
हृदय हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। हृदय का कार्य रक्त को हमारे पूरे शरीर में पंप करना है, जो ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को शरीर के सभी अंगों तक पहुंचाता है। कोलेस्टेरॉल एक वसा जैसा पदार्थ है, जो हमारे शरीर के लिए बहुत ज्यादा आवश्यक है। हालांकि, उच्च कोलेस्टेरॉल हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है।
यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्थितियों का कारण भी बन सकता है। इस स्थिति से निपटने में हमारे हृदय रोग विशेषज्ञ आपकी मदद कर सकते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार का संदेह होने पर तुरंत हमारे विशेषज्ञों से परामर्श लें। इसके अतिरिक्त आप इस ब्लॉग के द्वारा आप समझ सकते हैं कि उम्र के अनुसार कोलेस्टेरॉल लेवल कितना होना चाहिए। यह जानकारी आपको अपने कोलेस्टेरॉल के स्तर को नियंत्रित करने और हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
कोलेस्ट्रॉल एक फैट जैसा पदार्थ है, जो आपके शरीर की हर कोशिका में मौजूद होता है। अक्सर कोलेस्ट्रॉल को स्वास्थ्य के लिए खलनायक के रूप में देखा जाता है। लेकिन सच यह है कि कोलेस्ट्रॉल हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
आपका शरीर स्वस्थ कोशिकाएं बनाने, पाचन (digestion) में मदद करने वाले पित्त (Bile) को बनाने और विटामिन डी और जरूरी हार्मोन (जैसे कि एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन) का उत्पादन करने के लिए कोलेस्ट्रॉल का उपयोग करता है। आपका लिवर अधिकांश जरूरी कोलेस्ट्रॉल बनाता है, और कुछ मात्रा हमें भोजन से मिलती है।
समस्या तब आती है, जब आपके रक्त में इसकी मात्रा सामान्य सीमा से बहुत अधिक हो जाती है। जब ऐसा होता है, तो अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल आपकी रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की अंदरूनी दीवारों पर धीरे-धीरे जमना शुरू हो जाता है। यह जमाव (Plaque) आपकी धमनियों को सकरा (Narrow) और कठोर बना देता है, जिसे मेडिकल भाषा में एथेरोस्क्लेरोसिस (atherosclerosis) कहा जाता है।
जब नसें संकरी हो जाती हैं, तो आपके हृदय तक रक्त का प्रवाह मुश्किल हो जाता है। यदि यह प्लाक टूट जाता है और खून का थक्का (Blood Clot) बना लेता है, तो यह पूरी तरह से रक्त प्रवाह को भी बाधित कर सकता है, जिससे दिल के दौरे (Heart Attack) या स्ट्रोक की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में रखना आपकी लंबी उम्र की कुंजी है।
क्या आप जानना चाहते हैं कि आपको हाई कोलेस्ट्रॉल है या नहीं? देखिए, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उच्च कोलेस्ट्रॉल में आमतौर पर कोई खास लक्षण उत्पन्न नहीं होते हैं। यह एक "साइलेंट किलर" है, जो वर्षों तक बिना कोई संकेत दिए आपके शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है। आप स्वस्थ महसूस कर सकते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर आपकी धमनियां भी कठोर होती रहेगी।
कई बार, हाई कोलेस्ट्रॉल का पता तब चलता है, जब समस्या पहले ही गंभीर रूप ले चुकी होती है, जैसे कि दिल का दौरा या स्ट्रोक पड़ने पर। कुछ दुर्लभ मामलों में, अत्यधिक हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों की आंखों के आसपास या त्वचा के अन्य भाग पर छोटे, पीले-नारंगी रंग के वसायुक्त जमाव (Fatty Deposits) दिखाई दे सकते हैं। पर यह संकेत बहुत आम नहीं हैं। तो, इसे जानने का एकमात्र पक्का तरीका क्या है? एक साधारण सा ब्लड टेस्ट।
दिल के स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए कोलेस्टेरॉल के लेवल का आकलन बहुत महत्वपूर्ण है। ब्लड टेस्ट के दौरान कोलेस्टेरॉल के लेवल को टोटल कोलेस्टेरॉल लेवल (Total Cholesterol level), खराब कोलेस्टेरॉल (एलडीएल), और अच्छे कोलेस्टेरॉल (एचडीएल) के लेवल के रूप में मापा जाता है। ब्लड में कोलेस्टेरॉल का ऑप्टिमम लेवल व्यक्ति की उम्र और लिंग के अनुसार अलग-अलग होता है। कोलेस्टेरॉल टेस्ट नार्मल रेंज इस प्रकार हैं -
यदि इस रेंज में आपका कोलेस्टेरॉल का स्तर नहीं है, तो आपको तुरंत एक अच्छे हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। नियमित परामर्श और जांच कोलेस्टेरॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
डॉक्टर जब कोलेस्टेरॉल के स्तर की जांच करते हैं, तो वह कई कारकों को देखते हैं, जैसे वह पुरुष है या महिला या फिर उनकी उम्र कितनी है। अधिकतर लोगों को यह पता नहीं होता है कि ldl कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए, hdl कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए या फिर vldl कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए।
अलग-अलग उम्र के पड़ाव पर कोलेस्टेरॉल का स्तर अलग-अलग ही होता है। यदि रक्त में कोलेस्टेरॉल की मात्रा नार्मल रेंज में नहीं है, तो हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाएगा। उम्र के अनुसार कोलेस्टेरॉल के लेवल से संबंधित जानकारी आपको नीचे दिए गए टेबल से मिल जाएगी -
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उम्र |
लिंग |
टोटल कोलेस्टेरॉल लेवल |
एलडीएल लेवल (खराब कोलेस्टेरॉल) |
एचडीएल लेवल (अच्छा कोलेस्टेरॉल) |
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19 साल या उससे कम |
पुरुष |
170 mg/dl से कम |
100 mg/dl से कम |
45 mg/dl से ज्यादा |
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19 साल या उससे कम |
महिला |
170 mg/dl से कम |
100 mg/dl से कम |
45 mg/dl से ज्यादा |
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20 या अधिक |
पुरुष |
125–200 mg/dl के बीच |
100 mg/dl से कम |
40 mg/dl या इससे ज्यादा |
|
20 या अधिक |
महिला |
125–200 mg/dl के बीच |
100 mg/dl से कम |
50 mg/dl या उससे ज्यादा |
कोलेस्टेरॉल के नार्मल रेंज (cholesterol normal range in hindi) की बात करें, तो रक्त में टोटल कोलेस्टेरॉल का लेवल जितना कम होगा, उतना ही अच्छा होगा। कोलेस्टेरॉल के टेस्ट में नार्मल टोटल कोलेस्टेरॉल रेंज को नीचे एक टेबल के द्वारा बताया गया है -
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कोलेस्टेरॉल लेवल (Cholesterol Level) |
परिणाम |
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< 200 mg/dL |
वांछित (Desirable) कोलेस्टेरॉल लेवल |
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200 – 239 mg/dL |
थोड़ा बढ़ा हुआ कोलेस्टेरॉल लेवल |
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> 240 mg/dL |
एलडीएल कोलेस्टेरॉल, जिसे "खराब" या “बैड” कोलेस्टेरॉल भी कहा जाता है, आपके शरीर के अधिकांश कोलेस्टेरॉल का निर्माण करता है। रक्त में एलडीएल का लेवल जितना कम होगा, उतना आपकी सेहत के लिए अच्छा होगा। एलडीएल कोलेस्टेरॉल नार्मल लेवल को समझना मुश्किल कार्य नहीं है। चलिए इसे नीचे दिए गए टेबल से समझने का प्रयास करते हैं -
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खराब कोलेस्टेरॉल लेवल (Bad Cholesterol Level) |
परिणाम |
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< 100 mg/dL |
सामान्य एलडीएल कोलेस्टेरॉल लेवल |
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100 – 129 mg/dL |
नियर ऑप्टीमल एलडीएल कोलेस्टेरॉल लेवल |
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130 – 159 mg/dL |
बॉर्डरलाइन कोलेस्टेरॉल लेवल |
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160 – 189 mg/dL |
हाई कोलेस्टेरॉल लेवल |
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> 190 mg/dL |
वैरी हाई कोलेस्टेरॉल लेवल |
यदि ब्लड टेस्ट में पुष्टि हो गई है कि एलडीएल कोलेस्टेरॉल नार्मल रेंज से हाई या वेरी हाई है, तो तुरंत इलाज लें। कुछ मामलों में तो > 190 mg/dL एलडीएल कोलेस्टेरॉल नार्मल लेवल से बहुत ज्यादा ऊपर माना जाता है, जिसे इमरजेंसी स्थिति के रूप में भी देखा जाता है।
रक्त में एचडीएल का स्तर जितना ज्यादा होगा, व्यक्ति के लिए उतना अच्छा होगा। एचडीएल गुड कोलेस्टेरॉल होता है, जिससे मेटाबॉलिज्म में बहुत मदद मिलती है। नीचे एक टेबल है, जो बताता है कि hdl कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए -
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पुरुषों के लिए अच्छा कोलेस्टेरॉल लेवल (Good Cholesterol Level for Men) |
महिला के लिए अच्छा कोलेस्टेरॉल लेवल (Good Cholesterol Level for Women) |
परिणाम |
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> 40 mg/dL |
> 50 mg/dL |
ऑप्टिमम रेंज |
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> 60 mg/dL |
> 60 mg/dL |
उच्च एचडीएल लेवल्स |
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< 40 mg/dL |
< 50 mg/dL |
निम्न एचडीएल लेवल्स |
नॉन-एचडीएल कोलेस्टेरॉल एक और कारक है, जिससे रक्त में कोलेस्टेरॉल के स्तर को मापा जाता है। यहां पर एक और प्रश्न उठता है कि non hdl कोलेस्टेरॉल कितना होना चाहिए? नॉन-एचडीएल कोलेस्टेरॉल का ऑप्टिमम रेंज 130 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (मिलीग्राम/डीएल) से कम है। अधिक संख्या का मतलब दिल की बीमारियों का अधिक जोखिम है।
कोलेस्ट्रॉल के स्तर को जानना बहुत आसान है। इसे मापने के लिए डॉक्टर साधारण का एक ब्लड टेस्ट कराते हैं, जिसे लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid profile test) कहा जाता है।
यह एक ब्लड टेस्ट है, जिसके लिए आमतौर पर 9 से 12 घंटे तक फास्टिंग की आवश्यकता पड़ती है। इसका मतलब है कि आप रात का खाना खाने के बाद अगले दिन सुबह टेस्ट होने तक पानी के अलावा कुछ भी नहीं खाते। खाली पेट रहना इसलिए ज़रूरी है ताकि आपके द्वारा खाए गए भोजन का फैट और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर रिपोर्ट को प्रभावित न करे।
यह टेस्ट आपके रक्त में चार मुख्य चीज़ों की जाँच करता है:
डॉक्टर आपकी उम्र, लिंग और बाकी स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर इन संख्याओं का विश्लेषण करते हैं ताकि आपको सही सलाह दी जा सके।
कोलेस्टेरॉल की स्थिति को मैनेज करने के लिए आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखने की सलाह दी जाती है जैसे कि -
यह सारे परिवर्तन न केवल वयस्कों के लिए फायदेमंद है, बल्कि बच्चों में कोलेस्टेरॉल के प्रबंधन के लिए भी उतने ही अधिक महत्वपूर्ण है, खासकर यदि उनके परिवार में उच्च कोलेस्टेरॉल या मोटापे की फैमिली मेडिकल हिस्ट्री है।
कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य है या नहीं, यह जानने के लिए आपको सक्रिय रूप से इसकी जांच करवानी होगी।
यदि आपके पास निम्नलिखित में से कोई भी जोखिम कारक है, तो आपको नियमित रूप से जांच करवानी चाहिए और अपने कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए -
कोलेस्ट्रॉल का प्रबंधन एक टीम वर्क है। डॉक्टर आपको दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव के सही मिश्रण के साथ, एक स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ने में मदद करेंगे।
हाई कोलेस्ट्रॉल का अर्थ है कि आपके शरीर की धमनियों में किसी भी प्रकार की ब्लॉकेज बढ़ गई है। यहां कुछ "इमरजेंसी" सिग्नल दिए गए हैं, जो दर्शाते हैं कि आपको कब बिना विचार किए एक अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श बुक कर लेना चाहिए -
यह वैज्ञानिकों के द्वारा प्रमाणित है कि कोलेस्टेरॉल का ऑप्टिमम लेवल उम्र और लिंग के अनुसार अलग-अलग होता है। बढ़ती उम्र के साथ कोलेस्टेरॉल का स्तर भी बढ़ता रहता है। कोलेस्टेरॉल का बढ़ता स्तर स्ट्रोक और हार्ट अटैक के रिस्क को बढ़ा सकता है। उम्र के अनुसार टोटल कोलेस्टेरॉल, एचडीएल और एलडीएल कोलेस्टेरॉल की ऑप्टिमम रेंज की जानकारी सबको होनी चाहिए, जिससे आप अपनी मेडिकल रिपोर्ट का आकलन कर पाएं और सही समय पर उत्तम इलाज प्राप्त कर पाएं।
कोलेस्टेरॉल के लेवल को प्रभावित करने वाले कई कारक हैं, जैसे -
कोलेस्टेरॉल के लेवल की जांच करने के लिए डॉक्टर एक ब्लड टेस्ट का सुझाव देते हैं। इस टेस्ट को लिपोप्रोटीन पैनल (lipid profile) कहा जाता है। इस टेस्ट से टोटल कोलेस्टेरॉल, एलडीएल (खराब) कोलेस्टेरॉल, एचडीएल (अच्छा) कोलेस्टेरॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर का पता चलता है।
यदि आपका कोलेस्टेरॉल 270 है या इससे ज्यादा है, तो यह बहुत अधिक है। हाई कोलेस्टेरॉल हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ाता है। इसलिए, यदि आपका कोलेस्टेरॉल 270 है, तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए और तुरंत इलाज की योजना पर कार्य करना चाहिए।
एलडीएल कोलेस्टेरॉल अलग-अलग लोगों के अनुसार, अलग-अलग हो सकता है। 100 mg/dL से कम और 130 mg/dL से अधिक एलडीएल कोलेस्टेरॉल होना चाहिए।
उम्र के अनुसार, कोलेस्टेरॉल की नॉर्मल रेंज अलग-अलग होती हैं, जैसे -
20-39 उम्र के लोगों में
40-59 उम्र के लोगों में
60+ उम्र के लोगों में:
मुख्य रूप से कोलेस्टेरॉल तीन प्रकार के होते हैं -
कोलेस्टेरॉल बढ़ने पर निम्न खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं -
यह स्तर भी अलग-अलग लोगों में अलग-अलग होती हैं। सामान्य तौर पर 30 mg/dL से कम vldl कोलेस्टेरॉल का स्तर बेहतर होता है।
Written and Verified by:

Dr. Rakesh Sarkar is a Senior Consultant in Cardiology & Electrophysiology at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 11 years of experience. He specializes in complex arrhythmia management, including atrial fibrillation, ventricular tachycardia, CRT-D, and conduction system pacing.
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