
दिवाली में मिठाई, पकवान और मेहमानों की खातिरदारी, तीनों साथ चलते हैं। सवाल यह है कि क्या इसका मतलब दिल की सेहत से समझौता करना है? नहीं। दिवाली पर हार्ट हेल्दी डाइट का मतलब त्योहार का स्वाद छोड़ना नहीं, बल्कि मात्रा, तरीके और समय पर थोड़ा नियंत्रण रखना है। एक-दो दिन की सीमित मिठाई से दिल को आम तौर पर नुकसान नहीं होता। दिक्कत तब बढ़ती है जब यही खान-पान कई दिन तक चलता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से बीपी, शुगर, कोलेस्ट्रॉल या दिल की बीमारी है।
रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (Registrar General of India) की 'कॉज़ेस ऑफ डेथ 2021-23' रिपोर्ट के अनुसार, देश में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 31% मौतें हृदय रोगों (कार्डियोवैस्कुलर डिसीसेस) के कारण होती हैं। इसलिए त्योहारों के दिनों में थोड़ी सावधानी बरतना सिर्फ "परहेज" करना नहीं, बल्कि समझदारी है।
इस ब्लॉग में हम सीधे और व्यावहारिक तरीके से देखेंगे कि दिवाली में क्या खाएं, मिठाई कितनी लें, तला-भुना कैसे संभालें और कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
दीवाली के खाने से दिल को सीधा खतरा किसी एक मिठाई या एक नमकीन से नहीं होता। असर इन चीजों के जमा होने से पड़ता है: ज्यादा नमक, ज्यादा चीनी, ज्यादा तला हुआ खाना और देर रात तक खाना।
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क्या बढ़ता है |
शरीर में क्या हो सकता है |
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नमक (नमकीन, भुजिया, पापड़, चाट) |
शरीर में पानी रुकता है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है |
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चीनी और मावे की मिठाई |
वजन, ट्राइग्लिसराइड्स और ब्लड शुगर बढ़ने का जोखिम |
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बार-बार इस्तेमाल हुए तेल में तला खाना |
LDL ("खराब") कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और अपच का जोखिम |
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देर रात भारी खाना |
नींद बिगड़ती है, एसिडिटी और बेचैनी बढ़ती है |
रिसर्च के अनुसार इसमें खान-पान के साथ इलाज में देरी और मौसम जैसे कारण भी शामिल हो सकते हैं। दिवाली पर भारत में इसी तरह का बड़ा, पक्का आंकड़ा सीमित है, लेकिन सर्दी की शुरुआत और पटाखों से बढ़ा प्रदूषण दिल के मरीजों के लिए अतिरिक्त बोझ बन सकता है। इसलिए सिर्फ थाली नहीं, पूरे माहौल का ध्यान रखना चाहिए।
सीधा जवाब: मिठाई मना नहीं है, पर उसे "मुख्य भोजन" नहीं बनाना चाहिए। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार ज्यादातर महिलाओं को रोज़ लगभग 25 ग्राम (करीब 6 चम्मच) और पुरुषों को लगभग 36 ग्राम (करीब 9 चम्मच) से ज्यादा अतिरिक्त शुगर नहीं लेनी चाहिए। एक छोटा गुलाब जामुन या एक काजू कतली का टुकड़ा भी इस सीमा का बड़ा हिस्सा ले सकता है, इसलिए इसे भी गिनती में रखें।
पूरी तरह नहीं। WHO की 2023 की गाइडलाइन के अनुसार, शुगर-फ्री मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले नॉन-शुगर स्वीटनर से लंबे समय में वजन घटाने में मदद नहीं मिलती। इसके अलावा, लंबे समय तक इनके सेवन से टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग का जोखिम बढ़ने के संकेत भी मिले हैं। हालांकि, ये प्रमाण अभी सीमित हैं और यह सिफारिश पहले से डायबिटीज से पीड़ित लोगों पर लागू नहीं होती। बेहतर यही है कि मिठास की आदत ही धीरे-धीरे कम की जाए। इसके अलावा, शुगर-फ्री मिठाइयां भी अक्सर मावे, मेवे और घी से बनी होती हैं, यानी इनमें कैलोरी और फैट फिर भी काफी मात्रा में मौजूद रहता है।
पूरी तरह बचना ज़रूरी नहीं, पर तरीका बदला जा सकता है। हमारे अस्पताल में अक्सर आने वाले लगभग सभी मरीजों को सलाह दी जाती है कि तेल, घी और मक्खन जैसे फैट को सीमित मात्रा में लिया जाना चाहिए। यहां चिंता की बात यह है कि औसतन हर घर में तेल एवं घी की खपत काफी अधिक है।

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क्या खाते हैं |
इसकी जगह बेहतर विकल्प |
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गुलाब जामुन, रसमलाई |
भुना हुआ मखाना, खजूर के साथ बादाम, फल की चाट |
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तली मठरी, भुजिया |
भुना चना, रोस्टेड मखाना, बेक की हुई मठरी |
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समोसे, कचौरी |
इडली, ढोकला, भुने पनीर या सब्जी के टिक्के |
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मीठे ठंडे पेय |
नींबू पानी (कम चीनी), नारियल पानी, छाछ |
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मावे की भारी मिठाई |
सूजी या दलिया का हल्का हलवा, कम चीनी के लड्डू |
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पूरी, परांठे |
रोटी या बाजरे-ज्वार की रोटी के साथ सब्जी |
हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और मुट्ठी भर मेवे दिल के लिए अच्छे माने जाते हैं। त्योहार के भारी भोजन के बीच एक सलाद या सूप जोड़ लेने से पेट भरा-भरा रहता है और तली चीजें अपने आप कम खाई जाती हैं।
अक्सर हां, क्योंकि घर पर आप चीनी, घी और सामग्री की गुणवत्ता तय कर सकते हैं। पर घर की मिठाई भी ज्यादा खाई जाए तो उतनी ही नुकसानदेह हो सकती है। असली फर्क मात्रा का है। बाजार से लें तो भरोसेमंद दुकान से ताज़ी और कम मात्रा में लें।
हाई BP, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों को त्योहारों के दौरान खान-पान में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए जैसे कि -
त्योहार में अक्सर लोग सीने की जलन को एसिडिटी मान लेते हैं। इसलिए इन लक्षणों को हल्के में न लें -
ये लक्षण एसिडिटी, घबराहट या मांसपेशियों के दर्द में भी हो सकते हैं, इसलिए सिर्फ लक्षण देखकर कुछ तय नहीं किया जा सकता। फिर भी अगर ये अचानक शुरू हों या आराम करने से ठीक न हों, तो देर किए बिना नज़दीकी अस्पताल जाएं या एम्बुलेंस बुलाएं।
दिवाली की मिठाई और पकवान दिल के दुश्मन नहीं हैं, बशर्ते मात्रा, तरीका और आदतें संतुलित रहें। थोड़ी मिठाई, कम नमक, कम तला हुआ खाना और रोज़ थोड़ी सैर, यही सबसे व्यावहारिक फार्मूला है। अगर आप या आपके परिवार में कोई दिल का मरीज है, तो त्योहार से पहले डॉक्टर से अपनी डाइट पर बात कर लें। हमारे कार्डियोलॉजिस्ट मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और जरूरतों के अनुसार ही इलाज करते हैं, जिससे उपचार पूरी तरह व्यक्तिगत (personalized) रहता है।
हां, अगर मिठाई बार-बार और ज्यादा खाई जाए। इससे वज़न, शुगर और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ सकते हैं। सीमित मात्रा में, भोजन के बाद खाई गई मिठाई आम तौर पर स्वस्थ लोगों के लिए नुकसानदायक नहीं होती।
हां। ज्यादा सोडियम शरीर में पानी रोकता है और ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है। WHO वयस्कों को रोज़ 5 ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है।
ज्यादा मात्रा में हां, क्योंकि इनमें सैचुरेटेड फैट अधिक होता है जो LDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकती है। थोड़ी मात्रा आम तौर पर स्वीकार्य है। दिल के मरीज डॉक्टर से अपनी सही मात्रा पूछें।
फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, ओट्स और मुट्ठी भर मेवे चुनें। तला हुआ खाना, मावे की भारी मिठाई और बेकरी के स्नैक्स कम करें। दवा चल रही हो तो उसे न छोड़ें।
अक्सर हां, क्योंकि घर पर चीनी, घी और सामग्री आप तय करते हैं। फिर भी मात्रा ज्यादा हुई तो नुकसान उतना ही हो सकता है। छोटा टुकड़ा और सीमित बार लेना ही असली उपाय है।
हल्का, कम नमक और कम तेल वाला भोजन, जैसे दाल, रोटी, सब्जी, सलाद, फल और भुने मेवे। मिठाई का एक छोटा टुकड़ा लिया जा सकता है। हर मरीज की स्थिति अलग है, इसलिए डॉक्टर की सलाह मानें।
यह एसिडिटी भी हो सकती है और हार्ट की समस्या भी। अगर दर्द सीने में दबाव जैसा है, बांह या जबड़े तक जाए, या सांस फूले, तो तुरंत अस्पताल जाएं। देर न करें।
Written and Verified by:

Dr. Rakesh Sarkar is a Senior Consultant in Cardiology & Electrophysiology at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 13 years of experience. He specializes in complex arrhythmia management, including atrial fibrillation, ventricular tachycardia, CRT-D, and conduction system pacing.
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