सर्दियों में हार्ट अटैक क्यों बढ़ जाते हैं? कारण, लक्षण और बचाव के तरीके
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सर्दियों में हार्ट अटैक क्यों बढ़ जाते हैं? कारण, लक्षण और बचाव के तरीके

Cardiology | by Dr. Anil Mishra on 04/12/2025 | Last Updated : 12/01/2026

Summary

सर्दियों में ठंड के कारण नसें सिकुड़ने और खून गाढ़ा होने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। बुजुर्गों और बीपी के मरीजों को सुबह की ठंड से बचना चाहिए, गर्म कपड़े पहनने चाहिए और खानपान में सावधानी बरतनी चाहिए। लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टरी सलाह लें।

क्या आप जानते हैं कि सर्दियों की वो सुहानी सुबह, जिसका इंतज़ार हम पूरे साल करते हैं, आपके दिल के लिए सबसे खतरनाक समय भी हो सकती है? कड़ाके की ठंड सिर्फ ठिठुरन नहीं लाती, बल्कि यह हमारी नसों को सिकोड़ देती है, जिससे दिल पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है। हमारे रिसर्च में भी पाया गया है कि सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 

आंकड़े बताते हैं कि सर्दियों के मौसम में हार्ट अटैक (Heart Attack) का खतरा 30% से 50% तक बढ़ जाता है। अक्सर हम सीने में होने वाली हल्की जलन या भारीपन को 'गैस' या 'ठंड का असर' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, और यही गलती जानलेवा साबित होती है। यदि आप या आपके घर के बुजुर्ग दिल के मरीज हैं, या हाई बीपी से जूझ रहे हैं, तो यह मौसम आपके लिए सतर्क रहने का है। इस ब्लॉग में, हम जानेंगे कि आखिर ठंड में दिल कमजोर क्यों पड़ जाता है और वो कौन से उपाय हैं जो आपकी और आपके अपनों की जान बचा सकते हैं। अधिक समस्या दिखने पर तुरंत अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें और इलाज लें। 

सर्दियों में हार्ट अटैक क्यों बढ़ जाते हैं?

सर्दियों का मौसम आते ही हमारे खान-पान और दिनचर्या में बदलाव आ जाता है, लेकिन सबसे बड़ा बदलाव हमारे शरीर के अंदर होता है। मेडिकल भाषा में समझें तो, हमारा शरीर 37 डिग्री सेल्सियस के मुख्य तापमान को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करता है। जब बाहर का तापमान गिरता है, तो शरीर अपनी गर्मी को बचाने के लिए कई तरह के 'एडजस्टमेंट' करता है। इन्हीं एडजस्टमेंट को करने के लिए कभी-कभी दिल को भारी कीमत चुकानी पड़ती है। 

प्रमुख शोध और कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि सर्दियों में तापमान की गिरावट सीधे हमारे कार्डियोवास्कुलर सिस्टम को प्रभावित करते हैं। यह केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं है; आजकल 30 से 40 वर्ष के युवाओं में भी सर्दियों में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण हमारी बदलती जीवनशैली और मौसम के प्रति लापरवाही है।

ठंड का दिल और ब्लड वेसल्स पर प्रभाव 

ठंड का सीधा असर हमारी नसों और रक्त प्रवाह पर पड़ता है। इसे समझने के लिए हमें शरीर की दो मुख्य प्रक्रियाओं को जानना होगा - 

  1. वेसोकन्स्ट्रिक्शन (Vasoconstriction - नसों का सिकुड़ना): ठंड के संपर्क में आते ही हमारे शरीर का 'सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम' सक्रिय हो जाता है। शरीर की गर्मी को बाहर निकलने से रोकने के लिए हमारी रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। संकरी नसों में खून पंप करने के लिए दिल को सामान्य से ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, जिससे हार्ट फेलियर या अटैक का खतरा पैदा होता है।
  2. खून का गाढ़ा होना (Increased Blood Viscosity): सर्दियों में हमारे शरीर में फाइब्रिनोजेन जैसे क्लॉटिंग फैक्टर का स्तर बढ़ जाता है। इसके अलावा, ठंड में हम पानी कम पीते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन होता है और खून गाढ़ा होने लगता है। गाढ़ा खून और सिकुड़ी हुई नसें, यह कॉम्बिनेशन धमनियों में ब्लड क्लॉट जमने का सबसे बड़ा कारण बनता है, जो हार्ट अटैक को न्योता देता है।

सर्दियों में हार्ट अटैक के प्रमुख कारण

ठंड में हार्ट अटैक के मामले बढ़ने के पीछे केवल तापमान ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि इसके साथ कई अन्य कारक भी जुड़े हुए हैं। चलिए सभी को एक-एक करके समझते हैं - 

  • वायु प्रदूषण और स्मॉग: भारत के कई शहरों में सर्दियों के दौरान स्मॉग (धुंध और धुआं) बढ़ जाता है। प्रदूषित हवा में मौजूद महीन कण (PM 2.5) सांस के जरिए फेफड़ों और फिर खून में मिल जाते हैं, जिसके कारण दिल को ओवरटाइम करना पड़ता है। 
  • शारीरिक गतिविधि में कमी: ठंड के कारण लोग सुबह की सैर छोड़ देते हैं और रजाई में दुबके रहना पसंद करते हैं। व्यायाम की कमी से कैलोरी बर्न नहीं होती, वजन बढ़ता है और शरीर में सुस्ती आती है जो कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को बढ़ाता है।
  • खानपान में बदलाव: सर्दियों में हम अक्सर तली-भुनी चीजें, परांठे, हलवा, गजक और मिठाइयां ज्यादा खाते हैं। डॉ. अनिल मिश्रा (हृदय रोग विशेषज्ञ) के अनुसार, मीठे और घी से बनी चीजों का अत्यधिक सेवन ट्राइग्लिसराइड्स और खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा देता है।
  • विटामिन डी की कमी: सर्दियों में धूप कम निकलती है और लोग घर के अंदर ज्यादा रहते हैं। विटामिन डी की कमी को सीधे तौर पर हृदय रोगों और हाई ब्लड प्रेशर से जोड़ा गया है।
  • सुबह का समय: ज्यादातर हार्ट अटैक सुबह 4 बजे से 8 बजे के बीच होते हैं। इस समय शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन का स्तर अधिक होता है और ब्लड प्रेशर स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। सर्दियों की सुबह की अत्यधिक ठंड इस "मॉर्निंग सर्ज" को और खतरनाक बना देती है।

हार्ट अटैक के शुरुआती और गंभीर लक्षण

हार्ट अटैक लक्षण को समय रहते पहचानना ही जीवन बचाने की कुंजी है। कई बार लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि मरीज उन्हें नजरअंदाज कर देता है। कुछ लक्षण हैं, जिन पर आपको खास ध्यान रखना चाहिए जैसे कि - 

सर्दियों में हार्ट अटैक से बचाव के तरीके

सर्दियों में हार्ट अटैक से कैसे बचे, यह सवाल हर किसी के मन में होता है। हमारे सभी विशेषज्ञ अपने पेशेंट को नीचे बताए गए बेहद आसान उपायों को बताते हैं, जिनका पालन आप भी कर सकते हैं - 

  • शरीर को गर्म रखें (Keep Warm): ठंड में बाहर निकलते सही और पूरे कपड़े पहनें। सिर और कान को ढकना न भूलें क्योंकि शरीर की बहुत सारी गर्मी सिर से बाहर निकलती है।
  • धूप निकलने पर ही व्यायाम करें: सुबह की घनी धुंध और कड़ाके की ठंड में सैर करने से बचें। जब धूप निकल आए, तब वॉक पर जाएं। आप घर पर भी व्यायाम कर सकते हैं। 
  • खानपान पर विशेष ध्यान दें (Heart-Healthy Diet): हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और सरसों का साग (कम तेल में बना हुआ) का सेवन बढ़ाएं। ओमेगा-3 के लिए अखरोट और अलसी के बीज खाएं। मौसमी फल जैसे अमरूद और संतरा विटामिन सी प्रदान करते हैं। बाजार में मिलने वाले प्रोसेस्ड सूप, बहुत ज्यादा घी में बने लड्डू या गजक, और डीप फ्राइड स्नैक्स से दूरी बनाएं। 
  • हाइड्रेटेड रहें: सर्दियों में प्यास नहीं लगती, लेकिन शरीर को पानी की जरूरत होती है। दिन भर गुनगुना पानी पीते रहें। यह खून को पतला रखने और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। हर्बल टी या ग्रीन टी भी एक अच्छा विकल्प है।
  • नियमित हेल्थ चेकअप: यदि आप बीपी या शुगर के मरीज हैं, तो सर्दियों में अपनी जांच की फ्रीक्वेंसी बढ़ा दें। डॉक्टर से पूछें कि क्या आपकी दवाओं की डोज़ में कोई बदलाव करने की जरूरत है।
  • धूम्रपान और शराब से दूरी: सिगरेट और शराब शरीर को अंदर से गर्म नहीं करते, बल्कि यह नसों को और ज्यादा सिकोड़ देते हैं। यह एक मिथक है कि शराब ठंड भगाती है; वास्तव में, यह हार्ट अटैक के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है।

कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए?

समय ही जीवन है। कार्डियोलॉजी में एक टर्म है—"गोल्डन आवर" (Golden Hour)। हार्ट अटैक के लक्षण शुरू होने के पहले 60 मिनट इलाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।

  • यदि सीने में दर्द 10-15 मिनट से अधिक रहे और आराम करने पर भी ठीक न हो।
  • यदि दर्द के साथ पसीना, उल्टी जैसा महसूस होना या सांस उखड़ रही हो।
  • यदि 'सॉर्बिट्रेट' - Sorbitrate (प्रिस्क्राइब की गई दवा) जैसी गोली लेने पर भी आराम न मिले।

ऐसी स्थिति में खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने की कोशिश न करें। तुरंत एंबुलेंस बुलाएं या किसी की मदद लें। तुरंत इलाज आपकी जान बचा सकता है। 

अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ठंडे मौसम में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है?

हां, ठंड में रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) सिकुड़ जाती हैं (Vasoconstriction), जिससे खून के प्रवाह के लिए दिल को अधिक जोर लगाना पड़ता है, फलस्वरूप ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।

बुजुर्गों, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल वाले मरीजों और धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में सर्दियों के दौरान हार्ट अटैक का खतरा सबसे अधिक होता है।

क्या सर्दी में व्यायाम करने से हार्ट अटैक का खतरा कम होता है?

मध्यम श्रेणी का व्यायाम (Moderate Exercise) फायदेमंद है, लेकिन अत्यधिक ठंड में भारी व्यायाम (Heavy Exertion) करने से दिल पर अचानक दबाव पड़ता है, जो खतरनाक हो सकता है।

हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण कैसे पहचाने?

सीने में भारीपन या जलन, बाएं हाथ या जबड़े में दर्द, सांस फूलना, और बिना वजह पसीना आना हार्ट अटैक के प्रमुख शुरुआती लक्षण हैं।

सर्दियों में हार्ट की सुरक्षा के लिए क्या सावधानियां अपनाएं?

शरीर को गर्म कपड़ों (लेयर्स) से ढकें, सुबह अत्यधिक ठंड में बाहर न जाएं, नमक और तला हुआ भोजन कम करें, और अपनी बीपी की दवाएं समय पर लें।

Written and Verified by:

Dr. Anil Mishra

Dr. Anil Mishra

Director Exp: 41 Yr

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Dr. Anil Mishra is the Director of Cardiology Dept. at BM Birla Heart Hospital, Kolkata, with over 33 years of experience. He specializes in complex angioplasties, pacemaker & AICD implantation, CRT-D, TAVI, and was the first in Eastern India to perform rotablation and implant leadless pacemakers.

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