
ब्रेन इंजरी के बाद वेसोस्पाज़्म एक गंभीर जटिलता है, जिसका समय अवधि 3-14 दिन है। यह मस्तिष्क की नसों के सिकुड़ने से होता है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। सही समय पर लक्षणों की पहचान और CK Birla Hospitals (CMRI) जैसे विशेषज्ञ केंद्र में इलाज जीवन बचा सकता है।
क्या आप जानते हैं कि भारत में हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं या गिरने के कारण सिर की चोट (Head Injury) का शिकार होते हैं? एक गंभीर एक्सीडेंट के बाद जब कोई मरीज शुरुआती खतरे से बाहर आ जाता है, तो परिवार को लगता है कि अब सब ठीक हो जाएगा। लेकिन, न्यूरोलॉजी में अक्सर यह कहा जाता है कि चोट लगने के बाद के कुछ हफ्ते, चोट लगने वाले दिन जितने ही महत्वपूर्ण होते हैं।
यहीं पर 'सेरेब्रल वेसोस्पाज़्म' (Cerebral Vasospasm) एक साइलेंट किलर की तरह सामने आता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जो ब्रेन इंजरी के बाद मरीज की रिकवरी के रास्ते में अचानक आ खड़ी होती है। कल्पना कीजिए कि एक मरीज जो कल तक बात कर रहा था, अचानक उसके सामने भ्रमित होने जैसे लक्षण महसूस हो या हाथ-पैर सुन्न होने लग जाएं। यह डरावना हो सकता है, लेकिन सही जानकारी और समय पर इलाज से इसे हराया जा सकता है। इसके लिए हम आपको सलाह देंगे कि आप सबसे पहले हमारे न्यूरोसाइंसेज विभाग के विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें।
चलिए इस स्थिति को सरल भाषा में समझने का प्रयास करते हैं। वेसोस्पाज़्म (Vasospasm) का मतलब है मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं का अचानक सिकुड़ जाना। जब रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं, तो उनमें से गुजरने वाले रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है।
मस्तिष्क को काम करने के लिए निरंतर ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जो रक्त के माध्यम से ही पहुंचते हैं। लेकिन जब ब्रेन इंजरी के बाद वेसोस्पाज़्म होता है, तो मस्तिष्क के कुछ हिस्सों को पर्याप्त खून नहीं मिल पाता, जिसे मेडिकल भाषा में 'इस्केमिया' (Ischemia) कहा जाता है, जो यदि लंबे समय तक रहे तो स्ट्रोक या स्थायी ब्रेन डैमेज का कारण बन सकता है।
यह ब्रेन इंजरी के बाद ही क्यों होता है? जब सिर में गंभीर चोट लगती है, तो अक्सर मस्तिष्क की सुरक्षात्मक परतों के बीच खून बहने लगता है, जिसे सबराच्नॉइड हेमरेज (Subarachnoid Hemorrhage) कहा जाता है। इसके कारण वाहिकाएं अपनी रक्षा के लिए कसने या सिकुड़ने लगती हैं, जो वेसोस्पाज्म का कारण बनती है।
वेसोस्पाज़्म को पहचानना कई बार मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसके लक्षण ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी के लक्षण से मिलते-जुलते हो सकते हैं। हालांकि, यदि मरीज की हालत में सुधार होने के बाद अचानक गिरावट आए, तो यह वेसोस्पाज़्म का संकेत हो सकता है। हालांकि परिवार को सलाह दी जाती है कि वह निम्न लक्षणों का खास ध्यान रखें -
यदि एक्सीडेंट के बाद कोई मरीज रिकवर कर रहा है, और उसकी स्थिति में कुछ भी असामान्य महसूस हो, तो बिना देर किए और नजरअंदाज किए, डॉक्टर से मिलें और उन्हें सूचित करें।
हालांकि वेसोस्पाज़्म का मुख्य कारण ब्रेन इंजरी के बाद जमा हुआ खून या ब्लड क्लॉट है, लेकिन कुछ कारक इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं।
सही समय पर निदान ही वेसोस्पाज़्म के इलाज की कुंजी है। CMRI जैसे आधुनिक अस्पतालों में इसके लिए एडवांस तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
वेसोस्पाज़्म के उपचार का मुख्य उद्देश्य मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाना और स्थायी क्षति को रोकना है। इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम आमतौर पर तीन चरणों वाली रणनीति अपनाती है। चलिए सभी को एक-एक करके समझते हैं -
वेसोस्पाज़्म से रिकवरी का समय हर मरीज के लिए अलग होता है। एक बार जब वेसोस्पाज़्म का खतरा (आमतौर पर 14-21 दिनों के बाद) कम हो जाता है, तो ध्यान ब्रेन इंजरी से हुई क्षति की रिकवरी पर जाता है। रिकवरी के लिए निम्न तरीकों को अपनाएं -
सेरेब्रल वेसोस्पाज़्म के बाद रिकवरी एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं। इसमें हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है। परिवार का सहयोग और सकारात्मक माहौल मरीज की इच्छाशक्ति को मजबूत करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।
ब्रेन इंजरी एक भयानक अनुभव है, और उसके बाद वेसोस्पाज़्म का डर परिवार के लिए तनावपूर्ण हो सकता है। लेकिन याद रखें, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इस क्षेत्र में बहुत प्रगति की है। लक्षणों के प्रति जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप से अधिकांश मरीजों को बचाया जा सकता है और वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकते हैं। इसके लिए आप तुरंत हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और समझें कि आपको क्या-क्या करने की आवश्यकता है।
एंजियोग्राफी (DSA) को सबसे विश्वसनीय (Gold Standard) माना जाता है, क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं की सटीक तस्वीर देता है। शुरुआती जांच के लिए टीसीडी (TCD) और सीटी एंजियोग्राफी भी बहुत प्रभावी हैं।
हां, वेसोस्पाज़्म एक गंभीर स्थिति है। ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन और मस्तिष्क में रक्त प्रवाह की निरंतर निगरानी के लिए मरीज को न्यूरो-आईसीयू (Neuro-ICU) में रखना अत्यंत आवश्यक है।
जी हां, वेसोस्पाज़्म आमतौर पर चोट लगने के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 3 से 14 दिनों के बीच विकसित होता है। 7वें और 8वें दिन इसका जोखिम सबसे अधिक होता है।
हां, यदि मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिले, तो संज्ञानात्मक क्षमताएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, समय पर इलाज और रिहैबिलिटेशन से इसमें काफी सुधार संभव है।
शारीरिक तनाव और अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर इसे बढ़ा सकते हैं। हालांकि मौसम का सीधा प्रभाव कम है, लेकिन अत्यधिक ठंड रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ सकती है, जो जोखिम बढ़ा सकती है।
बिल्कुल, अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी नसों की स्थिति और ब्रेन फंक्शन की जांच के लिए डॉक्टर के साथ नियमित फॉलो-अप और MRI स्कैन की आवश्यकता होती है।
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Dr. Gouri Kumar Prusty is a Senior Consultant in Neuro-surgery Dept. at CMRI Hospital, Kolkata, with over 45 years of experience. He specializes in brain, spine, and peripheral nerve surgeries, including microsurgical and endoscopic procedures.
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