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क्या प्रोबायोटिक्स सच में दिल को स्वस्थ रखते हैं? जानिए क्या कहती है रिसर्च

Table of Contents

Summary

  • प्रोबायोटिक्स सिर्फ पेट के लिए नहीं हैं - ये दिल की सेहत में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
  • गट-हार्ट एक्सिस: आपकी आंत और हृदय एक-दूसरे से बात करते हैं और इसके बारे में हम आपको बताएंगे।
  • कुछ प्रोबायोटिक स्ट्रेन LDL कोलेस्ट्रॉल कम करने और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
  • दही, छाछ, किमची जैसे फूड्स और कांजी जैसे सुपर ड्रिंक्स भारतीय रसोई में मौजूद हैं। ये फूड्स प्रोबायोटिक्स के बेहतरीन स्रोत हैं।
  • प्रोबायोटिक्स दवा का विकल्प नहीं है। यह एक सहायक उपाय है, जो स्वस्थ जीवनशैली के साथ काम करता है।
  • कमजोर इम्यूनिटी या गंभीर बीमारी में प्रोबायोटिक्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

क्या आपने कभी सोचा था कि दही खाने से आपका दिल भी खुश हो सकता है? यह सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने जो खोज की है, वो सच में चौंकाने वाली है। हम सबने सुना है कि प्रोबायोटिक्स पाचन के लिए अच्छे होते हैं, लेकिन अब रिसर्च यह कहने लगी है कि ये छोटे-छोटे जीवाणु (microorganisms) हमारे दिल की सेहत पर भी असर डाल सकते हैं।

भारत में हर साल 30 लाख से ज्यादा लोग हृदय रोग का सामना करते हैं। यदि खानपान की सिर्फ एक आदत इस खतरे को थोड़ा भी कम कर सके, तो यह आपके जीवन पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इस ब्लॉग में हम विज्ञान की भाषा को सरल भाषा में समझाएंगे और बताएंगे कि प्रोबायोटिक्स क्या है, यह दिल को कैसे प्रभावित करते हैं, और आपको क्या करना चाहिए। अगर आप या आपके परिवार में किसी को दिल की बीमारीहाई कोलेस्ट्रॉल, या हाई ब्लड प्रेशर है, तो आज ही सीके बिरला अस्पताल, BMB के अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट लें।

प्रोबायोटिक्स क्या होते हैं और ये कैसे काम करते हैं?

“प्रोबायोटिक्स क्या होता है” यह सवाल आपके मन में भी जरूर उठा होगा। सीधे शब्दों में कहें तो प्रोबायोटिक्स वे जीवित सूक्ष्मजीव हैं, जो सही मात्रा में लेने पर हमारे स्वास्थ्य को फायदा पहुंचाते हैं। इन्हें 'अच्छे बैक्टीरिया' भी कहा जाता है।

हमारी आंत में करीब 100 ट्रिलियन से भी ज्यादा बैक्टीरिया रहते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से 'गट माइक्रोबायोम' कहते हैं। ये बैक्टीरिया भोजन पचाने, विटामिन बनाने, और इम्यून सिस्टम को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। जब इस माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ता है, तो न सिर्फ पाचन बल्कि पूरे शरीर पर असर पड़ता है।

प्रोबायोटिक्स के सबसे आम और रिसर्च के द्वारा प्रमाणित प्रकार - 

  • लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) - दही, छाछ और फर्मेंटेड फूड्स में ये पाया जाता है।
  • बिफिदोबैक्टीरियम (Bifidobacterium) - पनीर, कांजी और कुछ प्रोबायोटिक ड्रिंक में ये मौजूद होता है।
  • सैकरोमाइसेस बौलार्डी (Saccharomyces boulardii) - ये एक लाभकारी यीस्ट है, जो पाचन तंत्र को ठीक रखता है।

ये सूक्ष्मजीव आंत की परत को मजबूत रखते हैं, हानिकारक बैक्टीरिया को पनपने से रोकते हैं, और शरीर में सूजन (inflammation) को कम करते हैं। यही काम जब बड़े स्तर पर होता है, तो दिल तक भी इसका असर पहुंचता है।

प्रोबायोटिक्स और दिल की सेहत के बीच क्या संबंध है?

यहीं से बात दिलचस्प होती है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि आंत और हृदय के बीच एक मजबूत दो-तरफा संपर्क होता है - जिसे 'गट-हार्ट एक्सिस' (Gut-Heart Axis) कहा जाता है। यानी, आपकी आंत में क्या हो रहा है, यह सीधे आपके दिल को प्रभावित कर सकता है।

यह कनेक्शन कैसे काम करता है?

जब आंत में स्वस्थ बैक्टीरिया होते हैं, तो वे फाइबर और पॉलीफेनॉल से 'शॉर्ट-चेन फैटी एसिड्स (SCFAs)' बनाते हैं। ये SCFAs खून में मिलकर सूजन को कम करते हैं और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। जब गट माइक्रोबायोम असंतुलित होता है, तो शरीर के भीतर हल्की लेकिन लंबे समय तक रहने वाली सूजन (chronic low-grade inflammation) शुरू होती है, जिससे हृदय रोग का खतरा काफी बढ़ जाता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा के नोरा एक्लेस हैरिसन कार्डियोवैस्कुलर रिसर्च इंस्टीट्यूट के रिसर्च के अनुसार, हार्ट फेलियरथ्रोम्बोसिस और आर्टेरियल हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों में गट माइक्रोबायोम का असंतुलन देखा गया है। यह एक बड़ा संकेत है कि दिल की देखभाल के लिए पेट की सेहत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

प्रोबायोटिक्स का कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर पर असर

कोलेस्ट्रॉल पर असर

कुछ प्रोबायोटिक स्ट्रेन, खासकर लैक्टोबैसिलस प्लांटारम और बिफिदोबैक्टीरियम लैक्टिस (Bifidobacterium lactis), कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में सहायक पाए गए हैं। चलिए समझते हैं कि ये कैसे काम करते हैं?

  • बाइल सॉल्ट हाइड्रोलेज (BSH) एंजाइम: कुछ प्रोबायोटिक बैक्टीरिया BSH नाम का एंजाइम बनाते हैं, जो पित्त एसिड (bile acids) के चक्र को बाधित करता है। इससे लिवर को नया पित्त बनाने के लिए खून में से अधिक कोलेस्ट्रॉल लेना पड़ता है, जिससे LDL (बुरा कोलेस्ट्रॉल) कम होता है।
  • SCFA उत्पादन: आंत में बने शॉर्ट-चेन फैटी एसिड लिवर में कोलेस्ट्रॉल संश्लेषण को धीमा करने में मदद कर सकते हैं।

नोट: अकरमंशिया बैक्टीरिया (Akkermansia bacteria): यह विशेष बैक्टीरिया आंत की म्यूकस परत में रहता है और वर्तमान में इस बैक्टीरिया पर रिसर्च जारी है, जिसमें इस बात की पुष्टि की जा रही है कि ये हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। 

ब्लड प्रेशर पर असर

बिफिदोबैक्टीरियम लैक्टिस और लैक्टोबैसिलस रैम्नोसस (Lactobacillus rhamnosus) स्ट्रेन पर हुई एक महत्वपूर्ण स्टडी में पाया गया कि ये दोनों ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायक हो सकते हैं। 

  • रेनिन-एंजियोटेंसिन सिस्टम (RAS) पर असर डालते हैं, जो ब्लड प्रेशर नियंत्रण में मुख्य भूमिका निभाता है।
  • नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ावा दे सकते हैं, जो रक्त वाहिकाओं को आराम देता है।
  • सूजन को कम करके रक्त वाहिकाओं की दीवारों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

एक मेटा-एनालिसिस की रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों ने 8 सप्ताह या उससे अधिक समय तक प्रोबायोटिक्स लिए, उनमें सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में मामूली लेकिन कमी देखी गई।

कौन-कौन से फूड्स प्रोबायोटिक्स से भरपूर होते हैं?

प्रोबायोटिक फूड लेने के लिए आपको महंगे सप्लीमेंट्स की हमेशा जरूरत नहीं पड़ती। भारतीय रसोई तो वैसे भी प्रोबायोटिक्स खाद्य पदार्थों का खजाना है:

भारतीय प्रोबायोटिक फूड्स:

  • दही (Yogurt) - Lactobacillus का सबसे आसान और सस्ता स्रोत। रोज एक कटोरी दही खाना सेहत के लिए फायदेमंद है।
  • छाछ (Buttermilk) - पाचन के साथ-साथ दिल के लिए भी उपयोगी।
  • कांजी - काली गाजर से बनी यह खट्टी ड्रिंक उत्तर भारत में प्रसिद्ध है और प्रोबायोटिक ड्रिंक का एक देसी रूप है।
  • इडली और डोसा - फर्मेंटेशन प्रक्रिया से बने ये दक्षिण भारतीय व्यंजन भी प्रोबायोटिक्स के अच्छे स्रोत हैं।
  • ढोकला और खमीरी रोटी - फर्मेंटेड बैटर से तैयार ये खाद्य पदार्थ भी लाभकारी हैं।

अंतर्राष्ट्रीय प्रोबायोटिक फूड्स:

  • कीफिर (Kefir) - दूध से बनी फर्मेंटेड ड्रिंक जो Lactobacillus और Bifidobacterium से भरपूर है।
  • किमची (Kimchi) - कोरियाई फर्मेंटेड सब्जी जो दिल और पाचन दोनों के लिए शोध में अच्छी मानी गई है।
  • सॉरक्राउट (Sauerkraut) - फर्मेंटेड पत्ता गोभी जो यूरोप में पारंपरिक प्रोबायोटिक फूड है।
  • मिसो सूप (Miso Soup) - जापानी फर्मेंटेड सोयाबीन पेस्ट से बना सूप।
  • कोम्बुचा (Kombucha) - फर्मेंटेड चाय जो एक लोकप्रिय प्रोबायोटिक ड्रिंक के रूप में उभरी है।

प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स के बारे में:

बाजार में कैप्सूल, पाउडर और लिक्विड के रूप में प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स उपलब्ध हैं। अगर आप इन्हें लेना चाहते हैं, तो याद रखें - हर सप्लीमेंट में अलग-अलग स्ट्रेन होते हैं और हर किसी पर हर स्ट्रेन एक जैसा काम नहीं करता। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी प्रोबायोटिक सप्लीमेंट शुरू न करें।

क्या प्रोबायोटिक्स सभी के लिए फायदेमंद है?

प्रोबायोटिक्स ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन यह सभी के लिए एक जैसे फायदेमंद नहीं होते। इसे अपनाते समय कुछ जरूरी बातें जानना आवश्यक है- 

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए:

  • कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग: कैंसर और HIV के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के प्रोबायोटिक्स नहीं लेने चाहिए।
  • शिशु: नवजात या समय से पहले जन्मे बच्चे को इससे दूर रखें।
  • गंभीर मरीज: जिनकी हाल ही में बड़ी सर्जरी हुई हो या जिन्हें बैक्टीरिया से एलर्जी हो।

सामान्य साइड इफेक्ट्स: शुरुआत में गैस, पेट फूलना या हल्की पाचन समस्या हो सकती है। आंतों के नए बैक्टीरिया के साथ तालमेल बिठाने पर यह समस्या एक-दो हफ्ते में ठीक हो जाती है। परेशानी बढ़ने पर डॉक्टर से मिलें।

दिल के मरीजों के लिए जरूरी बात: प्रोबायोटिक्स आपकी दिल की मुख्य दवाइयों का विकल्प नहीं हैं। यदि आपको हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल या दिल की बीमारी है, तो कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह के बाद ही इन्हें सही डाइट और व्यायाम के साथ एक सहायक उपाय के रूप में शुरू करें।

निष्कर्ष

प्रोबायोटिक्स दिल को स्वस्थ रखने में सहायक भूमिका निभाते हैं, लेकिन यह कोई जादू की दवा नहीं हैं। विज्ञान मानता है कि आंत और दिल का रिश्ता गहरा है। सही प्रोबायोटिक्स फूड और एक्टिव लाइफस्टाइल मिलकर कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और सूजन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

याद रखें, प्रोबायोटिक्स मुख्य दवाओं का ऐड-ऑन हैं, उनका रिप्लेसमेंट नहीं। अपने दिल की सेहत के प्रति गंभीर रहें, नियमित जांच करवाएं और किसी भी सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। सही समय पर सही कदम उठाना ही सबसे बड़ी स्वास्थ्य नीति है। सीके बिरला अस्पताल (BMB) के हृदय रोग विशेषज्ञों से मिलकर आप अपने दिल की सेहत का सही मूल्यांकन करवा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या प्रोबायोटिक्स दिल की सेहत को सुधार सकते हैं?

हां, प्रोबायोटिक्स गट-हार्ट एक्सिस के जरिए दिल की सेहत में सहायक भूमिका निभा सकते हैं — सूजन कम करके और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में मदद करके। लेकिन यह दवाइयों का विकल्प नहीं है।

क्या प्रोबायोटिक्स कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करते हैं?

कुछ स्ट्रेन जैसे L. plantarum और B. lactis LDL कोलेस्ट्रॉल को मध्यम रूप से कम करने में सहायक पाए गए हैं। यह असर तभी होता है जब कोलेस्ट्रॉल सामान्य सीमा के करीब हो और नियमित रूप से लिया जाए।

क्या रोजाना प्रोबायोटिक्स लेना सुरक्षित है?

स्वस्थ व्यक्तियों के लिए रोजाना दही जैसे प्राकृतिक प्रोबायोटिक फूड लेना सुरक्षित है। सप्लीमेंट्स के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें, खासकर अगर आप कोई दवा ले रहे हों।

क्या प्रोबायोटिक्स ब्लड प्रेशर पर असर डालते हैं?

शोध बताते हैं कि 8 सप्ताह या उससे अधिक समय तक प्रोबायोटिक्स लेने वालों में ब्लड प्रेशर में हल्की लेकिन मापनीय कमी देखी गई। यह हाई बीपी की मुख्य दवा का विकल्प नहीं है।

क्या प्रोबायोटिक्स के कोई साइड इफेक्ट्स होते हैं?

शुरुआत में गैस या पेट फूलना हो सकता है, जो सामान्यतः 1-2 हफ्तों में ठीक हो जाता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को इसके गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।

प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स में क्या फर्क है?

प्रोबायोटिक्स जीवित लाभकारी बैक्टीरिया हैं, जबकि प्रीबायोटिक वह फाइबर है जो इन बैक्टीरिया का भोजन है। दोनों मिलकर (जिसे 'सिंबायोटिक' कहते हैं) दिल और पाचन दोनों के लिए ज्यादा फायदेमंद होते हैं।

हार्ट पेशेंट कौन-सा प्रोबायोटिक फूड लें?

दही, छाछ, और किमची सुरक्षित विकल्प हैं। हार्ट पेशेंट को सप्लीमेंट शुरू करने से पहले अपने कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि कुछ स्ट्रेन दवाओं के साथ इंटरेक्शन कर सकते हैं।

क्या बच्चों को प्रोबायोटिक्स दे सकते हैं?

बड़े बच्चों को दही जैसे प्राकृतिक स्रोत दिए जा सकते हैं। छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं के लिए प्रोबायोटिक सप्लीमेंट देने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह अनिवार्य है।

Written and Verified by:

Dr. Sabyasachi Pal

Dr. Sabyasachi Pal

Senior Consultant Exp: 22 Yr

Cardiology

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Dr. Sabyasachi Pal is a Senior Consultant in Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 11 years of experience. He specializes in coronary interventions and heart failure management.

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