उम्र के अनुसार कोलेस्ट्रॉल लेवल कितना होना चाहिए?
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उम्र के अनुसार कोलेस्ट्रॉल लेवल कितना होना चाहिए?

Cardiology | by Dr. Rakesh Sarkar on 07/11/2025 | Last Updated : 13/01/2026

Table of Contents

Summary

  • कोलेस्ट्रॉल कई प्रकार के होते हैं जैसे कि - LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल), HDL (गुड़ कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स।
  • स्वस्थ लोगों जैसे कि वयस्कों के लिए टोटल कोलेस्ट्रॉल 200 mg/dL से कम होना चाहिए।
  • केवल लिपिड प्रोफाइल (ब्लड टेस्ट) के जरिए ही कोलेस्ट्रॉल के सही स्तर की जांच संभव है।
  • फाइबर युक्त आहार, नियमित व्यायाम, वेट मैनेजमेंट और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
  • 20 वर्ष की आयु के बाद हर 4-6 साल में जांच आवश्यक है और 30 वर्ष के बाद लोगों को हर साल में एक बार यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
  • यदि फैमिली हिस्ट्री या डायबिटीज की समस्या हो, तो इससे आपको अधिक खतरा हो सकता है।

हृदय हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। हृदय का कार्य रक्त को हमारे पूरे शरीर में पंप करना है, जो ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को शरीर के सभी अंगों तक पहुंचाता है। कोलेस्टेरॉल एक वसा जैसा पदार्थ है, जो हमारे शरीर के लिए बहुत ज्यादा आवश्यक है। हालांकि, उच्च कोलेस्टेरॉल हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है। 

यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्थितियों का कारण भी बन सकता है। इस स्थिति से निपटने में हमारे हृदय रोग विशेषज्ञ आपकी मदद कर सकते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार का संदेह होने पर तुरंत हमारे विशेषज्ञों से परामर्श लें। इसके अतिरिक्त आप इस ब्लॉग के द्वारा आप समझ सकते हैं कि उम्र के अनुसार कोलेस्टेरॉल लेवल कितना होना चाहिए। यह जानकारी आपको अपने कोलेस्टेरॉल के स्तर को नियंत्रित करने और हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

कोलेस्ट्रॉल क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

कोलेस्ट्रॉल एक फैट जैसा पदार्थ है, जो आपके शरीर की हर कोशिका में मौजूद होता है। अक्सर कोलेस्ट्रॉल को स्वास्थ्य के लिए खलनायक के रूप में देखा जाता है। लेकिन सच यह है कि कोलेस्ट्रॉल हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

आपका शरीर स्वस्थ कोशिकाएं बनाने, पाचन (digestion) में मदद करने वाले पित्त (Bile) को बनाने और विटामिन डी और जरूरी हार्मोन (जैसे कि एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन) का उत्पादन करने के लिए कोलेस्ट्रॉल का उपयोग करता है। आपका लिवर अधिकांश जरूरी कोलेस्ट्रॉल बनाता है, और कुछ मात्रा हमें भोजन से मिलती है।

खतरा कब बढ़ता है?

समस्या तब आती है, जब आपके रक्त में इसकी मात्रा सामान्य सीमा से बहुत अधिक हो जाती है। जब ऐसा होता है, तो अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल आपकी रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की अंदरूनी दीवारों पर धीरे-धीरे जमना शुरू हो जाता है। यह जमाव (Plaque) आपकी धमनियों को सकरा (Narrow) और कठोर बना देता है, जिसे मेडिकल भाषा में एथेरोस्क्लेरोसिस (atherosclerosis) कहा जाता है।

जब नसें संकरी हो जाती हैं, तो आपके हृदय तक रक्त का प्रवाह मुश्किल हो जाता है। यदि यह प्लाक टूट जाता है और खून का थक्का (Blood Clot) बना लेता है, तो यह पूरी तरह से रक्त प्रवाह को भी बाधित कर सकता है, जिससे दिल के दौरे (Heart Attack) या स्ट्रोक की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में रखना आपकी लंबी उम्र की कुंजी है।

उच्च कोलेस्ट्रॉल के संकेत और लक्षण

क्या आप जानना चाहते हैं कि आपको हाई कोलेस्ट्रॉल है या नहीं? देखिए, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उच्च कोलेस्ट्रॉल में आमतौर पर कोई खास लक्षण उत्पन्न नहीं होते हैं। यह एक "साइलेंट किलर" है, जो वर्षों तक बिना कोई संकेत दिए आपके शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है। आप स्वस्थ महसूस कर सकते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर आपकी धमनियां भी कठोर होती रहेगी।

कई बार, हाई कोलेस्ट्रॉल का पता तब चलता है, जब समस्या पहले ही गंभीर रूप ले चुकी होती है, जैसे कि दिल का दौरा या स्ट्रोक पड़ने पर। कुछ दुर्लभ मामलों में, अत्यधिक हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों की आंखों के आसपास या त्वचा के अन्य भाग पर छोटे, पीले-नारंगी रंग के वसायुक्त जमाव (Fatty Deposits) दिखाई दे सकते हैं। पर यह संकेत बहुत आम नहीं हैं। तो, इसे जानने का एकमात्र पक्का तरीका क्या है? एक साधारण सा ब्लड टेस्ट।

नार्मल कोलेस्टेरॉल का लेवल

दिल के स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए कोलेस्टेरॉल के लेवल का आकलन बहुत महत्वपूर्ण है। ब्लड टेस्ट के दौरान कोलेस्टेरॉल के लेवल को टोटल कोलेस्टेरॉल लेवल (Total Cholesterol level), खराब कोलेस्टेरॉल (एलडीएल), और अच्छे कोलेस्टेरॉल (एचडीएल) के लेवल के रूप में मापा जाता है। ब्लड में कोलेस्टेरॉल का ऑप्टिमम लेवल व्यक्ति की उम्र और लिंग के अनुसार अलग-अलग होता है। कोलेस्टेरॉल टेस्ट नार्मल रेंज इस प्रकार हैं - 

  • टोटल कोलेस्टेरॉल: 200 मिलीग्राम/डिली या उससे कम
  • एलडीएल कोलेस्टेरॉल (बैड कोलेस्टेरॉल): 100 मिलीग्राम/डिली या उससे कम
  • एचडीएल कोलेस्टेरॉल (गुड़ कोलेस्टेरॉल): 60 मिलीग्राम/डिली या उससे अधिक
  • नॉन एचडीएल कोलेस्टेरॉल: 130 mg/dL से कम

यदि इस रेंज में आपका कोलेस्टेरॉल का स्तर नहीं है, तो आपको तुरंत एक अच्छे हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। नियमित परामर्श और जांच कोलेस्टेरॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

उम्र और लिंग के अनुसार नार्मल कोलेस्टेरॉल का लेवल 

डॉक्टर जब कोलेस्टेरॉल के स्तर की जांच करते हैं, तो वह कई कारकों को देखते हैं, जैसे वह पुरुष है या महिला या फिर उनकी उम्र कितनी है। अधिकतर लोगों को यह पता नहीं होता है कि ldl कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए, hdl कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए या फिर vldl कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए। 

अलग-अलग उम्र के पड़ाव पर कोलेस्टेरॉल का स्तर अलग-अलग ही होता है। यदि रक्त में कोलेस्टेरॉल की मात्रा नार्मल रेंज में नहीं है, तो हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाएगा। उम्र के अनुसार कोलेस्टेरॉल के लेवल से संबंधित जानकारी आपको नीचे दिए गए टेबल से मिल जाएगी - 

उम्र

लिंग

टोटल कोलेस्टेरॉल लेवल

एलडीएल लेवल

(खराब कोलेस्टेरॉल)

एचडीएल लेवल

(अच्छा कोलेस्टेरॉल)

19 साल या उससे कम

पुरुष

170 mg/dl से कम

100 mg/dl से कम

45 mg/dl से ज्यादा

19 साल या उससे कम

महिला

170 mg/dl से कम

100 mg/dl से कम

45 mg/dl से ज्यादा

20 या अधिक

पुरुष

125–200 mg/dl के बीच

100 mg/dl से कम

40 mg/dl या इससे ज्यादा

20 या अधिक

महिला

125–200 mg/dl के बीच

100 mg/dl से कम

50 mg/dl या उससे ज्यादा

नार्मल टोटल कोलेस्टेरॉल का लेवल 

कोलेस्टेरॉल के नार्मल रेंज (cholesterol normal range in hindi) की बात करें, तो रक्त में टोटल कोलेस्टेरॉल का लेवल जितना कम होगा, उतना ही अच्छा होगा। कोलेस्टेरॉल के टेस्ट में नार्मल टोटल कोलेस्टेरॉल रेंज को नीचे एक टेबल के द्वारा बताया गया है - 

कोलेस्टेरॉल लेवल (Cholesterol Level)

परिणाम

< 200 mg/dL

वांछित (Desirable) कोलेस्टेरॉल लेवल

200 – 239 mg/dL

थोड़ा बढ़ा हुआ कोलेस्टेरॉल लेवल

> 240 mg/dL

अधिक कोलेस्टेरॉल लेवल

नार्मल एलडीएल लेवल

एलडीएल कोलेस्टेरॉल, जिसे "खराब" या “बैड” कोलेस्टेरॉल भी कहा जाता है, आपके शरीर के अधिकांश कोलेस्टेरॉल का निर्माण करता है। रक्त में एलडीएल का लेवल जितना कम होगा, उतना आपकी सेहत के लिए अच्छा होगा। एलडीएल कोलेस्टेरॉल नार्मल लेवल को समझना मुश्किल कार्य नहीं है। चलिए इसे नीचे दिए गए टेबल से समझने का प्रयास करते हैं - 

खराब कोलेस्टेरॉल लेवल (Bad Cholesterol Level)

परिणाम

< 100 mg/dL

सामान्य एलडीएल कोलेस्टेरॉल लेवल

100 – 129 mg/dL

नियर ऑप्टीमल एलडीएल कोलेस्टेरॉल लेवल

130 – 159 mg/dL

बॉर्डरलाइन कोलेस्टेरॉल लेवल

160 – 189 mg/dL

हाई कोलेस्टेरॉल लेवल

> 190 mg/dL

वैरी हाई कोलेस्टेरॉल लेवल

यदि ब्लड टेस्ट में पुष्टि हो गई है कि एलडीएल कोलेस्टेरॉल नार्मल रेंज से हाई या वेरी हाई है, तो तुरंत इलाज लें। कुछ मामलों में तो > 190 mg/dL एलडीएल कोलेस्टेरॉल नार्मल लेवल से बहुत ज्यादा ऊपर माना जाता है, जिसे इमरजेंसी स्थिति के रूप में भी देखा जाता है।

नार्मल एचडीएल लेवल 

रक्त में एचडीएल का स्तर जितना ज्यादा होगा, व्यक्ति के लिए उतना अच्छा होगा। एचडीएल गुड कोलेस्टेरॉल होता है, जिससे मेटाबॉलिज्म में बहुत मदद मिलती है। नीचे एक टेबल है, जो बताता है कि hdl कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए - 

पुरुषों के लिए अच्छा कोलेस्टेरॉल लेवल (Good Cholesterol Level for Men)

महिला के लिए अच्छा कोलेस्टेरॉल लेवल (Good Cholesterol Level for Women)

परिणाम

> 40 mg/dL

> 50 mg/dL

ऑप्टिमम रेंज 

> 60 mg/dL

> 60 mg/dL

उच्च एचडीएल लेवल्स 

< 40 mg/dL

< 50 mg/dL

निम्न एचडीएल लेवल्स

नॉन-एचडीएल कोलेस्टेरॉल एक और कारक है, जिससे रक्त में कोलेस्टेरॉल के स्तर को मापा जाता है। यहां पर एक और प्रश्न उठता है कि non hdl कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए? नॉन-एचडीएल कोलेस्टेरॉल का ऑप्टिमम रेंज 130 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (मिलीग्राम/डीएल) से कम है। अधिक संख्या का मतलब दिल की बीमारियों का अधिक जोखिम है।

डॉक्टर कोलेस्ट्रॉल कैसे मापते हैं?

कोलेस्ट्रॉल के स्तर को जानना बहुत आसान है। इसे मापने के लिए डॉक्टर साधारण का एक ब्लड टेस्ट कराते हैं, जिसे लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid profile test) कहा जाता है।

टेस्ट से पहले तैयारी

यह एक ब्लड टेस्ट है, जिसके लिए आमतौर पर 9 से 12 घंटे तक फास्टिंग की आवश्यकता पड़ती है। इसका मतलब है कि आप रात का खाना खाने के बाद अगले दिन सुबह टेस्ट होने तक पानी के अलावा कुछ भी नहीं खाते। खाली पेट रहना इसलिए ज़रूरी है ताकि आपके द्वारा खाए गए भोजन का फैट और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर रिपोर्ट को प्रभावित न करे।

लिपिड प्रोफाइल में क्या मापा जाता है?

यह टेस्ट आपके रक्त में चार मुख्य चीज़ों की जाँच करता है:

  • टोटल कोलेस्ट्रॉल (Total Cholesterol): आपके रक्त में मौजूद हर प्रकार के कोलेस्ट्रॉल की जांच इससे की जाती है।
  • एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (LDL-C): इसे "बैड" कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। यही वह फैट है जो धमनियों में जमा होता है। यदि यह कम रहता है, तो हमारा शरीर स्वस्थ रहता है।
  • एचडीएल कोलेस्ट्रॉल (HDL-C): इसे "गुड" कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। यह अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को वापस लीवर तक ले जाने में मदद करता है। हमें इसे अधिक रखना चाहिए।
  • ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides): यह फैट का एक और रूप है, जो ऊर्जा के लिए इस्तेमाल होता है। इसका उच्च स्तर भी हृदय रोग का खतरा बढ़ाता है।

डॉक्टर आपकी उम्र, लिंग और बाकी स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर इन संख्याओं का विश्लेषण करते हैं ताकि आपको सही सलाह दी जा सके।

कोलेस्टेरॉल के स्तर को कम करने के लिए जीवनशैली में बदलाव

कोलेस्टेरॉल की स्थिति को मैनेज करने के लिए आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखने की सलाह दी जाती है जैसे कि - 

  • हृदय-स्वस्थ आहार अपनाएं: अपने आहार में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करें, जिससे हृदय का स्वास्थ्य बेहतर होता जाता है। अपने आहार में ओट्स, फल, सब्जियां और फलियां जैसे फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। इसके अतिरिक्त सैल्मन जैसी मछली को शामिल करें क्योंकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। 
  • शारीरिक गतिविधि: प्रयास करें कि आप रोजाना कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम करें। 30 मिनट तक वॉकिंग और साइकिल चलाना भी आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है। 
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें: अतिरिक्त वजन कम करने से एलडीएल कोलेस्टेरॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ा सकता है। स्वस्थ वजन बनाए रखने से आपको बहुत लाभ मिल सकता है। वयस्कों और बच्चों दोनों को ही अपने वजन का खास ख्याल रखने की आवश्यकता होती है। 
  • धूम्रपान और शराब से बचें: धूम्रपान और शराब के कारण रक्त वाहिकाएं और हृदय स्वास्थ्य को अच्छा खासा नुकसान पहुंचता है। धूम्रपान और शराब से दूरी आपके हृदय स्वास्थ्य को बचा सकता है।
  • प्रारंभिक जांच: बच्चों में कोलेस्टेरॉल की निगरानी, विशेष रूप से जोखिम वाले कारकों वाले बच्चों में, समस्याओं को जल्दी हल करने में मदद मिल सकती है। डॉक्टर से सलाह लेने से स्थिति को नियंत्रित करने में बहुत मदद मिलती है।

यह सारे परिवर्तन न केवल वयस्कों के लिए फायदेमंद है, बल्कि बच्चों में कोलेस्टेरॉल के प्रबंधन के लिए भी उतने ही अधिक महत्वपूर्ण है, खासकर यदि उनके परिवार में उच्च कोलेस्टेरॉल या मोटापे की फैमिली मेडिकल हिस्ट्री है।

आपको डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए?

कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य है या नहीं, यह जानने के लिए आपको सक्रिय रूप से इसकी जांच करवानी होगी।

पहली जांच कब?

  • सामान्यतः स्वस्थ वयस्कों (20 वर्ष या उससे अधिक) को हर 4 से 6 साल में एक लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवा लेना चाहिए।
  • यदि परिवार में कम उम्र में ही हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग की हिस्ट्री रही है, तो डॉक्टर बचपन में ही जांच शुरू करने की सलाह दे सकते हैं।

निम्न स्थितियों में आपको तुरंत डॉक्टरी सलाह लें

यदि आपके पास निम्नलिखित में से कोई भी जोखिम कारक है, तो आपको नियमित रूप से जांच करवानी चाहिए और अपने कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए - 

  • मधुमेह (Diabetes) या उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure): यह दोनों स्थितियां कोलेस्ट्रॉल की समस्याओं को तेज़ी से बढ़ाती हैं।
  • फैमिली हिस्ट्री: यदि आपके परिवार में किसी पुरुष को 55 वर्ष की आयु से पहले या किसी महिला को 65 वर्ष की आयु से पहले दिल का दौरा पड़ा हो।
  • मोटापा (Obesity) और धूम्रपान: यह जीवन शैली कारक सीधे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित करते हैं।
  • टेस्ट रिपोर्ट सामान्य से बाहर: यदि आपकी हालिया लिपिड प्रोफाइल रिपोर्ट बताती है कि आपका LDL बहुत अधिक है या आपका HDL बहुत कम है।

कोलेस्ट्रॉल का प्रबंधन एक टीम वर्क है। डॉक्टर आपको दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव के सही मिश्रण के साथ, एक स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ने में मदद करेंगे।

हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरे के संकेत: शरीर के "इमरजेंसी" सिग्नल

हाई कोलेस्ट्रॉल का अर्थ है कि आपके शरीर की धमनियों में किसी भी प्रकार की ब्लॉकेज बढ़ गई है। यहां कुछ "इमरजेंसी" सिग्नल दिए गए हैं, जो दर्शाते हैं कि आपको कब बिना विचार किए एक अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श बुक कर लेना चाहिए -

  • छाती में भारीपन या दर्द (Angina): सीने में जकड़न, दबाव या ऐसा महसूस हो रहा है कि कोई छाती को दबा रहा है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि हृदय तक खून ठीक से नहीं पहुंच पा रहा है।
  • अचानक बोलने या समझने में दिक्कत (स्ट्रोक के संकेत): कोलेस्ट्रॉल के कारण दिमाग की नसों में रुकावट आ सकती है। इससे चेहरे के एक हिस्से का लटक जाना, बोलने में दिक्कत होना या हाथ पैर में कमजोरी महसूस होना। कुछ भी महसूस हो, बिना देर किए अपने नजदीकी अस्पताल में जाएं और उन्हें समझाएं। यहां BE FAST नियम याद रखें (Balance, Eyes, Face, Arm, Speech, Time)।
  • सांस फूलना (Shortness of Breath): बिना ज्यादा मेहनत किए या थोड़ा सा चलने पर ही अगर आपकी सांस फूलने लगती है, तो इसका मतलब है कि आपके दिल को शरीर की जरूरत पूरी करने के लिए बहुत ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है।
  • आंखों के आसपास पीले धब्बे (Xanthelasma): यह एक लक्षण है, जो काफी समय पहले आपको बता सकता है कि आप हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्या का सामना कर रहे हैं। इसमें आंख के आस-पास फैट जमने लगता है।
  • हाथ-पैरों का बार-बार सुन्न होना: जब पैरों की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जम जाता है (Peripheral Artery Disease), तो वहां खून का बहाव कम हो जाता है। इससे पैरों में तेज दर्द, ऐंठन या सुन्न होने की समस्या हो सकती है।

निष्कर्ष

यह वैज्ञानिकों के द्वारा प्रमाणित है कि कोलेस्टेरॉल का ऑप्टिमम लेवल उम्र और लिंग के अनुसार अलग-अलग होता है। बढ़ती उम्र के साथ कोलेस्टेरॉल का स्तर भी बढ़ता रहता है। कोलेस्टेरॉल का बढ़ता स्तर स्ट्रोक और हार्ट अटैक के रिस्क को बढ़ा सकता है। उम्र के अनुसार टोटल कोलेस्टेरॉल, एचडीएल और एलडीएल कोलेस्टेरॉल की ऑप्टिमम रेंज की जानकारी सबको होनी चाहिए, जिससे आप अपनी मेडिकल रिपोर्ट का आकलन कर पाएं और सही समय पर उत्तम इलाज प्राप्त कर पाएं। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौन से फैक्टर कोलेस्टेरॉल के लेवल को प्रभावित कर सकते हैं?

कोलेस्टेरॉल के लेवल को प्रभावित करने वाले कई कारक हैं, जैसे - 

  • आहार में सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट और कोलेस्टेरॉल की मात्रा रक्त में कोलेस्टेरॉल के लेवल को प्रभावित कर सकती है। इसलिए अपने आहार का खास ध्यान रखें। 
  • व्यायाम की कमी, धूम्रपान और अधिक वजन या मोटापा कोलेस्टेरॉल के लेवल को प्रभावित कर सकता है। 
  • कोलेस्टेरॉल एक जेनेटिक रोग है। यदि आपके परिवार में से किसी को कोलेस्टेरॉल की समस्या है तो आप भी इस रोग के जोखिम के दायरे में है। 

मैं अपने कोलेस्टेरॉल के लेवल की जांच कैसे करवा सकता हूं?

कोलेस्टेरॉल के लेवल की जांच करने के लिए डॉक्टर एक ब्लड टेस्ट का सुझाव देते हैं। इस टेस्ट को लिपोप्रोटीन पैनल (lipid profile) कहा जाता है। इस टेस्ट से टोटल कोलेस्टेरॉल, एलडीएल (खराब) कोलेस्टेरॉल, एचडीएल (अच्छा) कोलेस्टेरॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर का पता चलता है।

अगर मेरा कोलेस्टेरॉल 270 है तो क्या होगा?

यदि आपका कोलेस्टेरॉल 270 है या इससे ज्यादा है, तो यह बहुत अधिक है। हाई कोलेस्टेरॉल हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ाता है। इसलिए, यदि आपका कोलेस्टेरॉल 270 है, तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए और तुरंत इलाज की योजना पर कार्य करना चाहिए। 

एलडीएल कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए?

एलडीएल कोलेस्टेरॉल अलग-अलग लोगों के अनुसार, अलग-अलग हो सकता है। 100 mg/dL से कम और 130 mg/dL से अधिक एलडीएल कोलेस्टेरॉल होना चाहिए। 

उम्र के हिसाब से कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए?

उम्र के अनुसार, कोलेस्टेरॉल की नॉर्मल रेंज अलग-अलग होती हैं, जैसे - 

20-39 उम्र के लोगों में

  • टोटल: 200 mg/dL से कम
  • एलडीएल: 100 mg/dL से कम
  • एचडीएल: 40 mg/dL या अधिक

40-59 उम्र के लोगों में

  • कुल: 200 mg/dL से कम
  • एलडीएल: 130 mg/dL से कम
  • एचडीएल: 40 mg/dL या अधिक

60+ उम्र के लोगों में: 

  • टोटल: 200 mg/dL से कम, 
  • एलडीएल: 130 mg/dL से कम
  • एचडीएल: 40 mg/dL या अधिक

कोलेस्टेरॉल कितने प्रकार के होते है?

मुख्य रूप से कोलेस्टेरॉल तीन प्रकार के होते हैं - 

  • एलडीएल कोलेस्टेरॉल (खराब या बैड कोलेस्टेरॉल)
  • एचडीएल कोलेस्टेरॉल (अच्छा या गुड कोलेस्टेरॉल)
  • VLDL जो ट्राइग्लिसराइड्स को ले जाने में मदद करता है
  • ट्राइग्लिसराइड्स जो ऊर्जा का स्टोर हाउस होता है।

कोलेस्टेरॉल बढ़ने पर क्या न खाएं?

कोलेस्टेरॉल बढ़ने पर निम्न खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं - 

  • सैचुरेटेड फैट
  • ट्रांस फैट
  • रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट
  • अधिक चीनी वाले पेय

vldl कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए?

यह स्तर भी अलग-अलग लोगों में अलग-अलग होती हैं। सामान्य तौर पर 30 mg/dL से कम vldl कोलेस्टेरॉल का स्तर बेहतर होता है।

Written and Verified by:

Dr. Rakesh Sarkar

Dr. Rakesh Sarkar

Senior Consultant Exp: 16 Yr

Cardiology & Electrophysiology

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Dr. Rakesh Sarkar is a Senior Consultant in Cardiology & Electrophysiology at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 11 years of experience. He specializes in complex arrhythmia management, including atrial fibrillation, ventricular tachycardia, CRT-D, and conduction system pacing.

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