
अक्सर लोग मोबाइल और दिल की बीमारी के संबंध को एक अफवाह मान लेते हैं, लेकिन हालिया शोध कुछ और ही बयां करते हैं। 'मेडिकल न्यूज टुडे' और 'ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी' के डेटा पर आधारित रिसर्च ने इस विषय पर नई चेतावनी दी है।
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि हमारा स्मार्ट-फोन हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। गूगल मैप्स से लेकर, राशन का सामान और टीवी के साथ-साथ दवाओं की डिलीवरी, सभी इस मोबाइल फोन से संभव है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका स्मार्टफोन आपके जीवन के साथ-साथ आपके स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। चलिए समझते हैं कि कैसे?
कल्पना कीजिए, आप रात को आराम से रील देख रहे हैं और अचानक आपके सीने में भारीपन महसूस होता है। आप उसे 'गैस' समझकर टाल देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वह आपके फोन की ब्लू-लाइट और उससे उपजे तनाव का परिणाम हो सकता है? हालिया मेडिकल रिसर्च और अस्पतालों में बढ़ते कार्डियक अरेस्ट के मामले एक डरावनी हकीकत की ओर इशारा कर रहे हैं। इस ब्लॉग में हम उन सभी पहलुओं के बारे में बात करने वाले हैं जो आपके दिल को छूते हुए जाते हैं। इसके अतिरिक्त आप हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञों से भी संपर्क कर परामर्श कर सकते हैं।
जब हम बात करते हैं कि मोबाइल का दिल पर असर क्या है, तो अक्सर लोग इसे केवल एक मिथक मानकर टाल देते हैं। लेकिन हाल ही में 'मेडिकल न्यूज टुडे' और 'ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी' के डेटा पर आधारित रिसर्च में चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं।
सच्चाई क्या है? रिसर्च के अनुसार, मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग सीधे तौर पर हार्ट अटैक नहीं देता, लेकिन यह उन परिस्थितियों को जन्म देता है, जो अंततः हार्ट अटैक का कारण बनती हैं। उदाहरण के लिए, एक रिसर्च में पाया गया कि जो लोग सप्ताह में 30 मिनट से अधिक समय तक मोबाइल कॉल पर बात करते हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या विकसित होने का जोखिम 12% तक बढ़ जाता है। हाई ब्लड प्रेशर ही वह 'साइलेंट किलर' है, जो भविष्य में दिल के दौरे की नींव रखता है। इसलिए, यह कहना गलत नहीं होगा कि मोबाइल फोन और दिल की बीमारियों के बीच एक गहरा और चिंताजनक संबंध है।
आजकल 'डिजिटल एडिक्शन' के कारण ज्यादा स्क्रीन टाइम के नुकसान हमारी कल्पना से कहीं अधिक हैं। जब हम घंटों बैठकर सोशल मीडिया या कोई वीडियो देखते हैं, तो हम अनजाने में 'सेडेंटरी लाइफस्टाइल' या गतिहीन जीवनशैली को अपना लेते हैं, जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। चलिए उन सभी कारकों को समझते हैं जो आपके दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाता है -
क्या आपने कभी गौर किया है कि फोन पर कोई नोटिफिकेशन आते ही आपकी धड़कन थोड़ी तेज हो जाती है? इसे 'रिंग्जाइटी' या 'फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम' कहा जाता है।
जब हम मोबाइल पर लगातार लगे रहते हैं, तो हमारा मस्तिष्क 'कॉर्टिसोल' (Stress Hormone) रिलीज करता है, जो दिल का संबंध हमारे फोन से दर्शाता है। यह हार्मोन सीधे तौर पर आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है। मोबाइल फोन से हार्ट अटैक का खतरा तब और बढ़ जाता है, जब सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी देखकर तुलनात्मक तनाव पैदा होता है। तनाव के कारण दिल की धमनियों में सूजन आ सकती है, जो हार्ट अटैक को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त है। इसके अतिरिक्त मोबाइल स्ट्रेस धमनियों की अंदरूनी परत (Endothelium) को क्षतिग्रस्त करता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होकर हार्ट अटैक और ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Endothelial Dysfunction) कहा जाता है।
मोबाइल रेडिएशन और हार्ट हेल्थ पर लंबे समय से बहस चल रही है। मोबाइल फोन रेडियो फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (RF-EMF) उत्सर्जित करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह रेडिएशन एक्स-रे की तरह शक्तिशाली नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक शरीर के करीब (जैसे शर्ट की जेब में फोन रखना) रहने से यह हृदय के ऊतकों (Tissues) को प्रभावित कर सकता है।
कुछ रिसर्च बताते हैं कि रेडिएशन के प्रभाव से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा होता है, जो हृदय की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि इस पर अभी और अधिक क्लिनिकल ट्रायल की आवश्यकता है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से फोन को दिल से दूर रखना ही बुद्धिमानी है।
ज्यादातर युवा रात के अंधेरे में घंटों स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं या अपने सगे संबंधियों से लगातार फोन पर बात करते हैं। यह आदत आपके दिल के लिए घातक हो सकती है। इसके कारण निम्न समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं -
जब हम मोबाइल का दिल पर असर देख रहे हैं, तो यह भी जानना जरूरी है कि शरीर कब खतरे का संकेत देता है। मोबाइल की लत के कारण लोग इन लक्षणों को थकान समझ कर टाल देते हैं -
यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत विशेषज्ञों से सलाह लें। सीके बिरला हॉस्पिटल या बीएम बिरला हॉस्पिटल, कोलकाता जैसे संस्थानों में अत्याधुनिक कार्डियक केयर उपलब्ध है, जिसकी मदद से हमारे अनुभवी विशेषज्ञ समय रहते आपकी जान बचा सकते हैं।
आप अपने मोबाइल को पूरी तरह नहीं छोड़ सकते, लेकिन अपनी आदतों को बदलकर दिल की बीमारी से बच सकते हैं जैसे कि -
स्मार्टफोन आज की जरूरत है, लेकिन यह आपकी कीमती जिंदगी और स्वस्थ दिल की कीमत पर नहीं होना चाहिए। मोबाइल फोन से हार्ट अटैक का खतरा कोई डरावनी कहानी नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली की कड़वी सच्चाई है। सावधानी और संतुलन ही वह कुंजी है, जो आपको और आपके दिल को लंबी उम्र दे सकती है। याद रखें, सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन फिर से देखे जा सकते हैं, लेकिन आपका दिल एक ही है। इसे संभालकर रखें।
यदि आप अपने हृदय स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं, तो आज ही हमारे विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करें। हमारे पास Advanced Cath Lab, 24/7 Emergency Care, और अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट्स की टीम है, जिससे आपका ख्याल हम अच्छे से रख सकते हैं। आपका एक छोटा सा कदम एक स्वस्थ भविष्य की शुरुआत हो सकता है।
हां, अत्यधिक मोबाइल उपयोग से होने वाला तनाव और नींद की कमी 'एरिथमिया' (Arrhythmia) का कारण बन सकती है, जिससे दिल की धड़कन अनियमित महसूस होती है।
लगातार नोटिफिकेशन 'फाइट-ऑर-फ्लाइट' रिस्पॉन्स को ट्रिगर करते हैं, जिससे शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ता है। यह लंबे समय में हाई ब्लड प्रेशर और हृदय तनाव का कारण बनता है।
हां, लंबे समय तक स्थिर बैठकर फोन चलाना एक सेडेंटरी लाइफस्टाइल है, जो मोटापे और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर सीधे तौर पर हार्ट अटैक का जोखिम पैदा करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट के मरीजों को स्क्रीन टाइम 2 घंटे से कम रखना चाहिए और कॉल पर बात करने के लिए हमेशा इयरफोन का उपयोग करना चाहिए।
जी बिल्कुल, खराब नींद, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता के कारण अब 25-35 साल के युवाओं में भी दिल की बीमारियां और हार्ट अटैक देखे जा रहे हैं।
Written and Verified by:

Dr. Anil Mishra is the Director of Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 33 years of experience. He specializes in complex angioplasties, pacemaker & AICD implantation, CRT-D, TAVI, and was the first in Eastern India to perform rotablation and implant leadless pacemakers.
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