अचानक ज्यादा पीरियड ब्लीडिंग? कारण और समाधान
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अचानक ज्यादा पीरियड ब्लीडिंग? कारण और समाधान

Obstetrics and Gynaecology | by Dr. Anushree Mandal on 22/01/2026 | Last Updated : 21/01/2026

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Summary

क्या आप अचानक ज्यादा पीरियड ब्लीडिंग या थकावट महसूस कर रही हैं? यह ब्लॉग आपके लिए हैं, जिसमें इसके कारणों (जैसे कि PCOD, फाइब्रॉड्स), लक्षणों और कारगर उपचारों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग होना केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह मानसिक तनाव और अत्यधिक थकान का कारण भी बन सकती है। हम जानते हैं कि हर महिला का शरीर और उनका पीरियड्स का ब्लड फ्लो भी अलग-अलग होता है। लेकिन, कभी-कभी यह फ्लो बहुत ज्यादा हो जाता है, जो किसी भी मामले में सामान्य नहीं लगता है। ऐसे में आपको हर घंटे ऐसा लग सकता है कि आपको बार-बार पैड बदलना पड़ेगा। 

ऐसी स्थिति को मेडिकल भाषा में 'मेनोरेजिया' (Menorrhagia) कहा जाता है। कई महिलाएं इसे "सामान्य" मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन यह शरीर के अंदर चल रही किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है, इसलिए इसे नजरअंदाज तो बिल्कुल भी न करें। CMRI (CK Birla Hospitals) में, हम समझते हैं कि यह स्थिति कितनी डरावनी और असुविधाजनक हो सकती है। सही जानकारी और समय पर इलाज से आप इस समस्या से पूरी तरह निजात पा सकते हैं।

ज्यादा पीरियड ब्लीडिंग क्या है?

एक सामान्य मेंस्ट्रुअल साइकिल या मासिक धर्म चक्र में, एक महिला औसतन 30 से 40 मिलीलीटर रक्त खोती है। लेकिन जब यह मात्रा 80 मिलीलीटर से अधिक हो जाए, या पीरियड 7 दिनों से अधिक समय तक चले, तो इसे भारी रक्तस्राव या ज्यादा पीरियड आना या हेवी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहा जाता है।

सरल शब्दों में समझें तो, तो यदि आपको अपने पैड को हर 1-2 घंटे में बदलना पड़ रहा है, या आपको रात में उठकर पैड बदलना पड़ता है, तो यह 'अचानक ज्यादा पीरियड ब्लीडिंग' या हेवी ब्लीडिंग की श्रेणी में आता है। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि यह आयरन की कमी (Anemia) का एक प्रमुख कारण भी बन सकती है।

कौन से लक्षण बताते हैं कि ब्लीडिंग असामान्य है? 

अक्सर महिलाएं भ्रमित रहती हैं कि उनका फ्लो सामान्य है या नहीं। यहां कुछ प्रमुख लक्षण दिए गए हैं, जो पीरियड में ब्लड ज्यादा आना और असामान्यता की ओर इशारा करते हैं - 

  • लगातार पैड बदलना: यदि आपको लगातार कई घंटों तक हर घंटे एक या एक से अधिक सैनिटरी पैड या टैम्पोन बदलने की आवश्यकता पड़ती है।
  • दोहरी सुरक्षा की जरूरत: ब्लीडिंग को नियंत्रित करने के लिए आपको एक साथ दो पैड का उपयोग करना पड़ता है।
  • रात में जागना: फ्लो इतना ज्यादा होना कि आपको रात में नींद से जागकर पैड बदलना पड़े।
  • लंबे समय तक पीरियड्स: ब्लीडिंग का एक सप्ताह (7 दिन) से अधिक समय तक चलना।
  • खून के थक्के (Blood Clots): सामान्य छोटे थक्के आना ठीक है, लेकिन यदि आप चौथाई (coin size) से बड़े खून के थक्के पास कर रही हैं, तो यह ज्यादा पीरियड आने के कारण में से एक गंभीर लक्षण है।
  • एनीमिया के लक्षण: अत्यधिक खून बहने के कारण थकान, सांस फूलना, चक्कर आना या कमजोरी महसूस होना।
  • दैनिक जीवन में बाधा: यदि भारी फ्लो के कारण आपको अपने ऑफिस, कॉलेज या घर के काम छोड़ने पड़ रहे हैं।

ज्यादा पीरियड ब्लीडिंग के आम कारण

पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होने के कई कारण हो सकते हैं। यह हार्मोनल बदलाव से लेकर गर्भाशय की संरचनात्मक समस्याओं तक हो सकता है। आइए विस्तार से जानें कि पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग क्यों होती है - 

हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance)

एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन वो दो मुख्य हार्मोन है, जो गर्भाशय की परत (Endometrium) के निर्माण और टूटने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। किशोरावस्था (Puberty) या मेनोपॉज के दौरान इन हार्मोनों में उतार-चढ़ाव सबसे आम कारण होता है। इसके अतिरिक्त - 

  • पीसीओएस (PCOS): पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में ओव्यूलेशन नियमित नहीं होता, जिससे गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है और बाद में भारी ब्लीडिंग होती है।
  • थायरॉयड की समस्याएं: हाइपोथायरायडिज्म (कम सक्रिय थायरॉयड) भी भारी पीरियड्स का एक प्रमुख कारण है।

गर्भाशय फाइब्रॉड्स - Uterine Fibroids

फाइब्रॉड्स गर्भाशय की मांसपेशियों में होने वाली गैर-कैंसरकारी गांठें हैं। यह प्रजनन आयु के दौरान बहुत आम है। फाइब्रॉड्स गर्भाशय की दीवार को फैला सकते हैं, जिससे पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग होना शुरू हो जाता है।

पॉलीप्स (Polyps)

गर्भाशय की परत पर छोटे, सौम्य (benign) वृद्धि को पॉलीप्स कहा जाता है। यह अक्सर हार्मोन के उच्च स्तर से जुड़े होते हैं और भारी या अनियमित रक्तस्राव का कारण बनते हैं।

एडेनोमायोसिस (Adenomyosis)

यह एक ऐसी स्थिति है, जब गर्भाशय की परत (Endometrium) गर्भाशय की मांसपेशियों के अंदर बढ़ने लगती है। इससे पीरियड के दौरान बहुत तेज दर्द और भारी ब्लीडिंग होती है। यह अक्सर उन महिलाओं में देखा जाता है, जो अधेड़ उम्र की हैं या जिनके बच्चे हो चुके हैं।

अंतर्गर्भाशयी उपकरण (IUDs)

गर्भनिरोधक के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कॉपर-टी (Non-hormonal IUD) के दुष्प्रभावों में से एक हैवी पीरियड्स है। यदि आपको IUD लगवाने के बाद अचानक ज्यादा पीरियड ब्लीडिंग हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

दवाएं

कुछ दवाएं, विशेष रूप से खून को पतला करने वाली दवाएं (Anticoagulants) और कुछ एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, भारी ब्लीडिंग में योगदान कर सकते हैं।

अन्य चिकित्सीय स्थितियां

  • पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID): यह एक संक्रमण है, जो गर्भाशय और अन्य प्रजनन अंगों को प्रभावित करते हैं।
  • कैंसर: हालांकि यह दुर्लभ है, लेकिन गर्भाशय या सर्विक्स का कैंसर भी भारी ब्लीडिंग का कारण हो सकता है, विशेष रूप से मेनोपॉज के बाद।

ज्यादा ब्लीडिंग की जांच कैसे की जाती है?

सही जांच ही सही इलाज की कुंजी है। जब आप CMRI या अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाती हैं, तो वह पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग होने के कारण का पता लगाने के लिए निम्नलिखित जांच कर सकते हैं - 

  • ब्लड टेस्ट: यह जांचने के लिए कि क्या आपको एनीमिया या आयरन की कमी है और थायरॉयड या रक्त के थक्के जमने की कोई समस्या तो नहीं है।
  • पैप स्मीयर: सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) की कोशिकाओं की जांच, ताकि संक्रमण या कैंसर के शुरुआती संकेतों को खारिज किया जा सके।
  • अल्ट्रासाउंड: यह सबसे आम इमेजिंग टेस्ट है। यह गर्भाशय, अंडाशय और पेल्विक क्षेत्र की तस्वीरें दिखाता है, जिससे डॉक्टर फाइब्रॉड्स, पॉलीप्स या अन्य समस्याओं को देख सकते हैं।
  • हिस्टेरोस्कोपी: इसमें डॉक्टर एक पतली, रोशनी वाली ट्यूब को आपकी योनि के माध्यम से गर्भाशय में डालते हैं ताकि गर्भाशय के अंदरूनी भाग की जांच की जा सके और पॉलीप्स आदि का पता लगाया जा सके।

ज्यादा पीरियड ब्लीडिंग के उपचार

इलाज का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि ज्यादा पीरियड आने के कारण क्या है, आपकी उम्र क्या है, और क्या आप भविष्य में मां बनना चाहती हैं। चलिए इस स्थिति के सभी संभावित उपचारों के बारे में जानते हैं - 

चिकित्सा उपचार - Medical Treatments

  • आयरन सप्लीमेंट्स: यदि ब्लीडिंग के कारण आपके शरीर में खून की कमी हो गई है, तो यह आयरन सप्लीमेंट्स आपके लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।
  • NSAIDs: इबुप्रोफेन जैसी दवाएं दर्द को कम करने और ब्लीडिंग को थोड़ा कम करने में मदद कर सकती हैं।
  • ट्रेनेक्सैमिक एसिड (Tranexamic acid): यह दवा रक्त के थक्के जमने में मदद करती है और भारी ब्लीडिंग को कम करती है। इसे केवल पीरियड के दिनों में लिया जाता है।
  • ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव (Oral Contraceptives): जन्म नियंत्रण की गोलियां हार्मोन को संतुलित कर सकती हैं और पीरियड्स को नियमित और हल्का कर सकती हैं।
  • हार्मोनल IUD (Mirena): यह गर्भाशय की परत को पतला करता है, जिससे ब्लीडिंग काफी कम हो जाती है।

सर्जिकल उपचार

जब दवाएं काम नहीं करती हैं, तो सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है:

  • D&C (Dilation and Curettage): गर्भाशय की परत को खुरच कर साफ करना। इस प्रक्रिया का उपयोग अबॉर्शन में भी होता है। 
  • मायोमेक्टोमी: यदि फाइब्रॉड्स कारण हैं, तो उन्हें सर्जिकल रूप से हटाया जाता है, जिसके लिए मायोमेक्टोमी नाम की सर्जरी की जाती है। 
  • हिस्टेरेक्टॉमी: इसमें गर्भाशय को पूरी तरह से हटा दिया जाता है। यह इलाज का अंतिम विकल्प होता है और इसके बाद महिलाएं गर्भवती नहीं हो सकती हैं।

पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग होने पर घरेलू उपाय

हालांकि भारी ब्लीडिंग के लिए चिकित्सकीय सलाह अनिवार्य है, लेकिन कुछ पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग होने पर घरेलू उपाय आपके लक्षणों को प्रबंधित करने और शरीर को रिकवर करने में मदद कर सकते हैं। इन उपायों का पालन करके आपको बहुत मदद मिल सकती है - 

  • हाइड्रेटेड रहें और खूब सारा पानी पीएं
  • आयरन युक्त आहार खाएं और पालक, बीन्स, दालें, और अनार को अपने आहार में शामिल करें।
  • संतरे, नींबू या आंवला का सेवन करें, जिससे विटामिन सी बढ़ता है।
  • पेट के निचले हिस्से पर 20 मिनट के लिए आइस पैक लगाने से आराम मिल सकता है। 
  • आयुर्वेद के अनुसार, दूध और गुड़ शरीर को ताकत देता है और पीरियड्स के दौरान कमजोरी को कम करते हैं।

पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग होने पर क्या करें और कब डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि ब्लीडिंग अचानक बहुत तेज हो जाए, तो इसे घर पर संभालने की कोशिश करना जोखिम भरा हो सकता है। आपको तुरंत CMRI हॉस्पिटल या अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि - 

  • आपको एक घंटे में एक से ज्यादा पैड की ज़रूर पड़ रही है।
  • आपको चक्कर आ रहे हैं या आप बेहोश हो रही हैं।
  • सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है।
  • पेट के निचले भाग में असहनीय दर्द हो रहा है।
  • आप गर्भवती हैं और ब्लीडिंग हो रही है।

निष्कर्ष

पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग होना एक ऐसी समस्या है, जो आपके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है, लेकिन याद रखें कि यह लाइलाज नहीं है। यदि आप या आपके परिवार में कोई इस समस्या से जूझ रहा है, तो आज ही सीएमआरआई के विशेषज्ञ स्त्री रोग विशेषज्ञों से परामर्श लें। आपकी सेहत हमारी प्राथमिकता है।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ज्यादा पीरियड ब्लीडिंग एनीमिया का कारण बन सकती है?

हां, बिल्कुल। जब शरीर से खून का बहाव, नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण की गति से तेज होता है, तो शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, जिससे एनीमिया होता है। इससे अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होती है।

क्या थायराइड या हार्मोनल असंतुलन से पीरियड ब्लीडिंग बढ़ सकती है?

जी हां, थायरॉयड गैंड की समस्याएं (विशेषकर हाइपोथायरायडिज्म) और हार्मोनल असंतुलन (PCOS) माहवारी को अनियमित और भारी बनाने के मुख्य कारणों में से हैं।

क्या अचानक ज्यादा ब्लीडिंग पीसीओएस या फाइब्रॉइड का संकेत हो सकता है?

हां, गर्भाशय में फाइब्रॉड्स (गांठें) और पीसीओएस (PCOS) दोनों ही ज्यादा पीरियड आने के कारण हो सकते हैं। अल्ट्रासाउंड के जरिए इनकी पुष्टि की जा सकती है।

क्या लगातार भारी ब्लीडिंग होने पर अल्ट्रासाउंड जरूरी है?

हां, अल्ट्रासाउंड एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह डॉक्टर को गर्भाशय, अंडाशय और पेल्विक क्षेत्र के अंदर देखने में मदद करता है ताकि ब्लीडिंग के मूल कारण (जैसे पॉलीप्स या फाइब्रॉड्स) का पता लगाया जा सके।

क्या आयरन की कमी ज्यादा पीरियड ब्लीडिंग को और बढ़ा सकती है?

भारी ब्लीडिंग से आयरन की कमी होती है, और रिसर्च बताते हैं कि आयरन की गंभीर कमी गर्भाशय की मांसपेशियों की सिकुड़ने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है, जिससे ब्लीडिंग और बढ़ सकती है या रुकने में समय ले सकती है।

क्या इमरजेंसी में भारी पीरियड ब्लीडिंग को घर पर संभालना सुरक्षित है?

हल्की भारी ब्लीडिंग को आराम और हाइड्रेशन से मैनेज किया जा सकता है, लेकिन यदि ब्लीडिंग इतनी तेज है कि आप हर घंटे पैड बदल रही हैं या चक्कर आ रहे हैं, तो यह एक मेडिकल इमरजेंसी है। ऐसे में तुरंत अस्पताल जाना सुरक्षित है।

Written and Verified by:

Dr. Anushree Mandal

Dr. Anushree Mandal

Consultant Exp: 17 Yr

Obstetrician and Gynaecologist

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Dr. Anushree Mandal is a Consultant in Obstetrician and Gynaecologist Dept. at CMRI, Kolkata, with over 14 years of experience. She specializes in high-risk pregnancies, laparoscopic and hysteroscopic surgeries, and infertility treatments.

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