
पीरियड्स हर महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन हर महीने होने वाला दर्द आपकी रातों की नींद उड़ा सकता है। जब पीरियड्स पेन हर महीने आपको परेशान करते हैं, तो आपके भी मन में ये प्रश्न आता होगा कि, "क्या इसका कोई हल नहीं है?" पीरियड्स में दर्द सिर्फ शारीरिक तकलीफ नहीं, यह आपके काम, नींद, मूड और पूरी दिनचर्या को बाधित कर देता है।
परेशान न रहें क्योंकि इसमें आप अकेली नहीं हैं। भारत में करीब 70% महिलाएं हर महीने मासिक धर्म के दौरान किसी न किसी स्तर का दर्द महसूस करती हैं। कुछ के लिए यह हल्की बेचैनी होती है, तो कुछ के लिए यह इतना असहनीय हो जाता है कि बिस्तर से उठना भी मुश्किल लगता है।
अच्छी बात यह है कि सही जानकारी और कुछ आजमाए हुए घरेलू उपायों से पीरियड्स में दर्द को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस ब्लॉग में हम आपको पीरियड्स में पेट दर्द और कमर दर्द के कारण, असरदार घरेलू नुस्खे, सही खानपान और वह जरूरी जानकारी देंगे जो आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए, यह समझने में मदद करेगी। अगर आपको दर्द हर बार बहुत ज्यादा होता है, तो बेहतर है कि एक बार हमारे अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और अपनी तकलीफ को नज़रअंदाज़ करना बंद करें।
यह समझना जरूरी है कि पीरियड्स में दर्द क्यों होता है, तभी उसका सही उपाय किया जा सकता है। जब पीरियड्स शुरू होते हैं, तो गर्भाशय की परत झड़ना शुरू हो जाती है। इस प्रक्रिया में शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन (Prostaglandin) नाम के हार्मोन निकलते हैं। ये हार्मोन गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकोड़ते हैं, ताकि परत बाहर निकल सके। जितनी ज़्यादा प्रोस्टाग्लैंडिन की मात्रा होगी, ऐंठन उतनी ही तेज और दर्दनाक होगी।
इसके अलावा पीरियड्स में कमर दर्द का कारण भी यही है। गर्भाशय की मांसपेशियों का सिकुड़ना पीठ के निचले हिस्से और जांघों में दर्द पहुंचाता है।
पीरियड पेन दो प्रकार के होते हैं -
इन उपायों को अपनाकर आपको लाभ तो मिल सकता है, लेकिन यदि दर्द की सीमा आपके सहन करने की क्षमता से बढ़ जाए, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें -

पीरियड्स में पेट दर्द के लिए क्या खाएं, यह सवाल बहुत सी महिलाएं पूछती हैं। सही जवाब है कि खानपान में छोटे-छोटे बदलाव बड़ा फर्क डाल सकते हैं -
क्या खाएं:
क्या न खाएं:
बहुत सी महिलाओं को लगता है कि पीरियड्स के दौरान बिल्कुल आराम करना चाहिए। लेकिन हल्की फिज़िकल एक्टिविटी दर्द को कम करने में बहुत मदद कर सकती है। एक्सरसाइज से शरीर में Endorphin निकलते हैं जो प्राकृतिक दर्द निवारक का काम करते हैं।
फायदेमंद योगासन:
हल्की एक्सरसाइज:
भारी वजन उठाना, दौड़ना और हाई इंटेंसिटी वर्कआउट पीरियड्स के पहले दो दिनों में टालना बेहतर है।
हर महीने होने वाला हल्का से मध्यम दर्द सामान्य है, लेकिन कुछ संकेत बताते हैं कि यह साधारण दर्द से परे है -
ये लक्षण एंडोमेट्रियोसिस, PCOS, यूटेराइन फाइब्रॉयड या पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज का संकेत हो सकते हैं।
यह सबसे जरूरी सवाल है। पीरियड्स में दर्द कैसे कम करें, यह घरेलू उपायों से हल हो सकता है, लेकिन कुछ स्थितियों में देर करना नुकसानदेह हो सकता है।
डॉक्टर से तुरंत मिलें जब:
पीरियड्स में दर्द को "बस सहना पड़ता है" वाली सोच अब बदलने का वक्त आ गया है। सही घरेलू उपाय, संतुलित खानपान और थोड़ी सी एक्सरसाइज से इस दर्द को काफी कम किया जा सकता है। गर्म सिकाई, अदरक-दालचीनी की चाय, हल्दी वाला दूध और पर्याप्त पानी आपकी किचन में ही मौजूद हैं। लेकिन अगर यह दर्द हर बार आपकी जिंदगी रोक देता है, तो यह शरीर का आपको कुछ बताने का तरीका है।
सीके बिरला अस्पताल, CMRI में हमारे विशेषज्ञ आपकी मासिक धर्म संबंधी हर समस्या को समझते हैं और आपको एक बेहतर, दर्द-मुक्त जीवन की ओर ले जाने में मदद करते हैं। आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें।
हां, दोनों बेहद फायदेमंद है। अदरक Prostaglandin को कम करती है और दालचीनी ऐंठन घटाती है। इन्हें गर्म पानी या दूध में मिलाकर पीरियड्स के दौरान लेना दर्द में राहत देता है।
हल्का दर्द सामान्य है, लेकिन हर बार असहनीय दर्द सामान्य नहीं है। अगर दर्द की वजह से रोजमर्रा के काम रुक जाते हैं, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
सामान्य पीरियड दर्द पहले 1 से 2 दिन होता है और दवा से कम हो जाता है। एंडोमेट्रियोसिस में दर्द बहुत तेज होता है, पीरियड्स के बाद भी रहता है और सेक्स व पेशाब में भी दर्द होता है।
हां, पर्याप्त पानी पीने से ब्लोटिंग कम होती है और गर्म पानी मांसपेशियों को रिलैक्स करता है, जिससे ऐंठन में राहत मिलती है।
पैरों को मोड़कर भ्रूण की पोजीशन (Fetal Position) में सोना सबसे आरामदायक होता है। इससे पेट की मांसपेशियों पर दबाव कम होता है और दर्द में राहत मिलती है।
हां, कैफीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है जिससे गर्भाशय में रक्त संचार कम होता है और ऐंठन बढ़ सकती है। पीरियड्स के दौरान चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक सीमित करें।
हां। बालासन, सुप्त बद्धकोणासन और पवनमुक्तासन जैसे आसन पेट और पीठ की मांसपेशियों को आराम देते हैं। नियमित अभ्यास से हर महीने दर्द की तीव्रता कम होती जाती है।
हां, PCOS में हार्मोनल असंतुलन की वजह से पीरियड्स अनियमित और दर्दनाक हो सकते हैं। ऐसे में घरेलू उपायों के साथ डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
पीरियड्स से 1 से 2 दिन पहले होने वाले दर्द को PMS यानी Premenstrual Syndrome कहते हैं। इसमें ब्लोटिंग, थकान, मूड में बदलाव और हल्का पेट दर्द होता है। यह सामान्य है, लेकिन बहुत तेज़ हो तो डॉक्टर से मिलें।
Written and Verified by:

Dr. C.P. Dadhich is the Director of Obstetrics and Gynecology Dept. at CK Birla Hospital, Jaipur, with over 25 years of experience. He specializes in high-risk pregnancy management, endo-gynecology, and radical hysterectomy.
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