
पीरियड मिस होने के 8 मुख्य कारण:
अक्सर हम देखते हैं कि महिलाओं के जीवन के हर महीने में कुछ तारीखें ऐसी आती हैं, जिनसे उनकी पूरी सेहत का तालमेल जुड़ा होता है। लेकिन जब वह तारीख निकल जाए और पैड की जरूरत न पड़े, तो मन में सौ सवाल और थोड़ी घबराहट होना स्वाभाविक है।
हम समझते हैं कि इस अनिश्चितता की भावना से गुजरना कितना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, यह ब्लॉग आपको पीरियड मिस होने के कारण और पीरियड लेट होने के कारण की पूरी जानकारी देगा, ताकि आप घबराए बिना सही कदम उठा सकें। इस ब्लॉग का उत्तर जानना क्यों महत्वपूर्ण है? क्योंकि पीरियड्स में देरी किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। सही जानकारी और समय पर कार्रवाई से आप बड़े स्वास्थ्य जोखिमों से आसानी से बच सकते हैं।
अक्सर महिलाएं अपनी तय तारीख के एक-दो दिन ऊपर-नीचे होते ही तनाव में आ जाती हैं। लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हमारा शरीर कोई मशीन नहीं है। मेडिकल साइंस के अनुसार, एक स्वस्थ पीरियड साइकिल 21 से 35 दिनों का हो सकता है और ब्लीडिंग 2 से 7 दिनों तक रहना सामान्य है। यह साइकिल हर महिला के लिए अलग-अलग हो सकता है।
अब सवाल उठता है कि पीरियड मिस या लेट कब माना जाए?
पीरियड मिस होने के पीछे सिर्फ प्रेग्नेंसी ही इकलौती वजह नहीं होती। अक्सर हार्मोनल असंतुलन, पीसीओएस (PCOS) या अत्यधिक मानसिक तनाव भी इसके पीछे के बड़े कारण हो सकते हैं।
अब सवाल यह उठता है कि डॉक्टर से कब मिलें? सबसे ज्यादा तनावपूर्ण स्थिति तब होती है, जब गैप बहुत बढ़ जाए। यदि आपको 2 महीने से पीरियड नहीं आया, तो यह घरेलू नुस्खों का नहीं बल्कि डॉक्टर से मिलने का समय है। 60 दिनों की देरी इस बात का साफ संकेत है कि शरीर के अंदरूनी हार्मोन्स का बैलेंस काफी बिगड़ चुका है और उसे विशेषज्ञ की सलाह की जरूरत है। इसके अतिरिक्त भी कुछ और महत्वपूर्ण बातें हैं, जिन्हें नीचे समझाया गया है।
पीरियड नहीं आने के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, यह कारण पर निर्भर करता है -
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लक्षण की तीव्रता |
लक्षण (Symptoms) |
किस ओर इशारा |
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हल्के/सामान्य लक्षण |
हल्की ऐंठन, स्तन में कोमलता (tenderness), मूड में बदलाव (Mood swings)। |
तनाव, जीवनशैली में बदलाव, या प्रारंभिक गर्भावस्था (early pregnancy)। |
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गंभीर/चिंताजनक लक्षण |
अत्यधिक थकान, अनियंत्रित वजन बढ़ना, शरीर पर बालों का बढ़ना, पेट के निचले भाग में तेज़ दर्द होना। |
हार्मोनल असंतुलन (PCOS या थायराइड), या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं। |
अक्सर सवाल उठता है कि किन कारणों से पीरियड लेट होते हैं। हम उन सभी मुख्य कारणों के बारे में बात करने वाले हैं, जिनसे आपके पीरियड्स लेट हो सकते हैं।
यदि आप शारीरिक रूप से सक्रिय (Sexually Active) हैं, तो पीरियड मिस होने का सबसे बड़ा कारण गर्भावस्था हो सकती है। अक्सर जो महिलाएं शारीरिक रूप से सक्रिय होती है, उनके मन में पहली आशंका इसी की होती है।
जब आप बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेती हैं या आपकी नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर में कोर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है। हमारा दिमाग सोचता है कि शरीर अभी 'संकट' में है, इसलिए वह ओव्यूलेशन (अंडा बनने की प्रक्रिया) को रोक देता है। चलिए इसे सरल भाषा में समझते हैं। दिमाग का एक हिस्सा है जो पीरियड्स को कंट्रोल करता है। अत्यधिक तनाव में पीरियड्स का 'पॉज बटन' दब जाता है।
वजन का सीधा संबंध हमारे हार्मोन्स से है। चलिए इसके मुख्य लक्षणों को समझते हैं -
आजकल हर 10 में से 2 महिलाओं को यह समस्या है। इसमें अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं और शरीर में पुरुष हार्मोन बढ़ने लगते हैं।
थायरॉयड ग्लैंड हमारे शरीर की 'कंट्रोलर' की तरह काम करती है। यदि यह ग्लैंड बहुत ज्यादा एक्टिव (हाइपरथायरायडिज्म) या बहुत सुस्त (हाइपोथायरायडिज्म) हो जाए, तो पीरियड्स का समय गड़बड़ा जाता है।
यदि आप किसी बीमारी के लिए एंटी-डिप्रेसेंट या कीमोथेरेपी जैसी भारी दवाइयां ले रही हैं, तो पीरियड लेट हो सकते हैं।
फिट रहना अच्छा है, लेकिन जरूरत से ज्यादा वर्कआउट शरीर पर दबाव डालता है। एथलीट्स या जिम में बहुत ज्यादा पसीना बहाने वाली महिलाओं में अक्सर पीरियड्स रुक जाते हैं क्योंकि शरीर के पास हार्मोन बनाने के लिए पर्याप्त कैलोरी नहीं बचती। ऐसा करने से महिलाओं के शरीर में कम वसा प्रतिशत (low body fat percentage) के कारण हार्मोनल सिग्नलिंग बाधित होती, जिसके कारण पीरियड आना बंद हो जाते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में एमेनोरिया (Amenorrhea) कहा जाता है।
अगर आपकी उम्र 40 के पार है, तो यह 'पेरिमेनोपॉज' के लक्षण हो सकते हैं। यह वह समय है जब शरीर धीरे-धीरे पीरियड्स को बंद करने की तैयारी करता है। इसमें पीरियड्स कभी कम आते हैं, तो कभी महीनों का गैप हो जाता है।
यदि आपको 2 महीने से पीरियड नहीं आया है, तो यह शरीर का एक इशारा है कि अंदर कुछ ठीक नहीं है। ऐसे में आपको ये 3 काम तुरंत करने चाहिए -
"क्या मैं प्रेग्नेंट हूँ?" "क्या मुझे कोई बीमारी है?" या "आखिर पीरियड नहीं आने का कारण क्या हो सकता है?" ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं, जो तब उत्पन्न होते हैं, जब पीरियड लेट होते हैं। यदि आप भी इस वक्त की इसी उलझन में हैं, तो सबसे पहले एक गहरी सांस लीजिए, क्योंकि आप अकेली नहीं हैं। चलिए समझते हैं कि लेट पीरियड्स की स्थिति में आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं चाहिए -
यदि आप यौन रूप से सक्रिय हैं और पीरियड मिस होते हैं, तो सबसे पहला और जरूरी कदम है एक 'होम प्रेगनेंसी टेस्ट'। हम जानते हैं कि टेस्ट स्ट्रिप पर उन दो लाइनों का आपके जीवन पर क्या महत्व हो सकता है। कुछ लोगों के लिए यह एक उम्मीद की किरण हो सकता है, तो किसी के लिए यह चिंता का विषय। लेकिन सच जानना ही आपको अगले कदम की स्पष्टता देगा।
कभी-कभी हमारा शरीर सिर्फ थका हुआ होता है। पिछले एक महीने को याद करें कि आपके जीवन में क्या क्या हुआ है -
अक्सर पीरियड्स मिस होने के कारण हमारी भागदौड़ भरी जिंदगी और मानसिक तनाव में ही छिपे होते हैं। हमारा दिमाग तनाव के समय ओव्यूलेशन को कुछ समय के लिए 'होल्ड' पर डाल देता है।
अपने शरीर की बात सुनें। क्या आपको पेट के निचले भाग में भारीपन लग रहा है? क्या स्तनों में हल्का दर्द है? ये संकेत बताते हैं कि पीरियड बस आने ही वाले हैं, बस थोड़े लेट हैं। अपनी पुरानी तारीखों को किसी ऐप या डायरी में देखें कि क्या पहले भी आपके साथ ऐसा हुआ है?
क्या करें (Dos):
क्या न करें (Don'ts):
यदि पीरियड मिस होने के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्या (जैसे PCOS या थायराइड) नहीं है, तो जीवनशैली में बदलाव और देर से पीरियड के घरेलू उपाय मदद कर सकते हैं। चलिए इसे सरल तरीके से इस टेबल की मदद से समझते हैं -
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घरेलू उपाय |
कब करें |
सावधानियां |
किसको करना चाहिए |
किसको नहीं करना चाहिए |
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अदरक |
पीरियड लेट होने के कारण तनाव या ठंड लगने पर। |
अधिक मात्रा में सेवन से बचें (दिन में 2-3 बार)। |
सामान्य स्वास्थ्य वाली महिलाएं। |
गर्भवती महिलाएं या रक्तस्राव की समस्या (Bleeding disorder) वाली महिलाएं इसका सेवन न करें। |
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दालचीनी |
PCOS या इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण पीरियड में देरी होने पर। |
सीमित मात्रा में सेवन करें, लेकिन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में यह सहायक है। |
अनियमित पीरियड्स वाली महिलाएं। |
डायबिटीज की दवा लेने वाली महिलाएं डॉक्टर से पूछ कर ही इसका सेवन करें। |
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पपीता |
पीरियड्स शुरू करने के लिए गर्भाशय के संकुचन को बढ़ाना हो। |
प्रेगनेंसी की संभावना होने पर तुरंत बंद कर दें। |
पीरियड शुरू होने में 5-7 दिन की देरी होने पर। |
गर्भवती महिलाएं (यह गर्भपात का कारण बन सकता है)। |
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हल्दी |
यदि पीरियड लेट होने का कारण हार्मोनल असंतुलन या सूजन है। |
रात में हल्दी वाला दूध पीने से तनाव भी कम होता है। |
वज़न नियंत्रित करने वाली महिलाएं। |
पित्ताशय की समस्या (Gallbladder issues) से पीड़ित। |
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योग और मेडिटेशन |
तनाव के कारण पीरियड मिस होने पर। |
प्रतिदिन 30 मिनट का हल्का व्यायाम करें। |
हर महिला को करना चाहिए। |
कोई नहीं (सभी के लिए सुरक्षित)। |
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एलोवेरा |
हार्मोनल असंतुलन के कारण देरी होने पर। |
शहद के साथ खाली पेट सेवन करें। |
पीरियड्स में देरी से परेशान महिलाएं। |
पीरियड आने के समय इसका सेवन न करें। |
हालांकि, पीरियड कितने दिन लेट होना सामान्य है? सामान्य तौर पर यह लगभग 7 दिन होता है। हालांकि कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं, जहां तुरंत विशेषज्ञ, यानी स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से परामर्श करना अनिवार्य है -
डॉक्टर आपकी जांच, हार्मोनल टेस्ट (जैसे थायराइड, PCOS), और अल्ट्रासाउंड के माध्यम से पीरियड नहीं आने के सटीक कारण का पता लगा सकते हैं और उचित उपचार शुरू कर सकते हैं।
यदि लक्षण अधिक गंभीर है और पीरियड्स मिस होने के साथ यह सारे लक्षण आपको परेशान कर रहे हैं, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों से मिलें और समझें कि आपके इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है और सही इलाज लें।
आमतौर पर, यदि आपका पीरियड सामान्य चक्र की अवधि से 7 दिन तक लेट है, तो इसे सामान्य माना जा सकता है। यह तनाव, यात्रा या डाइट में बदलाव के कारण हो सकता है। 7 दिन से अधिक की देरी पर जांच की आवश्यकता होती है।
नहीं, गर्भावस्था एक मुख्य कारण है, लेकिन तनाव, PCOS, थायरॉइड, या वज़न में बड़ा बदलाव भी पीरियड्स में देरी का कारण बन सकते हैं। गर्भावस्था या पीरियड मिस के बारे में निश्चित होने के लिए टेस्ट करना अनिवार्य है।
यदि 2 महीने तक पीरियड नहीं आए हैं, तो सबसे पहले प्रेगनेंसी टेस्ट करें। यदि वह नेगेटिव आता है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। 2-3 महीने तक पीरियड नहीं आना (एमेनोरिया) हार्मोनल समस्या जैसे PCOS या थायराइड का संकेत हो सकता है।
हाँ, बिल्कुल। तनाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाकर ओव्यूलेशन को रोक सकता है, और वज़न बढ़ने से शरीर में एस्ट्रोजन का अत्यधिक उत्पादन हो सकता है, दोनों ही पीरियड लेट होने के कारण बनते हैं।
स्वयं निदान से बचें और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें। डॉक्टर कारण जानने के बाद ही दवा (जैसे हार्मोनल पिल्स) या पीरियड समय पर लाने के उपाय बताएंगे। अनुचित दवाएं आपकी हार्मोनल हेल्थ को और खराब कर सकती हैं।
पीरियड्स न आने पर घबराकर सारे घरेलू नुस्खों पर भरोसा ना करें, खासतौर पर जो वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। इसके अलावा, तनाव न लें और स्वयं ही कोई इलाज न शुरू करें। अन्य लक्षणों को नजरअंदाज ना करें।
पीरियड लेट होने के उपाय में शामिल हैं: संतुलित आहार लेना, वज़न को नियंत्रित रखना, प्रतिदिन योग या हल्का व्यायाम करना, और पर्याप्त नींद लेना। यदि जीवनशैली में बदलाव से फायदा नहीं होता, तो डॉक्टर से सलाह लें।
पीरियड लेट आने के अनेक कारण हो सकते हैं जैसे की गर्भवती होना, मेनोपॉज आना, तनाव से ग्रस्त होना, वजन अत्यधिक कम या ज्यादा होना आदि। इन सभी कारणों को ब्लॉग में समझाया गया है।
पीरियड्स न आने पर घबरा कर कुछ भी न करें। सबसे पहले आपको निम्न चीजों को करने से बचना चाहिए -
इसके अतिरिक्त यदि पीरियड ज्यादा लेट हो जाए तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
वर्तमान समय में पीरियड लेट होना एक आम बात है। इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं, जैसे कि तनाव, वजन में बदलाव या बीमारी। इसके अतिरिक्त जो महिलाएं अधिक यौन संबंध स्थापित करती हैं उन्हें पीरियड्स मिस होने पर प्रेगनेंसी टेस्ट कराना चाहिए। यदि कुछ दिनों तक पीरियड्स नहीं आते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
यदि एक महीने से पीरियड नहीं आते हैं तो यह चिंता का विषय हो सकता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे कि हार्मोन में असंतुलन, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) या थायराइड की समस्या। डॉक्टर से मिलकर इसका कारण जानना और उचित उपचार कराना जरूरी है।
पीरियड मिस होने के एक हफ्ते बाद होम प्रेग्नेंसी टेस्ट (UPT) करना सबसे सटीक तरीका है। इसके अलावा थकान, मतली और स्तन में भारीपन जैसे शुरुआती लक्षणों पर गौर करें।
पपीता, अदरक या दालचीनी जैसे उपाय शरीर में गर्मी बढ़ाकर कुछ मामलों में मदद कर सकते हैं, लेकिन यह हमेशा कारगर नहीं होते हैं। हार्मोनल असंतुलन के लिए डॉक्टरी सलाह जरूरी है।
डाइट में हरी सब्जियां, नट्स और होल ग्रेन्स शामिल करें। ज्यादा चीनी, कैफीन और प्रोसेस्ड जंक फूड से बचें, क्योंकि यह हार्मोन का संतुलन बिगाड़ कर देरी का कारण बनते हैं।
यदि पीरियड लगातार 3 महीने से अनियमित हों, पेट में तेज दर्द हो या प्रेग्नेंसी टेस्ट नेगेटिव होने के बाद भी पीरियड न आएं, तो तुरंत गाइनेकोलॉजिस्ट से मिलें।
Written and Verified by:

Dr. Manas Kundu is a Consultant in Obstetrics & Gynaecology Dept. at CMRI, Kolkata with over 28 years of experience.
He specializes in laparoscopic gynaecological surgery, pregnancy hypertension, infertility (IVF & ICSI), and obstetric & gynaecological ultrasonography including transvaginal sonography.
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