ब्रेन इंजरी के बाद वेसोस्पाज़्म: वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए
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ब्रेन इंजरी के बाद वेसोस्पाज़्म: वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए

Neuro Sciences | by Dr. Gouri kumar Prusty on 19/01/2026 | Last Updated : 21/01/2026

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Summary

ब्रेन इंजरी के बाद वेसोस्पाज़्म एक गंभीर जटिलता है, जिसका समय अवधि 3-14 दिन है। यह मस्तिष्क की नसों के सिकुड़ने से होता है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। सही समय पर लक्षणों की पहचान और CK Birla Hospitals (CMRI) जैसे विशेषज्ञ केंद्र में इलाज जीवन बचा सकता है।

क्या आप जानते हैं कि भारत में हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं या गिरने के कारण सिर की चोट (Head Injury) का शिकार होते हैं? एक गंभीर एक्सीडेंट के बाद जब कोई मरीज शुरुआती खतरे से बाहर आ जाता है, तो परिवार को लगता है कि अब सब ठीक हो जाएगा। लेकिन, न्यूरोलॉजी में अक्सर यह कहा जाता है कि चोट लगने के बाद के कुछ हफ्ते, चोट लगने वाले दिन जितने ही महत्वपूर्ण होते हैं।

यहीं पर 'सेरेब्रल वेसोस्पाज़्म' (Cerebral Vasospasm) एक साइलेंट किलर की तरह सामने आता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जो ब्रेन इंजरी के बाद मरीज की रिकवरी के रास्ते में अचानक आ खड़ी होती है। कल्पना कीजिए कि एक मरीज जो कल तक बात कर रहा था, अचानक उसके सामने भ्रमित होने जैसे लक्षण महसूस हो या हाथ-पैर सुन्न होने लग जाएं। यह डरावना हो सकता है, लेकिन सही जानकारी और समय पर इलाज से इसे हराया जा सकता है। इसके लिए हम आपको सलाह देंगे कि आप सबसे पहले हमारे न्यूरोसाइंसेज विभाग के विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें।

वेसोस्पाज़्म क्या है और ब्रेन इंजरी के बाद यह क्यों होता है?

चलिए इस स्थिति को सरल भाषा में समझने का प्रयास करते हैं। वेसोस्पाज़्म (Vasospasm) का मतलब है मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं का अचानक सिकुड़ जाना। जब रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं, तो उनमें से गुजरने वाले रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है।

मस्तिष्क को काम करने के लिए निरंतर ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जो रक्त के माध्यम से ही पहुंचते हैं। लेकिन जब ब्रेन इंजरी के बाद वेसोस्पाज़्म होता है, तो मस्तिष्क के कुछ हिस्सों को पर्याप्त खून नहीं मिल पाता, जिसे मेडिकल भाषा में 'इस्केमिया' (Ischemia) कहा जाता है, जो यदि लंबे समय तक रहे तो स्ट्रोक या स्थायी ब्रेन डैमेज का कारण बन सकता है।

यह ब्रेन इंजरी के बाद ही क्यों होता है? जब सिर में गंभीर चोट लगती है, तो अक्सर मस्तिष्क की सुरक्षात्मक परतों के बीच खून बहने लगता है, जिसे सबराच्नॉइड हेमरेज (Subarachnoid Hemorrhage) कहा जाता है। इसके कारण वाहिकाएं अपनी रक्षा के लिए कसने या सिकुड़ने लगती हैं, जो वेसोस्पाज्म का कारण बनती है।

ब्रेन इंजरी के बाद वेसोस्पाज़्म के मुख्य लक्षण

वेसोस्पाज़्म को पहचानना कई बार मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसके लक्षण ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी के लक्षण से मिलते-जुलते हो सकते हैं। हालांकि, यदि मरीज की हालत में सुधार होने के बाद अचानक गिरावट आए, तो यह वेसोस्पाज़्म का संकेत हो सकता है। हालांकि परिवार को सलाह दी जाती है कि वह निम्न लक्षणों का खास ध्यान रखें - 

  • गंभीर सिरदर्द: यह सामान्य सिरदर्द नहीं होता है। मरीज अक्सर इसे "जीवन का सबसे भयंकर सिरदर्द" बताते हैं।
  • चेतना में बदलाव: मरीज का अचानक बहुत ज्यादा सोना, जगाने की कोशिश करने पर भी बेहोश हो जाना।
  • अंगों में कमजोरी: शरीर के एक तरफ (हाथ या पैर) में अचानक कमजोरी आना या सुन्नपन महसूस होना।
  • बोलने में दिक्कत होना: शब्द लड़खड़ाना या दूसरों की बात समझने में कठिनाई होना।
  • भ्रम (Confusion): मरीज को समय, जगह या लोगों को पहचानने में दिक्कत होना।
  • बुखार: बिना किसी स्पष्ट संक्रमण के बुखार का आना।

यदि एक्सीडेंट के बाद कोई मरीज रिकवर कर रहा है, और उसकी स्थिति में कुछ भी असामान्य महसूस हो, तो बिना देर किए और नजरअंदाज किए, डॉक्टर से मिलें और उन्हें सूचित करें।

वेसोस्पाज़्म होने के कारण और बढ़ते जोखिम कारक

हालांकि वेसोस्पाज़्म का मुख्य कारण ब्रेन इंजरी के बाद जमा हुआ खून या ब्लड क्लॉट है, लेकिन कुछ कारक इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं।

  • CT स्कैन में जितना अधिक खून मस्तिष्क के आधार (base of the brain) में दिखाई देता है, वेसोस्पाज़्म का खतरा उतना ही अधिक होता है।
  • युवा मरीजों में रक्त वाहिकाएं अधिक प्रतिक्रियाशील होती हैं, इसलिए बुजुर्गों की तुलना में युवाओं में गंभीर ऐंठन का खतरा अधिक देखा गया है।
  • जो लोग लंबे समय से धूम्रपान करते हैं या शराब का सेवन करते हैं, उनकी रक्त वाहिकाएं कमजोर होती है। 
  • अनियंत्रित ब्लड प्रेशर वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे ब्रेन इंजरी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
  • शरीर में पानी की कमी से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे सिकुड़ी हुई नसों से खून का बहना और भी मुश्किल हो जाता है।

वेसोस्पाज़्म की डायग्नोसिस: कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं?

सही समय पर निदान ही वेसोस्पाज़्म के इलाज की कुंजी है। CMRI जैसे आधुनिक अस्पतालों में इसके लिए एडवांस तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

  • ट्रांसक्रेनियल डॉप्लर (TCD): यह एक नॉन-इनवेसिव जिसमें अल्ट्रासाउंड तरंगों का उपयोग करके रक्त वाहिकाओं की जांच की जाती है। 
  • सीटी एंजियोग्राफी (CT Angiography): यह वेसोस्पाज़्म का पता लगाने के लिए एक बहुत ही सटीक टेस्ट है। इसमें एक डाई (dye) को नसों में इंजेक्ट किया जाता है और फिर ब्रेन का CT स्कैन लिया जाता है।
  • डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA): इसे "गोल्ड स्टैंडर्ड" माना जाता है। यह एक इनवेसिव प्रक्रिया है जिसमें कैथेटर का उपयोग करके नसों की जांच की जाती है।
  • सीटी परफ्यूजन स्कैन (CT Perfusion Scan): यह टेस्ट बताता है कि मस्तिष्क के किस भाग में खून का प्रवाह कम हो गया है और कहां स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा है।

वेसोस्पाज़्म के इलाज के विकल्प और रिकवरी

वेसोस्पाज़्म के उपचार का मुख्य उद्देश्य मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाना और स्थायी क्षति को रोकना है। इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम आमतौर पर तीन चरणों वाली रणनीति अपनाती है। चलिए सभी को एक-एक करके समझते हैं - 

  • चिकित्सा प्रबंधन (Medical Management): ब्रेन ब्लीडिंग के बाद सभी मरीजों को अक्सर 'निमोडिपिन' (Nimodipine) नामक दवा दी जाती है। यह एक कैल्शियम चैनल ब्लॉकर है, जो नसों को आराम देने और मस्तिष्क की कोशिकाओं को सुरक्षा प्रदान करने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त 'H-H-H थेरेपी' का भी उपयोग होता है। इसमें ब्लड प्रेशर (Hypertension) को बढाया जाता है, मरीज को पर्याप्त तरल पदार्थ पिलाया हाइपरवोलेमिया (Hypervolemia) जाता है, और रक्त को पतला रखा जाता हेमोडाल्युशन (Hemodilution) है।
  • एंडोवास्कुलर उपचार (Endovascular Treatment): जब दवाइयां पर्याप्त असर नहीं करतीं, तो इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट की भूमिका आती है।
  • बैलून एंजियोप्लास्टी (Balloon Angioplasty): इसमें एक बहुत छोटा गुब्बारा सिकुड़ी हुई नस के अंदर फुलाया जाता है, जिससे नस चौड़ी हो जाती है और रक्त प्रवाह बहाल हो जाता है।
  • इंट्रा-आर्टिरियल ड्रग्स: सीधे सिकुड़ी हुई नस के अंदर दवा डाली जाती है ताकि वह तुरंत खुल जाए।

वेसोस्पाज़्म से रिकवरी का समय हर मरीज के लिए अलग होता है। एक बार जब वेसोस्पाज़्म का खतरा (आमतौर पर 14-21 दिनों के बाद) कम हो जाता है, तो ध्यान ब्रेन इंजरी से हुई क्षति की रिकवरी पर जाता है। रिकवरी के लिए निम्न तरीकों को अपनाएं - 

  • फिजिकल थेरेपी, जिससे शरीर की ताकत बढ़ती है।
  • अगर बोलने या निगलने में दिक्कत हो, तो स्पीच थेरेपी लाभकारी होगी।
  • याददाश्त और सोचने की क्षमता को सुधारने के लिए संज्ञानात्मक थेरेपी (Cognitive Therapy)।

सेरेब्रल वेसोस्पाज़्म के बाद रिकवरी एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं। इसमें हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है। परिवार का सहयोग और सकारात्मक माहौल मरीज की इच्छाशक्ति को मजबूत करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।

निष्कर्ष

ब्रेन इंजरी एक भयानक अनुभव है, और उसके बाद वेसोस्पाज़्म का डर परिवार के लिए तनावपूर्ण हो सकता है। लेकिन याद रखें, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इस क्षेत्र में बहुत प्रगति की है। लक्षणों के प्रति जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप से अधिकांश मरीजों को बचाया जा सकता है और वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकते हैं। इसके लिए आप तुरंत हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और समझें कि आपको क्या-क्या करने की आवश्यकता है।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

वेसोस्पाज़्म का पता लगाने के लिए सबसे विश्वसनीय टेस्ट कौन-सा है?

एंजियोग्राफी (DSA) को सबसे विश्वसनीय (Gold Standard) माना जाता है, क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं की सटीक तस्वीर देता है। शुरुआती जांच के लिए टीसीडी (TCD) और सीटी एंजियोग्राफी भी बहुत प्रभावी हैं।

क्या वेसोस्पाज़्म होने पर मरीज को ICU में रखना जरूरी होता है?

हां, वेसोस्पाज़्म एक गंभीर स्थिति है। ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन और मस्तिष्क में रक्त प्रवाह की निरंतर निगरानी के लिए मरीज को न्यूरो-आईसीयू (Neuro-ICU) में रखना अत्यंत आवश्यक है।

क्या ब्रेन इंजरी के बाद वेसोस्पाज़्म कुछ दिनों बाद भी विकसित हो सकता है?

जी हां, वेसोस्पाज़्म आमतौर पर चोट लगने के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 3 से 14 दिनों के बीच विकसित होता है। 7वें और 8वें दिन इसका जोखिम सबसे अधिक होता है।

क्या वेसोस्पाज़्म से याददाश्त या सोचने की क्षमता पर असर पड़ता है?

हां, यदि मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिले, तो संज्ञानात्मक क्षमताएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, समय पर इलाज और रिहैबिलिटेशन से इसमें काफी सुधार संभव है।

क्या मौसम, तनाव या ब्लड प्रेशर वेसोस्पाज़्म को ट्रिगर कर सकते हैं?

शारीरिक तनाव और अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर इसे बढ़ा सकते हैं। हालांकि मौसम का सीधा प्रभाव कम है, लेकिन अत्यधिक ठंड रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ सकती है, जो जोखिम बढ़ा सकती है।

क्या वेसोस्पाज़्म के बाद लंबे समय तक फॉलो-अप की आवश्यकता होती है?

बिल्कुल, अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी नसों की स्थिति और ब्रेन फंक्शन की जांच के लिए डॉक्टर के साथ नियमित फॉलो-अप और MRI स्कैन की आवश्यकता होती है।

Written and Verified by:

Dr. Gouri kumar Prusty

Dr. Gouri kumar Prusty

Senior consultant Exp: 45 Yr

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Dr. Gouri Kumar Prusty is a Senior Consultant in Neuro-surgery Dept. at CMRI Hospital, Kolkata, with over 45 years of experience. He specializes in brain, spine, and peripheral nerve surgeries, including microsurgical and endoscopic procedures.

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