
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण हाइपरटेंशन एक आम समस्या बन चुका है। अक्सर लोग इंटरनेट पर सर्च करते हैं कि हाई बीपी क्यों होता है या फिर ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण क्या हैं? दरअसल, हम रोजमर्रा की कई ऐसी छोटी-छोटी गलतियां करते हैं, जो सीधे तौर पर हाई ब्लड प्रेशर के कारण बनती हैं। इसे मेडिकल की भाषा में 'साइलेंट किलर' कहा जाता है, क्योंकि यह बिना कोई गंभीर लक्षण दिखाए चुपके से हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
चिंता की बात यह है कि अब केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही, हार्मोनल बदलावों के कारण महिलाओं में हाई बीपी के कारण और उनके लक्षण भी अलग हो सकते हैं। कई बार लोग शिकायत करते हैं कि सब कुछ ठीक होने के बावजूद अचानक बीपी बढ़ने के कारण समझ नहीं आते। चाहे तनाव से ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है यह जानना हो, या फिर नमक और हाई बीपी का संबंध समझना हो तो इन सभी कड़ियों को जोड़े बिना इस बीमारी से पार पाना नामुमकिन है।
यदि इस स्थिति को समय रहते न संभाला जाए, तो यह दिल का दौरा (Heart Attack) या स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों का कारण बन सकता है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं हाई बीपी के वो 15 बड़े कारण जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, ताकि आप और आपका परिवार सुरक्षित रह सके। यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इस गंभीर समस्या का सामना कर रहा है, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से मिलें और इलाज लें।
हाई ब्लड प्रेशर, उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन (Hypertension) वह स्थिति है, जिसमें शरीर की धमनियां (Arteries) में रक्त का प्रवाह बहुत ज्यादा होता है। इसके कारण हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। ब्लड प्रेशर को मिलीमीटर (मिमी एचजी) में मापा जाता है। आमतौर पर 120/80 मिलीमीटर को सामान्य ब्लड प्रेशर में गिना जाता है। इससे अधिक ब्लड प्रेशर को हाई ब्लड प्रेशर मापा जाता है। यदि यह समस्या लंबे समय तक अनुपचारित रह जाए, तो इसके कारण हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिसके कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं।

चूंकि हाई बीपी को 'साइलेंट किलर' माना जाता है, इसलिए इसके लक्षण अक्सर छिपे रहते हैं। फिर भी, शरीर की सुरक्षा के लिए आपको इसके शुरुआती और गंभीर, दोनों तरह के संकेतों की पहचान होनी चाहिए -
ये वो हल्के संकेत हैं, जो बीमारी की शुरुआत में दिखाई देते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं -
ये लक्षण तब दिखते हैं, जब ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। इसे तुरंत मेडिकल इमरजेंसी मानें -
महत्वपूर्ण नोट: यदि किसी में भी ये गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो बिना एक मिनट गंवाए तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
यदि आप यह सोच रहे हैं कि आखिर हाई बीपी क्यों होता है, तो आपको बता दें कि इसके पीछे कोई एक वजह नहीं होती। हमारी रोजमर्रा की आदतें, शारीरिक बीमारियां और आनुवंशिकी मिलकर ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण बनते हैं। आइए, इन 15 मुख्य कारणों को विस्तार से समझते हैं -
नमक और हाई बीपी का संबंध बहुत गहरा है। नमक में सोडियम होता है, और जब हम जरूरत से ज्यादा नमक खाते हैं, तो शरीर में पानी रुकने (Water Retention) लगता है। यह अतिरिक्त पानी रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ाता है, जिससे बीपी हाई हो जाता है।
वजन बढ़ने से शरीर को ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने के लिए हृदय को अधिक रक्त पंप करना पड़ता है। धमनियों के माध्यम से बहने वाले रक्त की मात्रा बढ़ने से उनकी दीवारों पर दबाव बढ़ता है, जो हाई ब्लड प्रेशर के कारणों में सबसे प्रमुख है।
आजकल लोग अक्सर पूछते हैं कि तनाव से ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है? दरअसल, जब आप स्ट्रेस में होते हैं, तो शरीर में एड्रीनलीन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन रिलीज होते हैं। ये हार्मोन अस्थाई रूप से रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देते हैं और दिल की धड़कन बढ़ा देते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर तेजी से ऊपर भागता है।
तम्बाकू या सिगरेट में मौजूद निकोटीन आपके ब्लड प्रेशर को तुरंत बढ़ा देता है। इसके अलावा, धूम्रपान करने से रक्त वाहिकाओं की परतें अंदर से क्षतिग्रस्त और सख्त हो जाती हैं, जिससे धमनियां पतली हो जाती हैं।
नियमित या बहुत अधिक मात्रा में शराब पीने से हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचता है। यह शरीर के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है, जिसके कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और बीपी बढ़ जाता है।
जो लोग दिनभर बैठे रहते हैं और व्यायाम नहीं करते, उनके दिल की धड़कन की दर (Heart Rate) अक्सर अधिक होती है। इसका मतलब है कि आपके दिल को हर संकुचन के साथ अधिक मेहनत करनी पड़ती है। यह आजकल के युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर का एक बहुत बड़ा कारण बन चुका है।
नींद के दौरान हमारा शरीर ब्लड प्रेशर और तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन्स को खुद ही नियंत्रित करता है। यदि आप लगातार 6 घंटे से कम सोते हैं या आपकी नींद बार-बार टूटती है, तो शरीर का यह नेचुरल बैलेंस बिगड़ जाता है।
किडनी हमारे शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ और अपशिष्ट को छानने का काम करती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में फ्लूइड बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर अचानक बीपी बढ़ने के कारण में शामिल होता है।
हाई ब्लड शुगर धमनियों को सख्त और संकरा बना देता है। डायबिटीज के मरीजों में एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में प्लाक जमना) का खतरा बढ़ जाता है, जिससे रक्त का प्रवाह कठिन हो जाता है।
उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारी रक्त वाहिकाएं अपनी लचीलापन (Elasticity) खोने लगती हैं और सख्त हो जाती हैं। यही कारण है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में हाइपरटेंशन की समस्या अधिक देखी जाती है।
अगर आपके माता-पिता या परिवार में किसी को पहले से ही उच्च रक्तचाप की समस्या है, तो आपको यह बीमारी होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। आपके जीन भी आपके बीपी को प्रभावित कर सकते हैं।
रक्त में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ने से धमनियों के अंदर वसा की परतें जमने लगती हैं। रास्ता छोटा होने के कारण दिल को खून आगे धकेलने के लिए बहुत ज्यादा प्रेशर लगाना पड़ता है।
शरीर में कुछ खास हार्मोन के कम या ज्यादा होने से भी बीपी अनियंत्रित होता है (जैसे कॉन सिंड्रोम या थायराइड)। गर्भावस्था या मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव भी महिलाओं में हाई बीपी के कारण बनते है।
यह नींद से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर अचानक गिर जाता है, जिससे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर भारी दबाव पड़ता है।
कुछ दवाएं जैसे कि दर्द निवारक गोलियां (NSAIDs), गर्भनिरोधक गोलियां (Birth Control Pills) या सर्दी-खांसी की डिकंजेस्टेन्ट दवाएं भी ब्लड प्रेशर के स्तर को चुपके से बढ़ा सकती हैं।
हाइपरटेंशन किसी को भी हो सकता है, लेकिन नीचे दिए गए लोगों को इसका सबसे ज्यादा खतरा रहता है:
चूंकि हाई बीपी के लक्षण शुरुआती दौर में महसूस नहीं होते, इसलिए आपको इन परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए:
हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए जीवनशैली में बदलाव और दवाओं के संयोजन को सबसे उत्तम विकल्प माना जाता है। इसके अतिरिक्त कुछ दवाएं भी होती हैं, जिनके सेवन की सलाह अक्सर दी जाती है। चलिए हाई ब्लड प्रेशर के उपचार के सभी विकल्पों के बारे में बात करते हैं -
हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में जीवनशैली में बदलाव एक अहम भूमिका निभाता है। कुछ स्वस्थ आदतों को अपना कर हर व्यक्ति अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकता है। चलिए कुछ स्वस्थ आदतों के बारे में जानते हैं -
यदि जीवनशैली में बदलाव से ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं होता है, तो कुछ दवाएं इस स्थिति को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि दर्जन-भर दवाएं हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में मदद कर सकती हैं। इन दवाओं को एंटीहाइपरटेन्सिव (antihypertensives) कहा जाता है और इन सभी दवाओं का कार्य भी अलग-अलग होता है। किसे कौन सी दवा दी जाएगी इसका निर्णय रोगी के स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर ही किया जाता है।
अक्सर दवाएं तब दी जाती है जब सारे उपाय कारगर साबित नहीं होते हैं। हालांकि दवाओं के साथ-साथ हाई बीपी के घरेलू उपचार काफी लाभकारी साबित हो सकते हैं। यह ध्यान रखना होगा कि इन उपायों को दवाओं और सटीक इलाज के विकल्प के तौर पर बिल्कुल न देखें। हाई बीपी के घरेलू उपचार नीचे लिखे हैं -
हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर स्थिति है, जिसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जीवनशैली में बदलाव और दवाओं के साथ, हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है और एक लंबा, स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर में निम्न खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह नहीं दी जाती है -
हाई ब्लड प्रेशर को तुरंत कंट्रोल करने के लिए निम्न उपायों का पालन करें -
हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति में निम्न फलों का सेवन लाभकारी होगा -
ब्लड प्रेशर हाई होने पर निम्न चरणों का ध्यान रखें -
ब्लड प्रेशर को तीन चरणों में मापा जाता है -
हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति में निम्न प्रकार के दूध या डेयरी उत्पाद के सेवन की सलाह दी जाती है -
हाँ, तनाव से शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन्स बढ़ते हैं, जो रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देते हैं। इससे दिल की धड़कन तेज होती है और बीपी तुरंत बढ़ जाता है।
महिलाओं में गर्भावस्था, मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति), गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल और शरीर में समय-समय पर होने वाले तीव्र हार्मोनल बदलावों के कारण हाई बीपी का खतरा काफी बढ़ जाता है।
हाँ, खराब जीवनशैली, पैक्ड जंक फूड, शारीरिक सक्रियता की कमी, अधूरी नींद और करियर या पढ़ाई के बढ़ते मानसिक तनाव के कारण युवाओं में भी हाई बीपी बढ़ रहा है।
प्राइमरी हाई बीपी को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता। लेकिन डॉक्टर की दवाओं, कम नमक वाले संतुलित आहार और एक्टिव लाइफस्टाइल से इसे हमेशा नॉर्मल रखा जा सकता है।
हाँ, रोज 30 मिनट तेज चलने से दिल की कार्यक्षमता बढ़ती है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और धमनियों पर दबाव कम होता है, जिससे बीपी नियंत्रित रहता है।
बीपी में पोटेशियम और मैग्नीशियम से भरपूर हरी सब्जियां खानी चाहिए, जैसे पालक, ब्रोकली, लौकी, तोरई, चुकंदर और लहसुन। ये धमनियों को रिलैक्स रखने में मदद करती हैं।
सुबह उठते समय शरीर खुद को सक्रिय करने के लिए कोर्टिसोल और एड्रिनालिन हार्मोन रिलीज करता है। इस प्राकृतिक शारीरिक चक्र (Circadian Rhythm) के कारण सुबह बीपी थोड़ा बढ़ जाता है।
Written and Verified by:

Dr. Ashok B. Malpani is a Senior Consultant in Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 34 years of experience. He specializes in complex angioplasty, primary angioplasty, and pacemaker implantation.
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