
क्या आपके पीरियड्स इतने दर्दनाक होते हैं कि पेन किलर के बिना दिन निकलना मुश्किल हो जाता है? या फिर लंबे समय से कोशिश करने के बावजूद मां बनने का सपना अधूरा लग रहा है? अगर हाँ, तो हो सकता है कि इसके पीछे 'चॉकलेट सिस्ट' जिम्मेदार हो।
चॉकलेट सिस्ट (एंडोमेट्रियोमा) महिलाओं में होने वाली एक ऐसी स्थिति है जो न सिर्फ आपके पीरियड्स को दर्दनाक बनाती है, बल्कि इनफर्टिलिटी (बांझपन) का एक बड़ा कारण भी बन सकती है। सही जानकारी के अभाव में महिलाएं इसे सिर्फ 'सामान्य दर्द' मानकर सहती रहती हैं, जिससे समस्या बढ़ती चली जाती है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि चॉकलेट सिस्ट क्या है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और आधुनिक मेडिकल साइंस में इसका इलाज कैसे संभव है। अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें: समय पर सही इलाज आपकी फर्टिलिटी बचा सकता है। विशेषज्ञ सलाह के लिए सीके बिरला अस्पताल, जयपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ की टीम से संपर्क करें।
मेडिकल भाषा में इसे एंडोमेट्रियोमा कहा जाता है, और यह एंडोमेट्रियोसिस की ही एक गंभीर स्थिति है। सामान्य तौर पर गर्भाशय के अंदर की परत, यानी एंडोमेट्रियम, हर महीने पीरियड्स में झड़ती है। लेकिन जब यही टिश्यू गर्भाशय की बजाय ओवरी में जमा होने लगता है, तो वहां की ब्लीडिंग बाहर नहीं निकल पाती और धीरे-धीरे पुराना खून जमा होकर एक थैली का रूप ले लेता है, जिसका रंग गहरा भूरा और बनावट गाढ़ी चॉकलेट जैसी होती है, इसलिए इसे चॉकलेट सिस्ट कहा जाता है। यानी जब भी कोई पूछता है कि चॉकलेट सिस्ट क्या होता है, तो सीधा जवाब यही है, ओवरी में बना पुराने खून से भरा सिस्ट। डॉक्टरों का मानना है कि इसकी बड़ी वजह रेट्रोग्रेड मेंस्ट्रुएशन है, यानी पीरियड्स का खून उल्टा फैलोपियन ट्यूब से होते हुए ओवरी में चला जाना।
हां, चॉकलेट सिस्ट से कंसीव करने में परेशानी हो सकती है, लेकिन यह नामुमकिन नहीं है। एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित लगभग आधी महिलाओं को फर्टिलिटी में दिक्कत आती है, और इनमें से 17% से 44% महिलाओं में चॉकलेट सिस्ट विकसित होता है। यह फर्टिलिटी को इन तरीकों से प्रभावित करता है -
जयपुर में हमारे अस्पताल में कई मरीज आए हैं, जो कई सालों से कंसीव नहीं कर पा रहे थे, लेकिन जांच में चॉकलेट सिस्ट की परेशानी निकली। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और सही दवाओं की मदद से वे नेचुरल तरीके से कंसीव कर पाईं। सही समय पर सही इलाज ही इसके बेहतर परिणाम की कुंजी है।
चॉकलेट सिस्ट की सटीक वजह आज भी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन रेट्रोग्रेड मेंस्ट्रुएशन के अलावा फैमिली मेडिकल हिस्ट्री, इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी और हार्मोनल असंतुलन को भी कारण माना जा सकता है। अगर मां, बहन या नानी को एंडोमेट्रियोसिस की समस्या रही है, तो जोखिम बढ़ सकता है।
चॉकलेट सिस्ट के लक्षण शुरुआत में हल्के हो सकते हैं, इसलिए कई महिलाएं इन्हें सामान्य पीरियड पेन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ आम चॉकलेट सिस्ट लक्षण इस प्रकार हैं,
जोखिम कारकों की बात करें तो 20 से 40 साल की उम्र, कभी मां न बनना, कम उम्र में पीरियड्स शुरू होना और छोटा मेंस्ट्रुअल साइकल इसकी संभावना बढ़ा सकते हैं। कुछ महिलाओं में कोई लक्षण नजर ही नहीं आते, और सिस्ट की जानकारी रूटीन अल्ट्रासाउंड में अचानक मिलती है, इसलिए नियमित गायनी चेकअप को हल्के में न लें।

चॉकलेट सिस्ट की जांच के लिए निम्नलिखित तरीकों का उपयोग किया जाता है -
चॉकलेट सिस्ट का इलाज हर महिला के लिए एक जैसा नहीं होता। यह सिस्ट के साइज, लक्षणों, उम्र और प्रेग्नेंसी की योजना पर निर्भर करता है -
नोट करें: सर्जरी से पहले AMH टेस्ट से ओवेरियन रिजर्व जांचना ज़रूरी है, ताकि अंडों की क्षमता का पता चल सके। इसलिए अनुभवी सर्जन का चुनाव बेहद मायने रखता है।
यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह लें:
ध्यान दें: 35 की उम्र के बाद फर्टिलिटी विंडो सीमित होने लगती है, इसलिए फैमिली हिस्ट्री होने पर जांच में देरी न करें।
जी हाँ, बिल्कुल संभव है! ये तीन तरीकों से संभव है। चलिए समझते हैं कैसे -
चॉकलेट सिस्ट के बारे में खामोश रहना समस्या को बढ़ा सकता है। सही समय पर पहचान और सटीक इलाज से ज्यादातर महिलाएं स्वस्थ जीवन जी सकती हैं और मां बनने का सपना पूरा कर सकती हैं। यदि आप भी ऐसे किसी लक्षण का सामना कर रही हैं, तो हिचकिचाएं नहीं। सीके बिरला अस्पताल, जयपुर की अनुभवी गायनेकोलॉजी और फर्टिलिटी टीम से संपर्क करें और आज ही अपना परामर्श (Appointment) बुक करें।
हां, बड़ी या दोनों ओवरी में मौजूद सिस्ट कंसीव करना मुश्किल बना सकती है, क्योंकि यह अंडे की क्वालिटी और ट्यूब के काम करने के तरीके को प्रभावित करती है। हालांकि छोटी सिस्ट के साथ भी नैचुरल प्रेगनेंसी संभव है।
चॉकलेट सिस्ट, एंडोमेट्रियोसिस की ही एक एडवांस स्टेज है। जब एंडोमेट्रियल टिश्यू ओवरी में जमा होकर पुराने खून से भरी सिस्ट बना लेता है, तो उसे चॉकलेट सिस्ट या एंडोमेट्रियोमा कहा जाता है।
नहीं, छोटी और बिना लक्षण वाली सिस्ट को सिर्फ निगरानी में रखा जा सकता है। सर्जरी तब सुझाई जाती है जब सिस्ट बड़ी हो, दर्द बढ़ रहा हो या फर्टिलिटी पर असर डाल रही हो।
आमतौर पर जब सिस्ट का आकार 4 सेंटीमीटर या उससे बड़ा हो जाए, लगातार बढ़ रहा हो या तेज दर्द दे रहा हो, तब डॉक्टर सक्रिय इलाज या सर्जरी की सलाह देते हैं।
हां, सिस्ट के आसपास की सूजन और कई बार सर्जरी दोनों ओवेरियन रिजर्व यानी अंडों की संख्या और क्वालिटी को घटा सकते हैं, इसलिए इलाज से पहले AMH टेस्ट कराना फायदेमंद रहता है।
अगर सिस्ट बहुत बड़ी हो, दर्द दे रही हो या अंडे निकालने की प्रक्रिया में रुकावट बन सकती हो, तभी IVF से पहले इसे हटाने की सलाह दी जाती है, वरना सीधे IVF शुरू किया जा सकता है।
हां, बिल्कुल संभव है। कई महिलाएं चॉकलेट सिस्ट के बावजूद IVF के जरिए सफलतापूर्वक मां बनी हैं, खासकर जब नैचुरल कंसीव करना मुश्किल हो या ओवेरियन रिजर्व कम हो।
एंटी इनफ्लेमेटरी डाइट, हल्की एक्सरसाइज और तनाव प्रबंधन दर्द कम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन ये सिस्ट को ठीक नहीं करते। यह सपोर्टिव उपाय है, डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं।
ऐसा होना बहुत दुर्लभ है। ज्यादातर चॉकलेट सिस्ट नॉन कैंसरस होती हैं, फिर भी लंबे समय तक बनी रहने वाली या तेजी से बढ़ने वाली सिस्ट की नियमित जांच जरूरी मानी जाती है।
हल्दी, अदरक जैसी एंटी-इन्फ्लेमेटरी डाइट, योग और हल्की एक्सरसाइज दर्द व सूजन में राहत दे सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें, ये सपोर्टिव केयर है, डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं। एंडोमेट्रियोसिस से जुड़ी सूजन का असर लंबे समय में दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है, इसलिए नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहें।
Written and Verified by:

Dr. C.P. Dadhich is the Director of Obstetrics and Gynecology Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 25 years of experience. He specializes in high-risk pregnancy management, endo-gynecology, and radical hysterectomy.
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