कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के 10 लक्षण: शरीर में दिखने वाले चेतावनी संकेत और बचाव
Home >Blogs >कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के 10 लक्षण: शरीर में दिखने वाले चेतावनी संकेत और बचाव

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के 10 लक्षण: शरीर में दिखने वाले चेतावनी संकेत और बचाव

Summary

  • हाई कोलेस्ट्रॉल को "साइलेंट किलर" कहा जाता है क्योंकि ज़्यादातर मामलों में शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण नज़र नहीं आते हैं।
  • फिर भी आंखों के आसपास पीले उभार, पैरों में भारीपन, थकान और सांस फूलना जैसे संकेत शरीर में जमा कोलेस्ट्रॉल की ओर इशारा कर सकते हैं।
  • सिर्फ लक्षणों पर भरोसा करना खतरनाक है, लिपिड प्रोफाइल टेस्ट ही असली सच बताता है।
  • 20 साल की उम्र के बाद हर 4-6 साल में एक बार कोलेस्ट्रॉल जांच करवाना ज़रूरी है।
  • परिवार में हृदय रोग की हिस्ट्री, मोटापा, धूम्रपान और गतिहीन जीवनशैली वालों को अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है।

आज के दौर की कड़वी सच्चाई यह है कि तला-भुना खाना, देर रात तक स्क्रीन पर बैठे रहना और एक ही रात में पूरी-पूरी सीरीज खत्म कर देना एक नया नॉर्मल है। यह हर तीसरे व्यक्ति की कहानी है, जो उन्हें कोलेस्ट्रॉल के जोखिम के करीब ला खड़ा करती है। इस ब्लॉग में हम कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण और उपाय को आसान भाषा में समझेंगे, ताकि आप समय रहते सही कदम उठा सकें। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को इस ब्लॉग में बताए गए लक्षण जाने-पहचाने लगे, तो देर न करें और हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट बुक करें।

क्या हाई कोलेस्ट्रॉल के वास्तव में कोई लक्षण होते हैं?

यहां सबसे पहले एक बात साफ समझ लेनी चाहिए, हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण ज़्यादातर मामलों में सीधे तौर पर नजर नहीं आते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर इसे "साइलेंट कंडीशन" के नाम से भी जानते हैं। कोलेस्ट्रॉल हमारे खून में धीरे-धीरे जमा होता रहता है और नसों को अंदर ही अंदर संकरा करता जाता है, बिना किसी दर्द या तकलीफ के एहसास के। हमारे पास कई मरीज़ ऐसे भी आते हैं जिन्हें सालों तक पता ही नहीं चलता कि उनका कोलेस्ट्रॉल लेवल खतरे की सीमा पार कर चुका है, जब तक कि उन्हें अचानक सीने में दर्द या हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

हालांकि, जब कोलेस्ट्रॉल का स्तर लंबे समय तक बहुत अधिक बना रहता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (जेनेटिक कारणों से होने वाला हाई कोलेस्ट्रॉल) होता है, तो शरीर में कुछ शारीरिक संकेत उभरने लगते हैं। इसलिए कोलेस्ट्रॉल हाई होने के लक्षण को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि इन्हें एक चेतावनी की तरह लेकर समय पर जांच करवानी चाहिए।]

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर शरीर में दिखने वाले 10 संभावित संकेत कौन-से हैं?

शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण कई बार इतने मामूली होते हैं कि हम उन्हें आम थकान या उम्र का असर समझकर टाल देते हैं। नीचे दिए गए संकेत आपको सतर्क रहने में मदद कर सकते हैं - 

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर शरीर में दिखने वाले 10 संभावित

  1. आंखों के पास पीले उभार (Xanthelasma)
  2. आंख की पुतली के चारों ओर सफेद या धुंधली रिंग (Corneal Arcus)
  3. पैरों में भारीपन, दर्द या ऐंठन
  4. बार-बार थकान महसूस होना
  5. सांस फूलना
  6. हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन
  7. त्वचा या टेंडन (कण्डरा) पर पीले उभार (Xanthoma)
  8. सीने में हल्का दबाव या बेचैनी
  9. हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी परेशानी
  10. धुंधला दिखना या आंखों से जुड़ी अन्य दिक्कतें

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से क्या होता है, इसका जवाब सिर्फ ब्लड टेस्ट के ज़रिए ही पूरी तरह समझा जा सकता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज के चेतावनी संकेतों में क्या अंतर है?

बहुत से लोग हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज के लक्षणों को एक ही मान बैठते हैं, जबकि दोनों में एक बुनियादी फर्क है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के संकेत ज़्यादातर धीरे-धीरे और बिना दर्द के सामने आते हैं, जैसे आंखों के पास पीले धब्बे या हल्की थकान। वहीं हार्ट डिजीज के चेतावनी संकेत अक्सर अचानक और तीव्र होते हैं, जैसे सीने में तेज दर्द, बहुत अधिक पसीना आना, बाएं हाथ या जबड़े में दर्द फैलना, या अचानक सांस फूलना।

असल में हाई कोलेस्ट्रॉल एक "जोखिम कारक" है, जबकि हार्ट डिजीज उसका संभावित परिणाम है। यानी अगर कोलेस्ट्रॉल का स्तर लंबे समय तक अनियंत्रित रहे, तो यह धमनियों में प्लाक जमा कर देता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक या ब्लॉकेज जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकता है। इसलिए कोलेस्ट्रॉल के हल्के लक्षणों को भी नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल का पता लगाने के लिए कौन-सी जांच जरूरी है?

चूंकि कोलेस्ट्रॉल हाई होने के लक्षण भरोसेमंद संकेत नहीं होते, इसलिए जांच ही एकमात्र सटीक तरीका है। इसके लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile Test) करवाया जाता है, जिसमें निम्नलिखित फैक्टर्स की जांच होती है -

यह टेस्ट आमतौर पर 9 से 12 घंटे की फास्टिंग के बाद करवाया जाता है, ताकि सटीक परिणाम मिल सकें। डॉक्टर आमतौर पर 20 साल की उम्र के बाद हर 4 से 6 साल में एक बार यह जांच करवाने की सलाह देते हैं।

किन लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा अधिक होता है?

कुछ लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल का जोखिम स्वाभाविक रूप से अधिक होता है। इनमें शामिल हैं - 

  • जिनके परिवार में हृदय रोग या हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास रहा हो
  • मोटापे या अधिक वजन से जूझ रहे लोग
  • धूम्रपान करने वाले व्यक्ति
  • डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़
  • गतिहीन जीवनशैली अपनाने वाले लोग, जो नियमित शारीरिक गतिविधि नहीं करते
  • अधिक तला-भुना, प्रोसेस्ड और सैचुरेटेड फैट युक्त भोजन खाने वाले लोग
  • 45 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष और 55 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं

हमारे अस्पताल में ऐसे कई मामले देखे गए हैं, जहां सामान्य वज़न वाले, यहां तक कि जिम जाने वाले युवा मरीज भी जांच में हाई LDL लेवल के साथ पाए गए, क्योंकि उनकी दिनचर्या में तला हुआ खाना, नींद की कमी और तनाव का स्तर अधिक था। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हृदय संबंधी बीमारियां दुनिया भर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं, और असंतुलित कोलेस्ट्रॉल इसका एक बड़ा योगदानकर्ता माना जाता है।

निष्कर्ष

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण अक्सर इतने हल्के और धीमे होते हैं कि हम उन्हें रोज़मर्रा की थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जैसा कि हमने ऊपर देखा, आंखों के पास पीले उभार से लेकर पैरों में भारीपन तक, ये सभी संकेत शरीर की एक चुपचाप चल रही चेतावनी हो सकते हैं। सबसे समझदारी भरा कदम यही है कि लक्षणों के भरोसे बैठने की बजाय समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाया जाए, संतुलित खानपान अपनाया जाए और नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए। अगर आपको ऊपर बताए गए किसी भी संकेत का अनुभव हो रहा है, या आप सिर्फ अपनी सेहत को लेकर आश्वस्त होना चाहते हैं, तो देर न करें। हमारे सीके बिरला अस्पताल, जयपुर के अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और परामर्श लें।

Written and Verified by:

Dr. Ashwani Kumar Sharma

Dr. Ashwani Kumar Sharma

Senior Consultant Exp: 11 Yr

Cardiology

Book an Appointment

Dr. Sharma is renowned cardiologist working in CK Birla hospitals (RBH). He completeted his MBBS from JLN medical college Ajmer. He completed his M.D. (Internal Medicine) and then D.M. (Cardiology) from PGIMER, Chandigarh, a prestigious instititute of India.

Related Diseases & Treatments

Treatments in Jaipur

Cardiac Sciences Doctors in Jaipur

NavBook Appt.WhatsappWhatsappCall Now