
हार्ट अटैक - ये एक ऐसा शब्द है, जो किसी के भी जीवन को गंभीर रूप से तहस-नहस करने की क्षमता रखता है। अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर आना एक राहत की बात तो है, लेकिन मन में कई अनगिनत सवाल और डर भी होते हैं जैसे कि— "क्या मैं फिर से नॉर्मल लाइफ जी पाऊंगा?", "क्या सीढ़ियां चढ़ना सुरक्षित है?", "कहीं फिर से सीने में दर्द तो नहीं होगा?"
सच्चाई यह है कि पहले हार्ट अटैक के बाद आपका दिल थोड़ा कमजोर जरूर होता है, लेकिन वह पूरी तरह हार नहीं मानता। मेडिकल साइंस और सही रिकवरी टिप्स की मदद से आप न केवल एक लंबा जीवन जी सकते हैं, बल्कि पहले से बेहतर स्वास्थ्य भी पा सकते हैं। यह ब्लॉग आपको उस डर से बाहर निकाल कर भरोसे की राह पर ले जाने के लिए है। लेकिन हृदय की स्थिति में थोड़ी सी भी लापरवाही आपके लिए हानिकारक साबित हो सकती है। इसलिए हृदय संबंधित समस्या दिखने पर तुरंत हमारे अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
जब हार्ट अटैक आता है, तो हृदय की मांसपेशियों के एक हिस्से को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे वहां के 'टिश्यूज' को नुकसान पहुंचता है। इसे मेडिकल भाषा में 'स्कारिंग' (Scarring) कहते हैं। हार्ट अटैक के बाद शरीर में तीन मुख्य बदलाव देखने को मिलते हैं -
आंकड़े बताते हैं कि लगभग 20% लोग जो 45 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, उन्हें पहले अटैक के 5 साल के भीतर दूसरे अटैक का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन ऐसा होता क्यों है?
नोट: कई बार देखा गया है कि पहले हार्ट अटैक के बाद अगले 3 दिनों में ही दूसरा अटैक आ जाता है। यदि आप उसे भी सर्वाइव कर चुके हैं, तो भी आपके लिए ये ब्लॉग महत्वपूर्ण है।
खानपान में बदलाव का मतलब स्वाद का त्याग नहीं, बल्कि सही चुनाव है। दिल की सेहत के लिए डाइट ऐसी होनी चाहिए जो नसों में सूजन (Inflammation) को कम करे।
कई लोग डर के मारे चलना-फिरना बंद कर देते हैं, जो कि गलत है। हार्ट पेशेंट के लिए एक्सरसाइज दवा जितनी ही जरूरी है। इसके लिए आप अपने जीवन में निम्नलिखत बदलाव कर सकते हैं -
“हार्ट अटैक के बाद क्या करें” अक्सरा यह सवाल हमारे पेशेंट्स हमसे पूछते हैं और ये सवाल जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी है "क्या न करें"। चलिए इस पहलू को अच्छे से समझते हैं -
हार्ट अटैक के बाद की जिंदगी एक नई शुरुआत है। आपका अनुशासन ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। सही समय पर दवाएं लेना, दिल की सेहत के लिए डाइट का पालन करना और खुश रहना आपके हृदय को लंबी उम्र दे सकता है। याद रखें, आप अकेले नहीं हैं; सही चिकित्सा सलाह और अपनों के सहयोग से आप फिर से वही खुशहाल जीवन जी सकते हैं। आप सीके बिरला अस्पताल (BM Birla Heart Hospital) के अनुभवी विशेषज्ञों से भी परामर्श ले सकते हैं।
हां, यह न केवल सुरक्षित है बल्कि जरूरी भी है। बस शुरुआत धीमी होनी चाहिए। अपने डॉक्टर की सलाह से वॉकिंग या लाइट योग शुरू करें। यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करता है।
आमतौर पर शुरुआती 2 से 4 हफ्ते भारी काम से बचना चाहिए। हालांकि, इसका मतलब बेड रेस्ट नहीं है। हल्की चहलकदमी दूसरे दिन से ही शुरू की जा सकती है। पूर्ण रिकवरी में 2-3 महीने लग सकते हैं।
धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, तनाव, जंक फूड का अधिक प्रयोग और दवाओं को बीच में ही छोड़ देना दोबारा हार्ट अटैक के मुख्य कारण बनते हैं। इसके अलावा, शारीरिक सक्रियता की कमी भी जोखिम बढ़ाती है।
जी हां, अत्यधिक तनाव शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ाता है, जो ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को अनियंत्रित कर सकता है। मानसिक शांति के लिए ध्यान और गहरी सांस लेने वाले एक्सरसाइज बहुत प्रभावी होते हैं।
बिल्कुल, अधिकांश लोग 3 से 6 महीने के भीतर अपने काम और सामान्य दिनचर्या पर वापस लौट आते हैं। सही लाइफस्टाइल के साथ आप ट्रेवलिंग, जॉब और हल्की स्पोर्ट्स एक्टिविटीज का आनंद ले सकते हैं।
अटैक के बाद पहले साल में हर 3 महीने पर फॉलो-अप जरूरी है। इसके बाद डॉक्टर की सलाह पर साल में कम से कम दो बार लिपिड प्रोफाइल, ईसीजी और इको (ECHO) टेस्ट कराना चाहिए।
ज्यादातर मरीज 4 से 6 हफ्ते बाद अपनी सेक्सुअल लाइफ शुरू कर सकते हैं। अगर आप बिना थके दो मंजिल सीढ़ियां चढ़ पा रहे हैं, तो आप इसके लिए शारीरिक रूप से तैयार माने जाते हैं।
Written and Verified by:

Dr. Suman Chatterjee is a Consultant in Cardiology at BM Birla Heart Hospital, Kolkata with over 7 years of experience. He specializes in arrhythmias, adult congenital heart disease, acute coronary syndrome, heart failure, hypertension, and cardiomyopathies.
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