
हाई एलडीएल और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन हृदय रोग और स्ट्रोक का एक बड़ा, लेकिन अक्सर छिपा हुआ, जोखिम है। एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल) को 100 mg/dL से कम रखना और एचडीएल (गुड कोलेस्ट्रॉल) को 50 mg/dL से ऊपर बढ़ाना आवश्यक है। स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और समय पर चिकित्सा जांच से इस जोखिम को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है।
क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर के अंदर एक ऐसा 'साइलेंट किलर' पल रहा है, जिसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन वह कभी भी आपको हार्ट अटैक या स्ट्रोक (Stroke) जैसी जानलेवा स्थिति तक पहुंचा सकता है? हम बात कर रहे हैं हाई एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की। भारत में, हृदय रोग मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है, और एक बड़ी आबादी अनजाने में ही उच्च कोलेस्ट्रॉल के साथ जी रही है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) जैसी प्रतिष्ठित संस्थानों के अनुसार, 20 वर्ष की आयु के बाद हर 4-6 साल में कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना अनिवार्य है, क्योंकि यह खतरा किसी भी उम्र के लोगों को परेशान कर सकता है।
यदि आप एलडीएल कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल रेंज और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल कम होने के खतरों को समझना चाहते हैं, या दिल को स्वस्थ रखने के तरीकों की तलाश में है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। हृदय रोगों के जोखिम को कम करने के लिए, खासकर यदि आप फैमिली मेडिकल हिस्ट्री या अस्वस्थ जीवनशैली का सामना कर रहे हैं, तो तुरंत अपने कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं। एक छोटा सा कदम आपको गंभीर बीमारी से बचा सकता है। इसलिए अभी अपना परामर्श सत्र बुक करें।
कोलेस्ट्रॉल एक फैट जैसा पदार्थ है, जो आपके शरीर की सभी कोशिकाओं में पाया जाता है। यह सेल मेम्ब्रेन बनाने, विटामिन डी (Vitamin D) और हार्मोन का उत्पादन करने के लिए महत्वपूर्ण है। आपके शरीर को जितना कोलेस्ट्रॉल चाहिए, उसका अधिकांश हिस्सा लीवर खुद बनाता है, और बाकी भोजन से आता है।
कोलेस्ट्रॉल अकेले खून में नहीं घुल सकता, इसलिए यह लिपोप्रोटीन (Lipoproteins) नामक प्रोटीन के साथ मिलकर पूरे शरीर में यात्रा करता है। यह लिपोप्रोटीन दो मुख्य प्रकार के होते हैं, जिन्हें आमतौर पर 'गुड' और 'बैड' कोलेस्ट्रॉल में बांटा गया है। चलिए दोनों को समझते हैं -
एल डी एल कोलेस्ट्रॉल की फुल फॉर्म है 'लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन'। एलडीएल पूरे शरीर में कोलेस्ट्रॉल के प्रसार के लिए कार्य करता है।
अक्सर यह सवाल उठता है कि इसे बैड क्यों कहा जाता है? जब इसकी मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो यह धमनियों (Arteries) की दीवारों पर जमने लगता है और फैटी डिपॉजिट (एथेरोस्क्लेरोसिस) बनाता है। प्लाक के कारण धमनियां संकरी और कठोर हो जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इसके कारण हृदय रोग और स्ट्रोक की समस्या उत्पन्न हो सकती है। यही कारण है कि हमें इसके बारे में अधिक विचार करने की आवश्यकता है।
एच डी एल कोलेस्ट्रॉल की फुल फॉर्म है 'हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन' (High-Density Lipoprotein)। एचडीएल को 'गुड' कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है, क्योंकि यह आपके शरीर में रक्त प्रवाह से अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को वापस लीवर तक ले जाता है, जहां इसे शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
उच्च एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद करता है। यदि आपका एचडीएल कोलेस्ट्रॉल कम है, तो हृदय रोग का जोखिम बढ़ जाता है, भले ही आपके एलडीएल का स्तर नियंत्रण में हो।
ट्राइग्लिसराइड्स भी एक प्रकार का फैट है, जो आपके रक्त में मौजूद होता है। आपका शरीर अतिरिक्त कैलोरी को ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है और उन्हें फैट कोशिकाओं में संग्रहित करता है। उच्च कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर मिलकर हृदय रोग के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। यह भी आमतौर पर लिपिड पैनल टेस्ट में मापे जाते हैं।
एलडीएल के बढ़ने के पीछे कई जटिल कारण हो सकते हैं, जिनमें अधिकांश आनुवंशिक (Genetic) और जीवनशैली कारक है। इसके अतिरिक्त भी कई कारक हैं, जो बैड कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने के मुख्य कारण है -
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं, इसलिए इसे अक्सर 'साइलेंट किलर' के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि, जब एल डी एल कोलेस्ट्रॉल बहुत अधिक हो जाता है और धमनियों में रुकावट आने लगती है (एथेरोस्क्लेरोसिस), तो कुछ गंभीर संकेत और लक्षण उभर सकते हैं -
इन लक्षणों का इंतज़ार न करें। नियमित रक्त परीक्षण ही हाई कोलेस्ट्रॉल का पता लगाने का एकमात्र निश्चित तरीका है।
आपके कोलेस्ट्रॉल का स्तर लिपिड पैनल नामक रक्त परीक्षण द्वारा मापा जाता है। यह रीडिंग मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (mg/dL) में दी जाती हैं। अलग-अलग स्वास्थ्य जोखिम वाले लोगों के लिए लक्ष्य भिन्न हो सकते हैं (जैसे, हृदय रोग या मधुमेह वाले लोगों के लिए लक्ष्य कम होते हैं)।
|
कोलेस्ट्रॉल का प्रकार |
लक्ष्य (आदर्श) |
नॉर्मल से थोड़ा ऊपर (Borderline) |
अधिक (High) |
|
कुल कोलेस्ट्रॉल |
200 से कम |
200–239 |
240 या अधिक |
|
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल |
100 से कम |
130–159 |
160 या अधिक |
|
एलडीएल (जोखिम कारकों वाले लोगों के लिए) |
70 से कम |
100-129 (नॉर्मल से थोड़ा ऊपर) |
130 या अधिक |
|
एचडीएल कोलेस्ट्रॉल (पुरुष) |
40 से अधिक |
40-50 |
60 या अधिक (आदर्श) |
|
एचडीएल कोलेस्ट्रॉल (महिला) |
50 से अधिक |
50-60 |
60 या अधिक (आदर्श) |
|
ट्राइग्लिसराइड्स |
150 से कम |
150–199 |
200 या अधिक |
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल रेंज का लक्ष्य उन लोगों के लिए और भी कम हो सकता है, जिन्हें पहले ही हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ चुका है। ऐसे मामलों में, डॉक्टर इसे 70 mg/dL से नीचे रखने की सलाह देते हैं।
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कैसे नियंत्रित करें और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल कैसे बढ़ाएं, इसके लिए सही एप्रोच की आवश्यकता है, जिसमें जीवनशैली में बदलाव और यदि आवश्यक हो, तो दवाएं शामिल हैं। चलिए इसे गंभीरता से समझने का प्रयास करते हैं -
आहार सबसे शक्तिशाली उपकरण है। इसके लिए आप निम्न तरीकों का उपयोग कर सकते हैं -
नियमित शारीरिक गतिविधि से एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है, जबकि एल डी एल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर घटता है। प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि का लक्ष्य बनाएं। यदि आपका वजन ज्यादा है, तो अपना वजन घटाएं।
यदि जीवनशैली में बदलाव के बाद भी एल डी एल कोलेस्ट्रॉल का स्तर उच्च बना रहता है या यदि आपको हृदय रोग का उच्च जोखिम है, तो डॉक्टर कुछ दवाओं का सुझाव दे सकते हैं। स्टेटिन सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं हैं, जो लीवर द्वारा बनाए जाने वाले कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को धीमा कर देते हैं। कोलेस्ट्रॉल अवशोषण अवरोधक (Cholesterol Absorption Inhibitors) और PCSK9 इनहिबिटर जैसी अन्य दवाएं भी उपलब्ध हैं, खासकर बहुत उच्च जोखिम वाले मामलों के लिए यह दवाएं दी जाती हैं।
हाई कोलेस्ट्रॉल को मैनेज किया जा सकता है, लेकिन इसे अनदेखा करना खतरनाक है। हृदय रोग अब केवल 'बुढ़ापे की बीमारी' नहीं रही; हमारी आधुनिक जीवनशैली ने इसे एक व्यापक महामारी भी बना दिया है। नियमित जांच और स्थिति की सही जानकारी से आपको बहुत मदद मिल सकती है।
याद रखें, स्वस्थ हृदय के लिए एलडीएल और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। एचडीएल कोलेस्ट्रॉल हाई होने से सुरक्षा मिलती है, जबकि एल डी एल कोलेस्ट्रॉल को हमेशा कम रखने का प्रयास करना चाहिए। अपने आहार को सही करें, सक्रिय रहें और यदि आवश्यक हो, तो अनुभवी विशेषज्ञों से सहायता लेने में संकोच न करें। अपने हृदय स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। यह आपकी लंबी और स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
वयस्कों के लिए, टोटल कोलेस्ट्रॉल 200 mg/dL से कम, एलडीएल 100 mg/dL से कम, और एचडीएल (पुरुष >40, महिला >50) होना चाहिए।
यह मुख्य रूप से अस्वस्थ आहार (सैचुरेटेड/ट्रांस फैट), शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा, धूम्रपान, और आनुवंशिक कारकों के कारण बढ़ता है।
सैचुरेटेड और ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें, घुलनशील फाइबर और अच्छे फैट वाले आहार को बढ़ाएं, और नियमित रूप से व्यायाम करें।
नियमित एरोबिक व्यायाम (150 मिनट/सप्ताह), धूम्रपान छोड़ना, शराब का सेवन सीमित करना, और जैतून का तेल जैसे स्वस्थ वसा का सेवन बढ़ाएं।
जीवनशैली में बदलाव (आहार, व्यायाम, वजन) और डॉक्टर की सलाह पर स्टेटिन जैसी दवाओं के माध्यम से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
एलडीएल को 100 mg/dL से कम और एचडीएल को पुरुषों के लिए 40 mg/dL से अधिक तथा महिलाओं के लिए 50 mg/dL से अधिक रखने का लक्ष्य रखें।
Written and Verified by:

Dr. Tarun Praharaj is a Senior Consultant in Interventional Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 34 years of experience. He specializes in coronary angioplasty, primary angioplasty, stenting, valvuloplasty, and high-risk coronary interventions.
Similar Cardiology Blogs
Book Your Appointment TODAY
© 2024 BMB Kolkata. All Rights Reserved.