फिट दिखने वाले युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले?
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फिट दिखने वाले युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले?

Cardiology | by Dr. Shuvo Dutta on 22/06/2026

Table of Contents

Summary

  • फिट दिखने वाले युवाओं में हार्ट अटैक बढ़ने की वजह सिर्फ शरीर की बाहरी बनावट नहीं, बल्कि छिपा हुआ तनाव, अनियमित नींद, धूम्रपान-वेपिंग और गलत सप्लीमेंट का इस्तेमाल भी है।
  • भारत में हृदय रोग करीब 28 प्रतिशत मौतों की वजह बनते हैं, और सडन कार्डियक डेथ भारतीयों में पश्चिमी देशों के मुकाबले औसतन 5 से 8 साल पहले देखी जाती है।
  • सिर्फ जिम जाना, पतला या मस्कुलर दिखना दिल के स्वस्थ होने की गारंटी नहीं, फैमिली हिस्ट्री, छिपा हुआ कोलेस्ट्रॉल और लगातार तनाव जैसे कारक उतने ही अहम हैं।
  • युवाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर सीने में तेज दर्द के बिना भी सामने आते हैं, जैसे असामान्य थकान, सांस फूलना, जबड़े या पीठ में दर्द।
  • नियमित कार्डियक स्क्रीनिंग, संतुलित वर्कआउट, सही नींद और तनाव प्रबंधन से हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सुबह पांच बजे की जिम क्लास, प्रोटीन शेक, हफ्ते में छह दिन की वर्कआउट रूटीन, और इंस्टाग्राम पर शेयर की हुई फिट बॉडी की तस्वीर, यही जिंदगी थी उनकी, जिनकी उम्र मुश्किल से 29 साल थी। न स्मोकिंग, न शराब, न जंक फूड, फिर भी एक दिन ट्रेडमिल पर दौड़ते-दौड़ते अचानक सीना जकड़ गया और कुछ ही मिनटों में सब कुछ बदल गया। परिवार के लिए सबसे बड़ा सदमा यही था कि जो इंसान सबसे ज्यादा फिट दिखता था, उसे ही हार्ट अटैक आ गया।

अगर यह कहानी आपको चौंका रही है, तो यह कोई इकलौता वाकया नहीं। पिछले कुछ सालों में युवाओं में हार्ट अटैक के मामले इतनी तेजी से बढ़े हैं कि डॉक्टर और शोधकर्ता दोनों इसे गंभीरता से ले रहे हैं, खासकर उन मामलों में जहां व्यक्ति बाहर से पूरी तरह सेहतमंद और एक्टिव नजर आता था। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को सीने में असहजता, असामान्य थकान या सांस फूलने जैसा कुछ भी महसूस हो रहा है, तो देर किए बिना हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें, हमारा चेस्ट पेन सेंटर ऐसी स्थितियों के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहता है।

फिट दिखने वाले युवाओं में हार्ट अटैक के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

पिछले कुछ समय में डॉक्टरों ने एक चिंताजनक ट्रेंड नोटिस किया है, ऐसे युवा जो दिखने में पूरी तरह सेहतमंद हैं, पतले हैं, सख्त फिटनेस रूटीन फॉलो करते हैं, वही अचानक वर्कआउट के दौरान या रोजमर्रा के काम करते वक्त गिर पड़ते हैं। आधुनिक फिटनेस कल्चर ने सेहत की परिभाषा को थोड़ा भटका दिया है, बड़े मसल्स, उभरे हुए एब्स और घंटों की वर्कआउट को अक्सर अच्छी सेहत की निशानी मान लिया जाता है, जबकि शरीर के भीतर क्या हो रहा है, उसका कोई अंदाजा बाहरी दिखावट से नहीं लगाया जा सकता।

हार्ट अटैक के कारण सिर्फ मोटापे या आलसी जीवनशैली तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब यह कहीं ज्यादा जटिल हो चुके है। भारत में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, यहां हृदय रोग कुल मौतों का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा बनते हैं। 

ग्लोबल रिसर्च के मुताबिक, 35 साल से कम उम्र के लोगों में सडन कार्डियक अरेस्ट की दर हर एक लाख व्यक्ति-वर्ष में लगभग 0.47 से 1.21 के बीच है, और एथलीट या भारी वर्कआउट करने वालों में यह दर इससे भी ज्यादा पाई गई है, खासकर जब इसमें स्टेरॉयड या ओवरट्रेनिंग जैसे कारक जुड़ जाएं।

क्या सिर्फ फिटनेस अच्छी होने से दिल स्वस्थ रहता है?

यह सवाल जितना मासूम लगता है, उसका जवाब उतना ही जरूरी है। कई कार्डियोलॉजिस्ट साफ तौर पर मानते हैं कि सिर्फ जिम जाने या नियमित वर्कआउट करने से दिल पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, अगर साथ में लगातार तनाव हो, खानपान की आदतें खराब हो, पर्याप्त आराम न मिल रहा हो, और परिवार में हृदय रोग की हिस्ट्री मौजूद हो। दूसरे शब्दों में कहें तो फिटनेस सिर्फ एक हिस्सा है, पूरी तस्वीर नहीं।

यहीं पर हार्ट अटैक के लक्षण समय पर पहचानने के फायदे और देर होने के नुकसान को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। एक इंसान का शरीर बाहर से कितना भी मजबूत और टोंड दिखे, उसकी धमनियों के भीतर प्लाक जमा हो सकता है, कोलेस्ट्रॉल का स्तर असामान्य हो सकता है, या दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम में कोई जन्मजात गड़बड़ी छिपी हो सकती है, जैसे हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (Hypertrophic Cardiomyopathy), जिसका बाहर से कोई संकेत नहीं मिलता। यही वजह है कि कई फिट और युवा खिलाड़ी, मॉडल या जिम जाने वाले लोग भी अचानक कार्डियक इमरजेंसी का शिकार हो जाते हैं, बिना किसी पूर्व चेतावनी के।

युवाओं में हार्ट अटैक के छिपे हुए जोखिम कारक

ज्यादातर लोग हार्ट अटैक को सिर्फ मोटापे, स्मोकिंग या बढ़ती उम्र से जोड़कर देखते हैं, लेकिन युवाओं में इसके पीछे कुछ कम चर्चित कारण भी ज़िम्मेदार हैं - 

  • क्रोनिक स्ट्रेस (लगातार तनाव): आज के युवाओं में यह सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। काम और सोशल लाइफ का दबाव स्ट्रेस हार्मोन बढ़ाता है, जिससे बीपी और हार्ट रेट असामान्य हो जाते हैं।
  • सप्लीमेंट्स का गलत इस्तेमाल: बिना डॉक्टरी सलाह के प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट, फैट बर्नर या स्टेरॉयड लेना। इनमें मौजूद भारी कैफीन दिल की धड़कन को अनियंत्रित कर देते हैं।
  • एक्टिव सिटिंग (जिम के बाद भी बैठे रहना): दिनभर 12-13 घंटे बैठे रहना और 4,000 कदम से कम चलना। शाम को 1 घंटा जिम जाने के बावजूद यह आदत इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैट बढ़ाती है।
  • फैमिली हिस्ट्री (जेनेटिक्स):फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया जैसी दिल की आनुवंशिक बीमारियां, जिनका पता गंभीर स्थिति आने से पहले नहीं चल पाता।
  • धूम्रपान और वेपिंग: ये धमनियों (Arteries) को सिकोड़कर ऑक्सीजन की सप्लाई कम कर देते हैं।

कौन-से शुरुआती संकेत हार्ट अटैक का इशारा हो सकते हैं?

युवाओं में हार्ट अटैक के लक्षण हमेशा फिल्मों जैसे नाटकीय नहीं होते। इन संकेतों पर ध्यान दें - 

  • सीने में दबाव, भारीपन या जलन (जो आराम करने पर भी ठीक न हो)।
  • बिना किसी चोट के बाएं हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ में दर्द होना।
  • सांस फूलना, अचानक ठंडा पसीना आना और चक्कर या बेचैनी होना।
  • बिना किसी भारी मेहनत के भी अत्यधिक थकान, जी मिचलाना या उल्टी आना।

सावधान (साइलेंट हार्ट अटैक): लगभग 45% हार्ट अटैक 'साइलेंट' होते हैं, जिनमें बेहद हल्के लक्षण होते हैं। खासकर डायबिटीज के मरीजों में नर्व डैमेज के कारण दर्द का अहसास ही नहीं हो पाता।

हार्ट अटैक के खतरे को कम करने के उपाय 

हार्ट अटैक से बचाव के तरीके बहुत सरल है, बस उन्हें आदत बनाना जरूरी है - 

6 easy ways to reduce heart attack risk through healthy lifestyle changes, regular heart check-ups, exercise, stress management, and a balanced diet.

  1. नियमित कार्डियक स्क्रीनिंग: साल में कम से कम एक बार बीपी, कोलेस्ट्रॉल, शुगर और ECG टेस्ट कराएं (खासकर भारी वर्कआउट शुरू करने से पहले)।
  2. वर्कआउट में संतुलन: अचानक बहुत हैवी या तीव्र (Intense) ट्रेनिंग शुरू न करें।
  3. सप्लीमेंट्स से दूरी: बिना मेडिकल सलाह के किसी भी तरह के फैट बर्नर या स्टेरॉयड का सेवन बंद करें।
  4. नशा छोड़ें: धूम्रपान, वेपिंग पूरी तरह बंद करें और शराब से दूरी बनाएं।
  5. स्ट्रेस और स्लीप मैनेजमेंट: तनाव कम करने के लिए ध्यान करें और रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें।
  6. हेल्दी डाइट: खाने में फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें; प्रोसेस्ड और तला-भुना खाना कम करें।

याद रखें: सीने में असहजता या सांस फूलने जैसे लक्षणों को कभी गैस या सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि हार्ट अटैक में हर मिनट कीमती होता है।

निष्कर्ष

फिट दिखना और दिल का सेहतमंद होना, यह दोनों अलग-अलग बातें हैं, और यही सच्चाई आज के युवाओं को समझनी होगी। सिक्स पैक एब्स या मैराथन दौड़ने की क्षमता दिल की धमनियों के भीतर की सेहत की गारंटी नहीं देती। तनाव, नींद, खानपान, फैमिली हिस्ट्री और नियमित जांच, यही वह आधार है, जिस पर असली दिल की सेहत टिकी होती है। जितनी जल्दी यह बात समझी जाए, उतना ही बड़ा फासला हम युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों को कम करने में बना सकते हैं।

अगर आपको या आपके परिवार में किसी को दिल से जुड़े किसी भी लक्षण को लेकर हल्का सा भी शक हो, तो इंतजार न करें। हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें और जरूरत पड़ने पर हमारे 24x7 चेस्ट पेन सेंटर से तुरंत संपर्क करें। सीके बिरला अस्पताल में हमारा मानना है कि सही समय पर सही जांच जिंदगी बचाने में सबसे बड़ा फर्क ला सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या एनर्जी ड्रिंक्स और प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स दिल को प्रभावित कर सकते हैं?

हां, इनमें मौजूद उच्च मात्रा का कैफीन और अन्य स्टिमुलेंट्स दिल की धड़कन को अनियमित कर सकते हैं और बीपी बढ़ा सकते हैं, खासकर जब इन्हें भारी वर्कआउट के साथ लिया जाए।

क्या धूम्रपान और वेपिंग युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाते हैं?

हां, यह धमनियों को सिकोड़ते हैं, ऑक्सीजन की सप्लाई घटाते हैं और बीपी बढ़ाते हैं, जिससे युवाओं में भी हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।

क्या अत्यधिक वर्कआउट भी दिल पर दबाव डाल सकता है?

हां, बिना मेडिकल सलाह के अचानक तीव्र वर्कआउट, अनियमित ट्रेनिंग या स्टेरॉयड के साथ भारी एक्सरसाइज दिल पर असामान्य दबाव डाल सकती है, खासकर पहले से छिपी हुई दिल की समस्या होने पर।

क्या हार्ट अटैक बिना सीने में दर्द के भी हो सकता है?

हां, करीब 45 प्रतिशत हार्ट अटैक साइलेंट होते हैं, यानी हल्की थकान, सांस फूलना या बदहजमी जैसे लक्षण ही दिखते हैं, खासकर डायबिटीज वाले लोगों में।

क्या डायबिटीज और हाई BP होने पर जोखिम बढ़ जाता है?

जी हां, यह दोनों धमनियों को नुकसान पहुंचाते हैं और दिल पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, जिससे युवाओं में भी हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

क्या अचानक कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक एक ही चीज है?

नहीं, हार्ट अटैक धमनी में रुकावट से जुड़ी समस्या है, जबकि कार्डियक अरेस्ट दिल की इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी से अचानक दिल का धड़कना बंद हो जाना है। दोनों ही मेडिकल इमरजेंसी हैं और तुरंत इलाज जरूरी है।

क्या युवाओं को नियमित रूप से हार्ट चेकअप करवाना चाहिए?

हां, खासकर फैमिली हिस्ट्री, स्मोकिंग या लगातार हाई स्ट्रेस वाले युवाओं को 25 से 30 साल की उम्र से ही सालाना बीपी, कोलेस्ट्रॉल, शुगर और ECG जांच करवाना फायदेमंद रहता है।

Written and Verified by:

Dr. Shuvo Dutta

Dr. Shuvo Dutta

Senior Consultant Exp: 50 Yr

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Dr. Shuvo Dutta is a Senior Consultant in Cardiology Dep. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 34 years of experience. He specializes in radial and femoral angioplasty, complex cardiac interventions, and was the first in India to perform carotid artery stenting to prevent brain stroke.

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