
आपकी रोजमर्रा की आदतें जैसे कि लगातार बैठे रहना, जंक फूड खाना, धूम्रपान, तनाव और कम नींद दिल की बीमारी का बड़ा कारण बन सकती हैं। स्वस्थ दिल के लिए सक्रिय रहें, सही आहार लें और नियमित चेकअप करवाएं।
हम अक्सर अपने चेहरे, बालों या बाहरी खूबसूरती का ख्याल तो रखते हैं, लेकिन उस "दिल" को नजरअंदाज कर देते हैं, जो हमारे जीवन का असली इंजन है। ज़रा सोचिए, अगर यह इंजन एक पल के लिए भी काम करना बंद कर दे, तो क्या होगा?
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अनजाने में कुछ ऐसी आदतों का शिकार हो गए हैं, जो हमारे दिल को हर दिन थोड़ा-थोड़ा करके कमज़ोर कर रही हैं। यह सिर्फ एक मेडिकल समस्या नहीं है, यह एक भावनात्मक त्रासदी है जो न केवल मरीज को बल्कि उसके पूरे परिवार को तोड़कर रख देती है। हालिया रिपोर्ट्स और बीएम बिरला अस्पताल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर चार में से एक मौत का कारण दिल की बीमारियां हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि लगभग 90% हार्ट प्रॉब्लम को सही समय पर जीवनशैली में बदलाव करके रोका जा सकता है। इस ब्लॉग में हम आपको उन्हीं आदतों के बारे में बताएंगे और समझाएंगे कि कैसे आप अपने दिल को स्वस्थ और जीवन को मजबूत बना सकते हैं।
हमारा दिल रातों-रात बीमार नहीं पड़ता। यह वर्षों की लापरवाही और गलत आदतों का नतीजा होता है। दिल की बीमारियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं, और अक्सर जब तक लक्षण सामने आते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। चलिए समझते हैं कि आपकी कौन सी आदतें हैं, जिससे आपके हृदय को नुकसान पहुंच सकता है -
क्या आप जानते हैं कि इस नए युग में निष्क्रिय जीवन शैली एक प्रकार का धूम्रपान है। ऑफिस में 8-9 घंटे बैठना, फिर घर जाकर सोफे पर बैठकर टीवी देखना, यह रूटीन हमारे दिल के लिए जहर समान है। जब हम लंबे समय तक बैठे रहते हैं, तो हमारे शरीर में 'लिपोप्रोटीन लाइपेस' (lipoprotein lipase) नामक एंजाइम का उत्पादन कम हो जाता है, जो फैट को पचाने के लिए ज़रूरी होता है। इससे धमनियों में फैट जमा होने लगता है, जिससे दिल की धमनी का रोग (Coronary Artery Disease) होने का खतरा दोगुना हो जाता है।
रिसर्च बताती है कि जो लोग दिन में 6 से 8 घंटे लगातार बैठे रहते हैं, उनमें हार्ट फेलियर और समय से पहले मौत का खतरा उन लोगों की तुलना में 20% तक बढ़ जाता है जो सक्रिय रहते हैं। इसके लिए आप हर 30-40 मिनट में अपनी सीट से उठें और 5 मिनट का वॉक लें। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें और फोन पर बात करते समय टहलने की आदत डालें। इससे आपको बहुत लाभ मिलेगा।
कहावत है, "जैसा अन्न, वैसा मन", लेकिन दिल के मामले में यह "जैसा खाना, वैसा दिल" है। पिज्जा, बर्गर, चिप्स और फ्राइड फूड्स में मौजूद ट्रांस फैट्स और अत्यधिक नमक दिल के सबसे बड़े दुश्मन हैं। चलिए समझते हैं कैसे -
यदि आप सोचते हैं कि कभी-कभार सिगरेट पीने से या हुक्का पीने से कोई फर्क नहीं पड़ता, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। तंबाकू किसी भी रूप में हो, चाहे सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या ई-सिगरेट (Vaping), यह दिल के लिए बेहद घातक है। सिगरेट के धुएं में मौजूद निकोटीन और कार्बन मोनोऑक्साइड आपके खून में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देते हैं। यह आपकी रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को क्षतिग्रस्त कर देता है, जिससे वहां प्लाक जमा होने लगता है। यह प्लाक धमनियों को संकरा बना देता है, जिससे दिल की बीमारी और क्लॉटिंग का खतरा बढ़ जाता है।
अगर आप खुद धूम्रपान नहीं करते लेकिन धूम्रपान करने वालों के साथ रहते हैं, तो भी आपको हार्ट डिजीज का खतरा 25-30% तक बढ़ जाता है। धूम्रपान करने वालों में हार्ट अटैक का खतरा धूम्रपान न करने वालों की तुलना में 2 से 4 गुना अधिक होता है। अच्छी बात यह है कि धूम्रपान छोड़ने के 1 साल के भीतर ही आपका हार्ट रिस्क 50% तक कम हो जाता है।
आज की दुनिया में "तनाव" एक ऐसी चीज है, जो सबके पास है। लेकिन आपको यह समझना पड़ेगा कि यह एक साइलेंट किलर भी है। जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारा शरीर कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन रिलीज करते है। तनाव स्ट्रेस हार्मोन्स अस्थायी रूप से ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को बढ़ा देता है। यदि आप लगातार तनाव में हैं, तो आपकी धमनियां हमेशा खिंचाव में रहती हैं, जिससे उनकी दीवारों को नुकसान पहुंचता है।
इसके अतिरिक्त नींद केवल आराम नहीं है, यह शरीर का रिपेयर टाइम है। जब आप सोते हैं, तो आपका ब्लड प्रेशर नीचे जाता है और दिल को आराम मिलता है। जो लोग रात में 6 घंटे से कम सोते हैं, उनका शरीर पूरी तरह से रिकवर नहीं हो पाता। इससे 'सी-रिएक्टिव प्रोटीन' (CRP) का स्तर बढ़ता है, जो दिल की बीमारियों का सूचक है।
क्या आप अक्सर सुबह उठने पर भी थका हुआ महसूस करते हैं? यह संकेत हो सकता है कि आपकी नींद की गुणवत्ता (Sleep Quality) खराब है, जो स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) का लक्षण भी हो सकता है। यह स्थिति दिल के लिए बहुत खतरनाक है।
यह सुनकर आपको हैरानी हो सकती है, लेकिन आपके मुंह की सफाई का सीधा संबंध आपके दिल से है। कई लोग रोजाना ब्रश तो करते हैं लेकिन फ्लॉसिंग नहीं करते। मसूड़ों की बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया मुंह से निकलकर खून के ज़रिए आपके दिल तक पहुंच सकते हैं। यह बैक्टीरिया दिल के वाल्व या धमनियों में सूजन और संक्रमण पैदा कर सकते हैं, जिसे 'एंडोकार्डाइटिस' (Endocarditis) कहा जाता है।
दिन में दो बार ब्रश करना और नियमित रूप से फ्लॉस करना न केवल आपके दांतों को बचाएगा, बल्कि आपके दिल को भी सुरक्षित रखेगा।
जागरूकता के लिए यह समझना जरूरी है कि "दिल की बीमारी" एक छतरी के समान शब्द है, जिसके नीचे कई तरह की समस्याएं आती हैं। इनमें से कुछ प्रमुख हैं -
अब जब हम समस्याओं को जानते हैं, तो समाधान पर बात करना भी ज़रूरी है। दिल की बीमारियां डरावनी हो सकती हैं, लेकिन छोटे बदलाव बड़ा असर दिखाते हैं:
हमारा दिल हमारे शरीर का सबसे वफादार साथी है। यह बिना किसी छुट्टी के 24/7 काम करता है। क्या यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है कि हम इसका थोड़ा ख्याल रखें? दिल की बीमारी की जांच अंत नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है कि हमें अपनी जीवनशैली सुधारने की ज़रूरत है। ऊपर बताई गई आदतें जैसे कि ज्यादा देर तक बैठे रहना, खराब खाना, धूम्रपान, तनाव और नींद की कमी, यह सब हमारे हाथ में हैं। आज ही अपना पहला कदम उठाएं और इन आदतों से दूरी बनाएं।
दिल की बीमारी के शुरुआती लक्षण कई बार बहुत सामान्य लगते हैं, जिन्हें लोग एसिडिटी या थकान समझ लेते हैं। इनमें छाती में भारीपन या जकड़न (जो चलता-फिरता दर्द हो सकता है), जबड़े, गर्दन या पीठ में दर्द, अत्यधिक पसीना आना, और बिना किसी मेहनत के सांस फूलना शामिल हैं।
जी हां, बिल्कुल। यदि आप पूरी नींद लेने के बाद भी लगातार थका हुआ महसूस करते हैं, या रोजमर्रा के छोटे-मोटे काम (जैसे कि नहाना या बिस्तर बनाना) करने में भी आपकी सांस फूल रही है, तो यह इशारा हो सकता है कि आपका दिल शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त खून पंप नहीं कर पा रहा है। इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
शत-प्रतिशत। हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल को 'लाइफस्टाइल डिजीज' ही कहा जाता है। खाने में ज्यादा नमक, तली-भुनी चीज़ें, ट्रांस फैट्स, शारीरिक गतिविधि की कमी और अत्यधिक तनाव, यह सभी कारक सीधे तौर पर आपका बीपी और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और कार्डियोलॉजिस्ट्स के अनुसार, हर व्यक्ति को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मॉडरेट एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसका मतलब है कि आप रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज़ पैदल चलें (Brisk Walk)।
यदि आप स्वस्थ हैं और आपकी उम्र 20 से 30 के बीच है, तो हर 2-3 साल में एक बार बेसिक हार्ट चेकअप (BP, कोलेस्ट्रॉल, शुगर) करवाना चाहिए। हालांकि, अगर आपकी उम्र 40 से ऊपर है, या आपके परिवार फैमिली मेडिकल हिस्ट्री रही है, या आप धूम्रपान/डायबिटीज के शिकार हैं, तो आपको साल में एक बार पूरा हार्ट हेल्थ चेकअप (जिसमें ECG और ECHO शामिल हो सकता है) जरूर करवाना चाहिए।
Written and Verified by:

Dr. Sabyasachi Pal is a Senior Consultant in Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 11 years of experience. He specializes in coronary interventions and heart failure management.
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