
समय पर कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना जीवन बचाने की कुंजी है, खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद। मेमोग्राफी टेस्ट और पैप स्मीयर टेस्ट जैसे नियमित कैंसर टेस्ट कैंसर को शुरुआती चरण में पहचानते हैं, जिससे सफल इलाज की संभावना 90% से अधिक हो जाती है। जोखिम के अनुसार कैंसर की जांच आज ही कराएं।
क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते हैं कि एक छोटा सा टेस्ट आपको कैंसर जैसी विकराल समस्या से बचा सकता है। जी हां, हम कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट की बात कर रहे हैं, जो हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए, जो न केवल हमारी जान बचाता है, बल्कि हमें कैंसर जैसी समस्या से लड़ने में सक्षम भी बनाता है।
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि कैंसर की बीमारी डरावनी है, लेकिन शुरुआती चरण में कैंसर की जांच हो जाए तो ठीक होने की संभावना भी 90% से भी अधिक हो जाती है। क्या आप जानते हैं कि भारत में हर साल 13 लाख से अधिक नए कैंसर के मामले सामने आते हैं? लेकिन इनमें से कई जीवन बचाए जा सकते थे, यदि समय पर कैंसर स्क्रीनिंग करवा ली जाती।
इसीलिए, सीके बिरला हॉस्पिटल्स (RBH), जयपुर के विशेषज्ञ के तौर पर हम आपको इस ब्लॉग के माध्यम से कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में समझाएंगे और बताएंगे कि इसे कब और कैसे करानी चाहिए। अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और आज ही विशेषज्ञ से परामर्श लें और खुद को स्वस्थ रखें।
कैंसर स्क्रीनिंग का अर्थ है, जब आप पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहे हों, तब भी शरीर में ऐसे संकेतों या असामान्यताओं की तलाश करना जो भविष्य में कैंसर का रूप ले सकते हैं या जो कैंसर को इसके शुरुआती चरण में दर्शाते हैं।
कैंसर स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है?
कैंसर स्क्रीनिंग निम्न कारणों से ज़रूरी है -
कई प्रकार के कैंसर एक व्यक्ति को परेशान करते हैं। हर कैंसर के लिए स्क्रीनिंग की शुरुआत की उम्र और आवृत्ति अलग-अलग होती है। आपकी व्यक्तिगत जोखिम कारकों (जैसे कि फैमिली हिस्ट्री) के आधार पर आपका डॉक्टर इसमें बदलाव करता है। नीचे दिए गए सामान्य दिशानिर्देशों को स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्रोतों से संकलित किया गया है -
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उम्र |
स्क्रीनिंग टेस्ट |
कब करवाएं |
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40 से 44 वर्ष |
मैमोग्राफी (Mammography) |
डॉक्टर से परामर्श के बाद वार्षिक कैंसर स्क्रीनिंग शुरू करें। |
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45 से 54 वर्ष |
मेमोग्राफी टेस्ट |
हर साल कराएं। |
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55 वर्ष और उससे अधिक |
मैमोग्राफी |
हर 1 या 2 साल में एक बार, जब तक आप स्वस्थ हैं। |
यदि आपके परिवार में ब्रेस्ट कैंसर की मेडिकल हिस्ट्री है या आप में आनुवंशिक जोखिम है, तो मेमोग्राफी टेस्ट 40 वर्ष से पहले भी शुरू किया जा सकता है। इस बारे में अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएं। मेमोग्राफी स्तन का एक्स-रे है जो ऊतक (Tissue) में छोटे बदलावों को पहचानता है और इसके परिणाम के आधार पर ही इलाज की योजना बनाई जाती है।
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उम्र |
स्क्रीनिंग टेस्ट |
कब करवाएं |
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21 से 29 वर्ष |
पैप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear Test) |
हर 3 साल में एक बार। |
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30 से 65 वर्ष |
पैप टेस्ट और एचपीवी (HPV) टेस्ट दोनों (Co-testing) |
हर 5 साल में एक बार। |
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65 वर्ष के बाद |
यदि पिछले 10 वर्षों की सभी स्क्रीनिंग सामान्य रही हैं, तो डॉक्टर स्क्रीनिंग बंद करने की सलाह दे सकते हैं। |
सर्वाइकल कैंसर की पुष्टि के लिए पैप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear) होता है। इस टेस्ट में गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) से कोशिकाओं का एक नमूना लिया जाता है और असामान्य कोशिकाओं की जांच की जाती है।
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उम्र |
स्क्रीनिंग टेस्ट |
कब करवाएं |
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45 से 75 वर्ष |
कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy) |
हर 10 साल में एक बार। |
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वैकल्पिक टेस्ट |
फिकल इम्यूनोकेमिकल टेस्ट (FIT) |
हर साल। |
कोलोरेक्टल कैंसर की जांच के लिए कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy) का सुझाव दिया जाता है। मलाशय और बड़ी आंत को देखने के लिए एक लचीली ट्यूब डाली जाती है, जिससे पॉलीप्स (Polyp-कैंसर बनने से पहले के जमाव) को हटाया भी जा सकता है। कोलोरेक्टल कैंसर की दरें अब कम उम्र के लोगों में भी बढ़ रही हैं, इसलिए जोखिम कारकों वाले लोगों को 45 वर्ष से पहले भी कैंसर की जांच शुरू करनी चाहिए।
फेफड़ों के कैंसर के लिए लो-डोज सीटी स्कैन (LDCT) किया जाता है। इस टेस्ट में फेफड़ों की विस्तृत छवि (Detailed Image) बनाने के लिए एक्स-रे तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह स्क्रीनिंग केवल उन लोगों के लिए है, जिनको फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक है।
प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए पीएसए (PSA) ब्लड टेस्ट होता है। रक्त में प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन प्रोटीन के स्तर को मापा जाता है।
त्वचा के कैंसर की जांच के लिए स्किन एग्जाम (Self-Exam & Doctor Exam) होता है। डॉक्टर त्वचा पर असामान्य मस्सों या धब्बों की जांच करते हैं। यह सभी कैंसर टेस्ट आमतौर पर सुरक्षित होते हैं और इन्हें डॉक्टर या प्रशिक्षित तकनीशियन द्वारा किया जाता है।
यह एक आम सवाल है कि कैंसर स्क्रीनिंग के लिए कौन सी जांच होती है और इसे किसे करानी चाहिए। सीधे शब्दों में कहें, हर व्यक्ति को, विशेष रूप से एक निश्चित उम्र के बाद, कैंसर स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। चलिए समझते हैं कि किन लोगों को कैंसर की जांच अनिवार्य है -
उच्च जोखिम वाले लोग
स्क्रीनिंग की आवश्यकता और आवृत्ति उन लोगों में बढ़ जाती है, जो उच्च जोखिम वाले समूह में आते हैं -
इन सभी कारकों से आपके मन के इस प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा कि - कैंसर की जांच किसे करानी चाहिए। यदि आपको लगता है कि आप भी इस रोग के जोखिम के दायरे में आते हैं, तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें और इलाज के सभी विकल्पों पर बात करें।
जी हाँ, अधिकांश स्क्रीनिंग टेस्ट में, खासकर जहां आपके आंतरिक अंगों की जाँच की जाती है, कुछ विशेष तैयारियों की आवश्यकता होती है।
हर टेस्ट और हर मरीज़ की ज़रूरत अलग होती है। आपके डॉक्टर आपके विशिष्ट टेस्ट के लिए आवश्यक सभी तैयारियों की विस्तृत जानकारी देंगे। टेस्ट से पहले इन निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करना सटीकता और सुरक्षा दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कैंसर स्क्रीनिंग से अधिकतम लाभ लेने के लिए, आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे कि -
कैंसर स्क्रीनिंग सिर्फ एक टेस्ट नहीं है; यह आपके भविष्य में एक निवेश है। शुरुआती कैंसर टेस्ट बीमारी को उसकी जड़ में खत्म करने का सबसे शक्तिशाली तरीका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित स्क्रीनिंग से स्तन कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में 20% तक की कमी लाई जा सकती है, और सर्वाइकल कैंसर जैसे कैंसर को लगभग पूरी तरह से रोका जा सकता है।
आपका स्वास्थ्य प्रतीक्षा नहीं कर सकता। आज ही आरबीएच के विशेषज्ञ से परामर्श लें और अपनी व्यक्तिगत कैंसर स्क्रीनिंग योजना शुरू करें।
अधिकांश टेस्ट, जैसे पीएसए ब्लड टेस्ट, दर्दनाक नहीं होते हैं। कोलोनोस्कोपी जैसी कुछ प्रक्रियाओं में असुविधा हो सकती है, जिसके लिए बेहोश करने की दवा दी जाती है।
यह आपकी उम्र, जोखिम कारकों और पिछले टेस्ट के परिणामों पर निर्भर करता है। यह 1 साल (मैमोग्राफी) से लेकर 10 साल (कोलोनोस्कोपी) तक हो सकती है।
जी हां, बिल्कुल। कैंसर स्क्रीनिंग की जांच का मुख्य उद्देश्य लक्षणों के दिखने से पहले ही समस्या का पता लगाना है।
नहीं, कैंसर की कौन सी जांच होती है, यह उस अंग पर निर्भर करता है। वर्तमान में, स्तन, सर्वाइकल, कोलोरेक्टल, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर के लिए प्रभावी स्क्रीनिंग उपलब्ध है।
यह टेस्ट के प्रकार पर निर्भर करता है। ब्लड टेस्ट (जैसे PSA) की रिपोर्ट कुछ दिनों में आ जाती है, जबकि पैप स्मीयर टेस्ट या बायोप्सी की रिपोर्ट आने में 1-2 सप्ताह लग सकते हैं।
Written and Verified by:

Dr. Umesh Khandelwal is Additional Director of Medical Oncology Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 13 years in heme-oncology. He treats all types of cancers, with a special focus on leukemia and pediatric oncology, and uses therapies like chemotherapy, immunotherapy, and targeted treatments.
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