
क्या आपको सुबह उठते ही एकदम तरोताजा महसूस करने की बजाय, बिना कारण थकान का अनुभव होता है? क्या व्यायाम और कम खाने के बावजूद आपका वजन लगातार बढ़ रहा है या आपके बाल अपनी चमक खोते जा रहे हैं? यदि इन सभी प्रश्नों के उत्तर हाँ हैं, तो यह न ही बढ़ती उम्र का तकाजा है और न आपके काम का प्रेशर। यह संकेत हो सकता है कि आपकी गर्दन में स्थित वह छोटी सी तितली के आकार का ग्लैंड, जिसे हम थायराइड कहते हैं, सुस्त पड़ गई है।
हाइपोथायरायडिज्म कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिससे आप अकेले लड़ रहे हैं; भारत में हर दस में से एक वयस्क इससे प्रभावित है। लेकिन यकीन मानिए, सही जानकारी और विशेषज्ञों के परामर्श से आप न केवल इसे नियंत्रित कर सकते हैं, बल्कि एक ऊर्जावान जीवन फिर से जीने में मदद कर सकते हैं। आज ही हाइपोथायरायडिज्म उपचार के लिए सही दिशा में कदम उठाएं और अपनी सेहत को अपनी प्राथमिकता बनाएं। ऐसा करने के लिए आपको हमारे अनुभवी एंडोक्राइनोलॉजिस्ट विशेषज्ञों से परामर्श लेना होगा।
चलिए सरल भाषा में समझते हैं कि हाइपोथायरायडिज्म क्या होता है। जो लोग इस समस्या से परेशान हैं और इस रोग के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, उनके लिए इसे समझना बहुत जरूरी है। जब हमारा थायराइड ग्लैंड पर्याप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन (T3 और T4) का उत्पादन नहीं कर पाता है, तो इस स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है। यह हार्मोन हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म (भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया) को नियंत्रित करते हैं। जब इनकी कमी होती है, तो शरीर के सभी कार्य धीमे पड़ जाते हैं।
हाइपोथायरायडिज्म के बारे में सही जानकारी प्राप्त करना बहुत आवश्यक है क्योंकि 'इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म' के अनुसार, भारत में लगभग 42 मिलियन लोग किसी न किसी प्रकार के थायराइड विकार से जूझ रहे हैं। सही जानकारी की मदद से ही सही इलाज संभव है।
शुरुआत में हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इन्हें अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय के साथ यह गंभीर हो सकते हैं जैसे कि -
इन लक्षणों को अक्सर हम लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल न करें। इन लक्षणों के दिखने पर बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से परामर्श लें और इलाज के सभी विकल्पों के बारे में उनसे पूछें।
यह समझना कि हाइपोथायरायडिज्म के कारण क्या हैं, इसके सही इलाज की पहली सीढ़ी है। कारण को पहचानकर ही इलाज का विकल्प डॉक्टरों के द्वारा तय किया जाता है। चलिए सबसे पहले समझते हैं कि किन कारणों से आपको यह समस्या परेशान कर सकती है -
एक बात का खास ध्यान रखें कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हाइपोथायरायडिज्म होने की संभावना 3 से 8 गुना अधिक होती है। इसलिए महिलाओं को थायराइड के लक्षणों पर अपना ध्यान हमेशा केंद्रित रखना चाहिए।
आज के मेडिकल साइंस में हाइपोथायरायडिज्म का उपचार बेहद प्रभावी और सरल है। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर में कम हो रहे हार्मोन की भरपाई करना है।
इसके अतिरिक्त हाइपोथायरायडिज्म में दो और बातों का खास ध्यान रखा जाता है -
केवल दवा लेना काफी नहीं है, उसे सही तरीके से लेना भी जरूरी है:
इस बात में दो राय नहीं है कि भोजन ही औषधि है। हाइपोथायरायडिज्म डाइट ऐसी होनी चाहिए जो आपके मेटाबॉलिज्म को गति दे सके जैसे कि -
कुछ खाद्य पदार्थ थायराइड हार्मोन के एबसोर्बशन को रोकते हैं, जिन्हें 'गोइट्रोजेन्स' (Goitrogens) कहा जाता है। इन खाद्य पदार्थों को अपने आहार में बिल्कुल शामिल नहीं करना चाहिए -
हाइपोथायरायडिज्म क्या है, इसे जानने के बाद यह स्पष्ट है कि यह केवल दवा खाने तक सीमित नहीं है। यह आपकी जीवनशैली को एक नई और स्वस्थ दिशा देने का मौका है। सही खान-पान, नियमित व्यायाम और विशेषज्ञों की सलाह से आप इस स्थिति को पूरी तरह से मात दे सकते हैं। यदि आप या आपके परिवार में कोई भी इन लक्षणों का सामना कर रहा है, तो इंतजार न करें। हाइपोथायरायडिज्म का इलाज संभव है और एक बेहतर कल आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। तुरंत परामर्श लें और अपने भविष्य के बारे में सोचें।
सबसे अच्छी डाइट वह है, जिसमें आयोडीन, सेलेनियम और जिंक की पर्याप्त मात्रा हो। होल ग्रेन्स, ताजे फल, सब्जियां और लीन प्रोटीन शामिल करें। साथ ही, कच्चे सोया और गोभी जैसी सब्जियों से बचें।
हां, आयोडीन थायराइड हार्मोन के निर्माण के लिए आवश्यक है। हालांकि, इसकी अधिकता भी नुकसानदेह हो सकती है। यदि आपको हाशिमोटो रोग है, तो आयोडीन की मात्रा के लिए डॉक्टर से परामर्श लें।
थायराइड हार्मोन की कमी से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इसका मतलब है कि आपका शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलने की क्षमता कम कर देता है, जिससे अतिरिक्त कैलोरी फैट के रूप में जमा होने लगती है।
खाली पेट दवा लेने से शरीर इसे सबसे बेहतर तरीके से सोख (Absorb) पाता है। भोजन, कॉफी या अन्य दवाएं लेवोथायरोक्सिन के अवशोषण में बाधा डाल सकती हैं।
यह एक जीवन भर चलने वाली स्थिति हो सकती है। हालांकि, सही खुराक शुरू करने के 1-2 सप्ताह के भीतर आपको सुधार महसूस होने लगता है, लेकिन हार्मोन लेवल सामान्य होने में कुछ महीने लग सकते हैं।
व्यायाम सीधे तौर पर थायराइड हार्मोन नहीं बनाता, लेकिन यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है, वजन कम करने में मदद करता है और थकान और तनाव को दूर करता है, जो इलाज में सहायक है।
हां, यदि इसे कंट्रोल न किया जाए तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान थायराइड लेवल की नियमित निगरानी और दवा की खुराक का समायोजन अनिवार्य है।
ज्यादातर मामलों में, यह दवा जीवनभर लेनी पड़ती है। कभी भी डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें, क्योंकि इससे लक्षण वापस आ सकते हैं और स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
Written and Verified by:

Dr. Ankur Gahlot is Additional Director of the Diabetes & Endocrinology Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 16 years of experience. He treats diabetes, thyroid, pituitary, adrenal disorders, osteoporosis, PCOS, and infertility related to hormonal issues
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