
हमने कई फिल्मों में देखा है कि अचानक एक व्यक्ति अपने परम मित्र की आवाज और चेहरे को नहीं पहचान पाता है। यदि ये स्थिति वास्तव में सामने आ जाए, तो यह स्थिति किसी डरावने सपने जैसी लग सकती है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में इसे 'एग्नोसिया' (Agnosia) कहा जाता है।
अक्सर लोग इसे सामान्य कमजोरी या याददाश्त की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन असल में यह एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के लक्षण हो सकते हैं। यदि आप या आपका कोई अपना ऐसी किसी असामान्य स्थिति का सामना कर रहा है, तो इसे अनदेखा करना जोखिम भरा हो सकता है। समय पर न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह और सही जानकारी ही इस उलझन भरी स्थिति से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता है।
एग्नोसिया क्या है, इसे सरल शब्दों में समझा जाए तो यह मस्तिष्क की वह अवस्था है, जहां व्यक्ति अपनी इंद्रियों (देखना, सुनना या छूना) का उपयोग तो कर पाता है, लेकिन प्राप्त जानकारी का अर्थ नहीं निकाल पाता। उदाहरण के लिए, आपकी आँखें किसी कुर्सी को देख रही हैं, वे उसका चित्र मस्तिष्क तक पहुँचा रही हैं, लेकिन आपका मस्तिष्क यह नहीं बता पा रहा कि वह 'कुर्सी' है।
यह स्थिति तब विकसित होती है जब मस्तिष्क के उन विशेष हिस्सों (जैसे पैरिएटल या टेम्पोरल लोब) में क्षति होने पर यह विकसित होता है, जो संवेदी जानकारी को संग्रहीत यादों के साथ जोड़ने का काम करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एग्नोसिया कोई स्मृति दोष (Memory loss) नहीं है, बल्कि यह एक 'पहचान विकार' (Identity Loss) है। सीके बिरला हॉस्पिटल (CMRI) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के न्यूरोलॉजी विभाग के अनुसार, मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह में कमी या अचानक लगी चोट इस विकार की नींव रख सकती है।
NIH के StatPearls के अनुसार, एग्नोसिया के शुद्ध रूप बेहद दुर्लभ हैं। सभी न्यूरोलॉजिकल रोगियों में से सिर्फ 1% से भी कम में एग्नोसिया की समस्या पाई जाती है। विजुअल एग्नोसिया इसका सबसे सामान्य और बेहतर-वर्णित प्रकार है।
अक्सर लोग सवाल करते हैं कि "मैं सब कुछ देख पा रहा हूँ, फिर भी पहचान क्यों नहीं पा रहा?" इसका उत्तर हमारे मस्तिष्क में है। जब हम किसी का चेहरा देखते हैं, तो मस्तिष्क का 'फ्यूसीफॉर्म फेस एरिया' (FFA) सक्रिय होता है। यदि इस क्षेत्र में कोई गड़बड़ी आती है, तो व्यक्ति को चेहरे पहचानने में दिक्कत होने लगती है, जिसे 'प्रोसपेग्नोसिया' कहते हैं।
इसी तरह, आवाज़ पहचानने में समस्या तब होती है, जब मस्तिष्क का वह हिस्सा प्रभावित होता है, जो ध्वनि के पैटर्न को व्यक्ति की पहचान से जोड़ता है। इसमें व्यक्ति शब्द तो सुनता है, लेकिन यह नहीं जान पाता कि बोलने वाला व्यक्ति उसका भाई है, दोस्त है या कोई अजनबी। यह स्मृति और पहचान विकार जीवन को सामाजिक रूप से चुनौतीपूर्ण बना देता है।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (Harvard Medical School) और VA Boston Healthcare System के शोधकर्ताओं (Researchers) द्वारा 3,341 व्यक्तियों पर किए गए एक रिसर्च में पाया गया कि हर 33 में से 1 व्यक्ति (लगभग 3.08%) फेस ब्लाइंडनेस यानी प्रोसपेग्नोसिया के मानदंडों (criteria) पर खरा उतरता है। यह रिसर्च फरवरी 2023 में जर्नल Cortex में प्रकाशित हुआ था।
एग्नोसिया कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि विकारों का एक समूह है। इसके मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं -
एग्नोसिया रातों-रात पैदा होने वाली स्थिति नहीं है (जब तक कि कोई दुर्घटना न हो)। एग्नोसिया के कारण मुख्य रूप से मस्तिष्क के घावों या क्षति से जुड़े होते हैं -
इस विकार का निदान चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि रोगी अक्सर अपनी समस्या को ठीक से समझा नहीं पाता। डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित चरणों का पालन करते हैं -
पबमेड सैंट्रल के अनुसार भारत में स्ट्रोक के 81% मामलों में मस्तिष्क की इमेजिंग (CT या MRI) की जाती है, जो एग्नोसिया जैसे संबंधित विकारों का पता लगाने में भी सहायक होती है।
यदि आप या आपके परिवार में कोई व्यक्ति अचानक परिचितों को पहचानने में असमर्थ हो जाए, या दैनिक उपयोग की वस्तुओं (जैसे ब्रश, कंघी) को लेकर भ्रमित रहने लगे, तो यह आपातकालीन स्थिति हो सकती है।
निम्नलिखित स्थिति में आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलने की सलाह दी जाती है -
ऐसी स्थिति में तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। शुरुआती इलाज की मदद से दिमाग को रिकवर होने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है।
वर्तमान में एग्नोसिया का इलाज मुख्य रूप से इसके अन्य स्वास्थ्य कारण पर निर्भर करता है। यदि कारण ट्यूमर या संक्रमण है, तो प्राथमिक उपचार उसे ठीक करना होता है। पहचान संबंधी समस्याओं के लिए आप निम्न तरीकों को अपना सकते हैं -
एग्नोसिया केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्ति की पहचान और सामाजिक संबंधों को प्रभावित करने वाली स्थिति है। आधुनिक न्यूरोलॉजिकल तकनीकों के माध्यम से इसे प्रबंधित करना संभव है। यदि आपको अपने व्यवहार या पहचान करने की क्षमता में थोड़ा भी बदलाव महसूस हो, तो विशेषज्ञ की सलाह लेने में संकोच न करें। आपका मस्तिष्क आपके शरीर का नियंत्रण केंद्र है; इसकी सुरक्षा आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
हाँ, एग्नोसिया के एक विशेष प्रकार 'प्रोसपेग्नोसिया' में व्यक्ति परिचित चेहरे, यहाँ तक कि परिवार के सदस्यों और खुद को भी नहीं पहचान पाता। वह चेहरों को देख तो सकता है, लेकिन मस्तिष्क उनका मिलान पुरानी यादों से नहीं कर पाता। इस स्थिति में आंखे ठीक से काम करती है, लेकिन दिमाग अपना कार्य नहीं कर पाता है।
जी हाँ, यह एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। यह तब होता है जब मस्तिष्क के संवेदी प्रसंस्करण क्षेत्रों (Sensory Processing Areas) में किसी चोट, स्ट्रोक या ट्यूमर के कारण क्षति हो जाती है, जिससे अंगों द्वारा भेजी गई जानकारी का सही अर्थ नहीं निकल पाता।
हाँ, यदि एग्नोसिया का कारण स्ट्रोक या सिर में लगी गंभीर चोट है, तो यह अचानक विकसित हो सकता है। हालांकि, डिमेंशिया या ब्रेन ट्यूमर जैसी स्थितियों में इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं।
इसका पूर्ण इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। यदि कारण उपचार योग्य है (जैसे संक्रमण), तो सुधार संभव है। अन्य मामलों में, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और वैकल्पिक पहचान तकनीकों के माध्यम से रोगी को स्वतंत्र जीवन जीना सिखाया जाता है।
अंधेपन में आँखें देख नहीं सकतीं। विजुअल एग्नोसिया में दृष्टि पूरी तरह सामान्य होती है, लेकिन व्यक्ति जो देख रहा है उसे समझ नहीं पाता (जैसे मोबाइल देखकर उसे साबुन समझना)।
हाँ, यह जन्मजात भी हो सकता है या बचपन में किसी मस्तिष्क क्षति के कारण विकसित हो सकता है, जिससे बच्चे को स्कूल में सीखने और सामाजिक मेलजोल में भारी दिक्कत आती है।
Written and Verified by:

Prof. Dr. Pahari Ghosh is a Senior Consultant Neurologist in the Neuro Sciences Department at CMRI, Kolkata with over 40 years of experience. He specializes in general neurology, stroke, multiple sclerosis, and epilepsy.
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