ब्लैक फंगस (म्यूकोर्माइकोसिस): जानें इसके लक्षण और सही इलाज
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ब्लैक फंगस (म्यूकोर्माइकोसिस): जानें इसके लक्षण और सही इलाज

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Summary

  • म्यूकोर्माइकोसिस या ब्लैक फंगस एक दुर्लभ लेकिन घातक फंगल इन्फेक्शन है, जो मुख्य रूप से उन लोगों को निशाना बनाता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बहुत कमजोर हो चुकी है।
  • चेहरे में दर्द, आंखों में सूजन या नाक बंद होने जैसे ब्लैक फंगस के लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श करना जीवन रक्षक हो सकता है।
  • CMRI अस्पताल में हम एक मल्टी-डिसिप्लिनरी दृष्टिकोण अपनाते हैं, जिसमें दवाओं के साथ-साथ सर्जरी के माध्यम से इस जानलेवा बीमारी को हराया जा सकता है।

पिछले कुछ वर्षों में, स्वास्थ्य की दुनिया में जिस एक नाम ने सबसे ज्यादा हलचल और चिंता पैदा की, वह है ब्लैक फंगस। जब हमारा शरीर कोरोना जैसी गंभीर बीमारियों के कारण कमजोर हो जाता है, तब वातावरण में मौजूद छोटे-छोटे जीव या अवसरवादी जीव सक्रिय होकर संक्रमण फैलाने लगते हैं। म्यूकोर्माइकोसिस भी एक ऐसा ही 'अवसरवादी' संक्रमण है। 

यदि आप या आपके परिवार में कोई डायबिटीज या किडनी की बीमारी का सामना कर रहा है, तो आपको यह समझना होगा कि ब्लैक फंगस बीमारी क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है। सीके बिरला अस्पताल (CMRI) में हमारे डॉक्टरों का मानना है कि इस संक्रमण में 'समय' सबसे महत्वपूर्ण है; जितनी जल्दी पहचान होगी, उतनी ही अधिक जान बचाने की संभावना होगी।

ब्लैक फंगस (म्यूकोर्माइकोसिस) क्या है?

वैज्ञानिक भाषा में ब्लैक फंगस को म्यूकोर्माइकोसिस (Mucormycosis) कहा जाता है। यह संक्रमण 'म्यूकोर्मिसेट्स' (Mucormycetes) नामक कवक (Fungus) के कारण होता है। यह फंगस हमारे आसपास की मिट्टी, खाद, सड़े हुए पत्तों और हवा में प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए यह बिल्कुल भी खतरनाक नहीं है क्योंकि हमारी इम्यूनिटी इसे शरीर के अंदर प्रवेश करते ही खत्म कर देती है।

लेकिन, जब कोई व्यक्ति पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो, तो यह फंगस साइनस, फेफड़ों और मस्तिष्क पर हमला कर देता है। इसे "ब्लैक फंगस" इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह संक्रमित ऊतकों (Tissues) में रक्त के प्रवाह को रोक देता है, जिससे वे मर जाते हैं और वह हिस्सा काला पड़ने लगता है। लोग अक्सर पूछते हैं कि ब्लैक फंगस क्या होता है, तो सरल शब्दों में यह शरीर के ऊतकों को सड़ाने वाला एक तीव्र संक्रमण या एक्यूट संक्रमण है।

ब्लैक फंगस के मुख्य कारण: यह किसे प्रभावित करता है?

पबमेड सेंट्रलके रिसर्च के अनुसार, भारत में म्यूकोर्माइकोसिस की अनुमानित दर वैश्विक औसत से लगभग 70 गुना अधिक है। लेकिन हर किसी को इस संक्रमण का खतरा नहीं होता। हमारे विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लैक फंगल इन्फेक्शन उन्हीं लोगों को अधिक प्रभावित करता है, जो कुछ विशिष्ट परिस्थितियों से गुजर रहे हों -

  • अनियंत्रित डायबिटीज (Diabetes Mellitus): हाई ब्लड शुगर वाले मरीजों में इस फंगस के पनपने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। शुगर लेवल बढ़ने से शरीर की फंगस से लड़ने की ताकत खत्म हो जाती है।
  • स्टेरॉयड का अत्यधिक प्रयोग: कई बीमारियों के इलाज में स्टेरॉयड दिए जाते हैं। हालांकि ये दवाएं जान बचाती हैं, लेकिन इनका गलत या लंबा इस्तेमाल इम्यूनिटी को "ऑफ" कर देता है, जिससे फंगस को रास्ता मिल जाता है।
  • कैंसर और ऑर्गन ट्रांसप्लांट: कीमोथेरेपी या किडनी/लिवर ट्रांसप्लांट के बाद दी जाने वाली दवाएं शरीर को कमजोर कर देते हैं।
  • लंबे समय तक ICU में रहना: अस्पतालों में ऑक्सीजन ह्यूमिडिफायर में गंदे पानी का उपयोग या वेंटिलेटर पर लंबे समय तक रहने से भी जोखिम बढ़ता है।
  • मिट्टी के सीधे संपर्क में आना: यदि आपकी त्वचा पर कोई गहरा घाव या जलन है और वह मिट्टी के संपर्क में आती है, तो भी ब्लैक फंगस के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानें

इस बीमारी का सबसे डरावना पहलू इसकी रफ़्तार है। ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य लग सकते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना आपके लिए घातक हो सकता है। संक्रमण के स्थान के आधार पर इसके लक्षण भिन्न हो सकते हैं। चलिए सभी को एक-एक करके समझते हैं -

1. नाक और साइनस के लक्षण (Rhino-orbital-cerebral)

यह सबसे आम रूप है, जो साइनस से शुरू होकर आंखों और दिमाग तक जाता है।

  • चेहरे के एक तरफ दर्द या सूजन होना।
  • नाक का लगातार बंद रहना या नाक से काले रंग का तरल (Discharge) निकलना।
  • सिर के एक तरफ तेज दर्द
  • आंखों में सूजन, लालिमा या धुंधला दिखाई देना।
  • ऊपरी जबड़े या दांतों में दर्द और उनका ढीला पड़ना।

2. फेफड़ों के लक्षण - Pulmonary Mucormycosis

जब फंगस सांस के जरिए फेफड़ों में पहुँचता है -

3. त्वचा के लक्षण (Cutaneous Mucormycosis)

  • त्वचा पर काले छाले या घाव जो तेजी से फैल रहे हों।
  • प्रभावित हिस्से में दर्द, अत्यधिक लालिमा या सुन्नपन महसूस होना।

ब्लैक फंगस की जांच कैसे की जाती है?

यदि किसी मरीज में ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई देते हैं, तो विशेषज्ञ डॉक्टर (ENT, नेत्र रोग विशेषज्ञ और न्यूरोलॉजिस्ट) मिलकर जांच करते हैं। CMRI अस्पताल में हम अत्याधुनिक नैदानिक उपकरणों का उपयोग करते हैं - 

  • नेजल एंडोस्कोपी: नाक के अंदर कैमरा डालकर फंगस की मौजूदगी की जांच की जाती है।
  • MRI और CT स्कैन: यह देखने के लिए किया जाता है कि फंगस साइनस, आंखों की हड्डी या दिमाग तक कितना फैला है।
  • बायोप्सी (Biopsy): संक्रमित ऊतक का एक छोटा सा हिस्सा लैब में भेजा जाता है, ताकि पुष्टि की जा सके कि यह म्यूकोर्माइकोसिस ही है।
  • KOH स्ट्रेनिंग: यह एक त्वरित लैब टेस्ट है, जो फंगस की संरचना को स्पष्ट करता है।

ब्लैक फंगस का इलाज

ऑक्सफोर्ड अकैडमी की रिसर्च के अनुसार, बिना इलाज के म्यूकोर्माइकोसिस में मृत्यु दर 100% तक पहुँच जाती है, लेकिन Amphotericin B से समय पर इलाज करने पर यह लगभग 32% तक घट जाती है। ब्लैक फंगस का इलाज चुनौतीपूर्ण है, लेकिन असंभव नहीं। इसके उपचार में दो मुख्य स्तंभ हैं - दवाएं और सर्जरी।

एंटी-फंगल दवाएं

मरीज को इंजेक्शन 'एम्फोटेरिसिन बी' (Liposomal Amphotericin B) दिया जाता है। यह दवा फंगस को खत्म करने में सबसे प्रभावी है। संक्रमण की गंभीरता के आधार पर यह दवा हफ्तों तक चल सकती है। इसके बाद ओरल दवाएं जैसे 'पोसाकोनाज़ोल' (Posaconazole) या 'इसावुकोनाज़ोल' (Isavuconazole) दी जाती हैं।

सर्जिकल डिब्रेडमेंट (Surgical Debridement)

केवल दवाएं पर्याप्त नहीं होती। मृत ऊतक (Necrotic tissues) में रक्त का प्रवाह नहीं होता, जिससे एंटी-फंगल दवाएं वहाँ तक पहुँच नहीं पातीं, इसलिए सर्जरी आवश्यक है। कभी-कभी संक्रमण को दिमाग तक पहुँचने से रोकने के लिए आंख को भी निकालना पड़ सकता है (इसे एविसरेशन कहते हैं)।

कब इस संक्रमण को इमरजेंसी मानना चाहिए?

अगर आप हाई-रिस्क ग्रुप (डायबिटीज या हाल ही में सर्जरी) में हैं, तो निम्नलिखित संकेतों को 'रेड फ्लैग' या मेडिकल इमरजेंसी मानें -

  • अचानक दृष्टि का जाना या एक की जगह दो चीजें दिखना (Double Vision)।
  • नाक या तालू पर काले रंग की पपड़ी जमना।
  • अत्यधिक मानसिक भ्रम या बेहोशी की स्थिति।
  • चेहरे का कोई हिस्सा पूरी तरह सुन्न हो जाना।

ऐसी स्थिति में एक मिनट की देरी भी भारी पड़ सकती है। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

निष्कर्ष

ब्लैक फंगस क्या है, यह जानने के बाद डरने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। यह कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन इसने हाल ही में उन लोगों को अधिक प्रभावित किया है, जिनका शरीर अन्य स्वास्थ्य कारणों से कमजोर था। सही समय पर शुगर कंट्रोल, डॉक्टर की सलाह पर ही स्टेरॉयड का सेवन और साफ-सफाई रखकर हम इस खतरे को टाल सकते हैं।

यदि आपके पास ब्लैक फंगस बीमारी से जुड़े कोई सवाल है या आप किसी लक्षण को लेकर चिंतित हैं, तो सीके बिरला अस्पताल (CMRI) की विशेषज्ञ टीम आपकी मदद के लिए सदैव तैयार हैं। आपको बस एक कदम आगे बढ़ाना है और परामर्श लेना है। याद रखें, जागरूकता ही इस अदृश्य शत्रु के खिलाफ आपका सबसे बड़ा हथियार है।

अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल

ब्लैक फंगस किन लोगों में ज्यादा होता है?

यह उन लोगों में ज्यादा होता है, जिनका ब्लड शुगर लेवल बहुत ज्यादा हो (अनियंत्रित डायबिटीज), जो लंबे समय तक स्टेरॉयड ले रहे हों, या जिन्हें कैंसर/अंग प्रत्यारोपण जैसी बीमारियां हों जिनकी वजह से इम्यूनिटी कम हो गई हो।

क्या ब्लैक फंगस जानलेवा हो सकता है?

जी हां, यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह 50% से अधिक मामलों में जानलेवा हो सकता है। यह बहुत तेजी से मस्तिष्क तक फैल सकता है, जो घातक होता है।

क्या कोविड के बाद ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ता है?

हाँ, क्योंकि कोविड के इलाज में स्टेरॉयड का उपयोग और शरीर की इम्यूनिटी कम होने के कारण फंगस को पनपने का मौका मिल जाता है। कोविड से ठीक होने के 2-6 सप्ताह बाद तक सतर्क रहना चाहिए।

क्या ब्लैक फंगस एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है?

नहीं, यह संक्रमण संक्रामक नहीं है। यह कोविड की तरह एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता। यह केवल उन लोगों को प्रभावित करता है जो फंगल बीजाणुओं (Spores) के संपर्क में आते हैं और जिनकी इम्यूनिटी बहुत कमजोर होती है।

क्या घर पर ब्लैक फंगस का इलाज संभव है?

बिल्कुल नहीं, इसके लिए अस्पताल में भर्ती होना, नसों के जरिए एंटी-फंगल दवाएं और अक्सर सर्जरी की आवश्यकता होती है। घरेलू उपचार के चक्कर में समय बर्बाद करना जानलेवा हो सकता है।

Written and Verified by:

Dr. Sabyasachi Chakraborty

Dr. Sabyasachi Chakraborty

Consultant Exp: 18 Yr

ENT- Otolaryngology

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Dr. Sabyasachi Chakraborty is a Consultant in ENT-Otolaryngology at CMRI Hospital, Kolkata with over 21 years of experience. He specializes in advanced ear, nose & throat surgeries, having trained in both the UK & USA.

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