एडल्ट जन्मजात हृदय रोग (ACHD) क्या है? जानें यह सामान्य हार्ट की बीमारी से कैसे अलग है
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एडल्ट जन्मजात हृदय रोग (ACHD) क्या है? जानें यह सामान्य हार्ट की बीमारी से कैसे अलग है

Summary

  • यह ब्लॉग पाठकों को यह समझाने के लिए है कि जन्मजात हृदय दोष केवल बच्चों की बीमारी नहीं है; यह वयस्कों (ACHD) को भी प्रभावित कर सकता है।
  • सामान्य हृदय रोग जीवन शैली और उम्र के कारण होते हैं, जबकि ACHD जन्म के समय मौजूद संरचनात्मक दोषों का परिणाम है।
  • यदि आपको सांस फूलने या थकान जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें।
  • बचपन की सर्जरी के बाद भी फॉलो-अप जरूरी है, इसलिए हर कुछ समय में परामर्श आवश्यक है।
  • आधुनिक चिकित्सा और विशेषज्ञ निगरानी के साथ ACHD के मरीज एक स्वस्थ और लंबा जीवन जी सकते हैं।

कल्पना कीजिए कि एक नन्हा सा दिल, जो जन्म के समय एक छोटी सी खामी के साथ धड़कना शुरू करता है, वह दशकों तक बिना किसी शोर के काम करता रहता है। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की जरूरतें बदलती हैं और वह पुराना 'छोटा सा डिफेक्ट' एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। दिल से जुड़ी बीमारियां अक्सर हमें बुढ़ापे या खराब लाइफस्टाइल की याद दिलाती हैं, लेकिन एडल्ट जन्मजात हृदय रोग (ACHD) की कहानी थोड़ी अलग और जज्बाती है। 

यदि आप या आपका कोई अपना अक्सर थकान महसूस करता है या बचपन में दिल का कोई ऑपरेशन हुआ था, तो यह जानकारी आपके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह और उचित देखभाल के जरिए आप एक सामान्य और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

एडल्ट जन्मजात हृदय रोग (ACHD) क्या है?

एडल्ट जन्मजात हृदय रोग, जिसे संक्षेप में ACHD (Adult congenital heart disease) कहा जाता है, उन हृदय दोषों को संदर्भित करता है, जो व्यक्ति के जन्म के समय से ही उसके दिल में मौजूद होते हैं। मेडिकल जगत में इसे अक्सर 'वयस्क जन्मजात हृदय रोग' भी कहा जाता है। "जन्मजात" का अर्थ ही है 'जन्म से'। पहले के समय में, हृदय दोष के साथ पैदा होने वाले अधिकांश बच्चे वयस्क होने तक जीवित नहीं रह पाते थे। लेकिन मेडिकल साइंस की प्रगति और आधुनिक सर्जरी तकनीकों की बदौलत, आज लगभग 90% से अधिक बच्चे वयस्कता की दहलीज पार कर रहे हैं। लेकिन बच्चों में दिल की समस्या (congenital heart disease in child) का इलाज बहुत आवश्यक है क्योंकि भारत में, एक अनुमान के मुताबिक, हर साल लगभग 2 लाख से अधिक बच्चे जन्मजात हृदय दोष के साथ पैदा होते हैं।

जब यही बच्चे बड़े होकर 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेते हैं, तो जिस स्थिति का सामना वो करते हैं, उसे एडल्ट जन्मजात हृदय रोग कहा जाता है। यहां यह समझना जरूरी है कि भले ही बचपन में कोई सर्जरी हुई हो, फिर भी दिल की संरचना सामान्य दिल से अलग हो सकती है, जिसे जीवन भर निगरानी की आवश्यकता होती है। 

सामान्य हृदय रोग और ACHD में क्या अंतर है?

अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं कि क्या बुढ़ापे में होने वाला हार्ट अटैक और ACHD एक ही हैं? इसका जवाब है - नहीं। ACHD बनाम सामान्य हृदय रोग के बीच के अंतर को समझना आपके इलाज के लिए बहुत जरूरी है। चलिए दोनों के बीच के अंतर को समझते हैं - 

  • उत्पत्ति (Origin): सामान्य हृदय रोग (जैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज) आमतौर पर उम्र बढ़ने, उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल या खराब खानपान के कारण धमनियों में रुकावट आने से होता है। वहीं, ACHD जन्म के समय दिल की दीवारों, वाल्वों या रक्त वाहिकाओं की गलत बनावट के कारण होता है।
  • संरचनात्मक बनाम कार्यात्मक: सामान्य हृदय रोग में दिल की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं या नसें ब्लॉक हो जाती हैं। ACHD में दिल की 'इंजीनियरिंग' या बनावट में ही अंतर होता है (जैसे दिल में छेद होना)।
  • इलाज का तरीका: सामान्य हार्ट पेशेंट को अक्सर लाइफस्टाइल बदलने और स्टेंट की जरूरत होती है, जबकि ACHD मरीजों को जन्मजात संरचनात्मक खामियों को सुधारने के लिए विशेष कार्डियक केयर की आवश्यकता होती है।

वयस्कों में जन्मजात हृदय रोग के लक्षण

कई बार बच्चों का हार्ट डिफेक्ट वयस्कों में तब तक पता नहीं चलता जब तक कि शरीर पर काम का बोझ न बढ़े। इसके लक्षण सामान्य हृदय रोगों से मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन इनकी गंभीरता अलग होती है। निम्नलिखित लक्षणों को हमेशा ध्यान में रखने की सलाह दी जाती है - 

  • अत्यधिक थकान: बिना किसी भारी काम के भी हर समय थका हुआ महसूस करना।
  • सांस की तकलीफ: सीढ़ियां चढ़ते समय या लेटने पर सांस फूलना।
  • नीलापन (Cyanosis): होठों, उंगलियों या नाखूनों का हल्का नीला पड़ना, जो ऑक्सीजन की कमी को दर्शाता है।
  • दिल की धड़कन का अनियमित होना (Arrhythmia): अचानक धड़कन तेज होना या महसूस होना कि दिल 'छलांग' लगा रहा है।
  • हाथों-पैरों में सूजन: शरीर में तरल पदार्थ जमा होने के कारण एडिमा की समस्या।
  • व्यायाम करने में असमर्थता: पहले की तुलना में जल्दी थक जाना।

ACHD के सामान्य प्रकार

जन्मजात हृदय रोग वयस्कों में कई रूपों में मौजूद हो सकता है। कुछ मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं - 

  • एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) और VSD: दिल के ऊपरी या निचले कक्षों के बीच की दीवार में छेद होना।
  • महाधमनी का संकुचन (Coarctation of the Aorta): शरीर की मुख्य धमनी का संकरा या पतला होना, जिससे रक्त प्रवाह में समस्या आती है।
  • टेट्रालॉजी ऑफ़ फैलोट (Tetralogy of Fallot): यह चार अलग-अलग स्वास्थ्य समस्या का एक समूह है, जिसका उपचार अक्सर बचपन में हो जाता है, लेकिन वयस्क होने पर इसके फॉलो-अप की जरूरत होती है।
  • वाल्व की समस्याएं: जैसे कि बाइकस्पिड एओर्टिक वाल्व, जहां वाल्व ठीक से नहीं खुलते या बंद होते हैं।

एडल्ट जन्मजात हृदय रोग का निदान कैसे किया जाता है?

निदान की प्रक्रिया एक साधारण शारीरिक जांच से शुरू होती है, जहां डॉक्टर स्टेथोस्कोप की मदद से 'मर्मर' (हृदय की असामान्य ध्वनि) को सुनते हैं। इसके बाद निम्नलिखित टेस्ट किए जा सकते हैं - 

  • इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram): यह दिल की संरचना की लाइव तस्वीरें देखने के लिए सबसे प्रमुख टेस्ट है।
  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG): दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी और धड़कन की लय को मापने के लिए इस टेस्ट को कराया जाता है।
  • कार्डियक एमआरआई या सीटी स्कैन: दिल की जटिल संरचनाओं का विस्तृत विवरण प्राप्त करने के लिए ये स्कैन कराया जाता है।
  • कार्डियक कैथीटेराइजेशन: हृदय के भीतर दबाव और ऑक्सीजन के स्तर को मापने के लिए एक पतली ट्यूब का उपयोग किया जाता है।

ACHD का उपचार और प्रबंधन

उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी गंभीर है। जरूरी नहीं कि हर ACHD मरीज को सर्जरी की आवश्यकता हो। इलाज और मैनेजमेंट के लिए निम्न विकल्प मौजूद हैं - 

  • दवाएं: रक्तचाप को नियंत्रित करने, धड़कन को नियमित रखने और शरीर से अतिरिक्त पानी निकालने के लिए दवाएं दी जाती हैं। 
  • न्यूनतम आक्रामक प्रक्रियाएं/मिनिमल इनवेसिव तकनीक (Minimally Invasive): आज कैथेटर-आधारित तकनीकों के जरिए बिना ओपन हार्ट सर्जरी के दिल के छेद बंद किए जा सकते हैं या वाल्व बदले जा सकते हैं।
  • सर्जिकल रिपेयर: यदि स्थिति जटिल है, तो विशेषज्ञ सर्जन हृदय को ठीक करने के लिए सर्जरी का सुझाव देते हैं।
  • नियमित निगरानी: ACHD के मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है एक 'ACHD स्पेशलिस्ट' के संपर्क में रहना। सामान्य कार्डियोलॉजिस्ट और ACHD विशेषज्ञ के अनुभव में बड़ा अंतर होता है। इसलिए प्रयास करें कि आप उन्हीं डॉक्टरों के पास जाएं जिनके पास ACHD के पेशेंट को संभालने का अनुभव हो।

जीवनशैली और सावधानी

ACHD के साथ जीने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी इच्छाओं को मार दें। बस आपको थोड़ा अधिक जागरूक रहने की जरूरत है - 

  • गर्भावस्था: यदि आप महिला हैं और ACHD से पीड़ित हैं, तो गर्भधारण से पहले अपने हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें। आप फैमिली प्लानिंग से पहले भी कुछ टेस्ट करा सकते हैं, जिससे आपको एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने में मदद मिलेगी।
  • डेंटल केयर: दांतों की सफाई के दौरान संक्रमण (Endocarditis) का खतरा हो सकता है, इसलिए एंटीबायोटिक के बारे में डॉक्टर से पूछें।
  • व्यायाम: भारी वजन उठाने के बजाय हल्के कार्डियो और योग पर ध्यान दें। सरल शब्दों में कहें तो वेट ट्रेनिंग के सिवाय कार्डियो पर अपना ध्यान केंद्रित करें।

निष्कर्ष

एडल्ट जन्मजात हृदय रोग (ACHD) कोई सजा नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति है, जिसे सही प्रबंधन और प्यार भरी देखभाल के साथ संभाला जा सकता है। विज्ञान ने हमें वह शक्ति दी है कि हम इन जन्मजात चुनौतियों के बावजूद एक लंबा और गुणवत्तापूर्ण जीवन जी सकें। यदि आपको अपने बचपन की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पता है या ऊपर बताए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो आज ही एक विशेषज्ञ से मिलें और परामर्श लें। आपका दिल अनमोल है, इसकी धड़कनों को थमने न दें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या जन्मजात हृदय रोग वयस्कों में भी हो सकता है?

हां, जन्मजात हृदय रोग जन्म से ही होता है, लेकिन कई मामलों में इसके लक्षण वयस्क होने तक प्रकट नहीं होते। साथ ही, जिन बच्चों की बचपन में सर्जरी हुई थी, वे भी वयस्क होने पर ACHD की श्रेणी में आते हैं।

सामान्य हार्ट डिजीज और ACHD में क्या अंतर है?

सामान्य हार्ट डिजीज अक्सर लाइफस्टाइल और उम्र (ब्लॉकेज) से जुड़ी होती है। इसके विपरीत, ACHD दिल की बनावट या संरचना में जन्मजात खराबी (जैसे दीवार में छेद या वाल्व की खराबी) के कारण होती है।

किन लोगों को ACHD का अधिक खतरा होता है?

उन लोगों को अधिक खतरा होता है, जिनके परिवार में हार्ट डिफेक्ट का इतिहास रहा हो, या जिनकी माता को गर्भावस्था के दौरान जर्मन खसरा (Rubella) या मधुमेह जैसी बीमारियां रही हों। इसके अतिरिक्त धूम्रपान से भी यह समस्या ट्रिगर हो सकती है।

क्या जन्मजात हृदय रोग के साथ सामान्य जीवन जिया जा सकता है?

बिल्कुल, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और नियमित चिकित्सा फॉलो-अप की मदद से ACHD के मरीज शादी कर सकते हैं, करियर बना सकते हैं और एक सक्रिय व सामान्य जीवन जी सकते हैं। बस हमेशा डॉक्टरों के साथ टच में रहें।

क्या बचपन की सर्जरी के बाद उम्र भर डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

हां, क्योंकि उम्र के साथ दिल में नए बदलाव आ सकते हैं। नियमित चेकअप से भविष्य में होने वाली जटिलताओं जैसे कि हार्ट फेलियर या एरिद्मिया को रोका जा सकता है।

Written and Verified by:

Dr. Satarupa Mukherjee

Dr. Satarupa Mukherjee

Associate Consultant Exp: 16 Yr

Pediatric Cardiology

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Dr. Satarupa Mukherjee is an Associate Consultant in Pediatric Cardiology at BM Birla Heart Hospital, Kolkata with over 3 years of experience. She specializes in post-op care after neonatal & pediatric cardiac surgery, extracorporeal life support, and pediatric cardiac transplantation.

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