
रात को सोते समय नाक बंद हो जाना, मुंह खोलकर सांस लेना, सुबह उठने पर गले में सूखापन, लगातार सिरदर्द। अगर यह समस्याएं आपके रोज़ के जीवन का हिस्सा बन गई हैं, तो शायद आपने इन्हें एलर्जी या मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया होगा। लेकिन क्या आपने सोचा है कि इसकी असली वजह आपकी नाक के अंदर टेढ़ी हड्डी हो सकती है?
डॉक्टरी भाषा में इसे DNS (Deviated Nasal Septum - विचलित नासापट) कहते हैं। यह एक बेहद आम लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली समस्या है। अच्छी बात यह है कि इसका पक्का इलाज मौजूद है। अगर आप या आपके घर में कोई लंबे समय से नाक बंद रहने, खर्राटों या बार-बार साइनस की समस्या से परेशान है, तो देर न करें। सीके बिरला अस्पताल, CMRI के अनुभवी ENT विशेषज्ञ से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और जड़ से इलाज की शुरुआत करें।
नाक के बीच में एक पतली दीवार होती है, जिसे नाक का पट या नासापट (nasal septum) कहते हैं। यह दीवार आगे की तरफ कार्टिलेज (cartilage - उपास्थि) और पीछे की तरफ हड्डी से बनी होती है। इसका मुख्य काम नाक को दाएं और बाएं दो बराबर हिस्सों में बांटना और सांस के लिए दोनों नथुनों में समान रूप से हवा का रास्ता देना है।
जब यह नेसल सेप्टम एक तरफ झुक जाता है या मुड़ जाता है, तो एक तरफ का नथुना छोटा और दूसरा बड़ा हो जाता है। इसी स्थिति को टेढ़ी नाक की हड्डी या DNS कहते हैं।
रिसर्च बताते हैं कि लगभग 70 से 80 प्रतिशत लोगों में किसी न किसी हद तक सेप्टम का टेढ़ापन होता है, लेकिन अधिकांश लोगों में यह इतना हल्का होता है कि कोई तकलीफ नहीं होती। जब यह टेढ़ापन ज्यादा हो जाता है, तभी सांस लेने में दिक्कत और अन्य लक्षण शुरू होते हैं।
जब नाक का पट एक तरफ मुड़ा होता है, तो उस तरफ का नथुना बहुत संकरा हो जाता है। इस संकरे रास्ते से हवा का प्रवाह (airflow) बाधित होता है। नाक की हड्डी टेढ़ी होने से नाक का प्रवाह बंद हो सकता है, जिससे बार-बार नाक बंद रहना, खर्राटे, सिरदर्द, मुंह से सांस लेना और साइनसाइटिस जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इसके अलावा जब किसी को जुकाम, एलर्जी या साइनस इन्फेक्शन होता है, तो नाक की अंदरूनी परत सूज जाती है। यह सूजन पहले से संकरे नथुने को और भी बंद कर देती है, जिससे सांस लेना और मुश्किल हो जाता है।
नाक की हड्डी टेढ़ी होने के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ को बहुत कम तकलीफ होती है, कुछ को रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है। चलिए अलग-अलग प्रकार के लक्षणों को समझते हैं -

नाक टेढ़ी होने के दो मुख्य कारण हैं -
अन्य जोखिम कारक:
DNS का निदान आमतौर पर ENT (कान, नाक, गला) विशेषज्ञ करते हैं। जांच प्रक्रिया में निम्न स्टेप शामिल हो सकते हैं -
हल्के से मध्यम DNS में दवाइयाँ लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। इनमें शामिल हैं -
ध्यान रखें: दवाइयाँ सिर्फ सूजन कम करती हैं और अस्थायी राहत देते हैं। ये नासापट की टेढ़ी स्थिति को ठीक नहीं कर सकते।
DNS को ठीक करने का एकमात्र स्थायी इलाज सेप्टोप्लास्टी सर्जरी है। इस सर्जरी में नाक के अंदर से टेढ़े सेप्टम को सीधा किया जाता है।
अगर DNS के साथ नाक का बाहरी आकार भी बिगड़ा हो, तो सेप्टोप्लास्टी के साथ-साथ राइनोप्लास्टी (rhinoplasty - नाक की आकार सुधारने की सर्जरी) भी की जा सकती है।
हर DNS में सर्जरी की जरूरत नहीं होती। लेकिन इन स्थितियों में सर्जरी की सलाह दी जाती है -
अगर आपका बच्चा DNS से पीड़ित है, तो डॉक्टर आमतौर पर तब तक सर्जरी टालते हैं, जब तक नाक पूरी तरह बढ़ न जाए, जो किशोरावस्था के मध्य में होता है।
सर्जरी से पहले या हल्के मामलों में इन उपायों से कुछ राहत मिल सकती है:
टेढ़ी नाक की हड्डी यानी DNS एक ऐसी समस्या है, जिसे बहुत लोग सालों तक झेलते रहते हैं, क्योंकि वे इसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन सही समय पर सही विशेषज्ञ से मिलने पर यह पूरी तरह ठीक हो सकती है। यदि आप या आपके परिवार में कोई लंबे समय से सांस लेने में तकलीफ, बंद नाक या खर्राटों से परेशान है, तो सीके बिरला अस्पताल, CMRI के वरिष्ठ ENT विशेषज्ञ से आज ही मिलें।
हाँ, टेढ़ी नाक की हड्डी से खर्राटे और नींद में व्यवधान बहुत आम है। संकरे नाक से हवा का प्रवाह बाधित होता है जिससे मुंह से सांस लेने की आदत और स्लीप एप्निया भी हो सकता है। सेप्टोप्लास्टी से इसमें काफी राहत मिलती है।
हाँ, DNS की वजह से साइनस का निकास (drainage) ठीक से नहीं हो पाता, जिससे बैक्टीरिया और म्यूकस जमा होते हैं और बार-बार साइनसाइटिस होता है। यह DNS के सबसे आम और तकलीफदेह नतीजों में से एक है।
हाँ, टेढ़ी हड्डी से नाक के अंदर दबाव और सूजन बढ़ती है, जो माथे और आंखों के पीछे दर्द पैदा करती है। खासकर सुबह उठते समय यह सिरदर्द ज्यादा महसूस होता है। सही इलाज से यह ठीक हो सकता है।
हां, बच्चों में DNS जन्मजात या खेलते समय नाक पर चोट लगने से हो सकती है। चूंकि नाक का सेप्टम 15 साल तक बढ़ता है, इसलिए बच्चों में सर्जरी अक्सर किशोरावस्था पूरी होने के बाद की जाती है।
हाँ, नाक पर चोट लगना DNS के प्रमुख कारणों में से एक है। खेल की चोट, दुर्घटना या कोई भी जोरदार धक्का नासापट को अपनी जगह से हटा सकता है। ऐसे में जल्दी ENT डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
एक सफल सेप्टोप्लास्टी के बाद DNS दोबारा नहीं होती। हालांकि अगर सर्जरी के बाद नाक पर फिर कोई गंभीर चोट लगे, तो स्थिति बदल सकती है। अच्छे अनुभवी सर्जन से सर्जरी करवाने पर परिणाम बेहतर होते हैं।
हल्के DNS में कोई खास तकलीफ नहीं होती और व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। लेकिन जब लक्षण जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने लगें तो सर्जरी सबसे असरदार और स्थायी समाधान है।
Written and Verified by:
-Dr.-N.-V.K-Mohan-(-E.N.-T-).webp&w=256&q=75)
Consultant - Otologist, ENT and Cochlear Implant Surgeon Exp: 26 Yr
ENT
Dr. Mohan has over 25 years of experience in ENT practice. Previously he worked as an assistant professor ENT at Kamineni Institute of Medical Sciences of Narketpally & SVS Medical College, Mahboob Nagar. Dr. Mohan has worked in Tertiary Referral Hospital in UK for 4 years
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