हार्ट अटैक आने पर पहले 10 मिनट में क्या करें?
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हार्ट अटैक आने पर पहले 10 मिनट में क्या करें?

Cardiology | by Dr. Anjan Siotia on 19/02/2026

Table of Contents

Summary

  • जब दिल की धड़कन अचानक साथ छोड़ने लगे, तो आपके पास सोचने का समय नहीं, सिर्फ सही कदम उठाने का मौका होता है।
  • 'गैस का दर्द' समझकर सीने में दर्द को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।
  • दर्द महसूस होते ही सबसे पहले खुद को शांत करें और मदद मांगें।
  • हार्ट अटैक के पहले 60 मिनट 'गोल्डन ऑवर' कहलाते हैं, लेकिन पहले 10 मिनट में की गई सही प्राथमिक चिकित्सा जैसे कि
  • एस्पिरिन लेना या सही पोजीशन में लेटना आपकी जान बचा सकती है।
  • मरीज को अकेला न छोड़ें और तुरंत पेशेंट को डॉक्टर के पास ले जाने के लिए एम्बुलेंस का सहयोग लें।
  • बी.एम. बिरला हार्ट रिसर्च सेंटर (BMB) जैसे विश्वसनीय संस्थानों का मानना है कि सही समय पर अस्पताल पहुंचना ही सबसे बड़ा बचाव है।

जीवन में कुछ पल ऐसे होते हैं, जहां समय की एक-एक सेकंड की कीमत किसी खजाने से भी अधिक होती है। हार्ट अटैक उन्हीं में से एक है। हार्ट अटैक आने के 10 मिनट के भीतर दो भी आप करते हैं, उसका संबंध सीधा आपकी जान से होता है। हार्ट अटैक के डर और घबराहट को शब्दों में बयान करना बहुत मुश्किल है, लेकिन सही जानकारी और स्थिति की जागरूकता किसी की भी जान बचा सकती है। हार्ट अटैक में क्या करें, यह जानना उतना ही जरूरी है जितना कि सांस लेना। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 28% का कारण हृदय रोग है। इसलिए यदि आप या आपके पास कोई इस स्थिति में है, तो याद रखें - घबराना नहीं है, बल्कि लड़ना है।

बी.एम. बिरला हार्ट रिसर्च सेंटर (BMB) जैसे एडवांस अस्पतालों में हम हर दिन ऐसे मामले देखते हैं जहां केवल 10 मिनट की देरी भारी पड़ गई। इसलिए, इस ब्लॉग को अंत तक पढ़ें और अपनी जानकारी को विस्तार दें। हार्ट अटैक की स्थिति में सबसे ज़रूरी है, सही समय पर अस्पताल में पहुंचना। जैसे ही आप सही समय पर अस्पताल पहुंचते हैं, तो आपको सही इलाज मिल सकता है। 

हार्ट अटैक में क्या होता है और यह कैसे शुरू होता है?

वैज्ञानिक भाषा में समझें तो हार्ट अटैक में क्या होता है, यह जानना आपके लिए बचाव की पहली सीढ़ी है। हमारे दिल को लगातार ऑक्सीजन और खून की जरूरत होती है, जो कोरोनरी आर्टरी (धमनियां) पहुंचाती हैं। जब इन धमनियों में फैट या कोलेस्ट्रॉल (प्लाक) जमा हो जाता है, तो खून का बहाव रुक जाता है। जैसे ही दिल की मांसपेशियों को ऑक्सीजन मिलना बंद होती है, वह मरने लगती है। यही वह समय है, जब इंसान को सीने में तेज दर्द या दबाव महसूस होता है।

यह कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है; शरीर अक्सर बहुत पहले से संकेत देना शुरू कर देता है, जिसे हम अक्सर 'काम का तनाव' या 'एसिडिटी' समझकर छोड़ देते हैं।

खतरे की घंटी: हार्ट अटैक के 6 लक्षण एक महीने पहले

हार्ट अटैक अचानक आ सकता है, लेकिन शरीर अक्सर हफ्ते भर या एक महीने पहले से ही चेतावनी देने लगता है। रिसर्च बताते हैं कि हार्ट अटैक के 6 लक्षण एक महीने पहले दिखाई दे सकते हैं, जिन्हें पहचानना हार्ट अटैक के लक्षण और बचाव का अहम भाग है - 

  • अत्यधिक थकान: बिना किसी मेहनत के थका हुआ महसूस करना।
  • नींद में परेशानी: अचानक से नींद न आने की समस्या होना या नींद में खलल आना।
  • सांस फूलना: सीढ़ियां चढ़ते समय या सामान्य चलते समय भी सांस लेने में दिक्कत होना।
  • अपच या जी मिचलाना: पेट में लगातार भारीपन या जलन महसूस होना।
  • चिंता और घबराहट: बिना किसी कारण के मन में डर बैठना।
  • हाथों या कंधों में दर्द: दर्द जो सीने से शुरू होकर बाएं हाथ या जबड़े तक जाए।

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो बिना देर किए हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें और इलाज लें।

हार्ट अटैक आने पर पहले 10 मिनट में क्या करें?

यदि अचानक सीने में दर्द शुरू हो जाए, तो यह 10 मिनट आपकी जिंदगी तय करेंगे। हार्ट अटैक में तुरंत क्या करें, इसके लिए इस गाइड का पालन करें - 

तुरंत रुक जाए और बैठ जाएं (0-2 मिनट)

लक्षण महसूस होने के पहले 2 मिनट में शारीरिक गतिविधि तुरंत बंद कर दें। यदि आप चल रहे हैं या गाड़ी चला रहे हैं, तो रुक जाएं। जमीन पर बैठ जाएं, पैरों को मोड़ लें और पीठ को दीवार का सहारा दें। इससे दिल पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।

मदद के लिए पुकारें (2-4 मिनट)

यदि आप अकेले हैं, तो तुरंत अपने किसी पड़ोसी या परिवार के सदस्य को फोन करें। यदि आप सार्वजनिक स्थान पर हैं, तो जोर से चिल्ला कर मदद मांगें। कई बार लोग परेशान हो जाते हैं कि हार्ट अटैक में क्या करें? इस प्रश्न के उत्तर में यह सबसे आवश्यक है कि आपको खुद को कमरे में बंद न करें, दरवाजा खुला रखें।

एम्बुलेंस को कॉल करें (4-5 मिनट)

बिना देरी किए इमरजेंसी नंबर या नजदीकी अस्पताल (जैसे कि BMB के हेल्पलाइन नंबर- 08062136599) पर कॉल करें। खुद ड्राइव करने की गलती कभी न करें।

एस्पिरिन (Aspirin) चबाएं (5-7 मिनट)

यदि आपके डॉक्टर ने पहले मना न किया हो, तो एस्पिरिन टैबलेट आप खा सकते हैं। मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मरीज को डिसप्रिन (पानी में घुलने वाली एस्पिरिन) या एस्पिरिन की गोलियां चबाकर लेनी चाहिए। साथ ही, यह चेतावनी जोड़ना महत्वपूर्ण है कि यदि मरीज को खून पतला करने वाली दवाओं से एलर्जी है या अल्सर की समस्या है, तो इसे न लें।

इसे पानी के साथ निगलने के बजाय चबाना बेहतर होता है, क्योंकि यह खून में जल्दी घुलती है और रक्त के थक्कों (Clots) को बढ़ने से रोकती है।

सॉर्बिट्रेट (Sorbitrate) दवा

हार्ट अटैक के प्राथमिक उपचार में Sorbitrate (5mg) का जिक्र अक्सर किया जाता है, जिसे जीभ के नीचे रखा जाता है। हालांकि, यह केवल डॉक्टर की सलाह पर दी जानी चाहिए, लेकिन बिना डॉक्टरी सलाह के इस दवा का सेवन न करें।

कपड़े ढीले करें और गहरी सांस लें (7-10 मिनट)

टाई, बेल्ट या टाइट शर्ट के बटन खोल दें। खिड़कियां खोल दें ताकि ताजी हवा आ सके। लंबी और गहरी सांस लेने की कोशिश करें ताकि शरीर को ऑक्सीजन मिलती रहे।

मरीज को क्या नहीं करना चाहिए? - Strictly Prohibited

अक्सर जानकारी के अभाव में लोग गलतियां कर बैठते हैं जो घातक हो जाती हैं। किसी भी हालत में नीचे बताए गई चीजों से दूरी बना लें - 

  • अकेले अस्पताल न जाएं: खुद गाड़ी चलाकर जाना जानलेवा हो सकता है, क्योंकि आप कभी भी बेहोश हो सकते हैं।
  • खांसी करने की तकनीक (Cough CPR) पर भरोसा न करें: इंटरनेट पर वायरल 'खांसी से जान बचाएं' वाली जानकारी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। इसे बिल्कुल न अपनाएं क्योंकि इससे पेशेंट की जान भी जा सकती है।
  • भारी खाना या पानी न पिएं: हार्ट अटैक के दौरान कुछ भी खाने-पीने से मरीज को उल्टी हो सकती है, जो सांस की नली में फंस सकती है।
  • दर्द को नजरअंदाज न करें: यह सोचकर न बैठें कि "शायद यह सिर्फ गैस है।" अक्सर लोगों को हार्ट अटैक गैस की तरह लगता है।

एम्बुलेंस बुलाना क्यों जरूरी है?

कई लोग सोचते हैं कि अपनी कार से जल्दी पहुंच जाएंगे, लेकिन एम्बुलेंस बुलाना इसलिए जरूरी है क्योंकि - 

  • रास्ते में इलाज: एम्बुलेंस में ऑक्सीजन और लाइफ सपोर्ट सिस्टम होता है।
  • पैरामेडिकल की मदद: विशेषज्ञ स्टाफ रास्ते में ही मरीज की स्थिति को स्थिर (Stabilize) करने की कोशिश करता है।
  • अस्पताल की तैयारी: एम्बुलेंस से सूचना मिलने पर अस्पताल की इमरजेंसी टीम और 'कैथ लैब' (Cath Lab) पहले से तैयार रहती है।

अस्पताल पहुंचने तक मरीज को कैसे संभालें?

यदि आप किसी मरीज की मदद कर रहे हैं, तो नीचे बताए गए तरीकों को अपनाएं - 

  • मरीज को अकेला न छोड़ें।
  • उनसे लगातार बात करते रहें ताकि वे होश में रहें।
  • यदि मरीज बेहोश हो जाए और सांस न ले रहा हो, तो तुरंत CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) शुरू करें। अपनी हथेलियों को मरीज के सीने के बीच में रखें और प्रति मिनट 100-120 बार जोर से दबाएं।

निष्कर्ष

हार्ट अटैक एक ऐसी चुनौती है जिसका सामना केवल साहस और सही जानकारी से किया जा सकता है। याद रखें, हार्ट अटैक में क्या करें और हार्ट अटैक के लक्षण और बचाव केवल पढ़कर छोड़ने वाली चीजें नहीं हैं, बल्कि जीवन रक्षक कौशल है। आपका एक सही कदम, एक सही फोन कॉल और सही समय पर एस्पिरिन लेना किसी का पूरा संसार उजड़ने से बचा सकता है।

हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें और नियमित जांच के लिए हमेशा अच्छे कार्डियक सेंटर से संपर्क बनाए रखें। आपका दिल अनमोल है, इसकी देखभाल में कोई कसर न छोड़ें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

हार्ट अटैक के दौरान सबसे पहला कदम क्या होना चाहिए?

सबसे पहला कदम शारीरिक गतिविधि बंद कर आराम की स्थिति में बैठना और तुरंत चिकित्सा सहायता (एम्बुलेंस) के लिए फोन करना होना चाहिए। शांत रहने की कोशिश करें ताकि दिल की धड़कन और न बढ़े।

क्या सीने में हर दर्द हार्ट अटैक होता है?

नहीं, हर दर्द हार्ट अटैक नहीं होता, लेकिन इसे खुद डायग्नोस न करें। यदि दर्द भारीपन, जकड़न के साथ बाएं हाथ या जबड़े तक जा रहा है, तो इसे इमरजेंसी मानकर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

हार्ट अटैक में एस्प्रिन देना सही है क्या?

हां, यदि मरीज को एस्पिरिन से एलर्जी नहीं है, तो 300 mg की एक टेबलेट चबाना फायदेमंद होता है। यह खून के थक्कों को कम कर दिल को और नुकसान होने से बचाती है।

एम्बुलेंस आने तक मरीज को कैसे लिटाना चाहिए?

मरीज को लेटाने के बजाय 'हाफ-सिटिंग' पोजीशन (कमर के नीचे तकिया लगाकर बैठना) में रखें। उनके घुटने मुड़े हुए होने चाहिए। इससे दिल पर बोझ कम पड़ता है और सांस लेना आसान होता है।

क्या खांसी या गैस का दर्द हार्ट अटैक जैसा लग सकता है?

हां, गैस या एसिडिटी का दर्द अक्सर सीने में जलन पैदा करता है, जिसे लोग हार्ट अटैक समझ लेते हैं, और इसके विपरीत भी। जोखिम न लें, ईसीजी (ECG) कराना ही सबसे सुरक्षित है।

कितने समय के अंदर इलाज मिलने से जान बच सकती है?

हार्ट अटैक के बाद पहले 60 मिनट 'गोल्डन ऑवर' होते हैं। यदि मरीज को 90 मिनट के भीतर मेडिकल उपचार (एंजियोप्लास्टी आदि) मिल जाए, तो हृदय की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है।

क्या अकेले होने पर हार्ट अटैक से बचाव संभव है?

हां, संभव है। सबसे पहले दरवाजा खोलें ताकि मदद अंदर आ सके, फोन पर किसी को सूचित करें, एस्पिरिन चबाएं और बिना घबराए शांत होकर बैठ जाएं।

क्या महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक के लक्षण अलग होते हैं?

हां, महिलाओं में अक्सर सीने में तेज दर्द के बजाय अत्यधिक थकान, अपच, सांस फूलना या पीठ दर्द जैसे 'असामान्य' लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

Written and Verified by:

Dr. Anjan Siotia

Dr. Anjan Siotia

Director Exp: 28 Yr

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Dr. Anjan Siotia is the Director of Cardiology Department at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 12 years of experience. He specializes in complex angioplasty, chronic total occlusion, TAVI, CRT & ICD pacemaker surgery, and radial interventions.

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