हाइपोथायरायडिज्म का इलाज और डाइट में क्या रखें ध्यान?
Home >Blogs >हाइपोथायरायडिज्म का इलाज और डाइट में क्या रखें ध्यान?

हाइपोथायरायडिज्म का इलाज और डाइट में क्या रखें ध्यान?

Diabetes and Endocrine Sciences | by Dr. Ankur Gahlot on 18/02/2026 | Last Updated : 17/02/2026

Table of Contents

Summary

  • शरीर में थकान, अचानक वजन बढ़ने, बालों के झड़ने और अत्यधिक ठंड लगने जैसे संकेत हाइपोथायरायडिज्म की तरफ इशारा करते हैं।
  • डॉक्टर की सलाह पर हार्मोनल दवाओं का नियमित सेवन करें ताकि थायराइड का स्तर संतुलित रहे।
  • आयोडीन और सेलेनियम युक्त पौष्टिक आहार लें, लेकिन सोया और कच्ची गोभी जैसी चीज़ों से परहेज़ करें।
  • तनाव कम करने के लिए योग को अपनाएं और मेटाबॉलिज्म सुधारने के लिए शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
  • अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में नियमित ब्लड टेस्ट करवाएं ताकि उपचार को ज़रूरत के अनुसार बदला जा सके।

क्या आपको सुबह उठते ही एकदम तरोताजा महसूस करने की बजाय, बिना कारण थकान का अनुभव होता है? क्या व्यायाम और कम खाने के बावजूद आपका वजन लगातार बढ़ रहा है या आपके बाल अपनी चमक खोते जा रहे हैं? यदि इन सभी प्रश्नों के उत्तर हाँ हैं, तो यह न ही बढ़ती उम्र का तकाजा है और न आपके काम का प्रेशर। यह संकेत हो सकता है कि आपकी गर्दन में स्थित वह छोटी सी तितली के आकार का ग्लैंड, जिसे हम थायराइड कहते हैं, सुस्त पड़ गई है।

हाइपोथायरायडिज्म कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिससे आप अकेले लड़ रहे हैं; भारत में हर दस में से एक वयस्क इससे प्रभावित है। लेकिन यकीन मानिए, सही जानकारी और विशेषज्ञों के परामर्श से आप न केवल इसे नियंत्रित कर सकते हैं, बल्कि एक ऊर्जावान जीवन फिर से जीने में मदद कर सकते हैं। आज ही हाइपोथायरायडिज्म उपचार के लिए सही दिशा में कदम उठाएं और अपनी सेहत को अपनी प्राथमिकता बनाएं। ऐसा करने के लिए आपको हमारे अनुभवी एंडोक्राइनोलॉजिस्ट विशेषज्ञों से परामर्श लेना होगा।

हाइपोथायरायडिज्म क्या है? - What is Hypothyroidism?

चलिए सरल भाषा में समझते हैं कि हाइपोथायरायडिज्म क्या होता है। जो लोग इस समस्या से परेशान हैं और इस रोग के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, उनके लिए इसे समझना बहुत जरूरी है। जब हमारा थायराइड ग्लैंड पर्याप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन (T3 और T4) का उत्पादन नहीं कर पाता है, तो इस स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है। यह हार्मोन हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म (भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया) को नियंत्रित करते हैं। जब इनकी कमी होती है, तो शरीर के सभी कार्य धीमे पड़ जाते हैं।

हाइपोथायरायडिज्म के बारे में सही जानकारी प्राप्त करना बहुत आवश्यक है क्योंकि 'इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म' के अनुसार, भारत में लगभग 42 मिलियन लोग किसी न किसी प्रकार के थायराइड विकार से जूझ रहे हैं। सही जानकारी की मदद से ही सही इलाज संभव है।

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण: शरीर के मौन संकेत

शुरुआत में हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इन्हें अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय के साथ यह गंभीर हो सकते हैं जैसे कि -

इन लक्षणों को अक्सर हम लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल न करें। इन लक्षणों के दिखने पर बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से परामर्श लें और इलाज के सभी विकल्पों के बारे में उनसे पूछें।

हाइपोथायरायडिज्म के कारण - Causes of Hypothyroidism

यह समझना कि हाइपोथायरायडिज्म के कारण क्या हैं, इसके सही इलाज की पहली सीढ़ी है। कारण को पहचानकर ही इलाज का विकल्प डॉक्टरों के द्वारा तय किया जाता है। चलिए सबसे पहले समझते हैं कि किन कारणों से आपको यह समस्या परेशान कर सकती है -

  • हाशिमोटो रोग: यह एक ऑटोइम्यून स्थिति है, जहां शरीर का इम्यून सिस्टम ही थायराइड ग्लैंड पर हमला कर देता है।
  • आयोडीन की कमी: भारत के कई हिस्सों में मिट्टी और पानी में आयोडीन की कमी के कारण यह समस्या देखी जाती है।
  • थायराइड सर्जरी: कैंसर या गोइटर के कारण थायराइड का हिस्सा निकाल देने से भी यह समस्या ट्रिगर हो सकती है।
  • दवाएं: कुछ खास बीमारियां (जैसे कि हृदय रोग या मानसिक रोग) की दवाएं भी इसे ट्रिगर कर सकती हैं।
  • जेनेटिक्स: यदि परिवार में किसी को थायराइड की समस्या रही है।

एक बात का खास ध्यान रखें कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हाइपोथायरायडिज्म होने की संभावना 3 से 8 गुना अधिक होती है। इसलिए महिलाओं को थायराइड के लक्षणों पर अपना ध्यान हमेशा केंद्रित रखना चाहिए।

हाइपोथायरायडिज्म का इलाज कैसे किया जाता है?

आज के मेडिकल साइंस में हाइपोथायरायडिज्म का उपचार बेहद प्रभावी और सरल है। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर में कम हो रहे हार्मोन की भरपाई करना है।

  • हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी: इसमें आमतौर पर 'लेवोथायरोक्सिन' (Levothyroxine) नामक दवा दी जाती है। यह एक सिंथेटिक हार्मोन है, जो प्राकृतिक T4 हार्मोन की तरह काम करता है। इस थेरेपी में दवा की मदद से शरीर अपने आप को ठीक करने का कार्य करने लगता है।
  • नियमित जांच: रक्त परीक्षण (TSH Test) के जरिए डॉक्टर यह तय करते हैं कि दवा की कितनी खुराक आपके लिए सही है।

इसके अतिरिक्त हाइपोथायरायडिज्म में दो और बातों का खास ध्यान रखा जाता है -

आहार और पोषण (Dietary)

  • सुबह की दवा और नाश्ते के बीच कम से कम 45-60 मिनट का अंतर रखें ताकि दवा पूरी तरह शरीर में सोख ली जाए।
  • सोया, फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी चीजों का सेवन सीमित करें या इन्हें अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।
  • कैल्शियम और आयरन की गोलियों को थायराइड की दवा के साथ न लें, इसमें कम से कम 4 घंटे का अंतर रखें।
  • आयोडीन और सेलेनियम युक्त भोजन (जैसे नट्स और अंडे) शामिल करें और रिफाइंड शुगर व पैकेट बंद फूड से बचें।

जीवनशैली (Lifestyle)

  • रोजाना 30 मिनट की पैदल सैर या कार्डियो एक्सरसाइज करें ताकि धीमा मेटाबॉलिज्म फिर से सक्रिय हो सके।
  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या हल्के वजन उठाने वाले व्यायाम करें, जिससे मांसपेशियों की ताकत बढ़े और थकान कम हो।
  • तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लेने वाले व्यायाम या योग करें, क्योंकि तनाव हार्मोन को असंतुलित करता है।
  • नियमित रूप से 7-8 घंटे की नींद लें ताकि शरीर को रिकवरी का पूरा समय मिले और ऊर्जा का स्तर भी बना रहे।

थायराइड की दवा लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?

केवल दवा लेना काफी नहीं है, उसे सही तरीके से लेना भी जरूरी है:

  • खाली पेट दवा: दवा को हमेशा सुबह उठने के तुरंत बाद खाली पेट लें।
  • समय का अंतराल: दवा लेने के कम से कम 30-60 मिनट बाद तक कुछ भी न खाएं (यहां तक कि चाय या कॉफी भी नहीं)।
  • कैल्शियम और आयरन से दूरी: यदि आप कैल्शियम या मल्टीविटामिन ले रहे हैं, तो उन्हें थायराइड की दवा के कम से कम 4 घंटे बाद लें, क्योंकि ये उन दवाओं के अवशोषण (Absorption) में बाधा डाल सकते हैं।

हाइपोथायरायडिज्म में क्या खाएं- डाइट गाइड (Dietary Management)

इस बात में दो राय नहीं है कि भोजन ही औषधि है। हाइपोथायरायडिज्म डाइट ऐसी होनी चाहिए जो आपके मेटाबॉलिज्म को गति दे सके जैसे कि -

  • आयोडीन युक्त नमक: आयोडीन हार्मोन उत्पादन के लिए ईंधन की तरह काम करता है।
  • सेलेनियम से भरपूर खाद्य पदार्थ: ब्राजील नट्स (सीमित मात्रा में), अंडे और दालें थायराइड एंजाइम को सक्रिय करती हैं।
  • जिंक: कद्दू के बीज और चने जिंक के अच्छे स्रोत हैं।
  • फाइबर युक्त भोजन: चूंकि थायराइड में कब्ज की समस्या होती है, इसलिए होल ग्रेन्स, फल और हरी सब्जियां शामिल करें।
  • प्रोटीन: लीन मीट, मछली और पनीर मांसपेशियों की मरम्मत में मदद करते हैं।

हाइपोथायरायडिज्म में क्या नहीं खाना चाहिए? - Foods to Avoid

कुछ खाद्य पदार्थ थायराइड हार्मोन के एबसोर्बशन को रोकते हैं, जिन्हें 'गोइट्रोजेन्स' (Goitrogens) कहा जाता है। इन खाद्य पदार्थों को अपने आहार में बिल्कुल शामिल नहीं करना चाहिए -

  • कच्ची क्रूसिफेरस सब्जियां: फूलगोभी, पत्तागोभी, ब्रोकोली और केल को कच्चा खाने से बचें। इन्हें पकाकर खाना सुरक्षित है।
  • सोया उत्पाद: सोयाबीन, सोया मिल्क और टोफू दवा के असर को कम कर सकते हैं।
  • प्रोसेस्ड शुगर: मीठी चीजें और मैदा वजन बढ़ाते हैं और सूजन (Inflammation) पैदा करते हैं।
  • कैफीन और अल्कोहल: ये थायराइड ग्लैंड की कार्यक्षमता को बिगाड़ सकते हैं।

निष्कर्ष

हाइपोथायरायडिज्म क्या है, इसे जानने के बाद यह स्पष्ट है कि यह केवल दवा खाने तक सीमित नहीं है। यह आपकी जीवनशैली को एक नई और स्वस्थ दिशा देने का मौका है। सही खान-पान, नियमित व्यायाम और विशेषज्ञों की सलाह से आप इस स्थिति को पूरी तरह से मात दे सकते हैं। यदि आप या आपके परिवार में कोई भी इन लक्षणों का सामना कर रहा है, तो इंतजार न करें। हाइपोथायरायडिज्म का इलाज संभव है और एक बेहतर कल आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। तुरंत परामर्श लें और अपने भविष्य के बारे में सोचें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाइपोथायरायडिज्म में कौन सी डाइट सबसे अच्छी है?

सबसे अच्छी डाइट वह है, जिसमें आयोडीन, सेलेनियम और जिंक की पर्याप्त मात्रा हो। होल ग्रेन्स, ताजे फल, सब्जियां और लीन प्रोटीन शामिल करें। साथ ही, कच्चे सोया और गोभी जैसी सब्जियों से बचें।

क्या थायराइड मरीज को आयोडीन लेना चाहिए?

हां, आयोडीन थायराइड हार्मोन के निर्माण के लिए आवश्यक है। हालांकि, इसकी अधिकता भी नुकसानदेह हो सकती है। यदि आपको हाशिमोटो रोग है, तो आयोडीन की मात्रा के लिए डॉक्टर से परामर्श लें।

हाइपोथायरायडिज्म में वजन क्यों बढ़ता है?

थायराइड हार्मोन की कमी से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इसका मतलब है कि आपका शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलने की क्षमता कम कर देता है, जिससे अतिरिक्त कैलोरी फैट के रूप में जमा होने लगती है।

थायराइड की दवा खाली पेट क्यों ली जाती है?

खाली पेट दवा लेने से शरीर इसे सबसे बेहतर तरीके से सोख (Absorb) पाता है। भोजन, कॉफी या अन्य दवाएं लेवोथायरोक्सिन के अवशोषण में बाधा डाल सकती हैं।

हाइपोथायरायडिज्म के इलाज में कितना समय लगता है?

यह एक जीवन भर चलने वाली स्थिति हो सकती है। हालांकि, सही खुराक शुरू करने के 1-2 सप्ताह के भीतर आपको सुधार महसूस होने लगता है, लेकिन हार्मोन लेवल सामान्य होने में कुछ महीने लग सकते हैं।

क्या व्यायाम से थायराइड कंट्रोल हो सकता है?

व्यायाम सीधे तौर पर थायराइड हार्मोन नहीं बनाता, लेकिन यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है, वजन कम करने में मदद करता है और थकान और तनाव को दूर करता है, जो इलाज में सहायक है।

क्या गर्भावस्था में हाइपोथायरायडिज्म खतरनाक है?

हां, यदि इसे कंट्रोल न किया जाए तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान थायराइड लेवल की नियमित निगरानी और दवा की खुराक का समायोजन अनिवार्य है।

क्या मैं थायराइड की दवा कभी बंद कर सकता हूँ?

ज्यादातर मामलों में, यह दवा जीवनभर लेनी पड़ती है। कभी भी डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें, क्योंकि इससे लक्षण वापस आ सकते हैं और स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।

Written and Verified by:

Dr. Ankur Gahlot

Dr. Ankur Gahlot

Additional Director Exp: 13 Yr

Diabetes & Endocrinology

Book an Appointment

Dr. Ankur Gahlot is Additional Director of the Diabetes & Endocrinology Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 16 years of experience. He treats diabetes, thyroid, pituitary, adrenal disorders, osteoporosis, PCOS, and infertility related to hormonal issues

Related Diseases & Treatments

Treatments in Jaipur

Diabetes and Endocrine Sciences Doctors in Jaipur

NavBook Appt.WhatsappWhatsappCall Now