
क्या आपको कभी-कभी ऐसा लगता है कि बिना मेहनत करे ही आपको थकान हो रही है, धड़कन तेज हो रही है और आप घबरा रहे हैं, तो यह स्थिति बिल्कुल भी छोटी बात नहीं है। इसके साथ-साथ यदि आपका वजन भी अचानक से गिर रहा है, तो हो सकता है कि यह स्थिति हाइपरथायरायडिज्म की है।
जब आपके गले में मौजूद तितली के आकार की थायराइड ग्लैंड जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती है, तो यह आपकी पूरी जीवनशैली को अस्त-व्यस्त कर सकती है। इसे नजरअंदाज करना न केवल आपकी सेहत के लिए जोखिम भरा है, बल्कि यह आपके दिल और हड्डियों को भी कमजोर कर सकता है। यदि आप या आपके परिवार में कोई इन लक्षणों से गुजर रहा है, तो घबराएं नहीं। हाइपरथायरायडिज्म का सही समय पर इलाज संभव है। विशेषज्ञ सलाह और बेहतर उपचार के लिए आपहमारे अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लें। हमारे अनुभवी विशेषज्ञ पिछले 30 वर्षों से पेशेंट्स का सर्वश्रेष्ठ सफलता दर के साथ इलाज कर रहे हैं।
हाइपरथायरायडिज्म एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें आपकी थायराइड ग्लैंड बहुत अधिक मात्रा में 'थायरोक्सिन' (T4) हार्मोन का उत्पादन करने लगती है। थायराइड ग्लैंड हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म (उपापचय) को नियंत्रित करती है। जब यह ग्लैंड 'ओवरड्राइव' मोड में चली जाती है, तो शरीर की सभी प्रक्रियाएं सामान्य से बहुत तेज होने लगती है।
अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं कि हाइपोथायरायडिज्म क्या होता है? चलिए इसे सरल भाषा में समझते हैं। जहां हाइपरथायरायडिज्म में ग्लैंड अधिक हार्मोन बनाते हैं, वहीं हाइपोथायरायडिज्म क्या है यह समझना भी जरूरी है क्योंकि इसमें ग्लैंड पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाते हैं। दोनों ही स्थितियां शरीर के संतुलन को बिगाड़ती हैं, लेकिन इनके लक्षण बिल्कुल विपरीत होते हैं। भारत में लगभग 42 मिलियन लोग किसी न किसी प्रकार के थायराइड विकार से पीड़ित हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में 10 गुना अधिक है। इसलिए यह प्रमाणित है कि महिलाओं में थायराइड की समस्या अधिक होती है।
हाइपरथायरायडिज्म के दो सबसे प्रमुख और डरावने लक्षण हैं - अचानक वजन का गिरना और दिल की धड़कन का अनियंत्रित होना।
अक्सर मरीज पूछते हैं कि आखिर हाइपरथायरायडिज्म क्यों होता है? इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे कि -
यहां यह जानना भी रोचक है कि हाइपोथायरायडिज्म के कारण अक्सर आयोडीन की कमी या हाशिमोटो रोग होते हैं, जो हाइपर के बिल्कुल उलट हैं।
धड़कन बढ़ने और वजन घटने के अतिरिक्त, शरीर कई अन्य संकेत भी देता है जैसे कि -
इसके विपरीत, हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण में अत्यधिक थकान, वजन बढ़ना और ठंड लगना शामिल हैं। इन दोनों के बीच का अंतर समझना सही इलाज के लिए अनिवार्य है।
यदि आपको संदेह है, तो आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इसके सटीक निदान के तरीके भी उपलब्ध हैं। CMRI कोलकाता जैसे अस्पतालों में विश्वस्तरीय डायग्नोस्टिक सुविधाएं मौजूद हैं जैसे कि -
इलाज का मुख्य उद्देश्य हार्मोन के उत्पादन को सामान्य स्तर पर लाना है। इसके लिए प्रमुख विकल्पों को नीचे बताया गया है -
अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या हाइपोथायरायडिज्म खतरनाक है? सच तो यह है कि हाइपर और हाइपो दोनों ही यदि अनुपचारित छोड़ दिए जाएं, तो दिल की बीमारी और हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis) का कारण बन सकते हैं।
हाइपरथायरायडिज्म और हृदय रोग एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। जब थायराइड ग्लैंड अत्यधिक हार्मोन (T3 और T4) बनाने लगती है, तो यह हृदय की गति को एक "ओवरड्राइव" मोड में डाल देती है। सरल शब्दों में, यह आपके दिल को बिना रुके दौड़ने के लिए मजबूर कर देता है। इस स्थिति में निम्न समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं -
यदि आप अचानक वजन घटने, गर्दन में सूजन (Goiter), या असामान्य रूप से तेज धड़कन का अनुभव कर रहे हैं, तो देर न करें। विशेषकर 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित जांच करानी चाहिए। थायराइड की समस्या केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है।
हाइपरथायरायडिज्म कोई ऐसी बीमारी नहीं है, जिससे डरा जाए, बल्कि यह एक ऐसी स्थिति है, जिसे समझा जाना चाहिए। सही डाइट, नियमित व्यायाम और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में आप एक सामान्य और ऊर्जावान जीवन जी सकते हैं। याद रखें, आपका शरीर आपसे बात करता है; जब धड़कनें तेज हों, तो वह मदद मांग रहा होता है। समय पर लिया गया फैसला आपको भविष्य की बड़ी जटिलताओं से बचा सकता है।
CMRI Hospital, Kolkata में डॉ. कल्याण कुमार गंगोपाध्याय और डॉ. सुजीत भट्टाचार्य जैसे प्रतिष्ठित एंडोक्रिनोलॉजिस्ट्स का 33+ वर्षों का अनुभव आपकी जटिल से जटिल समस्या का समाधान करने में सक्षम है।
नहीं, तेज धड़कन के कई कारण हो सकते हैं जैसे तनाव, एनीमिया या हृदय रोग। हालांकि, यदि इसके साथ वजन घट रहा है और पसीना अधिक आ रहा है, तो यह हाइपरथायरायडिज्म का संकेत हो सकता है।
मुख्य रूप से 'थायराइड फंक्शन टेस्ट' (TFT) किया जाता है, जिसमें रक्त में TSH, फ्री T3 और फ्री T4 के स्तर की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या थायराइड स्कैन भी लिख सकते हैं।
हाइपरथायरायडिज्म में मेटाबॉलिज्म बहुत तेज हो जाता है, जिससे शरीर आराम करते समय भी बहुत अधिक कैलोरी जलाता है। इससे मांसपेशियों और फैट का क्षय होता है, जिससे वजन तेजी से गिरता है।
आयोडीन युक्त नमक, मछली, अंडे और सेलेनियम युक्त चीजें जैसे नट्स (बादाम, अखरोट) खाएं। ताजे फल और सब्जियां मेटाबॉलिज्म सुधारने में मदद करती हैं।
सोया उत्पाद, गोभी, ब्रोकली और फूलगोभी जैसी 'गोइट्रोजेनिक' चीजों का कच्चा सेवन कम करना चाहिए। साथ ही प्रोसेस्ड शुगर और अत्यधिक कैफीन से परहेज करें।
हां, रेडियोआयोडीन थेरेपी या सर्जरी से इसका स्थायी समाधान संभव है। हालांकि, इसके बाद मरीज को अक्सर हाइपोथायरायडिज्म हो जाता है, जिसे एक छोटी टैबलेट से आसानी से मैनेज किया जा सकता है।
जी हाँ, अगर इसे नियंत्रित न किया जाए तो यह माँ और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान थायराइड स्तर की कड़ी निगरानी जरूरी है।
Written and Verified by:
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Consultant - Diabetes & Endocrinology Exp: 33 Yr
Endocrinology
Dr. Kalyan Kumar Gangopadhyay is a Consultant in Diabetes & Endocrinology Dept. at CMRI Hospital, Kolkata. He specializes in diabetes management, thyroid disorders, lipid disorders, and metabolic diseases.
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