प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण के बारे में जाने।
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प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण के बारे में जाने।

Table of Contents
  1. आपको प्रेगनेंसी टेस्ट कब करवाना चाहिए?
  2. प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या है?
  3. प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण - Early Pregnancy Symptoms in Hindi
  4. इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग और पीरियड में क्या अंतर है? - Implantation bleeding vs periods
  5. गर्भावस्था के मासिक लक्षण
  6. आपको कब सावधान रहना चाहिए: मिसकैरेज के लक्षण
  7. निष्कर्ष
  8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
    1. पीरियड मिस होने के कितने दिनों बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करें?
    2. प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण कब दिखते है?
    3. प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या है?
    4. प्रेगनेंसी के पहले महीने में क्या-क्या होता है?
    5. प्रेग्नेंट होने के बाद भी पीरियड आता है क्या?
    6. पीरियड आने के बाद भी क्या कोई प्रेग्नेंट हो सकता है?
    7. प्रेग्नेंट कब और कैसे होता है?
    8. क्या गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण दिखने पर भी महिलाएं प्रेग्नेंट नहीं होती हैं?
    9. प्रेग्नेंसी के लक्षणों को देखते हुए प्रेगनेंसी को कैसे कंफर्म करें?
    10. प्रेगनेंसी के पहले महीने में कैसे ध्यान रखें?
    11. मासिक धर्म या पीरियड के कितने दिन बाद गर्भधारण होता है?
    12. गर्भावस्था की जांच कैसे करें?
    13. गर्भावस्था के दौरान किसी को कैसे बैठना चाहिए?
    14. क्या गर्भावस्था के दौरान किसी को सेक्स करना चाहिए?
    15. गर्भावस्था के दौरान किसी को कौन सा फल खाना चाहिए?
    16. प्रेगनेंसी के दौरान कितना पानी पीना चाहिए?

Summary

जी मिचलाना, उल्टी आना और मुंह का स्वाद बदलना प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण हैं, लेकिन कुछ और लक्षण भी होते हैं, जो प्रेगनेंसी के संकेत हो सकते हैं। यदि आप भी प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आपकी मदद कर सकता है।

मां बनने का सुख इस संसार का सबसे बड़ा सुख है। प्रेगनेंसी के दौरान एक महिला के शरीर में अनेक शारीरिक एवं मानसिक बदलाव आते हैं। आप इन्ही बदलावों को प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण के नाम से जानते हैं, जिनके बारे में हर महिला को पता होना चाहिए। गर्भधारण के संबंध में किसी भी प्रकार की समस्या के लिए हम आपको सलाह देंगे कि आप हमारे स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें और हर प्रकार की जटिलताओं को दूर भगाएं।

यदि आप प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों (early symptoms of pregnancy) के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए ख़ास है।

आपको प्रेगनेंसी टेस्ट कब करवाना चाहिए?

प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए सबसे अच्छा समय कम से कम एक बार पीरियड का मिस हो जाने के 7 दिन बाद है। आप घर पर ही होम प्रेगनेंसी टेस्ट किट से hCG के स्तर का पता लगा सकते हैं। प्रेगनेंसी के दौरान इस हार्मोन के स्तर में अच्छी खासी वृद्धि देखी जाती है। यहां आपको एक बात का ध्यान रखना होगा कि बहुत जल्दी टेस्ट करने से भी गलत परिणाम आ सकते हैं, इसलिए यदि आपके पीरियड देर से आ रहे हैं और टेस्ट नेगेटिव आता है, तो आपको सलाह दी जाती है कि कम से कम 3 दिन और रुकें और फिर से टेस्ट करें।

इसे करने का भी एक सही तरीका होता है, जो आप टेस्ट किट के निर्देशन वाली पर्ची पर भी देख सकते हैं। सटीक परिणामों के लिए आपको सुबह के सबसे पहले पेशाब का इस्तेमाल करना होता है, क्योंकि इसी दौरान hCG हार्मोन के सही स्तर को मापा जा सकता है। इसके अतिरिक्त यदि आपको प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों का अनुभव होता है, और टेस्ट का परिणाम भी नेगेटिव आ रहा है, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर ब्लड टेस्ट कराएं। किसी भी प्रकार के कन्फ्यूजन की स्थिति में डॉक्टरी सलाह बहुत ज्यादा अनिवार्य है।

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव आते हैं। प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों में जी मचलना, उल्टी आना, बार-बार पेशाब आना, और थकान जैसे लक्षण शामिल है, जिसके बारे में हम इस ब्लॉग में बात भी करने वाले हैं।

प्रेगनेंसी के पहले कुछ दिनों में अंडा स्पर्म से फर्टिलाइज होता है, जिसके कारण ब्लीडिंग और पेट में ऐंठन जैसे लक्षण दिखते हैं। इस दौरान स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वह एंटीबायोटिक दवा लेने से बचें, क्योंकि इससे मां और बच्चे दोनों को ही खतरा हो सकता है। 

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण - Early Pregnancy Symptoms in Hindi

हर महिला का अनुभव अलग होता है। गर्भावस्था के लक्षण सभी में समान रूप से नहीं दिखते, इसलिए जरूरी यह है कि आप हर छोटे-बड़े संकेत को समझें और भ्रम की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करें। चलिए प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों के बारे में जानते हैं और जागरुक होते हैं - 

  • पीरियड का मिस होना (Missed Period): यह सबसे सामान्य और पहला गर्भावस्था का लक्षण है। गर्भधारण के बाद आपके शरीर में hCG हार्मोन बनता है, जो ओवुलेशन और पीरियड्स को रोकता है। हालांकि, तनाव, अधिक व्यायाम, वजन कम/ज्यादा होना या हार्मोनल गड़बड़ी भी पीरियड मिस का कारण बन सकता है। यदि आपके पीरियड एक हफ्ते या उससे अधिक समय तक नहीं आते हैं, तो अक्सर एक प्रश्न उत्पन्न होता है कि प्रेग्नेंसी के लक्षण टेस्ट से कैसे पाएं। यहां होम प्रेगनेंसी टेस्ट या डॉक्टर की सलाह आपके लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
  • बार-बार पेशाब आना (Frequent Urination): गर्भधारण के बाद शरीर में खून का बहाव बढ़ जाता है, जिससे किडनी पर अधिक प्रभाव पड़ता है जिसके कारण वह अधिक वेस्ट प्रोसेस करता है। यही कारण है कि शुरुआत में ही बार-बार पेशाब आने की समस्या महसूस होती है। सामान्य तौर पर इसे आप प्रेगनेंसी के लक्षण में गिन सकते हैं, लेकिन कभी-कभी यह पीरियड मिस होने से पहले भी शुरू हो सकता है।
  • थकान और कमजोरी (Fatigue): प्रेगनेंसी में प्रोजेस्टेरोन नामक हार्मोन बढ़ता है, जिससे अक्सर पहली तिमाही में थकावट महसूस होती है। यह गर्भवती होने के लक्षण का हिस्सा है और आमतौर पर दूसरे तिमाही में थोड़ा कम हो जाता है, लेकिन अंतिम महीनों में फिर से दिख सकता है।
  • मॉर्निंग सिकनेस/उल्टी या जी मिचलाना (Nausea & Vomiting): प्रेगनेंसी में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाला लक्षण यही है। हालांकि इसे "मॉर्निंग सिकनेस" कहा जाता है, लेकिन उल्टी या जी मिचलाना दिनभर में कभी भी हो सकता है। लगभग 50% महिलाओं में यह लक्षण होता है, पर हर महिला में इसकी गंभीरता अलग-अलग हो सकती है। यदि आपको लगातार उल्टी या पानी की कमी लगे, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। यह "हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम" जैसी स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
  • स्तनों में बदलाव (Breast & Nipple Changes): गर्भधारण के तुरंत बाद स्तनों में सूजन, निप्पल (एरिओला) काले या बड़े और ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं। ब्रा टाइट हो सकती है और इसके अतिरिक्त हल्का दर्द या तनाव का अनुभव भी हो सकता है। यह बदलाव हार्मोनल है, जो कुछ हफ्तों में शरीर के इन बदलते स्तरों के साथ ठीक हो जाता है।
  • पेट में ऐंठन या सूजन (Cramping & Bloating): शुरुआती गर्भावस्था के दौरान हल्की ऐंठन होना सामान्य है। यह शरीर में होने वाले बदलाव, बच्चेदानी की ग्रोथ और हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। साथ ही, सूजन या गैस, प्रेगनेंसी के पहले महीनों में आम समस्या है।
  • मूड में बदलाव (Mood Swings): हार्मोन फ्लक्चुएशन के कारण अचानक मूड बदलना, उदासी, कभी-कभी गुस्सा या खुशी आना भी गर्भावस्था के दौरान सामान्य है। जरूरत महसूस हो तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या परिवार से सलाह जरूर लें।

कम सामान्य या अन्य शुरुआती लक्षण (Less Common/Early Symptoms)

  • इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग (Spotting): गर्भ ठहरने के 10-14 दिन बाद हल्की स्पॉटिंग हो सकती है, जिसे कई बार महिलाएं हल्का पीरियड समझ लेती हैं। यह आमतौर पर हल्का गुलाबी या ब्राउन होता है और एक-दो दिन रहता है। अगर तेज या लंबे समय तक खून बहे तो डॉक्टर से मिलें। यहां एक प्रश्न उठता है कि इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग और पीरियड में क्या अंतर है, जिसे हम नीचे समझेंगे।
  • भोजन की रुचि में बदलाव, फूड क्रेविंग/अवर्शन: किसी खास स्वाद या खाने से बहुत लगाव या घिन आना।
  • मेटालिक टेस्ट: मुंह में धातु जैसा टेस्ट का बने रहना।
  • सिरदर्द, चक्कर आना: हार्मोनल और रक्त प्रवाह की वजह से सिर दर्द और चक्कर आना।
  • नाक बंद होना, जुकाम जैसा महसूस: हार्मोन और खून की मात्रा बढ़ने से साइनस की प्रॉब्लम बढ़ सकती है, जिससे कंजेशन की समस्या भी हो सकती है।
  • त्वचा में बदलाव: कभी चमक (Pregnancy Glow), तो कभी मुंहासे और सूजन जैसी समस्या दिख सकते हैं।

इनमें से अधिकतर लक्षण प्रेगनेंसी के साथ-साथ अन्य समस्याओं की तरफ भी संकेत कर सकते हैं, इसलिए लक्षण दिखने पर प्रेगनेंसी टेस्ट किट से टेस्ट करें या फिर हमारे स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें।

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग और पीरियड में क्या अंतर है? - Implantation bleeding vs periods

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग और पीरियड के बीच अंतर जानना हर महिला के लिए जरूरी है, खासकर जब वह गर्भधारण की शुरुआती संकेतों को समझना चाहती हो या उनको लेकर कन्फ्यूज हो। इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग तब होती है, जब फर्टिलाइज्ड अंडा बच्चेदानी की परत में जुड़ता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर पीरियड्स साइकिल के समय के आसपास ही होती है, इसलिए कई बार इसे हल्की पीरियड्स ब्लीडिंग ही समझ लिया जाता है।

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग आमतौर पर हल्की, गुलाबी या भूरी रंग की होती है और इसकी अवधि एक से दो दिन तक हो सकती है। इसके साथ हल्की ऐंठन भी हो सकती है, लेकिन यह पीरियड्स की तुलना में बहुत कम मात्रा में और कम समय के लिए होती है।

वहीं, मासिक धर्म (पीरियड्स) अधिक भारी होती है और इसका रंग गहरा लाल होता है। पीरियड्स का प्रवाह कई दिन (आमतौर पर 3 से 7 दिन तक) तक चलता है। इसके अलावा, पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अधिक तीव्र ऐंठन, थकान, मूड स्विंग्स और अन्य हार्मोनल लक्षण महसूस हो सकते हैं।

गर्भावस्था के मासिक लक्षण

जैसे-जैसे प्रेगनेंसी का समय बीतता है, इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। जैसे प्रेगनेंसी के पहले माह में स्तन में सूजन, दर्द, और निप्पल के रंग में बदलाव जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं, वहीं दूसरे माह में भूख में बदलाव और खाने-पीने की पसंद और आदतों में बदलाव देखा जा सकता है। चलिए हर महीने में दिखने वाले लक्षणों को एक टेबल की सहायता से समझने का प्रयास करते हैं - 

गर्भावस्था के मासिक लक्षण

प्रेगनेंसी की स्थिति में सीने में जलन, कब्ज, और सूंघने की क्षमता में वृद्धि जैसे लक्षण भी दिखते हैं। यदि आपको किसी भी प्रकार की समस्या होती है, तो उसके लिए डॉक्टर से परामर्श ज़रूर करें। 

आपको कब सावधान रहना चाहिए: मिसकैरेज के लक्षण

समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श आपके गर्भ में पल रहे बच्चे और आपको स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। प्रेगनेंसी में मिसकैरेज होने की संभावना भी होती है। मिसकैरेज होना, महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान अधिकांश मामलों में पहली तिमाही के दौरान ही मिसकैरेज की संभावना होती है। इसलिए यह ध्यान रखना बहुत ज्यादा आवश्यक है कि पहले तीन महीने के दौरान आप अपना ख्याल अच्छे से रखें। यदि प्रेगनेंसी के दौरान भारी रक्त हानि के साथ गंभीर ऐंठन और पीठ के निचले भाग में दर्द हो रहा है, तो यह आपके लिए एक चेतावनी का संकेत हो सकता है। हल्की स्पॉटिंग होना प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों में से एक है, लेकिन अत्यधिक रक्त हानि की स्थिति में तुरंत सहायता लेना बहुत ज्यादा जरूरी है। 

इसके अतिरिक्त कुछ अन्य गर्भपात के लक्षण होते हैं जैसे कि अधिक तरल पदार्थ का रिसाव, अधिक दर्द होना, अधिक गाढ़ा रक्त हानि होना, इत्यादि। ऐसा होने पर हम आपको सलाह देंगे कि तुरंत डॉक्टरी सलाह लें। मिसकैरेज की स्थिति में डॉक्टर के साथ-साथ घर परिवार का साथ भी बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टर गर्भपात के बाद की स्थिति का इलाज कर सकते हैं, लेकिन इससे होने वाले भावनात्मक बदलावों से बचने में महिला के घर-परिवार के लोग ही मदद कर सकते हैं।

निष्कर्ष

अधिकतर मामलों में गर्भाधान यानी कंसेप्शन के कुछ दिनों के बाद महिला खुद में प्रेगनेंसी के लक्षणों को देखने लगती है। लेकिन कुछ महिलाओं को इसके लक्षण देर से अनुभव होने शुरू होते हैं। गर्भावस्था के अधिकतर लक्षण पीरियड के समय के आसपास या फिर उसके 1-2 हफ्ते पहले या बाद में दिखाई देते हैं।

अगर एक महिला गर्भधारण करने की कोशिश कर रही है और खुद में ऊपर दिए गए लक्षणों को देखती हैं, तो उसे प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए। ऐसा करने से विशेषज्ञ लक्षण के सटीक कारण की पुष्टि कर सकते हैं। साथ ही, गर्भावस्था होने पर उचित सलाह देते हैं, ताकि गर्भावस्था सफलतापूर्वक पूरी हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीरियड मिस होने के कितने दिनों बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करें?

अगर आपका पीरियड साइकिल नियमित है, तो पीरियड मिस होने के पहले दिन भी आप प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती हैं। अगर आपका पीरियड साईकिल नियमित नहीं है, तो आप 7-10 दिनों तक इंतज़ार कर सकती हैं। वैसे तो 6-7 दिनों के बाद भी टेस्ट करने से सही रिजल्ट मिल सकता है।

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण कब दिखते है?

आमतौर पर गर्भाधान के 6-41 दिनों के अंदर गर्भधारण के शुरुआती लक्षणों का अनुभव होने लगता है। हालांकि, कुछ महिलाओं को गर्भधारण के 2 से 3 सप्ताह के बाद ही लक्षण दिखाई देते हैं।

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या है?

गर्भधारण के शुरुआती लक्षणों में निम्नलिखित शामिल है - 

  • जी मिचलाना और उल्टी आना
  • स्तन में दर्द और संवेदनशीलता
  • कब्ज और पेट फूलना
  • थकान और कमजोरी का बना रहना
  • बार-बार पेशाब आना
  • सिरदर्द और चक्कर आना

प्रेगनेंसी के पहले महीने में क्या-क्या होता है?

प्रेगनेंसी के पहले महीने में बच्चेदानी में भ्रूण का विकास शुरू होता है। भ्रूण का आकार एक बीन के दाने के समान होता है। प्रेगनेंसी के पहले महीने में भ्रूण के अंग और ऊतक का निर्माण होने लगता है। प्रेगनेंसी के अलग-अलग महीने में महिला के अलग-अलग लक्षणों का अनुभव होता है। 

प्रेग्नेंट होने के बाद भी पीरियड आता है क्या?

नहीं, प्रेग्नेंट होने के बाद पीरियड नहीं आता है। पीरियड्स का अर्थ है गर्भाशय की परत का टूटकर बाहर निकल जाना। प्रेगनेंसी के दौरान, बच्चेदानी की परत में भ्रूण का विकास होता है, इसलिए पीरियड नहीं आते हैं।

पीरियड आने के बाद भी क्या कोई प्रेग्नेंट हो सकता है?

हां, पीरियड के आने के बाद कोई भी व्यक्ति प्रेग्नेंट हो सकता है। यदि पीरियड के दौरान या पीरियड के बाद तुरंत असुरक्षित यौन संबंध बनाया जाता है, तो भी व्यक्ति प्रेग्नेंट हो सकता है। 

प्रेग्नेंट कब और कैसे होता है?

प्रेग्नेंसी तब होती है, जब एक पुरुष का शुक्राणु महिला के अंडाणु के साथ फर्टिलाइज होता है। यह तब होता है, जब पुरुष का वीर्य महिला के योनि में प्रवेश करता है। वीर्य में शुक्राणु होते हैं, जो महिला के बच्चेदानी में तैरते हुए अंडाणु तक पहुंचते हैं। अगर शुक्राणु अंडाणु को फर्टिलाइज कर देते हैं, तो भ्रूण का निर्माण होता है, जो बच्चेदानी में बढ़ता है और अंत में नौ महीने के बाद महिलाएं एक बच्चे को जन्म देते हैं। 

क्या गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण दिखने पर भी महिलाएं प्रेग्नेंट नहीं होती हैं?

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण कई स्वास्थ्य समस्या की तरफ भी संकेत कर सकते हैं। प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण पीरियड्स के साइकल के समान ही होते हैं। इनके बीच अंतर बता पाना बहुत मुश्किल है। कई बार तो हार्मोनल परिवर्तन के कारण भी पीरियड मिस हो जाते हैं। ऐसा हो तो घबराएं नहीं और सबसे पहले प्रेगनेंसी टेस्ट कराएं और डॉक्टर से परामर्श करें।

प्रेग्नेंसी के लक्षणों को देखते हुए प्रेगनेंसी को कैसे कंफर्म करें?

प्रेग्नेंसी की पुष्टि के लिए सबसे पहले होम प्रेगनेंसी टेस्ट करें। इसे करने के लिए आपको पीरियड मिस होने का इंतजार करना होता है। यदि टेस्ट पॉजिटिव है, तो डॉक्टर से संपर्क करें। 

प्रेगनेंसी के पहले महीने में कैसे ध्यान रखें?

प्रेग्नेंसी की पुष्टि होते ही, संतुलित आहार लें और स्वयं को हाइड्रेटेड रखें। ऐसा काम न करें, जिसमें ज्यादा सामान उठाना पड़े या ज्यादा जोर लगाना पड़े। हालांकि, आप हल्के व्यायाम कर सकते हैं जैसे कि योग या वॉकिंग।

मासिक धर्म या पीरियड के कितने दिन बाद गर्भधारण होता है?

गर्भ तभी ठहरता है तब ओव्यूलेशन के दौरान अंडे और शुक्राणु फर्टिलाइज होते हैं। यह प्रक्रिया अंतिम पीरियड्स के शुरू होने के 10-14 दिन के बाद शुरू होते हैं। इस दौरान शारीरिक संबंध स्थापित करने से प्रेगनेंसी हो सकती है। 

गर्भावस्था की जांच कैसे करें?

प्रेगनेंसी की जांच के लिए hCG के स्तर की जांच होती है। आप इसे दो तरीकों से माप सकते हैं। आप घर पर ही प्रेगनेंसी टेस्ट किट से ही प्रेगनेंसी की जांच कर सकते हैं। दूसरे तरीका क्लीनिक में ब्लड टेस्ट है। ब्लड टेस्ट की मदद से सटीक परिणाम मिल सकता है। 

गर्भावस्था के दौरान किसी को कैसे बैठना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान बैठने का सही तरीका है पीठ को सीधा रखना होता है। इस दौरान आप अपने कंधों को आराम दें और पैरों को जमीन पर सपाट तरीके से रखें। इस दौरान आप अपने पीठ को सहारा देने के लिए कुशन का उपयोग कर सकते हैं। 

क्या गर्भावस्था के दौरान किसी को सेक्स करना चाहिए?

हां, यदि प्रेगनेंसी के दौरान कोई समस्या नहीं है, तो आप यौन संबंध बना सकते हैं। हालांकि डॉक्टर स्वयं बताते हैं कि आपको कब-कब संबंध स्थापित करना चाहिए और कब-कब नहीं करना चाहिए। इसलिए उनकी बातों का खास ख्याल रखें।

गर्भावस्था के दौरान किसी को कौन सा फल खाना चाहिए?

केले, संतरे, सेब और जामुन जैसे फल आवश्यक विटामिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करते हैं। बिना धुले या कच्चे फलों से बचें और पपीता और अनानास का सेवन सीमित करें।

प्रेगनेंसी के दौरान कितना पानी पीना चाहिए?

हाइड्रेटेड रहना, एमनियोटिक द्रव का समर्थन करने और कब्ज को रोकने के लिए प्रतिदिन कम से कम 8-12 गिलास (2-3 लीटर) पानी पिएं। गर्म मौसम में या शारीरिक गतिविधि के साथ सेवन बढ़ाएं।

Written and Verified by:

Dr. C. P. Dadhich

Dr. C. P. Dadhich

Director Exp: 25 Yr

Obstetrics and Gynaecology

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Dr. C. P. Dadhich is the best Gynecologist in Jaipur, who has played a vital role in developing of Gynecology Laproscopic Surgery in Rajasthan. He is recognised trainer from FOGSI (Federation of Obstetric & Gynaecological Society of India) & Operative Laparoscopic faculty at National and International level.

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