एंजियोप्लास्टी के बाद कितने साल तक स्टेंट चलता है?
Home >Blogs >एंजियोप्लास्टी के बाद कितने साल तक स्टेंट चलता है?

एंजियोप्लास्टी के बाद कितने साल तक स्टेंट चलता है?

Cardiology | by Dr. Dhiman Kahali on 14/04/2026

Table of Contents

Summary

एंजियोप्लास्टी सुनकर घबराएं नहीं — यह प्रक्रिया आपके दिल की बंद धमनियों को फिर से खोलती है और एक स्टेंट (जालीदार ट्यूब) उन्हें दोबारा सिकुड़ने से बचाता है। आधुनिक ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (DES) जीवनभर के लिए लगाए जाते हैं और सही देखभाल से पहले साल में 95% तक सफलता दर देते हैं।

स्टेंट की लंबी उम्र के लिए ज़रूरी है — दवाएं नियमित लें, धूम्रपान छोड़ें, डायबिटीज व BP नियंत्रित रखें, और हार्ट-फ्रेंडली डाइट अपनाएं। सीने में भारीपन, सांस फूलना या जबड़े-कंधे में दर्द जैसे लक्षण नज़रअंदाज़ न करें।

एंजियोप्लास्टी की सलाह मिलते ही अक्सर लोग इस डर से घिर जाते हैं कि अब उनकी आयु कम हो गई है। लेकिन आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन आपको डरने की ज़रूरत नहीं है। हम मानते हैं कि हृदय रोग केवल शरीर की बीमारी नहीं है; यह मन को भी झकझोर देता है। 

लेकिन यकीन मानिए, एंजियोप्लास्टी आपके लिए एक "दूसरा जन्म" साबित हो सकती है। बीएम बिरला अस्पताल, कोलकाता में हमने हजारों मरीजों को इस प्रक्रिया के बाद मैराथन दौड़ते और अपनी पोते-पोतियों के साथ खेलते देखा है। हम इस ब्लॉग की मदद से आपके कई प्रश्नों के उत्तर देंगे। यदि इसके बाद भी आपको कोई समस्या नजर आती है, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लें और इलाज लें।

एंजियोप्लास्टी और स्टेंट क्या होते हैं?

इसे सरल भाषा में समझें तो, हमारे दिल को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों (Arteries) में जब वसा या कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है, तो रास्ता पतला हो जाता है। एंजियोप्लास्टी वह प्रक्रिया है, जिसमें एक छोटे गुब्बारे की मदद से उस संकरे रास्ते को खोला जाता है, जिससे ब्लड सप्लाई फिर से बहाल हो जाए।

स्टेंट एक छोटी जालीदार ट्यूब होती है, जो धमनियों के लिए एक 'सपोर्ट स्ट्रक्चर' की तरह कार्य करती है ताकि नसें दोबारा न सिकुड़ें। आजकल ज्यादातर 'ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट' (DES) का उपयोग किया जाता है, जो धीरे-धीरे दवा छोड़ते हैं, ताकि वहां फिर से ब्लॉकेज न हो।

स्टेंट कितने साल तक चलता है?

यह सबसे ज्यादा पूछे जाने वाला सवाल है। तकनीकी रूप से, एक हार्ट स्टेंट शरीर के अंदर हमेशा के लिए रहने के लिए बनाया जाता है। यह कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे 5 या 10 साल बाद बदलने की जरूरत पड़े।

हालांकि, हार्ट स्टेंट लाइफ सीधे तौर पर स्टेंट की गुणवत्ता से ज्यादा आपकी नसों के स्वास्थ्य और आपकी जीवनशैली पर निर्भर करता है। पबमेड सेंट्रल (PubMed Central) में प्रकाशित 1,000 मरीजों के एक बड़े रिसर्च से पता चलता है कि सही देखभाल के साथ स्टेंट की सफलता दर काफी प्रभावशाली है। इस रिसर्च में पाया गया है कि सही देखभाल के साथ मरीजों की जीवन रक्षा दर (Survival Rate) पहले वर्ष में 95%, तीसरे वर्ष में 91% और पांचवें वर्ष में 86% देखी गई है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि स्टेंट न केवल सुरक्षित है, बल्कि लंबे समय तक आपके दिल को स्वस्थ रखने में भी कारगर है।

स्टेंट की उम्र किन कारकों पर निर्भर करती है?

स्टेंट की सफलता और लंबी उम्र कुछ प्रमुख बातों पर टिकी होती है जैसे कि - 

  • दवाओं का नियमित सेवन: एंजियोप्लास्टी के बाद खून पतला करने वाली दवाएं सबसे महत्वपूर्ण हैं। इनके छोड़ने से धमनियां तुरंत ब्लॉक हो सकती हैं और स्टेंट फेल हो सकता है।
  • डायबिटीज और बीपी का नियंत्रण: अगर शुगर बढ़ी हुई है, तो स्टेंट के अंदर प्लाक जमने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
  • धूम्रपान: तंबाकू और सिगरेट स्टेंट के सबसे बड़े दुश्मन हैं। ये नसों में सूजन पैदा करते हैं और थक्का (Clot) जमने का खतरा बढ़ाते हैं।
  • स्टेंट का प्रकार: ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट की उम्र साधारण स्टेंट या बेयर मेटल स्टेंट (BMS) से कहीं बेहतर होती है।
  • कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण (LDL): एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) का स्तर बढ़ने से स्टेंट के आसपास नया ब्लॉकेज बन सकता है। डॉक्टर द्वारा दी गई स्टेटिन (Statins) का डोज़ मिस न करें।
  • जेनेटिक प्रभाव (Genetics): हृदय रोगों का पारिवारिक इतिहास होने पर धमनियों के दोबारा संकुचित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में नियमित फॉलो-अप और अधिक सावधानी जरूरी है।
  • प्रक्रिया की सटीकता: आधुनिक इमेजिंग तकनीक (जैसे IVUS) से स्टेंट लगाने पर उसकी फिटिंग बेहतर होती है, जिससे भविष्य में जटिलताओं का जोखिम कम हो जाता है।
  • अन्य बीमारियां (Co-morbidities): किडनी की गंभीर बीमारियों में स्टेंट के अंदर ब्लॉकेज का जोखिम थोड़ा अधिक होता है, जिसके लिए विशेष निगरानी आवश्यक है।
  • मानसिक तनाव: लंबे समय तक तनाव कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जो रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा कर स्टेंट की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।
  • शरीर का वजन: अधिक वजन हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालता है। स्वस्थ वजन बनाए रखने से हृदय की पंपिंग क्षमता बेहतर होती है और स्टेंट पर बोझ कम पड़ता है।

स्टेंट ब्लॉकेज या फेल होने के संकेत: कब हो जाएं सावधान?

ये बात पूर्ण रूप से सच है कि इस एडवांस मेडिकल फील्ड में स्टेंट के फेल होने की संभावना बहुत कम होती है, फिर भी स्टेंट ब्लॉकेज के कारण जैसे कि दवाओं में लापरवाही या खराब लाइफस्टाइल कभी-कभी समस्या दोबारा पैदा कर सकते हैं।

स्टेंट फेल होने के संकेत को समय रहते पहचानना न केवल आपकी सेहत के लिए जरूरी है, बल्कि यह जान बचाने वाला कदम साबित हो सकता है। यदि आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कुछ भी महसूस हो, तो उसे भूलकर भी "गैस" या "काम की थकान" समझकर नजरअंदाज न करें - 

  • शारीरिक मेहनत के दौरान परेशानी: यदि चलते समय, सीढ़ियां चढ़ते समय या कोई भारी काम करते समय छाती में भारीपन, जकड़न या दर्द महसूस हो, तो यह स्टेंट फेल होने का संकेत है।
  • सांस फूलना और ठंडा पसीना: बिना किसी कड़ी मेहनत के अचानक सांस का उखड़ना या ठंडे पसीने आना दिल पर बढ़ते दबाव का संकेत है।
  • दर्द का फैलना: कभी-कभी दिल का दर्द सिर्फ छाती तक सीमित नहीं रहता। यदि आपको अपने जबड़े, बाएं कंधे, गर्दन या पीठ के ऊपरी हिस्से में खिंचाव या अजीब सा दर्द महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • अत्यधिक थकान: यदि आपको रोजमर्रा के छोटे कामों में भी बहुत ज्यादा थकान महसूस होने लगे, तो यह दिल की बीमारी का इलाज दोबारा रिव्यू करने का समय हो सकता है।

एंजियोप्लास्टी के बाद पहले कुछ महीनों में इन लक्षणों के प्रति अतिरिक्त सजग रहें। सतर्कता ही स्टेंट की लंबी उम्र की पहली शर्त है।

स्टेंट की लाइफ बढ़ाने के लिए जरूरी लाइफस्टाइल बदलाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हृदय रोगों से होने वाली मौतों को सही लाइफस्टाइल और समय पर इलाज से 80% तक कम किया जा सकता है।

डॉक्टर अक्सर कहते हैं कि "हमने ब्लॉकेज तो खोल दिया है, लेकिन उसे साफ रखना अब आपकी जिम्मेदारी है।" एंजियोप्लास्टी के बाद लाइफस्टाइल में किया गया बदलाव ही वह असली "दवा" है, जो यह तय करती है कि आपका स्टेंट कितने सालों तक सुचारू रूप से काम करेगा। इसके लिए आप अपने जीवन में 4 मुख्य बदलाव करें - 

  • सक्रिय रहें: रिकवरी में आपका सक्रिय रहना बहुत ज्यादा जरूरी है। सर्जरी के बाद कम से कम 10 मिनट की वॉकिंग ज़रूरी है। 
  • स्ट्रेस मैनेजमेंट: योग, प्राणायाम और ध्यान (Meditation) को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और स्ट्रेस से दूरी बनाएं। इससे ब्लड प्रेशर स्थिर रहेगा और स्टेंट के आसपास की कोशिकाएं भी स्वस्थ रहेंगी।
  • नियमित मेडिकल फॉलो-अप: एंजियोप्लास्टी कोई "वन-टाइम फिक्स" नहीं है। स्टेंट की स्थिति और दिल की कार्यक्षमता जांचने के लिए साल में कम से कम दो बार अपने कार्डियोलॉजिस्ट से जरूर मिलें और समय समय पर जांच कराते रहें।
  • तंबाकू और सिगरेट से दूरी: तंबाकू और सिगरेट स्टेंट के सबसे बड़े दुश्मन हैं। धूम्रपान नसों के अंदर सूजन पैदा करता है, जिससे स्टेंट फेल हो सकता है। 

एंजियोप्लास्टी के बाद आहार चार्ट (Diet Chart)

आपका खान-पान सीधे तौर पर आपके रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य और स्टेंट की उम्र को प्रभावित करता है। एंजियोप्लास्टी के बाद एक संतुलित और हार्ट केयर डाइट न केवल कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है, बल्कि भविष्य में ब्लॉकेज के जोखिम को भी बिल्कुल कम कर देता है।

नीचे दिया गया चार्ट आपको यह समझने में मदद करेगा कि आपको अपनी थाली में क्या शामिल करना चाहिए और किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए - 

श्रेणी (Category)

क्या खाएं (अनुशंसित)

क्या न खाएं (वर्जित)

अनाज (Grains)

ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस, मल्टीग्रेन आटा।

मैदा, सफेद ब्रेड, बिस्कुट, केक, पेस्ट्री।

फल और सब्जियां

हरी पत्तेदार सब्जियां, सेब, पपीता, संतरा, अनार।

ज्यादा पके हुए आम, सीताफल (सीमित मात्रा में)।

हेल्दी फैट्स

अखरोट, बादाम (बिना नमक वाले), अलसी के बीज।

डालडा (Vanaspati), मक्खन, घी (अधिक मात्रा में)।

प्रोटीन

दालें, सोयाबीन, ग्रिल्ड मछली (ओमेगा-3)।

रेड मीट, प्रोसेस्ड मीट, सॉसेज।

तेल (Cooking Oil)

जैतून का तेल (Olive Oil), सरसों का तेल।

रिफाइंड तेल, नारियल का तेल, पाम आयल।

अन्य

कम नमक वाला भोजन, हर्बल चाय।

ज्यादा नमक (अचार, पापड़), चीनी, तला-भुना खाना (समोसा, पिज्जा)।

एंजियोप्लास्टी के बाद सावधानियां

बहुत से लोग पूछते हैं कि एंजियोप्लास्टी के बाद कितने दिन आराम करें? आमतौर पर, प्रक्रिया के 2 से 3 दिन बाद आप घर के हल्के काम कर सकते हैं। लेकिन पूर्ण एंजियोप्लास्टी रिकवरी टाइम लगभग एक सप्ताह का होता है।

  • शुरुआती 15 दिनों तक भारी वजन न उठाएं।
  • सीढ़ियां बहुत धीरे चढ़ें।
  • एंजियोप्लास्टी के बाद सावधानी के तौर पर, जिस पैर या हाथ से प्रक्रिया हुई है, वहां किसी भी तरह की सूजन या लालिमा पर नजर रखें।

निष्कर्ष

एंजियोप्लास्टी आपके जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक स्वस्थ शुरुआत है। स्टेंट की उम्र कितनी होती है, यह सवाल जितना तकनीकी है, उससे कहीं ज्यादा भावनात्मक है। एक स्टेंट आपके दिल के रास्ते को खोल सकता है, लेकिन उस रास्ते को साफ रखना आपकी जिम्मेदारी है, जैसा हमने इस ब्लॉग में पहले भी बताया है। एंजियोप्लास्टी के बाद सावधानियां बरतकर और हार्ट स्टेंट के बाद सावधानियां जैसे कि सही आहार और व्यायाम अपनाकर, आप न केवल अपने स्टेंट की लाइफ बढ़ा सकते हैं, बल्कि एक लंबा और खुशहाल जीवन जी सकते हैं। याद रखें, आपका दिल अनमोल है; इसकी देखभाल में कोई कोताही न बरतें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या स्टेंट हमेशा के लिए होता है?

हां, स्टेंट शरीर के अंदर हमेशा के लिए रहने के लिए ही बनाया जाता है। इसे तब तक निकालने की आवश्यकता नहीं होती जब तक कि कोई गंभीर जटिलता न हो।

स्टेंट दोबारा ब्लॉक क्यों हो जाता है?

स्टेंट ब्लॉकेज के कारण मुख्य रूप से दवाओं का समय पर न लेना, अनियंत्रित डायबिटीज, धूम्रपान और हाई फैट वाला भोजन है। यदि स्टेंट के अंदर फिर से प्लाक जमने लगे, तो इसे 'इन-स्टेंट रीस्टेनोसिस' कहा जाता है।

क्या स्टेंट बदलना पड़ता है?

नहीं, स्टेंट को बदला नहीं जाता। यदि स्टेंट फिर से ब्लॉक हो जाए, तो डॉक्टर उसी स्टेंट के अंदर दूसरा स्टेंट डाल सकते हैं या बैलून की मदद से उसे फिर से खोल सकते हैं।

क्या स्टेंट के बाद सामान्य जीवन जी सकते हैं?

बिल्कुल, अधिकांश लोग स्टेंट लगवाने के बाद पहले से ज्यादा सक्रिय महसूस करते हैं, क्योंकि उनके दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने लगती है। 

एंजियोप्लास्टी के बाद कितना आराम जरूरी है?

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद 2-4 दिन का पूर्ण आराम पर्याप्त है। एक सप्ताह के भीतर आप अपने सामान्य डेस्क वर्क पर लौट सकते हैं, लेकिन भारी सामान न उठाएं।

क्या स्टेंट लगवाने के बाद एमआरआई (MRI) करवा सकते हैं?

हां, आधुनिक स्टेंट 'MRI Safe' होते हैं। हालांकि, किसी भी स्कैन से पहले अपने डॉक्टर को जरूर बताएं कि आपको स्टेंट लगा है और अपना स्टेंट कार्ड साथ रखें।

क्या स्टेंट के बाद सीने में हल्का दर्द होना सामान्य है?

प्रक्रिया के बाद कुछ दिनों तक हल्का भारीपन महसूस हो सकता है। लेकिन अगर दर्द तेज हो, सांस लेने में दिक्कत हो या यह आराम करने पर भी न जाए, तो तुरंत अपने कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

Written and Verified by:

Dr. Dhiman Kahali

Dr. Dhiman Kahali

Director Exp: 47 Yr

Interventional Cardiology

Book an Appointment

Dr. Dhiman Kahali is the Director of Interventional Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 37 years of experience. He specializes in angioplasty, mitral balloon dilation, and peripheral vascular interventions, and has been honored with the Gandhi Centenary and Mother Teresa International Awards.

Related Diseases & Treatments

Treatments in Kolkata

Cardiology Doctors in Kolkata

NavBook Appt.WhatsappWhatsappCall Now