
कार्डियक प्रोफाइल टेस्ट आपके दिल की सेहत का एक विस्तृत 'रिपोर्ट कार्ड' है। यह केवल एक जांच नहीं, बल्कि Blood Tests का एक समूह है जो यह बताता है कि आपका हृदय कितनी कुशलता से कार्य कर रहा है और भविष्य में हृदय रोगों या हार्ट अटैक का कितना जोखिम है।
इस ब्लॉग में हमने कार्डियक प्रोफाइल के मुख्य Tests को विस्तार से समझाया है:
कल्पना कीजिए कि आप एक लंबी यात्रा पर निकले हैं और आपकी कार का इंजन बीच रास्ते में बिना किसी चेतावनी के बंद हो जाए। आपका दिल भी आपके शरीर का वही इंजन है, जो बिना रुके चौबीसों घंटे धड़कता और जीवन के हर पल को शांति से जीने में मदद करता है। भारत में हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है। आज 30 से 40 वर्ष के युवा भी इसके शिकार हो रहे हैं। अक्सर हम सीने में हल्की जलन या सांस फूलने को एसिडिटी या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके दिल की ओर से मिलने वाली आखिरी चेतावनी हो सकती है?
दिल की जांच में की गई छोटी सी देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है। कार्डियक प्रोफाइल टेस्ट वह आधुनिक तकनीक है, जो आपके दिल की धड़कनों के पीछे छिपे अनकहे खतरों को समय रहते पहचान लेता है। बीएम बिरला अस्पताल, कोलकाता के अनुभवी डॉक्टरों का मानना है कि हृदय रोगों का इलाज संभव है, लेकिन उसके लिए आपको उनकी बातों का पालन करना होगा। इसलिए समस्या है, तो परामर्श लें।
सरल शब्दों में कहें तो, कार्डियक प्रोफाइल टेस्ट रक्त परीक्षणों (Blood Tests) का एक विशेष समूह है। यह केवल एक टेस्ट नहीं, बल्कि आपके हृदय तंत्र का एक विस्तृत 'रिपोर्ट कार्ड' है। यह टेस्ट डॉक्टर को यह समझने में मदद करता है कि आपका हृदय कितनी कुशलता से काम कर रहा है और भविष्य में दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने की कितनी संभावना है। एक हार्ट टेस्ट लिस्ट में आमतौर पर निम्नलिखित पैरामीटर शामिल होते हैं -
इनके अलावा, स्थिति के आधार पर डॉक्टर अक्सर कार्डियोग्राफी टेस्ट (जैसे ECG या Echo) की भी सलाह देते हैं ताकि दिल की बनावट और धड़कन की लय को समझा जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल मौतों में से लगभग 32% का कारण हृदय रोग हैं। भारत में यह स्थिति और भी गंभीर है। हमें हार्ट के टेस्ट की आवश्यकता क्यों है, इसके मुख्य कारणों को नीचे दिया गया है -
मरीजों की सबसे बड़ी गलती लक्षणों को "सामान्य" मानना है। यदि आप नीचे दिए गए किसी भी लक्षण को महसूस करते हैं, तो बिना देर किए हार्ट चेकअप टेस्ट करवाएं -
यह टेस्ट बहुत ही सरल और सुरक्षित है। इसके लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है। चलिए इस टेस्ट को शुरू से समझने का प्रयास करते हैं -
जब आपकी रिपोर्ट आती है, तो डॉक्टर मुख्य रूप से इन चीजों पर ध्यान देते हैं:
इस प्रश्न का उत्तर हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होता है। चलिए इस टेबल की मदद से समझते हैं कि किस मरीज को कितनी बार यह टेस्ट करवाना चाहिए -
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मरीज का प्रकार |
टेस्ट की आवृत्ति (Frequency) |
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स्वस्थ व्यक्ति (25+ उम्र) |
साल में एक बार (Annual Screening) |
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हाई बीपी या डायबिटीज के मरीज |
हर 6 महीने में |
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जिनका हार्ट प्रोसीजर (Stent/Bypass) हुआ हो |
हर 3 महीने में या डॉक्टर की सलाह पर |
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धूम्रपान करने वाले या मोटे व्यक्ति |
साल में कम से कम दो बार |
सिर्फ दिल की जांच करवाना ही काफी नहीं है, अपनी दिनचर्या में बदलाव लाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यहां कुछ हार्ट हेल्थ टिप्स दिए गए हैं, जिनका पालन करने से आपको बहुत मदद मिल सकती है -
आपका दिल आपके परिवार की खुशियों का आधार है। हृदय रोगों का बढ़ता आंकड़ा डराने वाला जरूर है, लेकिन सही समय पर किया गया कार्डियक प्रोफाइल टेस्ट आपको इस खतरे से सुरक्षित रख सकता है। CK Birla Hospitals (BM Birla Heart Research Centre) में हम अत्याधुनिक तकनीक और दशकों के अनुभव के साथ आपकी हृदय सुरक्षा के लिए समर्पित हैं।
याद रखें, "इलाज से बेहतर बचाव है"। आज ही अपनी दिल की जांच बुक करें और एक स्वस्थ, लंबी और खुशहाल जिंदगी की ओर अपना कदम बढ़ाएं।
हां, यह टेस्ट कोलेस्ट्रॉल, सूजन और मेटाबॉलिक असंतुलन की पहचान कर लक्षणों के आने से वर्षों पहले हृदय रोग के जोखिम को बता सकता है।
जी बिल्कुल, क्योंकि उच्च रक्तचाप और मधुमेह सीधे तौर पर हृदय की धमनियों को नुकसान पहुंचाते हैं। इन मरीजों के लिए यह टेस्ट जीवन रक्षक है।
हां, इसके विभिन्न पैरामीटर (जैसे hs-CRP और लिपिड प्रोफाइल) के आधार पर डॉक्टर भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक के खतरे का आकलन कर सकते हैं।
लिपिड प्रोफाइल के सटीक परिणामों के लिए कम से कम 10-12 घंटे की फास्टिंग (केवल पानी पी सकते हैं) आवश्यक होती है।
निश्चित रूप से ऐसा करना चाहिए। आज की तनावपूर्ण जीवनशैली को देखते हुए, हर एनुअल हेल्थ चेकअप में कार्डियक प्रोफाइल को शामिल करना एक बुद्धिमानी भरा निर्णय है।
हां, हृदय रोग एक जेनेटिक रोग है। यदि आपके परिवार में किसी को दिल की बीमारी रही है, तो आपको कम उम्र से ही यह टेस्ट शुरू कर देना चाहिए।
Written and Verified by:

Dr. Sabyasachi Pal is a Senior Consultant in Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 11 years of experience. He specializes in coronary interventions and heart failure management.
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