मिसकैरेज, जिसे अक्सर गर्भपात के रूप में जाना जाता है, वह 20वें सप्ताह से पहले गर्भावस्था को होने वाला स्वाभाविक नुकसान है। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जो हर महिला के लिए कष्टदायक होती है। इस दौरान उन्हें भावनात्मक और शारीरिक सहायता की आवश्यकता होती है।
चलिए मिसकैरेज/गर्भपात के संबंध में पूर्ण जानकारी इकट्ठा करते हैं, तोकी यदि आपके सामने यह स्थिति उत्पन्न होती है, तो आप सही समय पर सही कदम उठाने में सक्षम हो पाए। किसी भी आपात स्थिति में हम आपको सलाह देंगे कि तुरंत हमसे या फिर किसी भी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ मिले और उनसे इलाज लें।
गर्भपात क्या है?
प्रेगनेंसी के संबंध में गर्भपात का मूल अर्थ है, गर्भ का समापन या प्रेगनेंसी समाप्त होना। मिसकैरेज का अर्थ होता है, अपने आप समाप्त होने वाली गर्भावस्था। आमतौर पर यह स्थिति गर्भधारण के 20वें सप्ताह से पहले ही उत्पन्न होती है। प्रेगनेंसी के सभी मामलों में से 10 से 20 प्रतिशत मामलों में गर्भपात की समस्या उत्पन्न होती है। हालांकि इसे रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए सतर्कता बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।
गर्भपात के कारण
गर्भपात को रोकने के लिए इसके कारणों की पहचान बहुत ज्यादा ज़रूरी है। इस स्थिति के उत्पन्न होने के कई कारण हैं जैसे कि -
- क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताएं: यह सबसे आम कारणों में से एक है, जिसमें गर्भपात के पीछे का कारण डीएनए होता है।
- मां की स्वास्थ्य स्थितियां: डायबिटीज, थायराइड रोग और ऑटोइम्यून रोग जैसी कुछ स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, जो गर्भपात के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं महिलाओं को पहले से ही सावधान कर सकती हैं, जिससे वह मिसकैरेज जैसी स्थिति से बच सकती हैं।
- मां की उम्र: बढ़ती उम्र भी इस रोग का एक मुख्य जोखिम कारक है। यदि आपकी उम्र 35 से अधिक है, तो भी गर्भपात अपने आप हो सकता है।
- संक्रमण: रूबेला, साइटोमेगालोवायरस और कुछ यौन संचारित रोगों जैसे संक्रमण भी मिसकैरेज के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
- हार्मोनल असंतुलन: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) या ल्यूटियल फेज डिफेक्ट जैसी स्थितियों के कारण अपर्याप्त प्रोजेस्टेरोन उत्पादन हो सकता है, जिससे गर्भ ठहरता नहीं है।
- गर्भाशय संबंधी असामान्यताएं: बच्चेदानी से संबंधित समस्याएं जैसे कि फाइब्रॉएड या सेप्टेट गर्भाशय, बच्चेदानी को शिशु के विकास के लिए गर्भ को अनुकूल बनाते हैं।
- जीवनशैली कारक: धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन और नशीली दवाओं का उपयोग सभी गर्भपात के जोखिम को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।
गर्भपात के प्रकार
इस बात में कोई संशय नहीं है कि गर्भपात एक कठिन यात्रा है, जो कई प्रकार के होते हैं, जिन्हें समझना बहुत ज्यादा जरूरी है। चलिए गर्भपात के सभी प्रकारों के बारे में जानते हैं और समझते हैं -
- ब्लाइटेड ओवम (एम्ब्रायोनिक प्रेगनेंसी): इस स्थिति में अंडों के फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया हो जाती है, लेकिन एम्ब्र्यो विकसित ही नहीं हो पाता है। शुरुआत में प्रेगनेंसी के लक्षण दिखते हैं, लेकिन यह बाद में गायब हो जाते हैं।
- पूर्ण गर्भपात (Complete miscarriage): पूर्ण गर्भपात में, शरीर से सभी गर्भावस्था ऊतक बाहर निकल जाते हैं। इस स्थिति में महिला को भारी रक्तहानी (गर्भस्राव), तीव्र पेट दर्द और ऐंठन जैसे लक्षण अनुभव होते हैं।
- अपूर्ण गर्भपात: इस स्थिति में बच्चेदानी में प्रेगनेंसी के कुछ ऊतक रह जाते हैं। यह स्थिति और अधिक कष्टदायक होती है। इस स्थिति में चिकित्सा हस्तक्षेप या सर्जरी, जैसे डी एंड सी, की आवश्यक होती है।
- अस्थानिक गर्भावस्था (एक्टोपिक प्रेगनेंसी): यह स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब फर्टिलाइजिड अंडे बच्चेदानी के बाहर फर्टिलाइज होते हैं। आमतौर पर यह प्रक्रिया फैलोपियन ट्यूब में होती है। इसके कारण महिलाओं के जीवन को भी भारी खतरा होता है। इसके लिए तत्काल चिकित्सा आवश्यकता होती है।
- मोलर गर्भावस्था: यह मिसकैरेज का एक दुर्लभ प्रकार है, जिसमें क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताएं होती हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रेगनेंसी समाप्त हो सकती है। यह अक्सर पहली तिमाही में ही परेशान करती है।
- रिकरंट मिसकैरेज: यह वह स्थिति है, जिसमें दो या इससे अधिक बार मिसकैरेज हुआ हो। यह बहुत कम मामलों में देखा जाता है, लेकिन यदि यह उत्पन्न होती है, तो आपको तुरंत अपनी मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी के साथ एक अनुभवी डॉक्टर से मिलना चाहिए।
- सेप्टिक गर्भपात: यह बच्चेदानी में संक्रमण के साथ होने वाला गर्भपात है, जिसमें असामान्य तरल पदार्थ का निकलना या बुखार जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं।
इन प्रकारों को समझकर और सही समय पर इलाज से आप इस स्थिति से बाहर निकल सकते हैं और फैमिली प्लानिंग के लिए सही कदम उठा सकते हैं। याद रखें, आप अकेली नहीं हैं, और कई महिलाओं को मातृत्व की अपनी यात्रा में इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
गर्भपात के लक्षण
मिसकैरेज या गर्भपात होने पर कई तरह के लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं, जिसमें से कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार है -
- गर्भपात के दौरान स्पॉटिंग या भारी रक्त हानि आम है, और यदि ऐसा हो, तो इसे आप एक खतरे की घंटी के तौर पर देख सकते हैं।
- पीरियड्स जैसे गंभीर ऐंठन होना भी गर्भपात का एक मुख्य लक्षण है।
- रक्त हानि के साथ ऊतक का निकलना, जो थक्कों के रूप में दिखाई दे, संकेत देता है कि प्रेगनेंसी समाप्त हो गई है।
यह सारे लक्षण पूर्ण गर्भपात के हैं, हालांकि अपूर्ण गर्भपात की स्थिति में कुछ विशेष लक्षण उत्पन्न होते हैं जैसे कि -
- सामान्य पीरियड्स से अधिक, अक्सर थक्कों के साथ रक्त आना।
- पेट में तीव्र दर्द या ऐंठन होना, जो असहनीय हो।
- ऊतक या तरल पदार्थ का निकलना, जो कभी-कभी देखा जा सके।
- गर्भपात के बाद लगातार पीठ में दर्द होना, जो जटिलताओं का संकेत हो सकता है।
यदि आप इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं, तो सर्वोत्तम देखभाल सुनिश्चित करने और आगे की जटिलताओं को रोकने के लिए तुरंत चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है।
अपूर्ण गर्भपात के मामले में क्या करें?
मिसकैरेज अपूर्ण हो या पूर्ण, आपका सबसे पहला कदम डॉक्टरी सहायता होना चाहिए। यदि आपको लगता है कि आपका गर्भ ठहरा नहीं है, तो आप डॉक्टर से मिल सकते हैं और वह निम्न इलाज के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं -
- डी एंड सी (डाइलेशन और क्यूरेटेज): गर्भपात के बाद गर्भाशय की सफाई, खास तौर पर अधूरे गर्भपात के मामले में, संक्रमण या अन्य जटिलताओं से बचने के लिए ज़रूरी हो सकती है। इसके लिए डी एंड सी का प्रयोग किया जाता है, जो कि एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें प्रेगनेंसी के किसी भी शेष ऊतक को निकालने के लिए बच्चेदानी की परत में एक सर्जरी की जाती है।
- दवा: कुछ मामलों में, यदि वह ज्यादा गंभीर नहीं है, तो प्रेगनेंसी के ऊतकों को निकालने के लिए दवा का उपयोग किया जा सकता है।
गर्भपात के बाद देखभाल के सुझाव
गर्भपात के बाद महिला को शारीरिक एवं मानसिक सहायता की आवश्यकता होती है। इस स्थिति में रिकवरी आराम और आत्म-देखभाल पर निर्भर करता है। रिकवरी में सहायता के लिए कुछ सुझाव इस प्रकार हैं -
- आराम: इस दौरान या इसके बाद आपके शरीर में महत्वपूर्ण शारीरिक परिवर्तन होते हैं, और पर्याप्त आराम करने से रिकवरी बेहतर होती है और मानसिक शांति भी मिलती है।
- फ़ॉलो-अप अपॉइंटमेंट: यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका शरीर ठीक से रिकवर हो रहा है या नहीं, इसके लिए डॉक्टर के साथ फ़ॉलो-अप विज़िट ज़रूर लें।
- ज़बरदस्त गतिविधियों से बचें: यदि आपको जल्दी रिकवर होना है, उसके लिए आप कुछ सप्ताह तक भारी सामान उठाने और उन व्यायाम को करने से बचें, जिसमें आपको अधिक जोर लगाना पड़ रहा है।
- ब्लीडिंग पर नज़र रखें: स्पॉटिंग या हल्की ब्लीडिंग सामान्य है, लेकिन यदि ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो जाए, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
- मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य: अपनी भावनात्मक सेहत को नजरअंदाज न करें। अगर आप परेशानी महसूस करते हैं, तो काउंसलर या सपोर्ट ग्रुप से बात करें।
- फैमिली सपोर्ट:यह एक मुश्किल की घड़ी होती है, जिसमें आपको अपने परिवार के किसी साथी की सहायता से इस समस्या से लड़ने में मदद मिल सकती है। उनका साथ ही ऐसा हथियार है, जिससे आप किसी भी चुनौती से लड़ सकते हैं।
गर्भपात रोकने के उपाय
हालांकि प्राकृतिक गर्भपात को रोकना हमेशा संभव नहीं होता है, लेकिन कुछ उपायों की मदद से इसके जोखिम कारकों को आसानी से कम किया जा सकता है जैसे कि -
- स्वस्थ जीवनशैली: संतुलित आहार और स्वस्थ वजन बनाए रखने से संतान प्राप्ति होने की उम्मीद अधिक होती है।
- प्रसवपूर्व देखभाल: मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए समय से पहले और नियमित प्रसवपूर्व जांच बहुत जरूरी है।
- हानिकारक पदार्थों से बचें: धूम्रपान, शराब पीना या नशीली दवाओं के सेवन से गर्भपात की संभावना को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
- दीर्घकालिक स्थितियों का प्रबंधन करें: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और थायराइड विकारों जैसी दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का उचित प्रबंधन स्वस्थ प्रेगनेंसी की संभावनाओं को बेहतर बना सकता है।
निष्कर्ष
इस बात में कोई संशय नहीं है कि गर्भपात का अनुभव करना एक बहुत ही दर्दनाक लेकिन कष्टदायक यात्रा है। हालांकि इस स्थिति से संबंधित कई कारक आपके नियंत्रण से बाहर होते हैं, इसलिए इसके कारणों को समझना, लक्षणों को पहचानना और उचित चिकित्सा देखभाल प्राप्त करना आपको मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बना सकता है। यदि आपका गर्भपात हो गया है, तो मार्गदर्शन, भावनात्मक समर्थन और उपचार विकल्पों के लिए अपने डॉक्टर से मिलें और इलाज के विकल्पों पर विचार करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गर्भपात के बाद क्या खाना चाहिए?
पौष्टिक आहार जैसे फल, सब्जियां और आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे पालक, दाल और लीन मीट के सेवन की सलाह अक्सर मिसकैरेज के बाद दी जाती है।
गर्भपात (अबॉर्शन) कब तक सुरक्षित माना जाता है?
गर्भपात को आमतौर पर प्रेगनेंसी के 24 सप्ताह तक सुरक्षित माना जाता है। हालांकि कई देशों में यह नियम अलग-अलग होते हैं।
गर्भपात के बाद भूरे रंग का स्राव कितने दिनों तक रह सकता है?
गर्भपात के बाद भूरे रंग का स्राव दो सप्ताह तक रह सकता है, जो समय के साथ धीरे-धीरे कम हो जाता है।
गर्भपात के बाद पीठ दर्द के कारण और इसे कम करने के उपाय?
पीठ दर्द गर्भाशय के संकुचन या हार्मोनल परिवर्तनों के कारण हो सकता है। इसे कम करने के लिए आप हीटिंग पैड का उपयोग कर सकते हैं या असुविधा होने पर हल्का स्ट्रेच भी कर सकते हैं।
शरीर पर बार-बार गर्भपात के प्रभाव क्या है?
बार-बार गर्भपात हमें शारीरिक और मानसिक रूप दोनों ही तरीकों से तोड़ सकता है। इसलिए इसके अंतर्निहित कारणों को समझना होगा और आवश्यकता के अनुसार डॉक्टर से मदद लेना होगा।
गर्भपात के बाद फिर से गर्भधारण करने के लिए कितने समय तक इंतजार करना चाहिए?
आमतौर पर फिर से गर्भधारण करने से पहले कम से कम 2-3 महीने इंतजार करने की सलाह दी जाती है, ताकि शरीर को शारीरिक और भावनात्मक रूप से ठीक होने का समय मिल सके।